Eilmeldung
TRGazze'de Topçu ve Hava Saldırısı: Filistinliler YaralandıESTres personas fallecidas en tiroteo en Isla Cristina (Huelva)ITLe Borse europee aprono in moderato rialzo nonostante le tensioni in Medio OrienteTRFilipinlerde Tropikal Sikyon ve Muson Yağmurlarından Kaçanların Sayısı ArttıITIran: aumento produzione missili e droni dopo l'accordo con gli Stati UnitiRUTrump Envoys to Bring Concrete Ukraine Crisis Proposals to MoscowTRHomeros'un Odysseia'sını Yazdığı İddialı Mağara: Tarihsel Gerçeklik mi, Sözlü Geleneğin Yansıması mı?CN路易威登2027春夏男裝系列:衝浪文化遇見都市正裝TRTarık Biberovic: 'Red Bull Sporcusu Olarak NBA'de Türkiye'yi Temsil Edeceğim'KR국정원 1차장 출신 친명 초선 박선원 의원 프로필 및 이력TRGazze'de Topçu ve Hava Saldırısı: Filistinliler YaralandıESTres personas fallecidas en tiroteo en Isla Cristina (Huelva)ITLe Borse europee aprono in moderato rialzo nonostante le tensioni in Medio OrienteTRFilipinlerde Tropikal Sikyon ve Muson Yağmurlarından Kaçanların Sayısı ArttıITIran: aumento produzione missili e droni dopo l'accordo con gli Stati UnitiRUTrump Envoys to Bring Concrete Ukraine Crisis Proposals to MoscowTRHomeros'un Odysseia'sını Yazdığı İddialı Mağara: Tarihsel Gerçeklik mi, Sözlü Geleneğin Yansıması mı?CN路易威登2027春夏男裝系列:衝浪文化遇見都市正裝TRTarık Biberovic: 'Red Bull Sporcusu Olarak NBA'de Türkiye'yi Temsil Edeceğim'KR국정원 1차장 출신 친명 초선 박선원 의원 프로필 및 이력
Newsgather
Zurückपाकिस्तान नौसेना में 'हैंगोर' पनडुब्बी का आगमन: एक नए युग की शुरुआत
पाकिस्तान नौसेना में 'हैंगोर' पनडुब्बी का आगमन: एक नए युग की शुरुआत
In Entwicklung
BBC हिंदी15.6.2026Defense7 Min. LesezeitIndia

पाकिस्तान नौसेना में 'हैंगोर' पनडुब्बी का आगमन: एक नए युग की शुरुआत

Auf einen Blick

पाकिस्तान नौसेना की पहली हैंगोर श्रेणी की पनडुब्बी कराची बंदरगाह पर पहुंच गई है। यह पनडुब्बी उन्नत युद्ध प्रणालियों, नए सेंसर और एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) तकनीक से लैस है। यह पाकिस्तान की नौसैनिक रक्षा परियोजनाओं का हिस्सा है।

KI-generierte Zusammenfassung

Schriftgröße

Author, मुन्ज़ा अनवर

पदनाम, बीबीसी उर्दू, इस्लामाबाद

प्रकाशित 2 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 9 मिनट

पाकिस्तान नौसेना की पहली हैंगोर श्रेणी की पनडुब्बी कराची बंदरगाह पर पहुंच गई है, लेकिन यह केवल एक नई पनडुब्बी का आगमन नहीं है, बल्कि एक ऐसे नाम की वापसी भी है जो पाकिस्तान के नौसैनिक इतिहास का हिस्सा है.

'हैंगोर' एक प्रकार की समुद्री शार्क है जो चुपचाप अपने शिकार का पीछा करती है, सही अवसर का इंतज़ार करती है और फिर अचानक हमला करती है.

1971 में पाकिस्तानी नौसेना की पनडुब्बी 'हैंगोर' और भारतीय युद्धपोत 'आईएनएस खुखरी' के बीच समुद्र में हुई आमने-सामने की मुठभेड़ एक प्रसिद्ध कहानी है. उस जंग के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.

