ममता बनर्जी का आरोप: बीजेपी के दबाव में निजी अस्पताल ने अभिषेक बनर्जी को भर्ती करने से इनकार किया
Auf einen Blick
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि बीजेपी के दबाव में एक निजी अस्पताल ने उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को भर्ती करने से इनकार कर दिया। अभिषेक पर चुनाव बाद हिंसा में मारे गए कार्यकर्ता के परिवार से मिलने के दौरान हमला हुआ था।
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Warum es wichtig ist
पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा के बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमला हुआ। इस घटना के बाद ममता बनर्जी ने बीजेपी पर अस्पतालों पर दबाव डालने का आरोप लगाया।
प्रकाशित 31 मई 2026
पढ़ने का समय: 8 मिनट
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि उनके भतीजे और पार्टी के सांसद अभिषेक बनर्जी को भर्ती न करने करने के लिए एक निजी अस्पताल पर दबाव डाला गया.
अभिषेक बनर्जी शनिवार को दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में चुनाव बाद हुई हिंसा में मारे गए पार्टी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने गए थे तभी उन पर पथराव हुआ था.
भारी हंगामे के बीच किसी तरह सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें सुरक्षित बचाया. अभिषेक ने खुद पर जानलेवा हमले का आरोप लगाते हुए इसके पीछे बीजेपी को ज़िम्मेदार ठहराया था. हालांकि बीजेपी नेताओं ने घटना की निंदा की है.
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अभिषेक बनर्जी को कोलकाता के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां पर उनसे मिलने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी पहुंची थीं.
इसके बाद अभिषेक बनर्जी को अपोलो अस्पताल से शिफ़्ट करके बेले व्यू अस्पताल में भर्ती कराया गया.
लेकिन अस्पताल के सीईओ के साथ ममता बनर्जी के विवाद का एक कथित वीडियो क्लिप वायरल हो गया. इस कथित वीडियो को बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता देबजीत सरकार ने एक्स पर साझा किया है.
इसमें कथित तौर पर अस्पताल के कर्मचारियों से ममता बनर्जी बहस करते हुए दिखाई देती हैं.
देबजीत सरकार ने उसी पोस्ट में लिखा, "अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ममता बनर्जी को अपने व्यवहार पर शर्म आनी चाहिए. क्या यह अभिषेक बनर्जी को सीआईडी के समन से बचाने की कोशिश है? जिन मरीज़ों को सच में इलाज की ज़रूरत है, उन्हें राजनीतिक दबाव की वजह से परेशान नहीं होना चाहिए. क़ानून से ऊपर कोई नहीं है."
उन्होंने यह भी दावा किया कि मेडिकल रिपोर्टों में अभिषेक को कोई गंभीर चोट न लगने की बात कही गई है और ममता पर अस्पताल के सीईओ को धमकाने का आरोप लगाया.
इस वीडियो क्लिप में ममता बनर्जी कथित रूप से अस्पताल के सीईओ से कहते सुनाई दे रही हैं, "सॉरी... आपने ग़लत काम किया है. कृपया याद रखिए कि हमने आपकी कितनी मदद की है. भगवान आपको माफ़ नहीं करेंगे."
"आपने कभी किसी मरीज़ का इलाज नहीं किया, आपको शर्म आनी चाहिए. हर कोई इस घमंड को याद रखेगा... आप अस्पताल चला रहे हैं, डॉक्टरों को धमका रहे हैं क्योंकि बीजेपी सत्ता में है."
शनिवार रात एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार "सभी अस्पतालों को अभिषेक बनर्जी को भर्ती न करने की धमकी दे रही है."
उन्होंने कहा, "दोनों अस्पतालों ने उनकी चोटों की गंभीरता का ज़िक्र किया. उन्हें आईटीयू (इंटेंसिव थेरेपी यूनिट) में भर्ती किया गया था."
उन्होंने यह भी दावा किया कि निजी अस्पताल के सीईओ ने उनसे कहा था कि उन्हें पुलिस और बीजेपी नेताओं की ओर से 'धमकी भरे फ़ोन' आ रहे थे, जिनमें कथित तौर पर अभिषेक को भर्ती न करने की चेतावनी दी जा रही थी.
ममता बनर्जी ने कहा, ''स्वतंत्र डॉक्टरों की रिपोर्ट में कहा गया है कि अभिषेक की छाती में खून जम गया है. उनकी पूरी देह में चकत्ते पड़ गए हैं. ये हमारी नहीं डॉक्टरों की रिपोर्ट में कहा गया है. जिस तरह से उन पर पत्थर फेंके गए थे, उससे उनकी मौके पर ही मौत हो सकती थी. उन्हें स्थानीय लड़कों ने हेलमेट नहीं दिया होता तो सिर में चोट लगने से उनकी वहीं मौत जाती.''
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ ब्रायन ने पत्रकारों के सामने डॉक्टर की रिपोर्ट को पढ़ कर सुनाया, जिसमें अभिषेक के चेहरे पर ज़ोर से चोट लगने, गले के आसपास और पीठ पर ज़ख़्म के निशान की बात कही गई है.
कल्याण बनर्जी पर हमले का दावा
अभिषेक बनर्जी पर हमले के एक दिन बाद रविवार को टीएमसी के एक और सांसद कल्याण बनर्जी पर भी कथित तौर पर भीड़ ने हमला किया.
