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ईरान पर अमेरिकी हमले: 14 की मौत, परमाणु संयंत्र और रेल कॉरिडोर निशाने पर
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ईरान पर अमेरिकी हमले: 14 की मौत, परमाणु संयंत्र और रेल कॉरिडोर निशाने पर

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ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच अमेरिका ने ईरान पर परमाणु संयंत्रों, चीन-रूस रेल कॉरिडोर और सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की।

KI-generierte Zusammenfassung

Warum es wichtig ist

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच अमेरिका ने ईरान पर परमाणु संयंत्रों, चीन-रूस रेल कॉरिडोर और सैन्य ठिकानों पर हमले किए। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की, जिससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।

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प्रकाशित 38 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 9 मिनट

ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के जनाज़े और दफ़नाने के अंतिम कार्यक्रम के बीच अमेरिका ने ईरान पर परमाणु केंद्र से लेकर चीन और रूस से जोड़ने वाले रेलवे कॉरिडोर पर हमले किए.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि बीती दो रातों में अमेरिकी सैन्य बलों ने ईरान के 170 सैन्य ठिकानों पर बमबारी की.

इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी में क़तर, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया.

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, बीती दो रातों के दौरान हुए अमेरिकी हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई है.

इस बीच गुरुवार को अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के आख़िरी दिन अमेरिकी हमलों को देखते हुए तेहरान और मशहद के बीच रेल सेवा को स्थगित कर दिया गया.

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने गुरुवार को कहा कि उसने अमेरिका की ओर से उसी दिन ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों के जवाब में खाड़ी क्षेत्र और जॉर्डन में कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया.

ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि बुधवार को होर्मुज़ स्ट्रेट से कमर्शियल जहाज़ों की आवाजाही काफ़ी कम हो गई और गुरुवार को लगभग ठप हो गई.

अमेरिकी सेंटकॉम ने क्या बताया

गुरुवार सुबह अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि अमेरिका ने 8 जुलाई को ईरान पर एक और चरण के हमले पूरे किए.

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यूएस सेंटकॉम ने मंगलवार को कहा कि यह अभियान अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में बेकसूर चालक दल वाले कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाए जाने के ख़िलाफ़ शुरू किया गया है.

बयान के मुताबिक़, इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज़ स्ट्रेट में कमर्शियल जहाज़ों और नागरिक नाविकों पर हमला करने की ईरान की क्षमता को और कमज़ोर करना था. इन हमलों में वायु रक्षा प्रणाली, मिसाइल और ड्रोन रखने वाली जगहों समेत अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया.

सेंटकॉम ने कहा कि 'ईरान की आक्रामक कार्रवाई बेवजह, ख़तरनाक और युद्धविराम का साफ़ उल्लंघन थी.'

अमेरिकी हमलों की घोषणा के बाद ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि देश के दक्षिणी तटीय इलाकों में कई जगह विस्फोटों की आवाज़ सुनी गई. इससे पहले सेंटकॉम ने कहा था कि उसने लगातार दूसरी रात ईरान में सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि उन्होंने ईरान पर नए हमलों का आदेश दिया है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तेहरान होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाज़ों को निशाना बनाना जारी रखता है तो उसे इससे भी गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

इन हमलों से पहले मंगलवार को अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने वो अस्थायी छूट वापस ले ली थी, जिसके तहत ईरान पर तेल संबंधी प्रतिबंधों में कुछ समय के लिए ढील दी गई थी.

ईरान के जवाबी हमले

आईआरजीसी ने एक बयान में कहा गया कि कुवैत स्थित अरिफ़जान और अली अल सलेम सैन्य ठिकानों, बहरीन के जुफैर और शेख ईसा सैन्य ठिकानों और जॉर्डन के अजराक सैन्य अड्डे के बुनियादी ढांचे और महत्वपूर्ण सुविधाओं को निशाना बनाया गया.

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के मुताबिक़, एक ईरानी अधिकारी ने गुरुवार को पुष्टि की कि अमेरिकी हमले में बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आसपास का इलाक़ा चपेट में आया. इससे पहले फ़ार्स समाचार एजेंसी ने दक्षिण-पश्चिमी ईरान के बुशहर प्रांत में कई विस्फोटों की आवाज़ सुनाई देने की खबर दी थी.

