बॉम्बे हाई कोर्ट का नितिन गडकरी को अंतरिम राहत, सोशल मीडिया से मानहानिकारक कंटेंट हटाने के आदेश
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर प्रसारित मानहानिकारक और डीपफ़ेक कंटेंट को हटाने का बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिया आदेश।
Auf einen Blick
बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को उनके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर फैलाए गए मानहानिकारक और डीपफ़ेक कंटेंट को हटाने के मामले में अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने मेटा और गूगल जैसी कंपनियों को आपत्तिजनक सामग्री हटाने का निर्देश दिया है।
KI-generierte Zusammenfassung
Warum es wichtig ist
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर अपने और परिवार के ख़िलाफ़ मानहानिकारक और डीपफ़ेक कंटेंट को हटाने की मांग की थी।
प्रकाशित 5 अगस्त 2026
पढ़ने का समय: 6 मिनट
बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को उनके द्वारा दायर मामले में अंतरिम राहत दी है.
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने और अपने परिवार के ख़िलाफ़ केंद्र सरकार के ई20 इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम से जुड़े सोशल मीडिया पर मानहानिकारक और डीपफ़ेक कंटेंट को हटाने की मांग की थी.
हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे कंटेंट अपने प्लेटफ़ॉर्म से हटाने के लिए कहा है.
जस्टिस आरिफ़ डॉक्टर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और उनकी मध्यवर्ती संस्थाओं को आदेश दिया है कि वो गडकरी के ख़िलाफ़ बदनाम करने वाला और गाली-गलौज वाला कंटेंट हटाएं.
क़ानूनी मामलों को कवर करने वाली वेबसाइट बार एंड बेंच ने बताया है कि नितिन गडकरी ने यह मामला मेटा, एक्स, गूगल/यूट्यूब, सूचना एवं प्रोद्यौगिकी मंत्रालय, डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्युनिकेशन्स और "अशोक कुमार/जॉन डो" नाम के अनजान यूज़र्स के ख़िलाफ़ दायर किया था.
हाई कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
कोर्ट ने यह माना है कि गडकरी ने जिन कंटेंट के बारे में बताया है वो घिनौना और गाली-गलौज वाला था.
कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा, "इंस्टाग्राम पर ऐसा ही एक ट्रांसक्रिप्ट रील के रूप में मौजूद है. इसके अलावा भी ऐसी सामग्री उपलब्ध है. वादी जिस सामग्री को हटाने की मांग कर रहे हैं, उसके बारे में मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि वह बेहद आपत्तिजनक और अपमानजनक है."
"ऐसी सामग्री का किसी भी सार्वजनिक मंच पर कोई स्थान नहीं होना चाहिए, जहां हर कोई, यहां तक कि बच्चे भी, उसे देख सकते हैं. वादी ने अंतरिम राहत देने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार प्रस्तुत किया है. मेटा और गूगल अदालत में पेश हुए हैं और उन्होंने एग्ज़िबिट-सी में बताई गई सामग्री को हटाने पर सहमति जताई है. उनका यह बयान स्वीकार किया जाता है."
इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि ऐसी सामग्री को हटाया जाए.
अदालत ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में गडकरी के संज्ञान में इस तरह की कोई और सामग्री आती है, तो वह इसकी जानकारी संबंधित इंटरमीडियरी कंपनियों को दे सकते हैं. इसके बाद उन कंपनियों को आवश्यक कार्रवाई करनी होगी.
कोर्ट ने कहा, "अगर भविष्य में वादी के संज्ञान में कोई और मानहानिकारक सामग्री आती है, तो वह इसकी जानकारी प्रतिवादियों को देंगे और वे उस पर कार्रवाई करेंगे."
मेटा की ओर से पेश वकील ने कहा, "कुछ सामग्री ऐसी भी हो सकती है जिसे उचित आलोचना माना जा सकता है."
इस पर गडकरी के वकील ने कहा, "मैं किसी को भी उचित आलोचना करने से नहीं रोक रहा हूं."
जज ने भी कहा, "मैं सहमत हूं कि मामला आलोचना का नहीं है."
अदालत ने आगे कहा, "अगर भविष्य में कोई और अपमानजनक सामग्री या डीपफेक तस्वीरें सामने आती हैं, तो उनकी जानकारी प्रतिवादियों को दी जाएगी. अगर किसी मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं हो, तो संबंधित पक्ष अदालत का रुख़ करने के लिए स्वतंत्र होंगे."