वो अपने ही संसदीय क्षेत्र हुगली के चांदिताला क्षेत्र में गए थे. घटना के समय के वीडियो में दिख रहा है कि पुलिस भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है और कल्याण बनर्जी सिर को पकड़े हुए ज़मीन पर लेट गए.
उन्होंने दावा किया कि उनके सिर पर चोट आई है.
जब वो जा रहे थे तो कुछ लोग उन्हें काला झंडा दिखा रहे थे और नारेबाज़ी कर रहे थे.
इस घटना के बाद वो सड़क पर ही अपने समर्थकों के साथ रुके रहे. बाद में ममता बनर्जी उनसे मिलने उनके आवास पर गईं.
ममता बनर्जी ने कहा, "कल (शनिवार) बीजेपी समर्थकों ने टीएमसी के लोकसभा में फ़्लोर लीडर अभिषेक बनर्जी पर बेरहमी से हमला किया और उनकी लिंचिंग की. इस भयावह घटना के वीडियो सार्वजनिक रूप से मौजूद हैं."
"आज लोकसभा में हमारे चीफ़ व्हिप कल्याण बनर्जी पर भी बीजेपी का एक सुनियोजित हमला हुआ."
ममता बनर्जी ने कहा, "बीजेपी लोकतंत्र की हत्या कर रही है."
शनिवार को क्या हुआ था?
शनिवार को जब अभिषेक बनर्जी टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने सोनारपुर गए, तो उन्हें आक्रामक प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा.
इस दौरान कुछ लोगों ने उन पर हमला किया. कार्यकर्ता के घर तक जाने वाली सड़क संकरी होने के कारण उनका वाहन वहाँ नहीं पहुँच सका, इसलिए उन्होंने मोटरसाइकिल का सहारा लिया.
इसी दौरान स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर सांसद को मोटरसाइकिल से नीचे खींच लिया और उन पर पत्थर और अंडे फेंके.
सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें बचाया. इसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया, फिर दूसरे निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया.
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, रात लगभग 11 बजे अभिषेक बनर्जी को अस्पताल से छुट्टी मिल गई.
तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस घटना की साज़िश बीजेपी ने रची थी. वहीं बीजेपी ने कहा कि सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें बचाया और हेलमेट दिया.
रविवार को पुलिस ने बताया कि इस घटना के सिलसिले में पाँच लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और दो लोगों को हिरासत में लिया गया है.
हमले के बाद अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा
अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को लेकर इंडिया गठबंधन के दलों ने टीएमसी सांसद के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए, हमले की निंदा की. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, झामुमो के नेता और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव समेत कई नेताओं ने बयान जारी किए.
अभिषेक बनर्जी ने सभी का धन्यवाद दिया और राहुल गांधी के बयान को साझा करते हुए एक्स पर लिखा, "सत्ता अस्थायी होती है. जनता की इच्छा स्थायी होती है. मैं केवल जनता के सामने झुकूँगा, सत्ता में बैठे लोगों के सामने कभी नहीं."
"हम उन लोगों के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे जो लोकतंत्र को कमज़ोर करना चाहते हैं और देश को बाँटना चाहते हैं, इंडिया एकजुट है और हम मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि डर, नफ़रत, हिंसा और धमकी की राजनीति पराजित हो, और जनता की आवाज़ की जीत हो."
उन्होंने लिखा, "पिछले साल मैं ऑपरेशन सिंदूर के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के तौर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पांच देशों की यात्रा पर गया था. मैंने अपने देश का पक्ष रखा और आतंकवाद के ख़िलाफ़ एकजुट होकर खड़ा रहा."
"आज मैं राजनीतिक हिंसा और राज्य प्रायोजित आतंकवाद का शिकार हूं, जिसे उन लोगों ने बढ़ावा दिया है जो ख़ुद को राष्ट्रवाद का संरक्षक बताते हैं."
उन्होंने कहा, "आज की बीजेपी की हक़ीक़त यही है. अगर आप उनका समर्थन करते हैं, तो आप देशभक्त हैं. अगर आप उनसे सवाल करते हैं, तो आप निशाने पर आ जाते हैं. अगर आप उनके साथ खड़े हैं, तो आपकी सराहना होती है. अगर आप उनके ख़िलाफ़ खड़े होते हैं, तो वे आपको चुप कराने की कोशिश करते हैं."
बीजेपी ने क्या कहा
एएनआई से शनिवार को उन्होंने कहा, "मैं लोगों से अपील करता हूं कि वो क़ानून को अपने हाथों में न लें. बंगाल की जनता में टीएमसी और अभिषेक बनर्जी के ख़िलाफ़ आक्रोश है. हमें बंगाल में सुधार लाने की ज़रूरत है."
चुनाव से पहले टीएमसी से अलग होकर अपनी नई पार्टी बनाने वाले हुमायूं कबीर ने कहा, "टीएमसी अब सत्ता में नहीं है, इसलिए लोग जवाब दे रहे हैं और विरोध कर रहे हैं. यह टीएमसी सरकार की वजह से लोगों को हुई तकलीफ़ और परेशानियों की प्रतिक्रिया है."
Offene Fragen
- क्या बीजेपी ने वास्तव में अस्पतालों पर दबाव डाला?
- क्या कल्याण बनर्जी पर हमला सुनियोजित था?
- क्या अभिषेक बनर्जी को लगी चोटें गंभीर थीं?
- क्या अस्पताल के सीईओ को धमकी मिली थी?

