कोलकाता में 4000 ईवीएम और वीवीपैट जलकर राख़, साजिश की आशंका
Auf einen Blick
कोलकाता की एक सरकारी इमारत में आग लगने से 4000 ईवीएम और वीवीपैट जलकर राख़ हो गए. तृणमूल कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र से छेड़छाड़ की सुनियोजित कोशिश बताया है, जबकि सरकार ने जांच के लिए एसआईटी गठित की है.
KI-generierte Zusammenfassung
Warum es wichtig ist
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों पर आरोप-प्रत्यारोप के बीच कोलकाता की एक सरकारी इमारत में आग लगने से चार हज़ार ईवीएम और वीवीपैट जल गए.
Author, प्रभाकर मणि तिवारी
पदनाम, कोलकाता से बीबीसी हिन्दी के लिए
प्रकाशित 3 मिनट पहले
पढ़ने का समय: 7 मिनट
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर अभी थमा भी नहीं है कि कोलकाता की एक सरकारी इमारत में आग लगने से चार हज़ार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वीवीपैट जलकर राख़ हो गए.
इस घटना पर अब विवाद गहरा गया है.
पश्चिम बंगाल के दमकल और आपदा प्रबंधन मंत्री कौशिक चौधरी ने भी इस आग पर आश्चर्य जताया है.
सरकार ने इस अग्निकांड की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है. लेकिन इस मामले में अब तक कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं.
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने इस घटना पर सवाल करते हुए कहा, "क्या यह महज़ एक हादसा है या फिर लोकतंत्र के साथ छेड़छाड़ के बाद बेहद अहम सबूतों को गायब करने की सुनियोजित कोशिश?"
फ़िलहाल एसआईटी और फोरेंसिक विभाग की टीम इस घटना की जांच कर रही है.
कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि जांच पूरी होने के बाद ही आग के कारणों का पता चलेगा.
मामला क्या है?
बीते सप्ताह 10 जून की सुबह कोलकाता के अलीपुर इलाके में स्थित दक्षिण 24-परगना ज़िला परिषद की दस मंज़िला इमारत में भयावह आग में चार हज़ार ईवीएम और वीवीपैट जलकर राख़ हो गए थे.
यह उस इमारत की आठवीं और नौवीं मंज़िल पर बने चुनाव कार्यालय में रखे गए थे.
इस घटना के एक चश्मदीद ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया था, "आग सुबह क़रीब साढ़े नौ बजे शुरू हुई और देखते-देखते तीसरी मंज़िल तक पहुंच गई. इससे पूरी इमारत में धुआं भर गया और सरकारी दफ़्तरों में काम करने वाले लोगों में आतंक फैल गया और वो नीचे भागने लगे. कुछ देर बाद मौके पर पहुंचे फ़ायर ब्रिगेड के इंजनों ने भारी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया."
पश्चिम बंगाल के दमकल और आपदा प्रबंधन राज्य मंत्री कौशिक चौधरी ने गुरुवार को घटनास्थल का दौरा करने के बाद पत्रकारों से कहा था, "बीते चुनाव में मतदान के लिए दस विधानसभा क्षेत्रों में इन ईवीएम का इस्तेमाल किया गया था.''
उन्होंने इससे पहले आग लगने के तरीके़ पर संदेह जताया था.
मंत्री ने बताया था कि शुरुआती जांच से पता चला है कि आग सबसे पहले दूसरी और तीसरी मंज़िल पर दिखी थी. इसके बाद यह सातवीं, आठवीं, नौवीं और दसवीं मंज़िल तक पहुंच गई.
उन्होंने कहा था, ''चौथी, पांचवीं और छठी मंज़िल को ज़्यादा नुक़सान पहुंचाए बिना आग ऊपर कैसे पहुंच गई? इस बात की जांच की जा रही है कि इसके पीछे कहीं कोई साज़िश तो नहीं थी.''
कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "यह सामान्य आग नहीं नज़र आती. हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि यह कहीं तोड़-फोड़ (सेबोटेज) की कार्रवाई तो नहीं थी. सरकार किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही है.''
फोरेंसिक टीम ने भी गुरुवार और शुक्रवार को मौके का दौरा कर सबूत जुटाए.
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस घटना में साज़िश की आशंका को ख़ारिज नहीं किया जा सकता.
दक्षिण 24-परगना ज़िला प्रशासन की शिकायत पर इस मामले में अलीपुर थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है.
पुलिस आग की वजह तलाश रही है. अभी यह साफ नहीं है कि आग शॉर्ट-सर्किट से लगी या किसी और कारण से.
लेकिन पुलिस ने फ़िलहाल इस घटना पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी नाम नहीं छापने की शर्त पर बताते हैं, "जांच का काम पूरा नहीं होने तक कुछ कहना उचित नहीं होगा. प्राथमिक जांच के बाद आग की वजहों की जानकारी मिलने की संभावना है. उसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा."