अब, लगभग 55 साल बाद, उसी नाम की एक 'नई और आधुनिक' पनडुब्बी पाकिस्तान के पनडुब्बी बेड़े में शामिल हो गई है.

पाकिस्तान नौसेना के अनुसार, पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा सहयोग के तहत विकसित 'पीएनएसएम हैंगोर' उन्नत युद्ध प्रणालियों, नए सेंसर, एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) तकनीक और बेहतर स्टील्थ विशेषताओं से लैस है.

यह पनडुब्बी पाकिस्तान की सबसे बड़ी नौसैनिक रक्षा परियोजनाओं में से एक का हिस्सा है, जिसके तहत आने वाले सालों में पाकिस्तानी नौसेना के बेड़े में कुल आठ पनडुब्बियां शामिल की जाएंगी.

लेकिन सवाल यह है कि हैंगोर श्रेणी की पनडुब्बियों में ऐसी क्या ख़ास बात है और पाकिस्तान को इनकी ज़रूरत क्यों पड़ी?

बीबीसी उर्दू ने इस संबंध में विशेषज्ञों से बात की है -

छोड़कर सबसे अधिक पढ़ी गईं आगे बढ़ें

सबसे अधिक पढ़ी गईं

समाप्त

पाकिस्तान नौसेना में पनडुब्बियों का सफ़र

विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तानी नौसेना की पनडुब्बी सेवा की नींव 1960 के दशक में अमेरिका से मिली टेन्च श्रेणी की पनडुब्बियों पर रखी गई थी.

बाद में, फ़्रांस से डैफनी श्रेणी और अगस्ता श्रेणी की पनडुब्बियां ख़रीदी गईं.

अगस्ता कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान में दो पनडुब्बियों का निर्माण किया गया था. पाकिस्तानी नौसेना के अनुसार, यह अनुभव बाद में हैंगोर श्रेणी के कार्यक्रम का आधार बना.

इस परियोजना की आधारशिला अप्रैल 2015 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस्लामाबाद यात्रा के दौरान रखी गई थी.

अप्रैल 2015 में शी ने आठ हैंगोर श्रेणी की पनडुब्बियों के निर्माण के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए.

इस परियोजना के तहत, चार पनडुब्बियों का निर्माण चीन में किया जा रहा है, जबकि चार का निर्माण कराची में किया जा रहा है.

हैंगोर क्लास में नया क्या है?

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें

दिनभर: पूरा दिन,पूरी ख़बर (Dinbhar)

वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.

एपिसोड

समाप्त

हैंगोर का डिज़ाइन चीन की आधुनिक 039बी युआन श्रेणी की पनडुब्बी पर आधारित है.

ये पनडुब्बियां उन्नत रडार, सोनार, इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट सिस्टम और ऑप्ट्रोनिक स्कोप से लैस हैं, जो सतह और पानी के भीतर बेहतर निगरानी कर सकती हैं.

हथियारों के मामले में, हैंगोर श्रेणी की पनडुब्बियां भारी वजन वाले टॉरपीडो और जहाज़-रोधी क्रूज मिसाइलों का उपयोग करने में सक्षम हैं.

पाकिस्तान नौसेना के अनुसार, 'हैंगोर श्रेणी की पनडुब्बियों की भूमिका केवल हथियारों के उपयोग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक उद्देश्य की पूर्ति में भी सहायक है.'

ये पनडुब्बियां मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण कार्य करती हैं:

समुद्री मार्गों को दुश्मन के लिए असुरक्षित बनाना,

दुश्मन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों का पता लगाना

ख़ुफिया जानकारी जुटाना.

इसी कारण पनडुब्बी को अहम रणनीतिक हथियार माना जाता है. इस पनडुब्बी की सबसे अहम बात एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) सिस्टम है.

पारंपरिक डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को अपनी बैटरियों को रिचार्ज करने के लिए समय-समय पर सतह पर आना पड़ता है, लेकिन एआईपी पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकती हैं.

