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इथेनॉल: आपकी कार के पेट्रोल में कितना इथेनॉल है? 10 सवालों के जवाब
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BBC हिंदी18.6.2026Business9 Min. LesezeitIndia

इथेनॉल: आपकी कार के पेट्रोल में कितना इथेनॉल है? 10 सवालों के जवाब

Auf einen Blick

इथेनॉल एक अल्कोहल है जिसे गन्ने और मक्के से बनाया जाता है और पेट्रोल में मिलाकर ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। भारत सरकार इसे बढ़ावा दे रही है ताकि आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम हो, डॉलर बचाए जा सकें और कृषि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिले। इथेनॉल मिश्रित ईंधन से माइलेज कम हो सकता है, लेकिन सरकार का दावा है कि यह उत्सर्जन को कम करता है।

KI-generierte Zusammenfassung

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Author, गुलशनकुमार वनकर

पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता

........से, नई दिल्ली

प्रकाशित 16 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 9 मिनट

आपकी कार के टैंक में वास्तव में कितना पेट्रोल और कितना इथेनॉल है?

क्या वाकई में इथेनॉल ने हमारी कारों के औसत/माइलेज को कम कर दिया है?

और क्या भविष्य में देश में ऐसी ही कारें होंगी, जो केवल इथेनॉल पर चलेंगी?

क्या आपके मन में आज-कल इनमें से कोई सवाल आया है? क्योंकि ये ही बातें पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई हैं.

लेकिन इथेनॉल आखिर है क्या?

'गन्ने का रस इथेनॉल है', मज़ाक में यह कहना कितना उपयुक्त होगा?

कौन से वाहन ई85 ईंधन का उपयोग कर सकते हैं?

और आजकल ई100 को लेकर इतनी चर्चा क्यों हो रही है?

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आइए ऐसे ही 10 प्रश्नों के जबाव तलाशते है सरल शब्दों में...

1. इथेनॉल क्या है?

इथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है. ये शब्द एथिल अल्कोहल को मिलाकर बना है. इसका केमिकल फॉर्म्युला सी2एच5ओएच है.

इस तरल पदार्थ का कोई रंग नहीं है, यह पारदर्शी होता है.

इथेनॉल का उत्पादन गन्ने और मक्के से होता है. ज्वलनशील होने के कारण सरकार इसे पेट्रोल में मिलाकर ईंधन के रूप में उपयोग करने को प्रोत्साहित कर रही है. इस मिश्रण को ब्लेंडिंग कहा जाता है.

ईंधन का नाम उसमें मिलाई गई मात्रा पर निर्भर करता है. यानी, अगर पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है, तो वह ई10 होता है, और अगर 20 प्रतिशत मिलाया जाता है, तो वह ई20 होता है.

2. इथेनॉल ब्लेंडिंग क्यों की जाती है?

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केवल लाभ कमाने के उद्देश्य से दूध में पानी मिलाना मिलावट कहलाता है. वहीं जब किसी एक पदार्थ को दूसरे पदार्थ के साथ जानबूझकर और परीक्षण के बाद मिलाया जाता है, तो उसे ब्लेंडिंग या मिश्रण कहते हैं.

सरकार का कहना है कि एथेनॉल का मिश्रण सावधानीपूर्वक और समीक्षा के बाद किया जा रहा है. सरकार ने इसके कुछ कारण बताए हैं.

भारत में कच्चा तेल आयात किया जाता है और इसका भुगतान डॉलर में करना पड़ता है. अगर ईंधन में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाए, तो उतनी ही मात्रा में शुद्ध पेट्रोल और कच्चे तेल की आवश्यकता कम हो जाएगी, जिससे डॉलर की बचत होगी.

मक्का और गन्ने से इथेनॉल का उत्पादन होता है. इसलिए, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी इस उत्पादन में योगदान दे रही है. केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक देश भर के गन्ना और मक्का किसानों ने इससे 1.58 लाख करोड़ रुपये की आय अर्जित की है.

पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल जलने पर कम धुआं पैदा करता है, और सरकार का अनुमान है कि इससे कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसों के कुल उत्सर्जन में 61 प्रतिशत तक की कमी लाने में मदद मिल सकती है.

3. एथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए सरकार का लक्ष्य क्या है?