गुरुवार दोपहर जॉर्डन सरकार के प्रवक्ता मोहम्मद अल-मोमानी ने कहा कि ईरान से दागी गई मिसाइलों के जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद सायरन बजाए गए. उन्होंने कहा कि इन मिसाइलों को रोक दिया गया.

जॉर्डन की सशस्त्र सेनाओं के एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि देश की वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान से दागी गई आठ मिसाइलों को मार गिराया. मलबा कुछ स्थानों पर गिरा, लेकिन किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की सूचना नहीं है.

कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ईरानी हमले में एक व्यक्ति घायल हुआ.

ईरान में कहां कहां हुए हमले

ईरान के लिए सामरिक रूप से अहम एक रणनीतिक पुल पर हमला किया गया है जो चीन-तुर्कमेनिस्तान-ईरान रेल गलियारे के तहत आता है.

बीबीसी वेरिफ़ाई ने उत्तरी शहर अक़्क़ाला में एक रेलवे ब्रिज पर हमले की तस्वीरों को सही पाया है. कैस्पियन सागर से 40 किलोमीटर दूर ईरान के गोलेस्तान प्रांत में अकताका ख़ान रेलवे ब्रिज को भी नुक़सान हुआ है.

आईआरजीसी के बयान के अनुसार, अकताका ख़ान पुल भी निशाने पर लिए गए स्थानों में शामिल था. इन हमलों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.

अकताका ख़ान रेलवे पुल चीन-तुर्कमेनिस्तान-ईरान रेल गलियारे पर स्थित एक रणनीतिक पुल है. यह गोलिस्तान प्रांत के अक़्क़ाला काउंटी में स्थित है.

दो अन्य सत्यापित वीडियो से पता चला है कि ईरान के दक्षिण पूर्वी शहर चाबहार में बहेश्ती पोर्ट के कंट्रोल टॉवर को भारी नुक़सान पहुंचा है.

ईरान के सरकारी मीडिया में कहा गया है कि गुरुवार दोपहर, ईरान का एकमात्र सक्रिय परमाणु ऊर्जा संयंत्र, बुशहर एटॉमिक एनर्जी प्लांट को निशाना बनाया गया.

बुशहर प्रांत के एक उप-गवर्नर के बयान को ईरानी मीडिया में प्रसारित किया जा रहा है, जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी हमले में दागे गए प्रोजेक्टाइल इस संयंत्र की बाहरी परिधि में आकर गिरे.

स्थानीय लोगों के हवाले से इरानियन ब्रॉडकास्टिंग एजेंसी (आईबीए) ने बताया कि ईरान के बलोचिस्तान प्रांत और सिस्तान प्रांत में ईरानशहर एयरपोर्ट पर धमाके देखे गए.

होर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण- आईआरजीसी

ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट पर नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया है.

आईआरजीसी से जुड़ी तसनीम समाचार एजेंसी में प्रकाशित एक बयान के अनुसार, ईरान का कहना है कि उसने पिछले दो सप्ताह के दौरान स्ट्रेट की 'सुरक्षा बनाए रखी' है और इसे 'धीरे-धीरे दोबारा खोलने' की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

बयान में कहा गया है कि इस जलमार्ग से जहाज़ों की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर के लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

साथ ही, ईरान से 'अनुमति' लेने वाले जहाज़ों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

बयान में कहा गया, "हम एक बार फिर साफ़ करते हैं कि इस रास्ते या होर्मुज़ स्ट्रेट पर किसी भी विदेशी ताक़त का कोई दावा नहीं है."

बीबीसी वेरिफ़ाई के अनुसार, 8 जुलाई को 23 मालवाहक जहाज़ और तेल टैंकर इस स्ट्रेट से होकर गुजरे. केप्लर का डेटा बताता है कि इनमें से 12 जहाज़ों ने ईरान के उत्तरी रास्ते का इस्तेमाल किया.

जॉइंट मैरिटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक़, 28 फ़रवरी को संघर्ष शुरू होने से पहले हर दिन औसतन 138 जहाज़ होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरते थे.

