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अर्जेंटीना के ख़िलाफ़ मिली हार के बाद मिस्र ने क्यों कहा- 'हुई नाइंसाफ़ी', मेसी पर भी साधा निशाना
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अर्जेंटीना के ख़िलाफ़ मिली हार के बाद मिस्र ने क्यों कहा- 'हुई नाइंसाफ़ी', मेसी पर भी साधा निशाना

Auf einen Blick

वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना से हार के बाद मिस्र की टीम ने रेफ़री के फैसलों पर सवाल उठाए हैं। मिस्र के कप्तान ने कहा कि उनकी टीम के साथ नाइंसाफ़ी हुई है और शायद विश्व चैंपियन को बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया। वीएआर द्वारा दो फैसलों को रद्द करने पर मिस्र ने नाराज़गी जताई।

KI-generierte Zusammenfassung

Warum es wichtig ist

मिस्र की टीम वर्ल्ड कप क्वार्टर फ़ाइनल में पहुंचने के क़रीब थी लेकिन अर्जेंटीना ने वापसी करते हुए मैच 3-2 से जीत लिया। मिस्र ने रेफ़री के फैसलों पर सवाल उठाए हैं।

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अर्जेंटीना के ख़िलाफ़ मिली हार के बाद मिस्र ने क्यों कहा- 'हुई नाइंसाफ़ी', मेसी पर भी साधा निशाना

Author, डेल जॉनसन

पदनाम, फुटबॉल मामलों के संवाददाता

प्रकाशित 2 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 9 मिनट

निर्धारित समय के 12 मिनट बाक़ी रहते हुए, मिस्र वर्ल्ड कप में इतिहास रचने के क़रीब पहुंच चुका था.

दर्शकों से खचाखच भरे अटलांटा स्टेडियम में, मिस्र मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना से 2-0 से आगे था. घड़ी की टिक-टिक के साथ अर्जेंटीना के फ़ैंस की मायूसी बढ़ती जा रही थी.

फुटबॉल के दीवाने इस अफ़्रीकी देश (मिस्र) के लिए क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बनाने का यह एक सुनहरा अवसर था. वो पहली बार नॉक आउट स्टेज में अपने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन के क़रीब था.

लेकिन फिर अगले कुछ मिनट उसके लिए बेहद भयानक साबित हुए.

अर्जेंटीना के क्रिस्टियन रोमेरो ने 79वें मिनट में गोल करके अंतर कम किया. लेकिन मिस्र ने डटकर मुकाबला करना जारी रखा. फ़ुटबॉल फ़ैंस के बीच गोट (ग्रेटेस्ट ऑफ़ ऑल टाइम) के तौर पर जाने जाने वाले अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी ने चार मिनट बाद ही स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया. अब मिस्र की टीम थोड़ी घबराई नज़र आने लगी.

इसके बाद एन्ज़ो फर्नांडीज़ ने स्टॉपेज टाइम के दूसरे मिनट में हेडर से गोल किया और पूरे स्टेडियम में मौजूद अर्जेंटीना के फ़ैंस ख़ुशी से झूम उठे. ये वर्ल्ड कप के इतिहास के सबसे ज़ोरदार कमबैक में से एक था. 3-2 से अर्जेंटीना की मिस्र पर जीत ने उसे क़्वार्टर फ़ाइनल में पहुंचा दिया.

मिस्र की टीम हताश और बेहद गुस्से में थी, क्योंकि वीडियो असिस्टेंट रेफ़री (वीएआर) ने मोस्तफ़ा ज़ीको के दूसरे गोल को फ़ाउल के आधार पर रद्द कर दिया. उस वक़्त तक मिस्र 1-0 से आगे थी और ये गोल उन्हें 2-0 की बढ़त दिला देता. यह फ़ाउल तब हुआ जब मिडफ़ील्डर मारवान अत्तिया को लिसेंड्रो मार्टिनेज के पैर पर अपना पैर रखने के लिए दंडित किया गया था.

मिस्र की नाराज़गी यहीं नहीं रुकी. उनका मानना था कि अर्जेंटीना के तीसरे गोल से चंद सेकंड पहले उनके पेनल्टी एरिया में मोहम्मद सलाह पर फ़ाउल किया गया था, लेकिन रेफ़री ने उसे नज़रअंदाज़ करके खेल को जारी रखने को कहा.

जब फ्रांसीसी रेफरी फ्रांकोइस लेटेक्सियर ने फ़ुल टाइम की सीटी बजाई, तो मिस्र के कई खिलाड़ी अपनी हार पर यक़ीन नहीं कर पाए और ज़मीन पर गिर पड़े.

मैच के बाद एक सनसनीखेज इंटरव्यू में, मिस्र के कप्तान होसाम हसन ने कहा कि उनकी टीम के साथ "नाइंसाफ़ी" हुई. बीबीसी स्पोर्ट ने इस मामले पर टिप्पणी के लिए फ़ीफ़ा से संपर्क किया है.