भारत सरकार ने 2014 में पेट्रोल में 1.5 प्रतिशत इथेनॉल मिलाना शुरू किया. 10 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य जून 2022 में हासिल कर लिया गया और फिर 2023 में इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया.

केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि वह 2025 तक पूरे देश में ई20 ब्लेंडिंग के लक्ष्य को हासिल करने में सफल रही है.

इससे पहले, इसके लिए 2030 का समय निर्धारित किया गया था.

आज भारत में बिकने वाले पेट्रोल वाहन जो बीएस6 उत्सर्जन मानकों का पालन करते हैं, उनमें ई20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल युक्त पेट्रोल का उपयोग करने की अनुमति है. इससे अधिक इथेनॉल अनुपात वाला ईंधन इन वाहनों के लिए उपयुक्त नहीं है.

4. क्या इथेनॉल मिश्रित ईंधन कार की माइलेज कम करता है?

पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल में ऊर्जा कम होती है. यही कारण है कि आपकी बाइक या कार का माइलेज कम हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, गाड़ी के इंजन में कुछ तकनीकी बदलाव करके और कुछ अतिरिक्त पुर्जे लगाकर इसे सुधारा जा सकता है, लेकिन फ़िलहाल यह तकनीक हर जगह उपलब्ध नहीं है.

भारत सरकार का दावा है कि ई20 ईंधन से वाहनों का माइलेज केवल 2 से 6 प्रतिशत तक कम होता है.

लेकिन वास्तविक उपयोगकर्ताओं की शिकायत है कि वाहन का औसत माइलेज 30-50 प्रतिशत तक घट गया है.

5. ई85 क्या है?

जिस प्रकार 20 प्रतिशत इथेनॉल युक्त पेट्रोल को ई20 कहा जाता है, उसी प्रकार 85 प्रतिशत इथेनॉल युक्त पेट्रोल को ई85 कहा जाता है.

देश में ई85 ईंधन 5 जून, 2026 को लॉन्च किया गया था, जिसकी कीमत नियमित ई20 पेट्रोल से 20 रुपये प्रति लीटर कम है.

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, "कुछ मामलों में ई85 बेहतर है, लेकिन कैलोरिफिक व्हॅल्यू (ईंधन की ऊर्जा भंडारण क्षमता) आदि को ध्यान में रखते हुए, इंजन की शक्ति कम होगी, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि कीमत के मामले में जो मुआवज़ा मिल रहा है, वह शक्ति या ऊर्जा की कमी की भरपाई कर देगा."

यानी, भले ही यह ईंधन 20 प्रतिशत सस्ता है, लेकिन न तो ई85 ईंधन हर जगह उपलब्ध है और न ही इस पर चलने वाले वाहन.

3 जून को हीरो मोटोकॉर्प ने फ्लेक्स फ्यूल तकनीक से चलने वाले दो टू-व्हीलर - स्प्लेंडर और एचएफ डीलक्स लॉन्च किए.

इसके बाद 4 जून को मारुति सुज़ुकी ने अपनी वैगन-आर का फ्लेक्स फ्यूल अवतार बाजार में उतारा.

जानकारी के लिए बता दें कि फ्लेक्स फ्यूल वैगन-आर की कीमत वैगन-आर के रेगुलर पेट्रोल (ई20) वैगन-आर से 86,000 रुपये अधिक है.

इसलिए ईंधन की कमी और नई तकनीक के लिए की उच्च लागत का जोखिम है.

6. अगर सामान्य कारों में ई85 ईंधन डाला जाए तो क्या होगा?

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ई85 ईंधन में बहुत अधिक इथेनॉल होता है, जिससे गैसोलीन या यहां तक ​​कि ई20 के लिए डिज़ाइन किए गए इंजनों में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.

इसके अलावा, इथेनॉल नमी सोखने वाला पदार्थ है, यानी यह हवा से नमी अवशोषित करता है. इसलिए, इथेनॉल युक्त ईंधन इंजन के पुर्जों, ईंधन लाइनों, ईंधन टैंकों, पाइपों, टैंक सीलों आदि को नुकसान पहुंचा सकता है या उनमें टूट-फूट पैदा कर सकता है.

इस वजह से इन वाहनों की सर्विसिंग और रखरखाव की लागत बढ़ जाती है, जिसका बोझ अनजाने में उपभोक्ताओं पर पड़ता है.