अमेरिका-ईरान के बीच 'न युद्ध, न शांति'

लीस डुसेट का विश्लेषण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ हुए नाज़ुक युद्धविराम के बारे में कहा, "यह युद्धविराम दुनिया के दूसरे हिस्सों में हुए युद्धविरामों से बहुत अलग है."

पिछले महीने हुए इस युद्धविराम और अंतरिम समझौते की अब भी परीक्षा हो रही है. दोनों पक्ष इसकी शर्तों को अपने-अपने तरीके से समझ रहे हैं.

ऐसा लगता है कि इस क्षेत्र को फ़िलहाल 'न युद्ध, न शांति' जैसी स्थिति के साथ जीना होगा. इसकी वजह एक छोटा और अस्पष्ट भाषा में लिखा गया समझौता है, जिसकी अलग-अलग व्याख्या की जा रही है.

ईरान मानता है कि इस समझौते के तहत उसे होर्मुज़ स्ट्रेट के मैनेजमेंट में भूमिका मिली है. वह यह भी मानता है कि जहाज़ों को उन्हीं मार्गों से गुज़रना चाहिए, जिन्हें ईरान तय करे.

वहीं, अमेरिका का कहना है कि इस समझौते से समुद्री यातायात की आज़ादी बहाल हुई है. उसके मुताबिक़, अब जहाज़ों की आवाजाही सामान्य रूप से हो सकती है.

दोनों पक्ष पूर्ण युद्ध में लौटना नहीं चाहते. लेकिन अपनी स्थिति मज़बूत करने के लिए दोनों जवाबी कार्रवाई जारी रखने को तैयार हैं.

ईरान और अमेरिका, दोनों के भीतर ऐसे कट्टरपंथी और युद्ध समर्थक समूह मौजूद हैं जो सरकारों पर दबाव बना रहे हैं.

तनाव के इस माहौल के बीच ट्रंप ने एक बार फिर कहा है कि "वे किसी समझौते के लिए बेताब हैं."

उनका इशारा ईरान की ओर था.

आमतौर पर ऐसे बयान इस बात का संकेत माने जाते हैं कि पर्दे के पीछे मध्यस्थ सक्रिय हैं. वे दोनों पक्षों के बीच किसी नए समझौते या बातचीत का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं.

सैन्य दबाव की रणनीति और ग़लत अनुमान का ख़तरा

खशायर जुनैदी, बीबीसी न्यूज़ वॉशिंगटन

पिछले दो दिनों के हमलों का मतलब यह नहीं है कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत पूरी तरह ख़त्म हो गई है.

यह दोनों देशों के बीच संभावित समझौते के लिए तय 60 दिन की अवधि के भीतर कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है.

ईरानी पक्ष का आकलन है कि वैश्विक बाज़ार में तेल की क़ीमतें बढ़ने की आशंका और अमेरिका में होने वाले संसदीय चुनावों को देखते हुए डोनाल्ड ट्रंप व्यापक सैन्य टकराव से बचना चाहेंगे और अंततः ईरान की कुछ मांगों पर विचार कर सकते हैं.

पिछले दो दिनों में अमेरिका के हमलों का दायरा बढ़ा है. इसमें फ़ारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के तटीय क्षेत्रों के अलावा गोलिस्तान प्रांत का एक महत्वपूर्ण रेलवे पुल भी शामिल रहा.

यह तेहरान को किसी भी तरह की रणनीतिक भूल से बचने की चेतावनी है.

ऐसी किसी भी ग़लत रणनीतिक अनुमान से तीसरा पक्ष, यानी इसराइल, किसी भी समय संघर्ष में शामिल हो सकता है, जिससे व्यापक जंग छिड़ने की आशंका बढ़ सकती है.

Worauf zu achten ist

KI-Ausblick — Möglichkeiten, keine Fakten

  • ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू हो सकती है।

    Möglich · Innerhalb von Wochen

  • तेल की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।

    Wahrscheinlich · Kurzfristig

Offene Fragen

  • क्या यह संघर्ष पूर्ण युद्ध में बदलेगा?
  • क्या मध्यस्थता के प्रयास सफल होंगे?
  • ईरान की आगे की प्रतिक्रिया क्या होगी?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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