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Backदिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने का मामला: 113 साल पुराने क्लब का इतिहास और विवाद
दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने का मामला: 113 साल पुराने क्लब का इतिहास और विवाद
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BBC हिंदी24.05.2026Politik4 dk okumaIndia

दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने का मामला: 113 साल पुराने क्लब का इतिहास और विवाद

Auf einen Blick

दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक खाली करने का सरकारी आदेश चर्चा में है। 113 साल पुराना यह क्लब लुटियंस दिल्ली में 27.3 एकड़ ज़मीन पर स्थित है। सरकार ने 'डिफेंस स्ट्रक्चर को मजबूत करने' का हवाला दिया है, जबकि क्लब इसे 'मनगढ़ंत वजह' बता रहा है।

KI-generierte Zusammenfassung

Warum es wichtig ist

दिल्ली जिमखाना क्लब, जिसकी स्थापना 1913 में हुई थी, 27.3 एकड़ ज़मीन पर स्थित है। सरकार ने इसे खाली करने का आदेश दिया है, जिसका क्लब विरोध कर रहा है।

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दिल्ली जिमखाना को खाली कराने का पूरा मामला क्या है, जानिए 113 साल पुराने क्लब का इतिहास

प्रकाशित 4 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 6 मिनट

दिल्ली में जिमखाना क्लब की ज़मीन और कैंपस खाली करने का सरकारी आदेश काफ़ी चर्चा में है.

दिल्ली जिमखाना क्लब ने कहा है कि ज़मीन और कैंपस खाली करने के आदेश के कुछ मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए वह लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस को चिट्ठी लिखेगा. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक केंद्र सरकार ने क्लब से 5 जून तक अपनी ज़मीन और कैंपस खाली करने को कहा है. सरकार के मुताबिक़ ये ज़मीन करीब 27.3 एकड़ है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ क्लब ने अपने सदस्यों को भेजे आधिकारिक संदेश में कहा कि केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली में स्थित उसके कैंपस को "डिफ़ेंस स्ट्रक्चर को मजबूत और सुरक्षित करने' और पब्लिक सेफ़्टी सुनिश्चित करने के लिए खाली करने को कहा है.

क्लब के मुताबिक़, उसे 22 मई को आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के तहत आने वाले लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस से नोटिस मिला है.

यह ज़मीन दिल्ली के 2,सफदरज़ंग रोड पर स्थित है, जो लोक कल्याण मार्ग स्थित पीएम आवास के पास है.

एलएंडडीओ के मुताबिक़, यह ज़मीन मूल रूप से तत्कालीन "इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड" को सामाजिक और खेल क्लब चलाने के लिए लीज पर दी गई थी.

अब भारत की राष्ट्रपति ने लीज डीड के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए लीज समाप्त करने और परिसर को तत्काल वापस लेने का आदेश दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ री-एंट्री के बाद पूरी जमीन, भवन, ढांचे, लॉन और फिटिंग्स सरकार के अधिकार में चली जाएंगी.

5 जून को इसका कब्जा लेने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

इस बीच, सरकार की ओर से जिमखाना क्लब की ज़मीन और कैंपस खाली करने के नोटिस की काफी चर्चा हो रही है.

क्लब के कई सदस्यों और अन्य लोगों ने सरकार की इस कदम की आलोचना की है.

क्लब के एक सदस्य ने नीतिन वर्मा ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "यह बेहद शर्म की बात है कि आप मनगढ़ंत वजहों के आधार पर क्लब को बंद करना चाहते हैं. मुझे नहीं लगता कि यहां ऐसा कुछ है, जिस पर कार्रवाई की ज़रूरत हो.''

पत्रकार शेखर गुप्ता ने लिखा. " यह वाकई बड़ी दुस्साहसिक कार्रवाई है. मोदी सरकार अब भारत के असली और स्थायी सत्ता प्रतिष्ठान को चुनौती दे रही है.''

पूर्व आईपीएस अफ़सर और पुडुचेरी की पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर किरन बेदी ने लिखा, ''यह दुर्भाग्यपूर्ण है. सचमुच बेहद दुखद. उम्मीद है कि इस प्रस्ताव पर फिर से विचार किया जाएगा.''

''दिल्ली जिमखाना क्लब सिर्फ़ एक प्रॉपर्टी नहीं है. यह हमारी संस्थागत और खेल विरासत का हिस्सा है. बदलाव ज़रूरी हो सकता है, लेकिन इतिहास और विरासत को सोच-समझकर सहेजने की ज़रूरत है.''

वहीं बीजेपी नेता प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, '' कभी इन जगहों को अभिजात्य वर्ग के केंद्र के रूप में देखा जाता था. अब दिल्ली जैसे शहर में यह सामाजिक रूप से उचित नहीं है कि ऐसी जगहों तक सिर्फ़ अभिजात्य वर्ग की ही पहुंच हो.''

