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ओडिशा की स्कूली किताबों में 1600 से ज़्यादा ग़लतियां, सरकार पर जनता का गुस्सा
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ओडिशा की स्कूली किताबों में 1600 से ज़्यादा ग़लतियां, सरकार पर जनता का गुस्सा

Auf einen Blick

ओडिशा में नई स्कूली किताबों में 1600 से ज़्यादा ग़लतियां मिलने से सरकार पर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। हम्पी को कोणार्क मंदिर बताने जैसी तथ्यात्मक त्रुटियों के साथ बॉलीवुड गानों का समावेश भी है। सरकार ने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और गलतियों वाली किताबें वापस लेने का वादा किया है।

KI-generierte Zusammenfassung

Warum es wichtig ist

ओडिशा सरकार को नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के तहत कक्षा एक से आठ तक की नई छपी किताबों में 1600 से ज़्यादा ग़लतियां मिलने पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

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ओडिया किताब में 'निंबूड़ा-निंबूड़ा', हम्पी को बताया कोणार्क मंदिर', स्कूली किताबों की ग़लतियों पर घिरी ओडिशा सरकार

Author, राखी घोष

पदनाम, भुवनेश्वर से, बीबीसी हिन्दी के लिए

प्रकाशित 14 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 7 मिनट

बीते कुछ दिनों से ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है.

यह गुस्सा नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 (एनईपी 2020) के तहत सिलेबस में बदलाव के बाद कक्षा एक से आठ तक के लिए नई छपी और बांटी गई किताबों में 1600 से ज्यादा ग़लतियां मिलने की वजह से है.

इस मामले में कार्रवाई करते हुए माझी सरकार ने लापरवाही के आरोप में चार बड़े अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है. ये अधिकारी हैं- स्टेट काउंसिल फ़ॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) के पूर्व डायरेक्टर मनोज पाढ़ी और प्रलिप्ता मिश्रा, दिलीप कुमार साहू और भारती टुडू.

शिक्षा मंत्रालय के तहत अलग-अलग विभागों में छह और असिस्टेंट डायरेक्टर्स के ख़िलाफ़ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है.

एनईपी 2020 के तहत सिलेबस में बदलाव के चलते टीचर एजुकेशन डायरेक्टरेट और एससीईआरटी ने इन किताबों को तैयार किया था.

प्रिंटिंग की दिक़्क़तों की वजह से इन किताबों को बांटने में देरी हुई थी. गर्मियों की छुट्टियों के बाद जब स्कूल खुले तो किताबों में ग़लतियां सामने आईं.

टीचर्स ने किताबों को देखने के बाद पाया कि उनमें स्पेलिंग से लेकर तथ्यों तक की ग़लतियां थीं और इसके अलावा भी कई तरह की कमियां थीं.

इन ग़लतियों की वजह से माता-पिता, शिक्षकों और विपक्षी दलों (बीजू जनता दल) ने राज्य सरकार की लापरवाही की तीख़ी आलोचना की.

विपक्ष ने सरकार को घेरा

बीजू जनता दल (बीजेडी) ने इन किताबों में पाई गईं गंभीर गलतियों को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया है.

बीजेडी ने मांग की है कि स्कूल और जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड को इन ग़लतियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए. बीजेडी के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने इन किताबों की छपाई में 380 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है.

उन्होंने सारे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि सरकार को इन किताबों को छापने में खर्च हुए जनता के पैसे की वसूली इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों से करनी चाहिए.

आलोचना के बाद स्कूल और जन शिक्षा सचिव एन. तिरुमाला नाइक ने कहा, "सरकार सभी गलतियों वाले एडिशन वापस लेगी. सही एडिशन छापेगी और छात्रों को स्कूल की टेक्स्ट बुक्स की नई प्रतियां बांटेगी."

हालांकि नाइक ने यह नहीं बताया कि नई किताबें कब तक उपलब्ध कराई जाएंगी. शैक्षणिक सत्र पहले ही शुरू हो चुका है, इसलिए टीचर्स सही संस्करण मिलने तक खुद ही गलतियों को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं.

किताबों में छपी हैं ऐसी ग़लतियां

अब नज़र डालते हैं इन किताबों में छपी कुछ गंभीर ग़लतियों पर -

हम्पी को कोणार्क सूर्य मंदिर और कर्नाटक विधानसभा को ओडिशा विधानसभा के रूप में दिखाया गया.

ओडिशा की नियमगिरि पहाड़ियों को झारखंड में दिखाया गया

नई छपी किताबों में बॉलीवुड गाने जैसे 'निंबूड़ा निंबूड़ा' और 'बुमरो बुमरो' छापे गए हैं.

चौथी कक्षा की अंग्रेजी किताब में पेपर बोट पर ओडिया कविता और पांचवीं कक्षा की अंग्रेजी किताब में राजा फ़ेस्टिवल का गाना शामिल

एक ओर जहां स्थानीय मीडिया लगातार सवाल उठा रहा है कि इस घोर लापरवाही के लिए कौन ज़िम्मेदार है, वहीं कुछ छात्र इन बॉलीवुड गानों पर सोशल मीडिया पर रील्स बनाने लगे हैं.

एक शिक्षाविद ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बीबीसी हिन्दी को बताया, "एनईपी 2020 को लागू करने के तहत विभाग ने एनसीईआरटी के कंटेंट के आधार पर कक्षा 1 से 8 तक के लिए 55 नई ओडिया मीडियम की टेक्स्ट बुक्स तैयार कीं."

"सिलेबस में बड़े बदलाव का मक़सद छात्रों को रटने या भारी-भरकम टेक्स्ट बुक्स से हटाकर प्रैक्टिकल स्किल डेवलपमेंट और असल समस्याओं को हल करने की ओर ले जाना था."

