लंबे समय तक बैठे रहने से सावधान, हर घंटे 5 मिनट का वॉक ब्रेक ज़रूरी
Auf einen Blick
नई स्टडी के अनुसार, हर घंटे 5 मिनट का वॉक ब्रेक लेने से मूड बेहतर होता है, थकान कम होती है और काम पर फ़ोकस बढ़ता है। यह लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने का आसान तरीका है।
KI-generierte Zusammenfassung
Warum es wichtig ist
लंबे समय तक बैठे रहने से मोटापा, दिल की बीमारी और टाइप 2 डायबिटीज़ का ख़तरा बढ़ सकता है। काम के दौरान मूवमेंट बनाए रखने के लिए वॉक ब्रेक लेना ज़रूरी है।
लंबे समय तक बैठे रहते हैं तो हो जाएं सावधान, इतने मिनट का वॉक ब्रेक लेना ज़रूरी
Author, मिशेल रॉबर्ट्स
पदनाम, डिजिटल हेल्थ एडिटर
प्रकाशित 9 घंटे पहले
पढ़ने का समय: 4 मिनट
ईमेल का जवाब देना हो या वीडियो कॉल अटेंड करना हो, दफ़्तर में पूरा दिन कुर्सी पर बैठे-बैठे ही बीत जाता है.
लेकिन यह आदत हमारी सेहत को नुक़सान पहुँचा रही है. विशेषज्ञ कहते हैं कि लंबे समय तक बैठे रहने से मोटापा, दिल की बीमारी और टाइप 2 डायबिटीज़ का ख़तरा बढ़ सकता है.
यह बात तो सभी जानते हैं कि स्क्रीन से ब्रेक लेना अच्छा है. लेकिन यह साफ़ नहीं है कि काम करते हुए कितनी बार वॉक ब्रेक लेना ज़रूरी है, ताकि शरीर का मूवमेंट बना रहे.
ब्रिटिश जर्नल ऑफ़ स्पोर्ट्स मेडिसिन में छपी एक नई स्टडी में पाया गया है कि हर घंटे पाँच मिनट का वॉक ब्रेक लेना चाहिए. इसे 'मूवमेंट स्नैक' कहा गया है.
दफ़्तर में दिन बिताने वाले लोगों के लिए सेहत ठीक रखने का यह सबसे अच्छा और आसान तरीका है. इससे काम भी प्रभावित नहीं होता है.
'हर घंटे पांच मिनट की वॉक से मूड बेहतर होता है'
लीड रिसर्चर कीथ डियाज़ ने बीबीसी न्यूज़ को बताया कि अब ज़्यादातर लोग नींद से उठने के बाद पूरे दिन का तीन-चौथाई हिस्सा बैठे-बैठे गुज़ारते हैं.
उन्होंने 'कम बैठो और ज़्यादा चलो' वाली सलाह को सही बताया.
डियाज़ ने कहा, "अच्छी ख़बर यह है कि हर घंटे पाँच मिनट की वॉक से मूड बेहतर होता है और थकान कम होती है. लोगों को यह सलाह आसान और रोज़मर्रा के जीवन में अपनाने लायक लगी."
आठ से नौ घंटे की शिफ़्ट करने वालों पर हुई रिसर्च
कोलंबिया यूनिवर्सिटी की इस स्टडी में अमेरिका के 11,000 से ज़्यादा कर्मचारियों को शामिल किया गया. इनमें ज़्यादातर दफ़्तर में काम करने वाले लोग थे, जो आठ से नौ घंटे की शिफ़्ट करते हैं.
पहले हफ़्ते उन्होंने अपनी सामान्य दिनचर्या जारी रखी. उन्होंने रोज़ाना थकान, मूड और कामकाज पर सर्वे भरे.
अगले दो हफ़्तों में उनसे कहा गया कि वे काम के दौरान हर आधे घंटे, एक घंटे या दो घंटे में पाँच मिनट का वॉक ब्रेक लें. इसके बाद सर्वे भरें.
हर आधे घंटे की वॉक से मूड में सुधार हुआ और थकान कम हुई, लेकिन काम में रुकावट आई. हर दो घंटे में चलना, बिल्कुल भी न चलने से बेहतर है.
लेकिन रिसर्चर्स ने पाया कि हर घंटे पाँच मिनट की वॉक से कामकाज, मूड और फ़ोकस में बड़ा सुधार हुआ.
'वॉक करने का मतलब काम को रोकना नहीं'
रिसर्चर कीथ डियाज़ ने कहा कि लंबे समय तक बैठने की आदत से छुटकारा पाना कठिन है. स्टडी में सामने आया कि कई कर्मचारियों को चिंता थी कि उनके बॉस या सहकर्मी उनके ब्रेक लेने की आदत को कैसे देखेंगे.
डियाज़ ने कहा, "भले ही यह उल्टा लगे, लेकिन मूवमेंट ब्रेक वास्तव में कामकाज को बेहतर बना सकते हैं. ब्रेक लेने से फ़ोकस, मेमोरी और सोचने की क्षमता में सुधार होता है. लोग फ़्रेश और रिलैक्स महसूस करते हैं."
उन्होंने बताया कि वॉक करना कम ख़र्चीला है और इसका मतलब काम रोकना नहीं है. चाहें तो मीटिंग करते हुए वॉक कर सकते हैं या फ़ोन कॉल के दौरान टहल सकते हैं. आप दफ़्तर में या बाहर भी वॉक कर सकते हैं.
ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन की सीनियर कार्डियक नर्स एमिली मैक्ग्राथ ने इस रिसर्च की सराहना की. उन्होंने कहा, "शरीर के छोटे-छोटे मूवमेंट से सेहत बेहतर हो सकती है."
हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी, "यह स्टडी कम समय में की गई थी और इसमें लोगों ने अपने अनुभवों के बारे में बताया. इसलिए हार्ट हेल्थ पर इसका असर जानने के लिए लंबी रिसर्च करनी पड़ेगी."
Offene Fragen
- हार्ट हेल्थ पर लंबे समय तक असर क्या होगा?
- बॉस/सहकर्मी ब्रेक को कैसे देखेंगे?