इसलिए, वर्तमान कारों में, पेट्रोल टैंक के ढक्कन पर एथेनॉल की अधिकतम प्रतिशत मात्रा के बारे में जानकारी दी जाती है.

7. क्या इथेनॉल के इस्तेमाल से कार बीमा अमान्य हो जाता है?

हाल ही में, कुछ जगहों पर ऐसी खबरें आई हैं कि कुछ बीमा कंपनियां ई20 ईंधन के उपयोग से होने वाले नुकसान को कवर नहीं करेंगी.

9 जून को प्रकाशित एक ब्लॉग में, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड इंश्योरेंस कंपनी ने कहा, "यदि आप ई20 ईंधन के लिए बने वाहनों में ई20 ईंधन का उपयोग करते हैं, तो आपका बीमा वैध रहेगा और आप के बीमा क्लेम पर कोई असर नहीं पड़ेगा..."

"लेकिन अगर आप अपने वाहन में ऐसे ईंधन का उपयोग करते हैं जो आपके वाहन के लिए नहीं बना है, तो इसे दुरुपयोग या लापरवाही माना जाएगा. "

इस ब्लॉग पोस्ट पर हुए विवाद के बाद, कंपनी ने आखिरकार स्पष्ट किया कि, "वाहन बीमा दुर्घटनाओं या चोरी जैसी आपात स्थितियों के लिए है. इसका वाहन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन के प्रकार से कोई लेना-देना नहीं है."

"इसलिए, पारंपरिक ईंधन के इस्तेमाल के लिए स्वीकार किया जाने वाला कोई भी क्लेम ई20 ईंधन के इस्तेमाल के लिए भी स्वीकार किया जा सकता है. आईसीआईसीआई लोम्बार्ड आपके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ईंधन के आधार पर किसी भी क्लेम को अस्वीकार नहीं करेगा."

12 अगस्त 2025 को केंद्र सरकार ने भी ऐसी अफ़वाहों का खंडन किया और स्पष्ट किया कि ई20 ईंधन के उपयोग से वाहन बीमा पर कोई असर नहीं पड़ता है."

8. क्या डीजल कारों में इथेनॉल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है?

फ़िलहाल इथेनॉल का उत्पादन सिर्फ पेट्रोल में मिलाने के लिए किया जाता है.

इसलिए यह कहा जा सकता है कि डीजल अभी भी काफ़ी शुद्ध है.

हालांकि, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कुछ दिन पहले यह बात कही थी कि इसी आधार पर आइसोब्यूटेनॉल नामक एक अन्य अल्कोहल को डीज़ल में मिलाया जा सकता है, इस पर विचार-विमर्श किया जा रहा है.

9. ई100 क्या है?

ई100 का सीधा सा मतलब है 100 प्रतिशत इथेनॉल.

इसमें किसी अन्य ईंधन की मिलावट नहीं होगी. 10 जून को नागपुर में नितिन गडकरी ने कहा कि उनकी सरकार ने 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलने वाले वाहनों को भी मंज़ूरी दे दी है, और जल्द ही मारुति सुजुकी, एमजी, ह्युंडाई और टोयोटा जैसी कंपनियां अपनी कारों के ई100 संस्करण लॉन्च करेंगी.

10. एक लीटर इथेनॉल बनाने के लिए कितने पानी की आवश्यकता होती है?

भारत सरकार द्वारा जारी इथेनॉल की खपत संबंधी एक आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार, एक टन गन्ने से 100 किलोग्राम चीनी और 70 लीटर इथेनॉल का उत्पादन किया जा सकता है. एक लीटर इथेनॉल के लिए लगभग 3000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है.

दस्तावेज़ में यह भी कहा गया है कि मक्के को अपेक्षाकृत कम पानी (लगभग 2,570 लीटर) की आवश्यकता होती है, जिससे यह अन्य अनाजों से इथेनॉल उत्पादन की तुलना में अधिक किफ़ायती है.

दस्तावेज़ में यह भी बताया गया है कि 2016 के एक अध्ययन के आधार पर, चावल और गेहूं से एक लीटर इथेनॉल उत्पादन करने में लगभग 4,480 लीटर से 4,900 लीटर पानी लगता है.

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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