"समस्या यह है कि उन्होंने प्रूफ़-रीडिंग ठीक से नहीं की. उन्होंने छह महीने में कंटेंट तैयार करके उसे पब्लिश भी कर दिया, जबकि टेक्स्ट बुक्स का कंटेंट तैयार करने में महीनों का समय लगता है और कई दौर की चर्चा, प्रूफ़-रीडिंग और मॉनिटरिंग की ज़रूरत होती है."

'राइट टू एजुकेशन फ़ोरम' (ओडिशा चैप्टर) के संयोजक अनिल प्रधान ने किताबों के अनुवाद पर सवाल उठाए हैं.

उन्होंने कहा, "एक बड़ी चिंता यह है कि उन्होंने शिक्षकों, शिक्षाविदों, पाठ्यक्रम विशेषज्ञों और अन्य संबंधित लोगों से बिना किसी सार्थक बातचीत के एनसीईआरटी की टेक्स्ट बुक्स का सीधे ओडिया में अनुवाद कर दिया है."

"उन्होंने यह काम जल्दबाज़ी में किया है और छात्रों के लिए नई टेक्स्ट बुक्स लाने में सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया है. इसका आदिवासी और आर्थिक रूप से ग़रीब छात्रों की सीखने की क्षमता पर बहुत बुरा असर पड़ेगा."

वहीं शिक्षाविद का कहना है कि रिसोर्स ग्रुप ने कंटेंट का अनुवाद करने के लिए एआई का इस्तेमाल किया है.

शिक्षाविद ने कहा, "छह महीने में सभी पाठ्यपुस्तकों का कंटेंट बदलना काफ़ी नहीं है. पहले उन्हें इसे निचली कक्षाओं (1 से 5) के लिए करना चाहिए था और फ़ीडबैक मिलने के बाद ही इसे ऊंची कक्षाओं के लिए लागू करना चाहिए था."

"इसके अलावा नए पाठ्यक्रम को लागू करने से पहले माता-पिता के साथ लगातार बैठकें करना और शिक्षकों की ट्रेनिंग कुछ ऐसे अहम कदम थे जो विभाग को उठाने चाहिए थे."

उन्होंने माना कि नई छपी किताबों में बड़ी ग़लतियां हुई हैं. ख़ासकर स्पेलिंग और तथ्यों से जुड़ी गलतियां. इसका दूर-दराज और आदिवासी इलाकों के छात्रों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि वहां पहले से ही शिक्षकों की कमी है.

राज्य के शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने पहले कहा था कि एक हाई-लेवल कमेटी ने टेक्स्ट बुक्स की ग़लतियों की जांच की और 14 सुझाव दिए. सरकार ने स्कूलों को करेक्शन स्लिप जारी की हैं और शिक्षकों को निर्देश दिया है कि वे क्लास के दौरान इन ग़लतियों को बोलकर ठीक करवाएं.

शिक्षा मंत्री का पहले कहना था कि इस समय किताबों को 'बदला' नहीं जा सकता क्योंकि लाखों किताबें पहले ही छपकर स्कूलों में बांटी जा चुकी हैं.

टीचर्स पर दूसरे कामों का बोझ

इस बीच सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए कुछ ज़िलों में शिक्षा अधिकारियों ने टेक्स्ट बुक्स की गलतियों को सुधारने के लिए स्कूलों में करेक्शन स्लिप बांटना शुरू कर दिया है.

भुवनेश्वर के एक सरकारी स्कूल की हेड मिस्ट्रेस ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, "हमें अप्रैल में ही किताबें मिल गई थीं. लेकिन क्योंकि टीचर, बीएलओ और जनगणना के काम में लगे हुए थे, इसलिए उन्हें किताबों को देखने का समय नहीं मिला. स्कूल खुलने के बाद हमें स्पेलिंग और तथ्यों से जुड़ी ग़लतियां दिखाई दे रही हैं."

"लेकिन हमारी समस्या यह है कि हमारे पास छात्रों को नया सिलेबस पढ़ाने के लिए पर्याप्त टीचर नहीं हैं. जब सरकार भारी-भरकम किताबों से हटकर प्रैक्टिकल स्किल डेवलपमेंट की ओर बढ़ रही है, तो उन्हें अपने टीचरों को छात्रों को पढ़ाने के लिए तैयार करना चाहिए था."

उन्होंने यह भी कहा, "अब सरकार कह रही है कि टीचर ग़लतियों को ठीक करेंगे और उसी के अनुसार पढ़ाएंगे. जब हम पर बीएलओ और जनगणना जैसे दूसरे कामों का बोझ है, टीचरों की कमी है और नया सिलेबस पढ़ाने की ट्रेनिंग भी नहीं मिली है, तो यह हमारे लिए एक बोझ बन जाएगा."

इस बीच अलग-अलग सरकारी स्कूलों के टीचर्स ने ग़लतियों को ठीक करके छात्रों को पढ़ाना शुरू भी कर दिया है. जब एक सरकारी स्कूल के पांचवीं कक्षा के छात्र संग्राम जेना से पूछा गया कि उसे नई बांटी गई टेक्स्ट बुक्स कैसी लगीं, तो जवाब था, "किताबें दिलचस्प तो हैं, लेकिन उलझन में डालने वाली भी हैं. उनमें स्पेलिंग की कई ग़लतियां हैं."

Worauf zu achten ist

KI-Ausblick — Möglichkeiten, keine Fakten

  • सरकार गलतियों वाली किताबों को वापस लेगी और सही एडिशन छापेगी।

    Sehr wahrscheinlich · Innerhalb von Monaten

Offene Fragen

  • नई किताबें कब तक उपलब्ध होंगी?
  • भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच का क्या नतीजा होगा?
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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