इराक़ के प्रधानमंत्री अली ज़ैदी की सक्रिय कूटनीति: क्षेत्रीय और वैश्विक संतुलन की कोशिश
मई में सत्ता संभालने के बाद से इराक़ी पीएम अली ज़ैदी ने वॉशिंगटन, तेहरान, अंकारा और सऊदी अरब के साथ संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने की पहल की है।
Auf einen Blick
इराक़ के प्रधानमंत्री अली ज़ैदी ने अमेरिका, ईरान, तुर्की और सऊदी अरब के साथ कूटनीतिक दौरे और समझौते कर विदेश नीति को नई दिशा देने की कोशिश की है, जिससे बाहरी ताक़तों पर निर्भरता कम हो सके।
KI-generierte Zusammenfassung
Warum es wichtig ist
मई में सत्ता संभालने के बाद से इराक़ के प्रधानमंत्री अली ज़ैदी ने अपनी विदेश नीति के तहत वॉशिंगटन, तेहरान और अंकारा के दौरे किए हैं।
मई में सत्ता संभालने के बाद से इराक़ के प्रधानमंत्री अली ज़ैदी ने काफ़ी सक्रिय कूटनीति अपनाई है. उन्होंने कुछ ही हफ़्तों के अंतराल में वॉशिंगटन, तेहरान और अंकारा का दौरा किया है.
उन्होंने पहले तय यात्रा स्थगित होने के बाद सऊदी अरब जाने की भी तैयारी की है.
इन कूटनीतिक गतिविधियों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बग़दाद अपनी विदेश नीति पर पुनर्विचार कर रहा है.
यह नीति कई वर्षों तक अमेरिका और ईरान की प्रतिस्पर्धा और प्रभाव से प्रभावित रही थी.
अली ज़ैदी एक तरफ़ अमेरिका के साथ आर्थिक और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी तरफ़ उन्होंने तेहरान को भरोसा दिलाया है कि इराक़ की ज़मीन ईरान के ख़िलाफ़ किसी ख़तरे का आधार नहीं बनेगी.
साथ ही, तुर्की और सऊदी अरब की उनकी यात्राएं दिखाती हैं कि बग़दाद क्षेत्रीय साझेदारियों को बढ़ाना चाहता है. उसका लक्ष्य बाहरी शक्तियों पर अपनी निर्भरता कम करना भी है.
अमेरिका के साथ संबंध एक नए दौर में
अली ज़ैदी ने अपने पहले विदेशी दौरे के लिए वॉशिंगटन को चुना. वह 13 से 18 जुलाई तक अमेरिका में रहे और इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले.
यह फ़ैसला अपने आप में महत्वपूर्ण माना गया.
अमेरिकी वित्तपोषित नेटवर्क 'अलहुर्रा' के अनुसार, ईरान ने ज़ैदी को समझाने की कोशिश की थी कि वह वॉशिंगटन जाने से पहले तेहरान आएं. लेकिन उन्होंने पहले अमेरिका जाने पर ज़ोर दिया.
इस यात्रा के दौरान अमेरिकी कंपनियों के साथ लगभग 48 समझौते और सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर हुए. इनमें ख़ासतौर पर ऊर्जा क्षेत्र शामिल था.
बग़दाद अब उन रिश्तों को नई दिशा देना चाहता है जो पहले मुख्य रूप से सुरक्षा मामलों तक सीमित थे. अब निवेश, ऊर्जा और व्यापार पर ज़ोर दिया जा रहा है.
ज़ैदी ने इसे "संकट प्रबंधन" से "अवसर निर्माण" की ओर बढ़ना बताया.
इन समझौतों में तेल, गैस, बिजली, दूरसंचार और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्र शामिल थे.
यह यात्रा ऐसे समय हुई जब अमेरिका अब भी इराक़ पर ईरान समर्थक सशस्त्र समूहों को नियंत्रित करने का दबाव बना रहा है.
ज़ैदी ने इन समूहों को निरस्त्र करना अपनी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल किया है.
उन्होंने कहा कि सितंबर में अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के मिशन की समाप्ति के बाद "सशस्त्र प्रतिरोध" की आवश्यकता भी समाप्त होनी चाहिए.
इस रुख़ की ईरान समर्थक समूहों ने आलोचना की.
ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार अली अक़बर वेलायती ने भी इस पर आपत्ति जताई. इससे नई इराक़ी सरकार की दिशा को लेकर तेहरान की चिंता झलकती है.
अमेरिका से इराक़ की नज़दीकी के ईरान के लिए मायने?
अमेरिका के साथ रिश्तों में सुधार के बावजूद ऐसा कोई बड़ा संकेत नहीं है कि अली ज़ैदी तेहरान से संबंध तोड़ना चाहते हैं.
अमेरिका से लौटने के कुछ ही दिनों बाद वह 23 जुलाई को तेहरान पहुंचे. वहां उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात की.
ज़ैदी ने कहा कि दोनों देशों की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई है. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इराक़ की धरती का इस्तेमाल ईरान के ख़िलाफ़ नहीं होने दिया जाएगा.
दोनों देशों ने परिवहन और रेल संपर्क से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए.
साथ ही राजनीतिक, आर्थिक, सुरक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रों में दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग दस्तावेज़ तैयार करने पर भी सहमति बनी.