हसन ने आगे कहा, "मैदान के अंदर और बाहर कई ऐसी बातें हैं जिन पर सवाल उठाए जा सकते हैं."

"हर तरफ नकारात्मक पहलू हैं. यह सब विश्वसनीयता का सवाल है, जिस तरह से घटनाएँ घटीं, उससे विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं."

"शायद वे विश्व चैंपियन को टूर्नामेंट में बनाए रखना चाहते थे. शायद वे चाहते थे कि मेसी दौड़ में बने रहें."

"विश्व चैंपियन को हर स्तर पर समर्थन मिला. ऐसा लगता है कि इस परिणाम को लेकर अर्जेंटीना की तरफ से दबाव था."

इस मैच में सब कुछ था- मेसी का पेनल्टी मिस करना, एक रद्द किया गया गोल, एक रेड कार्ड और साथ ही एक रोमांचक वापसी.

"खेलों में निष्पक्षता क्यों नहीं है?"

विश्व कप की पूर्व संध्या पर मिस्र के मुख्य कोच हसन ने अपने देश के पिछले प्रदर्शनों को देखते हुए कहा था, "हमें विश्व कप में बेहतर प्रदर्शन करने की जरूरत है."

मिस्र पिछले तीन वर्ल्ड कप में अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाया था और उनमें अपने सात मैचों में से एक भी मैच नहीं जीता था.

अर्जेंटीना के ख़िलाफ़ 15वें मिनट में यासर इब्राहिम के हेडर से किए गए गोल की बदौलत मिस्र ने 1-0 की बढ़त बना ली.

इसके कुछ देर बाद अर्जेंटीना को पेनल्टी मिली. लेकिन मेसी की किक को मिस्र के गोलकीपर मुस्तफा शोबेर ने शानदार तरीक़े से रोक लिया.

फर्नांडीज के आखिरी क्षणों में किए गए विजयी गोल ने मिस्र के गुस्से को और बढ़ा दिया, क्योंकि सालाह पर हुए फ़ाउल के बाद मिस्र ने पेनल्टी की मांग की. इसके बाद बेंच पर बैठे मिस्र के बैक रूम टीम के एक सदस्य को रेप़री ने रेड कार्ड दिखाया.

इसके अलावा, अर्जेंटीना के विजयी गोल के बाद विरोध प्रदर्शन करने के लिए मिस्र के मुख्य कोच पर भी कार्रवाई की गई, जब उन्होंने अपने हाथों से क्रॉस का चिह्न बनाया. ऐसा तब किया जाता है जब किसी को लगता है उसके या उसकी टीम के ख़िलाफ़ नस्लवादी घटना हुई.

मैच के बाद मिस्र ने इस बारे में कुछ नहीं कहा कि उनके हेड कोच ने ऐसा क्यों किया था.

हेड कोच ने कहा, "हमें न तो सम्मान देखने को मिला है और न ही निष्पक्ष खेल."

"हमारे लिए मिले पेनल्टी को खारिज कर दिया गया, वीएआर द्वारा इसकी जांच भी नहीं की गई और हमारा दूसरा गोल, पता नहीं किस कारण से, आश्चर्यजनक रूप से अमान्य कर दिया गया."

"हम सभी ने देखा है कि एलेक्सिस मैक एलिस्टर ने शर्ट को पीछे खींचा और वीएआर ने भी इसकी जांच नहीं की. सामान्य जीवन तो अनफ़ेयर है ही लेकिन खेलों में अन्याय क्यों."

मिस्र के फॉरवर्ड ज़ीको ने आगे कहा, "रेफ़री का व्यवहार बेहद अनुचित था. साफ़ तौर पर नाइंसाफ़ी की गई. मैच की शुरुआत से ही अन्याय हो रहा था."

विश्लेषण: रेफरी के प्रमुख निर्णय

इस बार के वर्ल्ड कप में रेफ़री को निर्देश दिए गए हैं कि वे मैचों के दौरान समय की अनावश्यक बर्बादी को रोकें और इसके लिए खिलाड़ियों के बीच हल्की फुल्की टक्कर या संपर्क की अनुमति दें.

इस विश्व कप में प्रति मैच औसतन 22.6 फाउल हुए हैं, जबकि 2022 में यह संख्या 25 और 2018 में 27 थी.

इससे मिस्र के रद्द किए गए गोल का क्या संबंध है?

अत्तिया ने मार्टिनेज की कमीज को हल्के से खींचा और गलती से उनके पैर के अंगूठे पर कदम रख दिया.

लेकिन वीएआर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि ज़ीको के शानदार गोल को फ़ाउल के कारण रद्द कर दिया जाना चाहिए.

