Eilmeldung
FRRussie : Attaque de drones ukrainiens sur des centres logistiques et un dépôt pétrolierFRL'UE cherche un accord sur de nouvelles sanctions contre la Russie; l'Ukraine change de commandant militaireCRYPTO-FRChute spectaculaire du stablecoin Balance Coin (BLC) après une attaqueFRMonique Barbut retire sa démission et reste ministre de la Transition écologiqueFRFrappes américaines en Iran et tirs iraniens: l'escalade se poursuit au Moyen-OrientFRMenaces criminelles contre le maire d'Alès, Christophe Rivenq, placé sous protection du RaidFRSécheresse intense dans les Pyrénées-Orientales : restrictions et tensions autour d'un projet de golfFRL'EFSA durcit ses recommandations sur le TFA, ouvrant la voie à des contrôles d'eau plus strictsFRMoonshot AI dévoile son modèle Kimi K3, rivalisant avec les IA américainesCRYPTO-FRS&P Dow Jones Indices et Pantera Capital lancent un indice crypto basé sur les revenusFRRussie : Attaque de drones ukrainiens sur des centres logistiques et un dépôt pétrolierFRL'UE cherche un accord sur de nouvelles sanctions contre la Russie; l'Ukraine change de commandant militaireCRYPTO-FRChute spectaculaire du stablecoin Balance Coin (BLC) après une attaqueFRMonique Barbut retire sa démission et reste ministre de la Transition écologiqueFRFrappes américaines en Iran et tirs iraniens: l'escalade se poursuit au Moyen-OrientFRMenaces criminelles contre le maire d'Alès, Christophe Rivenq, placé sous protection du RaidFRSécheresse intense dans les Pyrénées-Orientales : restrictions et tensions autour d'un projet de golfFRL'EFSA durcit ses recommandations sur le TFA, ouvrant la voie à des contrôles d'eau plus strictsFRMoonshot AI dévoile son modèle Kimi K3, rivalisant avec les IA américainesCRYPTO-FRS&P Dow Jones Indices et Pantera Capital lancent un indice crypto basé sur les revenus
Newsgather
Zurückपाकिस्तान का रक्षा बजट 17.6% बढ़ा: 2026-27 के लिए 3 ट्रिलियन रुपये का प्रस्ताव
पाकिस्तान का रक्षा बजट 17.6% बढ़ा: 2026-27 के लिए 3 ट्रिलियन रुपये का प्रस्ताव
In Entwicklung
BBC हिंदी15.6.2026Politik5 Min. LesezeitIndia

पाकिस्तान का रक्षा बजट 17.6% बढ़ा: 2026-27 के लिए 3 ट्रिलियन रुपये का प्रस्ताव

Auf einen Blick

पाकिस्तान सरकार ने 2026-27 के बजट में रक्षा खर्च 17.6% बढ़ाकर 3 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (10.8 अरब डॉलर) करने का प्रस्ताव दिया है। वित्त मंत्री ने क्षेत्रीय अस्थिरता और भारत की आक्रामकता को इसका कारण बताया।

KI-generierte Zusammenfassung

Schriftgröße

Author, असद सुहैब

पदनाम, बीबीसी उर्दू डॉट कॉम

........से, इस्लामाबाद

प्रकाशित 12 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 8 मिनट

पाकिस्तान सरकार ने साल 2026-27 का बजट पेश करते हुए रक्षा बजट में पिछले साल की तुलना में 17.6% की भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है.

नेशनल असेंबली में बजट भाषण देते हुए वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगज़ेब ने शुक्रवार को बताया कि इस साल रक्षा बजट के लिए तीन ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (10.8 अरब डॉलर) रखे गए हैं.

पिछले वित्त वर्ष (2025-26) में रक्षा बजट में 20.2% की बढ़ोतरी कर इसे 2,550 अरब रुपये (9.17 अरब डॉलर) किया गया था, जिसे बाद में संशोधित कर 2,595 अरब रुपये (9.33 अरब डॉलर) कर दिया गया.

ग़ौरतलब है कि 2024 में पीएमएल-एन (पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज़) सरकार ने अपना पहला बजट (2024-25) पेश करते समय रक्षा बजट के लिए 7.63 अरब डॉलर का प्रावधान किया था, जिसमें पहले के मुक़ाबले 1.13 अरब डॉलर की बढ़ोतरी की गई थी.

पिछले तीन साल में पाकिस्तान के रक्षा बजट में कुल 3.16 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है.

पाकिस्तान के 2026-27 के कुल 64.71 अरब डॉलर के बजट में रक्षा बजट का हिस्सा क़रीब 16.67% है.

हालांकि, सैन्य पेंशन रक्षा बजट का हिस्सा नहीं होती.

बजट दस्तावेज़ों के अनुसार, अगले वित्त वर्ष के लिए केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन पर 4.20 अरब डॉलर रखे गए हैं, जिनमें से 2.95 अरब डॉलर रिटायर्ड सैनिकों की पेंशन के लिए हैं.