शिवसेना के एनडीए और चुनावों के प्रमुख नेशनल को-ऑर्डिनेटर अभिषेक वर्मा ने लिखा, ''दशकों तक ऐसी जगहें विरासत में मिले विशेषाधिकारों के निजी गणराज्य की तरह चलती रहीं, जहां योग्यता से ज़्यादा उपनाम मायने रखते थे, पहुंच को पैतृक अधिकार की तरह माना जाता था और सार्वजनिक ज़मीन कुछ स्वयंभू अभिजात्य लोगों के आराम का इलाका बन गई थी.''

आलीशान क्लब, शानदार इतिहास और सुविधाएं

दिल्ली जिमखाना क्लब की वेबसाइट के मुताबिक यह भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित क्लबों में से एक है. यह 3 जुलाई 1913 को अस्तित्व में आया.

उस समय इसका नाम 'इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब' था और स्पेंसर हार्कोर्ट बटलर इसके पहले अध्यक्ष थे.

आज़ादी के बाद इसके नाम से 'इम्पीरियल' शब्द हटा दिया गया और तब से इसे सिर्फ़ 'दिल्ली जिमखाना क्लब कहा जाने लगा'.

शुरुआती वर्षों में पोलो क्लब भी इसका हिस्सा माना जाता था.

1930 के दशक में पोलो क्लब के नई दिल्ली आने के बाद उसे एक अलग यूनिट बना दिया गया.

करीब 1200 सदस्यों वाले इस क्लब में एंट्री मुश्किल है. यहां सदस्य बनने के लिए 20-30 साल तक वेटिंग बताई जाती है.

पिछले 113 सालों से यह क्लब हाई-सोसायटी के इलीट्स की गतिविधियों का केंद्र रहा है.

वेबसाइट के मुताबिक क्लब में 26 ग्रास टेनिस कोर्ट हैं. इसके अलावा स्क्वैश कोर्ट, बैडमिंटन कोर्ट, बिलियर्ड्स रूम, स्विमिंग पूल, तीन लाउंज बार और 43 कॉटेज भी हैं.

क्लब लंबे समय से ब्यूरोक्रेट्स, उद्योगपतियों, सेना प्रमुख, राजनेताओं की पसंदीदा जगह रही है. यहां की सदस्यता काफी प्रतिष्ठित मानी जाती है.

'दिल्ली का पहला प्यार कनॉट प्लेस' किताब के लेखक विवेक शुक्ला कहते हैं, ''पहले यह उत्तरी दिल्ली में उस जगह था जहां आज कोरोनेशन पार्क है. मौजूदा जगह पर ये 1928 में शिफ्ट हुआ. ये एक सांस्कृतिक क्लब था जहां पर ब्रिटिश अफ़सर, नागरिक और आर्मी और पुलिस के लोग आते थे.''

शुक्ला बताते हैं, ''उस समय भारत के वायसराय लॉर्ड वेलिंग्टन की पत्नी लेडी वेलिंग्टन ने यहां 21 हजार रुपये देकर स्वीमिंग पूल बनवाया था. अगर आप जिमखाना क्लब जाएं तो अभी भी उनके नाम की पट्टी लगी हुई है. ये जो आज लोदी गार्डन है उसका नाम भी लेडी वेलिंग्टन पार्क ही था. ये उन्होंने ही बनवाया था.''

विवेक शुक्ला कहते हैं, '' जिमखाना सुपर इलिट्स के लिए बेहतरीन जगह है. इसका डिजाइन जिस रॉबर्ट टॉर रसेल ने तैयार किया था उन्होंने नई दिल्ली की कई लैंडमार्क बिल्डिंग्स डिजाइन बनवाई थी. टॉर ने यहां वेस्टर्न और ईस्टर्न कोर्ट बनवाया. उन्होंने तीन मूर्ति भवन और सफ़दरजंग एयरपोर्ट भी बनवाया.''

उन्होंने कहा, "बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि यहां डेविस कप के दो-चार बड़े मुकाबले हुए. 1966 में इस क्लब के टेनिस कोर्ट में भारत और जर्मनी का मुक़ाबला हुआ था. उसमें भारत की ओर से रामनाथन कृष्णन, प्रेमजीत लाल, जयदीप मुखर्जी खेल रहे थे. ये दिलचस्प है कि उसी दौरान फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार और उनकी पत्नी सायरा बानो की शादी हुई थी और वो मैच देखने आए थे."

Worauf zu achten ist

KI-Ausblick — Möglichkeiten, keine Fakten

  • दिल्ली जिमखाना क्लब लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस को स्थिति स्पष्ट करने के लिए चिट्ठी लिखेगा।

    Sehr wahrscheinlich · Innerhalb von Tagen

  • सरकार 5 जून को क्लब परिसर का कब्जा ले लेगी।

    Sehr wahrscheinlich · Innerhalb von Tagen

  • इस मामले पर कानूनी और राजनीतिक बहस जारी रहेगी।

    Sehr wahrscheinlich · Innerhalb von Wochen

Offene Fragen

  • सरकार द्वारा 'डिफेंस स्ट्रक्चर को मजबूत करने' का वास्तविक कारण क्या है?
  • क्या क्लब के पास लीज की शर्तों के उल्लंघन का कोई सबूत है?
  • क्या क्लब इस फैसले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा?
  • क्या यह कार्रवाई अन्य पुराने क्लबों के लिए भी एक मिसाल बनेगी?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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