इस यात्रा से यह भी संकेत मिला कि इराक़ अब क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय ताक़तों के टकराव का मैदान नहीं, बल्कि मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता है.
अल जज़ीरा से बातचीत में एक सूत्र ने कहा कि ज़ैदी अमेरिका की ओर से तेहरान के लिए तनाव कम करने का संदेश भी लेकर आए थे.
हालांकि बग़दाद ने उन रिपोर्टों को ख़ारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया था कि वह अमेरिका की ओर से कोई विशेष युद्धविराम प्रस्ताव लेकर आए थे.
ऐसा लगता है कि इराक़ देश के भीतर ईरानी प्रभाव को कुछ हद तक सीमित करना चाहता है. लेकिन वह बग़दाद और तेहरान के बीच सरकारी स्तर के व्यापक संबंधों को नुक़सान नहीं पहुंचाना चाहता.
ईरान और इराक़ के बीच गहरे राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध हैं.
इस कारण ईरान समर्थक सशस्त्र समूहों को निरस्त्र करने की अमेरिकी मांग और तेहरान के प्रभाव से आने वाले दबावों के बीच संतुलन बनाना ज़ैदी के लिए सबसे कठिन चुनौतियों में से एक है.
अंकारा यात्रा और क्षेत्रीय साझेदारियों का विस्तार
अंकारा की यात्रा ने ज़ैदी की विदेश नीति का एक और पहलू सामने रखा. वह आर्थिक संबंध मज़बूत करके इराक़ की कूटनीतिक संभावनाओं का दायरा बढ़ाना चाहते हैं.
ज़ैदी और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन ने ऊर्जा, परिवहन, सुरक्षा और जल संसाधनों के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की घोषणा की.
दोनों नेताओं ने "डेवलपमेंट रोड" परियोजना में प्रगति का भी उल्लेख किया.
इस परियोजना का उद्देश्य इराक़ के बड़े फ़ाव बंदरगाह को तुर्की के माध्यम से यूरोप से जोड़ना है. अर्दोआन ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 17 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है.
ज़ैदी ने कहा कि इराक़ रोज़ाना 10 लाख बैरल तक तेल तुर्की को निर्यात करने के लिए तैयार है.
दोनों देशों ने किरकुक तेल क्षेत्र के विकास में तुर्की कंपनियों की भागीदारी की भी घोषणा की.
इस सहयोग से बग़दाद को एक और महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार मिलेगा. साथ ही इराक़ को अपने निर्यात के लिए वैकल्पिक रास्ते भी मिल सकते हैं.
होर्मुज़ स्ट्रेट में संभावित बाधाओं के संदर्भ में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है.
सऊदी अरब और इराक़ के संबंध सुरक्षा परीक्षा के दौर में
अली ज़ैदी को 30 जुलाई को सऊदी अरब जाना था.
लेकिन 28 जुलाई को इराक़ में हश्द अल-शाबी के ठिकानों पर अमेरिका और सऊदी अरब के संयुक्त हमलों के बाद यह यात्रा रद्द कर दी गई.
इस घटना ने दिखाया कि खाड़ी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की इराक़ की कोशिशों की भी सीमाएं हैं.
ईरान समर्थक सशस्त्र समूह अभी भी सरकार के पूर्ण नियंत्रण से बाहर काम करते हैं.
सऊदी अरब ने इराक़ में मौजूद कुछ समूहों पर अपने ख़िलाफ़ हमलों में शामिल होने का आरोप लगाया है.
इन समूहों ने ऐसे आरोपों से इनकार किया है.
इराक़ी समाचार एजेंसी शफ़क न्यूज़ के अनुसार, 7 अगस्त को बग़दाद पहुंचे सऊदी ख़ुफ़िया प्रमुख ख़ालिद हमैदान ने ज़ैदी को फिर से रियाद आने का निमंत्रण दिया.
ज़ैदी ने एक बार फिर कहा कि वह इराक़ की ज़मीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश पर हमला करने के लिए नहीं होने देंगे.
इसके बाद इराक़ का एक वरिष्ठ सुरक्षा प्रतिनिधिमंडल सऊदी अरब गया.
यह यात्रा दिखाती है कि दोनों देश मतभेदों को नियंत्रित करना चाहते हैं और व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को नुक़सान से बचाना चाहते हैं.
क्या इराक़ अपना पक्ष बदल रहा है?
इसमें अमेरिका से रिश्ते मज़बूत करना, ईरान समर्थक समूहों की स्वतंत्र शक्ति सीमित करना, तेहरान से आधिकारिक संबंध बनाए रखना और तुर्किये तथा खाड़ी देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाना शामिल है.
यह नीति कितनी सफल और टिकाऊ साबित होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बग़दाद घरेलू दबावों का सामना करते हुए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वी शक्तियों के साथ संतुलित और प्रभावी संबंध बनाए रख पाता है या नहीं.
Worauf zu achten ist
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सितंबर में अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के मिशन की समाप्ति
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Offene Fragen
- क्या ज़ैदी ईरान समर्थित समूहों को पूरी तरह नियंत्रित कर पाएंगे?
- सऊदी अरब के साथ अगली यात्रा कब होगी?