रक्षा बजट में इस बढ़ोतरी का बचाव करते हुए वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा, "क्षेत्र में अस्थिर हालात से निपटने और देश की रक्षा को मज़बूत बनाने के लिए रक्षा बजट में बड़ी बढ़ोतरी की गई है."

उन्होंने कहा "भारत की आक्रामकता का पाकिस्तान की सेना ने मज़बूत जवाब दिया, दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर किया और देश की सैन्य तैयारी और क्षमता को दिखाया."

पाकिस्तान के रक्षा बजट में और क्या-क्या है?

बजट दस्तावेज़ों के अनुसार, 10.78 अरब डॉलर के रक्षा बजट में से 3.48 अरब डॉलर कर्मचारियों से जुड़ी ख़र्चों के लिए रखे गए हैं. इसमें सैन्य अधिकारियों के वेतन, भत्ते आदि शामिल हैं. यह पिछले साल की तुलना में 14.36% ज़्यादा है.

बजट दस्तावेज़ों के मुताबिक़, 2.67 अरब डॉलर से ज़्यादा नियमित खर्चों के लिए रखे गए हैं. इसमें परिवहन, इलाज, राशन, ट्रेनिंग, ईंधन और रोज़मर्रा के ख़र्च शामिल हैं.

सबसे बड़ी बढ़ोतरी भौतिक संपत्ति वाले हिस्से में की गई है, जिसके लिए अगले वित्त वर्ष में 3.33 अरब डॉलर रखे गए हैं. इस हिस्से में हथियार, सैन्य उपकरण और गोला-बारूद की ख़रीद शामिल होती है.

पिछले साल इसके लिए 2.38 अरब डॉलर रखे गए थे, अब इसमें 39% से ज़्यादा की बढ़ोतरी की गई है.

सार्वजनिक कामों और सैन्य ढाँचे की देखभाल और नई सुविधाओं के निर्माण के लिए 1.21 अरब डॉलर रखे गए हैं. यह पिछले साल की तुलना में 7.92% ज़्यादा है.

क्या रक्षा बजट में बढ़ोतरी टालना नामुमकिन थी?

पिछले कई सालों से पाकिस्तान का रक्षा बजट लगभग हर साल बढ़ता रहा है. इस वजह से यह बहस होती रही है कि कमज़ोर अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए इतना बड़ा रक्षा बजट उठाना कैसे संभव है और क्यों हर साल इसे बढ़ाना ज़रूरी माना जाता है.

इस बारे में रक्षा विशेषज्ञ लेफ़्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) ख़ालिद नईम लोधी का कहना है कि वैश्विक संघर्ष, सीमा पर तनाव और अंदरूनी हालात पाकिस्तान को मजबूर करते हैं कि वह अपना रक्षा बजट बढ़ाए.

बीबीसी उर्दू से बातचीत में उन्होंने कहा, "खाड़ी में हाल की जंग ने भी दिखा दिया है कि अगर किसी देश की रक्षा मज़बूत नहीं हो तो उसे भारी नुक़सान उठाना पड़ सकता है."

उन्होंने कहा, "यूक्रेन युद्ध से लेकर पिछले साल भारत-पाकिस्तान संघर्ष और अब खाड़ी युद्ध तक साफ़ है कि साइबर युद्ध, रॉकेट, ड्रोन, लेज़र तकनीक और रिमोट कंट्रोल सिस्टम अब पारंपरिक लड़ाई की जगह लेकर युद्ध का रुख़ बदलने में अहम भूमिका निभा रहे हैं."

उनके मुताबिक़, ऐसे हालात में कोई भी देश जो अपनी रक्षा मज़बूत करना चाहता है, वह नई तकनीक के बिना नहीं रह सकता.

उन्होंने समझाते हुए कहा कि देश की तीनों सेनाएं अपनी ज़रूरतें इसी बजट से पूरी करती हैं, चाहे नए जहाज़ ख़रीदने हों, नौसेना को नई पनडुब्बियां लेनी हों या ज़मीनी सेना को कोई आधुनिक सैन्य उपकरण लेना हो.

इसके अलावा, जब उनसे सैन्य ख़र्च के बारे में पूछा गया तो लेफ़्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) लोधी ने कहा, "अपनी सर्विस के दौरान मैंने कभी नहीं देखा कि रक्षा बजट के लिए पैसा किसी और जगह से आता हो. यानी जो भी ख़र्च होता था, वह सीधे सरकार के बजट से ही आता था. लेकिन अगर सरकार के पास ऐसे संसाधन हैं जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं है, तो वह अलग बात है."

फ़ौजी कर्मचारियों की पेंशन रक्षा बजट का हिस्सा नहीं

आर्थिक विश्लेषक ख़ुर्रम हुसैन कहते हैं कि फ़ौजी कर्मचारियों के ख़र्चों में बहुत बढ़ोतरी हुई है, इसलिए यह देखना होगा कि बढ़ती महंगाई के हिसाब से फ़ौजी कर्मचारियों और सिविल कर्मचारियों की तनख़्वाहें बराबर बढ़ाई गई हैं या नहीं.