इस ख़ासियत के कारण ये पनडुब्बियां लंबे समय तक चुपचाप अपने मिशन को अंजाम दे सकती हैं.

लेकिन इसकी असली ताकत सिर्फ एआईपी या ख़ामोशी में नहीं, बल्कि दोनों के मेल में है. यानी, हैंगोर श्रेणी की पनडुब्बी दुश्मन की नज़रों से दूर, लंबे समय तक समुद्र में रह सकती है. 'छिपकर रहने और लंबे समय तक टिके रहने' की यह खूबी इसे असल में ज़्यादा असरदार बनाती है.

'सबसे बड़ा अंतर एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम है'

1971 की जंग में पाकिस्तान नौसेना के रिटायर्ड वाइस एडमिरल अहमद तसनीम देश की पहली पनडुब्बी 'ग़ाज़ी' पर तैनात थे.

बीबीसी उर्दू से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा अंतर एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम है, जो पनडुब्बी को लंबे समय तक छिपे रहने की अनुमति देता है, और यही इसका असली फ़ायदा है.

अहमद तसनीम के अनुसार, उनके समय में पनडुब्बियों को बैटरी चार्ज करने के लिए अक्सर सतह के करीब आना पड़ता था, जबकि नई हैंगोर श्रेणी की पनडुब्बियों को ऐसा बहुत कम करना पड़ता है.

उन्होंने कहा, "पहले हम टॉरपीडो और बाद में हार्पून मिसाइलों का इस्तेमाल करते थे. अब हमारे पास अधिक आधुनिक और लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार हैं. इनके वारहेड अलग हैं. सेंसर बेहतर हैं. शोर कम होता है. और कुल मिलाकर यह एक बेहतर और अधिक प्रभावी पनडुब्बी है."

पाकिस्तानी नेवी के रिटायर्ड कमोडोर सैयद मोहम्मद ओबैदुल्ला एआईपी प्रणाली के बारे में कहते हैं, "यह हमारी मौजूदा और नई पनडुब्बियों की परिचालन क्षमता को काफ़ी बढ़ाएगी."

उनके अनुसार, पाकिस्तानी नौसेना की कुछ पनडुब्बियों में पहले से ही एआईपी प्रणाली मौजूद है.

आठ नई पनडुब्बियों की ज़रूरत क्यों थी?

नई पनडुब्बियों की ज़रूरत क्यों पड़ी? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए अहमद तसनीम कहते हैं, "मूल रूप से, ये नई पनडुब्बियां पुरानी पनडुब्बियों की जगह लेंगी."

उनके अनुसार, पुरानी पनडुब्बियां लगभग 35 साल पुरानी हैं और 1960 और 1970 के दशकों की पनडुब्बियां अपना परिचालन जीवन पूरा कर चुकी थीं, इसलिए उन्हें बदलना ज़रूरी हो गया है.

वह कहते हैं, "यह सिर्फ एक रिप्लेसमेंट है, किसी के साथ कोई होड़ नहीं है."

इस बारे में सैयद मोहम्मद ओबैदुल्ला कहते हैं, "दुनिया भर की नौसेनाएं भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए लगातार खुद को अपडेट कर रही हैं."

उन्होंने कहा, "हम मुख्य रूप से डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों का संचालन करते रहे, पहले डैफनी श्रेणी की, फिर अगोस्टा श्रेणी की. अब हमें भविष्य के खतरों से निपटने के लिए नवीनतम तकनीक की आवश्यकता थी. इसीलिए यह कदम उठाया गया. हर नौसेना बेहतर और अधिक आधुनिक उपकरण चाहती है."

रिटायर्ड वाइस एडमिरल अहमद तसनीम कहते हैं, "भारतीय पनडुब्बियां भी हमारे लिए एक चुनौती हैं. उनके पास परमाणु पनडुब्बियां भी हैं, जो तेज तो हैं लेकिन शोर मचाती हैं. उनके पास अच्छे हथियार हैं, लेकिन उनमें भी कुछ कमियां हैं."