इस बीच, कोलकाता पुलिस की ओर से गठित एसआईटी ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है. इस टीम में पुलिस के सहायक आयुक्त सुखेंदु मुखर्जी के अलावा ख़ुफ़िया विभाग के इंस्पेक्टर हीरक दलपति, इंस्पेक्टर अर्पण दास और सब-इंस्पेक्टर सुमन घोष शामिल हैं.
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं, "इस टीम को आग लगने की वजहों की विस्तृत जांच के साथ ही उससे होने वाले नुक़सान के आकलन का निर्देश दिया गया है.''
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि जिस इमारत में आग लगी वहां राज्य सरकार के भी कई दफ़्तर हैं.
तृणमूल कांग्रेस के गिरफ्तार नेता और फाल्टा सीट पर उम्मीदवार जहांगीर खान, जो ज़िला परिषद के अध्यक्ष थे, उनका दफ़्तर भी उसी इमारत में था.
फ़िलहाल दक्षिण 24-परगना ज़िला परिषद पर तृणमूल कांग्रेस का कब्ज़ा है.
सरकारी सूत्रों ने बीबीसी को बताया, "फ़िलहाल उस इमारत में स्थित बाकी सरकारी दफ़्तरों को होने वाले नुक़सान का भी आकलन किया जा रहा है."
घटना को लेकर विवाद बढ़ा
आग लगने की इस घटना पर विवाद बढ़ता जा रहा है. इसकी वजह यह है कि बीते अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में दस विधानसभा क्षेत्रों में इन ईवीएम का इस्तेमाल किया गया था.
तृणमूल कांग्रेस ने इस आग को रहस्यमयी करार दिया है. कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग से इस घटना पर जवाब मांगा है.
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले से ही चुनावी नतीजों पर सवाल उठाती रही हैं.
उनका आरोप है कि कम से कम डेढ़ सौ सीटों पर गड़बड़ी की गई है. अब ताज़ा घटना ने पार्टी को एक मज़बूत हथियार दे दिया है.
तृणमूल कांग्रेस ने एक्स पर अपनी एक पोस्ट में कहा है, "डायमंड हार्बर सबडिवीज़न के तहत कई सीटों के अलावा कस्बा, जादवपुर, बेहला पूर्व, बेहला पश्चिम, मटियाबुर्ज़ और सातगाछिया सीट पर मतदान में इस्तेमाल चार हज़ार कंट्रोल यूनिट्स, चार हजार बैलट यूनिट्स और चार हजार वीवीपैट आग में रहस्यमय तरीके से नष्ट हो गई हैं.''
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष सवाल करते हैं, "क्या यह महज़ एक हादसा है या फिर लोकतंत्र के साथ छेड़छाड़ के बाद बेहद अहम सबूतों को गायब करने की सुनियोजित कोशिश? आख़िर यह आग कैसे लगी?"
टीएमसी ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में भी यही सवाल उठाया है.
उसने एक्स पर अपनी पोस्ट में आग का वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि चुनाव आयोग हमेशा सवालों से बच नहीं सकता.
लेकिन पुलिस ने फ़िलहाल इस घटना पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी नाम नहीं छापने की शर्त पर बताते हैं, "जांच का काम पूरा नहीं होने तक कुछ कहना उचित नहीं होगा. प्राथमिक जांच के बाद आग की वजहों की जानकारी मिलने की संभावना है. उसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा."
इस बीच, कोलकाता पुलिस की ओर से गठित एसआईटी ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है.
इस टीम में पुलिस के सहायक आयुक्त सुखेंदु मुखर्जी के अलावा खुफ़िया विभाग के इंस्पेक्टर हीरक दलपति, इंस्पेक्टर अर्पण दास और सब-इंस्पेक्टर सुमन घोष शामिल हैं.
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं, "इस टीम को आग लगने की वजहों की विस्तृत जांच के साथ ही उससे होने वाले नुक़सान के आकलन का निर्देश दिया गया है.''
एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार तापस मुखर्जी कहते हैं, "इस मामले में तो खुद मंत्री ने साजिश की आशंका जताई है. ऐसे में अब देखना होगा कि फ़ोरेंसिक और एसआईटी की जांच में असली वजह सामने आती है या यह लीपापोती की कवायद ही साबित होगी."
Worauf zu achten ist
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एसआईटी और फोरेंसिक जांच से आग के कारणों का खुलासा होगा.
Wahrscheinlich · Innerhalb von Wochen
तृणमूल कांग्रेस इस घटना का इस्तेमाल चुनावी धांधली के आरोपों को बल देने के लिए करेगी.
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Offene Fragen
- आग कैसे लगी?
- क्या यह हादसा था या साजिश?
- सबूत मिटाने की कोशिश थी?