ख़ुर्रम हुसैन बताते हैं कि पहले फ़ौजी कर्मचारियों की पेंशन अलग से गिनी जाती थी. लेकिन साल 2001 में सरकार ने यह पेंशन सिविल बजट में डाल दी. यानी अब यह ख़र्च आम सरकारी ख़र्चों में जुड़ गया.

सेना ने उस समय यह वजह दी थी कि जब कोई सैनिक रिटायर होता है तो वह अब सैनिक नहीं रहता, बल्कि आम नागरिक बन जाता है. इसलिए उसकी पेंशन को फ़ौजी ख़र्च में नहीं, बल्कि नागरिक ख़र्च में गिना जाना चाहिए.

लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज़ से जुड़े अर्थशास्त्री और शोधकर्ता डॉक्टर अली हसनैन कहते हैं कि अगर आँकड़ों की बात करें तो पाकिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मुक़ाबले रक्षा ख़र्च का अनुपात धीरे-धीरे कम हुआ है.

उन्होंने कहा, "इस मामले में पाकिस्तान कभी दक्षिण एशियाई देशों में नंबर वन था."

'टैक्स के मुक़ाबले रक्षा ख़र्च अब भी बहुत ज़्यादा'

भारत ने इस साल फ़रवरी में अगले वित्त वर्ष का बजट पेश किया, जिसमें रक्षा बजट पिछले साल के मुक़ाबले 15 प्रतिशत बढ़ाया गया है, जो अब 85.4 अरब डॉलर है. यह रकम भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 1.9 प्रतिशत है.

बीबीसी उर्दू से बात करते हुए डॉक्टर अली हसनैन ने कहा कि अगर पेंशन ख़र्च को भी रक्षा बजट में शामिल कर लिया जाए, तब भी जीडीपी के मुक़ाबले रक्षा ख़र्च कम ही है.

अली हसनैन के अनुसार, "इसकी वजह यह नहीं है कि हमने रक्षा से पैसा निकालकर शिक्षा या किसी और क्षेत्र में लगाया है, बल्कि इसका मतलब यह है कि क़र्ज़ का बोझ इतना बढ़ गया है कि हर चीज़ घट रही है."

"जब क़र्ज़ की वजह से ख़र्च कम करने का दबाव होता है तो सभी क्षेत्रों पर असर पड़ता है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता रक्षा ख़र्च में ज़्यादा कटौती न करने की होती है."

पाकिस्तान के जीडीपी का जो हिस्सा रक्षा ख़र्च के लिए रखा गया है, वह दो प्रतिशत है और हाल के वर्षों में यह दो प्रतिशत से भी कम रहा है.

अली हसनैन ने कहा कि जीडीपी के मुक़ाबले रक्षा ख़र्च का अनुपात घट रहा है, जबकि सरकार की आमदनी यानी टैक्स के मुक़ाबले रक्षा ख़र्च अभी भी बहुत ज़्यादा है.

पाकिस्तान को क्यों बढ़ाना पड़ा रक्षा बजट

लेफ़्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) ख़ालिद नईम लोधी का कहना है कि पाकिस्तान और भारत को एक-दूसरे की वजह से अपना रक्षा बजट बढ़ाना पड़ता है. इसलिए अगर दोनों देश बैठकर अपने झगड़े सुलझा लें, तो रक्षा बजट कम किया जा सकता है और यह पैसा ग़रीबी दूर करने में लगाया जा सकता है.

उन्होंने कहा, "दुनिया में अगर रिवाज़ यह है कि जिसकी लाठी उसकी भैंस, तो लाठी मोटी ही रखनी पड़ती है."

लोधी का कहना है कि पाकिस्तान का वैश्विक असर धीरे-धीरे बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा, "पिछले साल हमने सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता किया था और पाकिस्तान मध्य पूर्व के संघर्ष को सुलझाने में भी आगे है."

उनके मुताबिक़, दूसरे देश भी पाकिस्तान से सुरक्षा समझौता करना चाहते हैं और इसकी वजह पाकिस्तान का मज़बूत रक्षा क्षेत्र है. अगर इस पर ज़्यादा संसाधन ख़र्च हो रहे हैं, तो यह पाकिस्तान के हित में है.

लोधी का कहना है कि जब तक पाकिस्तान की अंदरूनी सुरक्षा समस्याएँ हल नहीं होतीं और पड़ोसी देशों के साथ तनाव ख़त्म नहीं होता, तब तक पाकिस्तान की रक्षा ज़रूरतें बढ़ती ही रहेंगी.

Verwandte Themen

This article was originally published by BBC हिंदी.

Ähnliche Meldungen

वो तस्वीरें जिनकी वजह से जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन की देश-विदेश में है चर्चा
In Entwicklung·vor 1 Stunde

वो तस्वीरें जिनकी वजह से जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन की देश-विदेश में है चर्चा

20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'चलो संसद' मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने सवाल उठाए हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वाच ने बल प्रयोग की स्वतंत्र जांच की मांग की है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।

BBC हिंदी
2 Min. Lesezeit
Mehr zu diesem Themaरक्षा बजट