सामान्य परिस्थितियों में ये बेशक फ़ाउल होता लेकिन इस टूर्नामेंट में फ़ाउल के लिए रेफ़री जिस तरह से फ़ैसले करते आए हैं ये फ़ैसला उसके अनुरूप नहीं था.

अगर आप मैदान पर इन चुनौतियों को नजरअंदाज कर रहे हैं, तो आपको वीएआर के साथ भी ऐसा ही करना होगा.

क्या आपको याद है अलेक्जेंडर पावलोविक के इक्वाडोर के पेड्रो विटे के चेहरे पर मारी गई किक? लेकिन लेरॉय साने के गोल के लिए कोई वीएआर हस्तक्षेप नहीं हुआ.

मिस्र का ग़ुस्सा इस बात पर भी भड़का कि उनके गोल को तो अमान्य कर दिया गया था लेकिन अर्जेंटीना के विनिंग गोल से ठीक पहले सालाह पर हुए फ़ाउल को नज़रअंदाज़ कर दिया गया. अगर वो फ़ाउल दिया जाता तो मिस्र को पेनल्टी मिलने की संभावना बन सकती थी क्योंकि सालाह अर्जेंटीना के पेनल्टी एरिया में थे.

मिस्र ने दावा किया कि जूलियन अल्वारेज़ ने उन्हें गिरा दिया था. क्या इस मामले की भी वीएआर द्वारा समीक्षा नहीं होनी चाहिए?

लेकिन रेफ़री ने फ़ैसला किया कि पेनल्टी के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे, इसलिए अर्जेंटीना का विजयी गोल मान्य है.

क्या सालाह अगले विश्व कप में खेलेंगे?

जहां मेसी, एर्लिंग हालैंड और किलियन एम्बापे ने इस टूर्नामेंट में शानदार परफॉर्मेंस दी है, वहीं सालाह सिर्फ एक गोल के साथ टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं.

उन्होंने 22 जून को न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ मैच में उन्होंने गोल किया.

लेकिन अर्जेंटीना के खिलाफ इस मैच में वो कमाल नहीं कर सके.

जब 2030 में मोरक्को, पुर्तगाल और स्पेन में विश्व कप का आयोजन होगा, तब सालाह 38 वर्ष के हो जाएंगे.

पुर्तगाल के 41 वर्षीय क्रिस्टियानो रोनाल्डो और क्रोएशिया के 40 वर्षीय लुका मोड्रिक ने विश्व कप में अपना आखिरी मैच खेल लिया है, लेकिन यह देखना बाकी है कि क्या सालाह चार साल बाद मिस्र के साथ वापसी करेंगे.

इस बीच, मिस्र के टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद मोरक्को अफ्रीका की उन 10 टीमों में से आखिरी टीम बची है जो अभी भी इस टूर्नामेंट में बनी हुई है.

चार साल पहले मोरक्को ने विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचने वाला पहला अफ्रीकी देश बनकर इतिहास रच दिया था.

गुरुवार को बोस्टन स्टेडियम में क्वार्टर फाइनल में मोरक्को का फ्रांस से मैच होगा.

दिल टूटने के साथ-साथ गर्व

मैंने अभी-अभी अपने नौ साल के भतीजे से फोन पर बात खत्म की थी.

"मिशा, ये तो बहुत बुरा हुआ. हमें लूट लिया गया है!" उसने गुस्से में रोते हुए कहा.

मेरा अनुमान है कि जिन भी मिस्रवासियों को, जैसे कि मेरा परिवार, आज रात यह मैच देखने को मिल रहा है, उनके घरों और पारिवारिक व्हाट्सएप ग्रुपों में इसी तरह की बातचीत हो रही होगी.

और मुझे लगता है कि आज रात कई मिस्रवासी यही महसूस कर रहे हैं.

गर्व... साथ ही दिल टूटना. वे कमजोरों की तरह नहीं खेले, वे बराबरी से खेले.

इस टीम ने वो कर दिखाया है जो इससे पहले किसी भी मिस्र की टीम ने नहीं किया. इन्होंने पूरे देश और पूरे क्षेत्र का मनोबल बढ़ाया है.

इस पूरे टूर्नामेंट में उनका आदर्श वाक्य 'मेकामेलीन' रहा है, जिसका अर्थ है 'हम आगे बढ़ते रहेंगे'.

यह विश्व कप भले ही निराशाजनक अंत के साथ समाप्त हुआ हो, लेकिन इसने मिस्रवासियों को यह विश्वास भी दिलाया है कि यह टीम फुटबॉल की बड़ी ताक़तों में शुमार होने की हकदार है.

Offene Fragen

  • क्या वीएआर ने सही फैसले लिए?
  • क्या रेफ़री पर अर्जेंटीना को जिताने का दबाव था?
  • क्या सालाह अगले विश्व कप में खेलेंगे?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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