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान में भी समस्याएं हैं, लेकिन हमारी प्रेरणा और अनुभव बहुत मज़बूत हैं."

सैयद मोहम्मद ओबैदुल्ला का दावा है कि भारत के पास 20 पनडुब्बियां हैं, लेकिन उनमें एआईपी सिस्टम नहीं है.

ये पनडुब्बियां कितनी महत्वपूर्ण हैं?

हिंद महासागर में चीन, भारत और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के बीच बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों के कारण पनडुब्बियों का महत्व बढ़ रहा है.

पाकिस्तान नौसेना के पूर्व अधिकारियों ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि पाकिस्तान की नौसैनिक रणनीति मुख्य रूप से रक्षात्मक है और इसका उद्देश्य किसी भी क्षेत्र पर कब्ज़ा करना नहीं है, बल्कि दुश्मन को हमला करने से रोकना है.

कमोडोर सैयद मोहम्मद ओबैदुल्लाह (रिटायर्ड) इसे 'एरिया डिनायल' (इलाक़े में घुसने से रोकने की) रणनीति कहते हैं. इसका मतलब है कि हम दुश्मन को उस जगह तक आने से रोकना चाहते हैं, जहां से वह ख़तरा पैदा कर सके.

"अगर दुश्मन करीब नहीं आ सकता, तो वह ख़तरा नहीं बन सकता, और यही हमारी रणनीति है."

हालांकि, रक्षा विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि आठ नई एआईपी पनडुब्बियों के शामिल होने से पाकिस्तान की पानी के नीचे युद्ध क्षमताओं, गुप्त अभियानों और समुद्री संचार मार्गों की रक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.

पाकिस्तान-चीन रक्षा सहयोग

पूर्व सैनिक और सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल अहमद तसनीम कहते हैं, "हमें ऐसे देश के साथ सहयोग करना चाहिए जो मुश्किल समय में हमारा साथ न छोड़े. चीन हमारा भरोसेमंद दोस्त है. हमने अतीत में प्रतिबंधों का सामना किया है, इसलिए पुर्जों और रसद के लिए चीन पर निर्भर रहना महत्वपूर्ण है."

वह बताते हैं कि ग़ाज़ी पनडुब्बी 1964 में आई थी और 1965 के युद्ध के दौरान उस पर प्रतिबंध और हथियार निषेध लागू थे. "तो फिर ऐसी पनडुब्बी का क्या फायदा, जिसके पुर्जों पर ही प्रतिबंध हो? इससे हमें यह सीख मिलती है कि एक भरोसेमंद सहयोगी कितना ज़रूरी है."

वाइस एडमिरल अहमद तसनीम (सेवानिवृत्त) के अनुसार, ग़ाज़ी जहाज़ को मरम्मत के लिए केप ऑफ़ गुड होप होते हुए तुर्की ले जाना पड़ा क्योंकि युद्ध के बाद उसमें कुछ मरम्मत की आवश्यकता थी और हमें लंबा रास्ता तय करना पड़ा. स्वेज नहर बंद थी, इसलिए हमें केप ऑफ़ गुड होप से घूमकर तुर्की जाना पड़ा.

पाकिस्तान नौसेना के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत डिज़ाइन, निर्माण, हथियार एकीकरण, गुणवत्ता आश्वासन और इंजीनियर प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता का हस्तांतरण किया जा रहा है.

इसीलिए हैंगोर श्रेणी की पनडुब्बी को न केवल एक नई पनडुब्बी, बल्कि पाकिस्तान के समुद्री उद्योग के लिए एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में भी देखा जा रहा है.

पचास साल पहले, हैंगोर पनडुब्बी पाकिस्तान के लिए एक सैन्य उपलब्धि की प्रतीक थी. आज, उसी नाम की एक नई पनडुब्बी पाकिस्तानी नौसेना में शामिल हो रही है.

Verwandte Themen

This article was originally published by BBC हिंदी.

Ähnliche Meldungen