अदालत ने गूगल और मेटा से यह भी कहा कि वे ऐसा तंत्र विकसित करें, जिससे हर बार अदालत का रुख़ किए बिना ही ऐसी सामग्री को हटाया जा सके.
अब इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी.
नितिन गडकरी के वकील ने क्या बताया?
सुनवाई के बाद एएनआई से बात करते हुए नितिन गडकरी की ओर से पेश वकील संदीप एस. लड्डा ने कहा कि कोर्ट ने इस बात को गंभीरता से लिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल डीपफ़ेक और भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए किया जा रहा है.
उन्होंने कहा, "केंद्रीय मंत्री के दायर मुकदमे पर सुनवाई हुई. मेटा, जो फेसबुक और इंस्टाग्राम संचालित करता है, और एक्स कॉर्प (पूर्व में ट्विटर) की ओर से वकील अदालत में पेश हुए. हमने अदालत को ई20 इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी से जुड़े मानहानिकारक कंटेंट की प्रकृति और यह बताया कि ऐसे दावे मानहानिकारक क्यों हैं. अदालत ने पहली नज़र में माना कि यह सामग्री मानहानिकारक है और मेटा तथा अन्य प्लेटफॉर्म से पूछा कि ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए उनके पास प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं है."
केंद्रीय मंत्री की ओर से पेश क़ानूनी टीम ने कहा कि मौजूदा नियामक माहौल में सोशल मीडिया का इस्तेमाल लोगों की प्रतिष्ठा खराब करने के लिए "बेहद आसानी" से किया जा रहा है और इसे रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद नहीं हैं.
वकील ने आगे कहा, "हमने अदालत को बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का लगभग सामान्य तरीके से लोगों की प्रतिष्ठा ख़राब करने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है, जबकि इसे रोकने के लिए कोई पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. अदालत ने पहली नज़र में माना कि ई20 से जुड़ी सामग्री डीपफेक और मानहानिकारक जैसी लगती है. इसके बाद अदालत ने प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया कि वे यह जानकारी दें कि यह सामग्री किसने अपलोड की और इसे तुरंत हटाया जाए."
सुनवाई के दौरान मेटा (जो फेसबुक और इंस्टाग्राम संचालित करता है) और एक्स कॉर्प (पूर्व में ट्विटर) की ओर से वकील अदालत में मौजूद थे. अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि डीपफ़ेक आधारित भ्रामक सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए इन प्लेटफॉर्म के पास पर्याप्त आंतरिक व्यवस्था नहीं है.
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि प्लेटफ़ॉर्म उन लोगों का विवरण उपलब्ध कराएं जिन्होंने यह आपत्तिजनक सामग्री अपलोड की थी. साथ ही मुकदमा दायर होने के बाद पोस्ट की गई ऐसी किसी भी समान सामग्री को भी हटाया जाए.
नितिन गडकरी निशाने पर कैसे आए?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद सोशल मीडिया पर नितिन गडकरी निशाने पर आ गए थे. आंदोलन के दौरान भी गडकरी से जुड़े मीम्स दिख रहे थे.
नितिन गडकरी ने अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाते हुए 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की थी. उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस सामग्री से उनकी छवि को ठेस पहुँची है.
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) समेत विपक्षी दलों ने गडकरी को निशाना बनाना शुरू कर दिया था.
सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में ई-20 (20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल) जैसे इथेनॉल मिश्रित ईंधन की नीति से कथित आर्थिक लाभ की बात कही गई थी.
सोशल मीडिया पर 'गडकरी इज़ Next' वाले मीम्स की बाढ़ आ गई थी. सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में जंतर-मंतर से लौटते समय जेन-ज़ी प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों से मज़ाक में कहते भी दिखाई दिए, "अब ई-20 के वक़्त मिलेंगे." हालांकि, सीजेपी के नेताओं ने अब तक इस तरह के किसी विशेष अभियान की घोषणा नहीं की है.
इसके बावजूद, "ई-20 जनता पार्टी" नाम से चल रहे सोशल मीडिया पेजों से भी हज़ारों लोग जुड़ चुके हैं. एक्स पर इसके 50 हज़ार से ज़्यादा फॉलोवर्स हो गए हैं.
Worauf zu achten ist
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चार सप्ताह बाद मामले की अगली सुनवाई होगी
Sehr wahrscheinlich · Innerhalb von Wochen
Offene Fragen
- चार सप्ताह बाद होने वाली सुनवाई में कोर्ट क्या निर्णय लेगा?
- क्या सोशल मीडिया कंपनियां भविष्य के लिए कोई स्थाई तंत्र विकसित करेंगी?

