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कुछ लोगों को मच्छर ज़्यादा क्यों काटते हैं?
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कुछ लोगों को मच्छर ज़्यादा क्यों काटते हैं?

Auf einen Blick

मच्छरों के कुछ लोगों को ज़्यादा काटने के पीछे तीन मुख्य कारण हैं: कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन, शरीर की गर्मी और गंध। ये संकेत मच्छरों को शिकार पहचानने में मदद करते हैं।

KI-generierte Zusammenfassung

Warum es wichtig ist

कुछ लोगों को मच्छर ज़्यादा काटते हैं क्योंकि उनके शरीर से निकलने वाले जैविक संकेत, जैसे सांस और शरीर की गंध, मच्छरों को ज़्यादा आकर्षित करते हैं।

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कुछ लोगों को मच्छर ज़्यादा क्यों काटते हैं?

Author, लाइक कैथरीन

पदनाम, बीबीसी

प्रकाशित 3 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 8 मिनट

मैं मच्छरों को जैसे चुंबक की तरह अपनी ओर खींचती हूँ. गर्मियों की छुट्टियों में मैं दुनिया के किसी भी कोने में चली जाऊँ, एक बात लगभग तय रहती है कि मच्छर मुझे ज़रूर काटेंगे.

उनके काटने से मेरी त्वचा पर खुजली वाले बड़े-बड़े निशान पड़ जाते हैं, जो कई हफ़्तों तक बने रहते हैं.

वहीं, मेरे साथ रहने वाले दो और लोगों के ऊपर मच्छरों का कोई ख़ास असर नहीं दिखता. उन्हें शायद ही कोई मच्छर काटता हो. और अगर काट भी ले, तो सिर्फ़ एक छोटा-सा लाल निशान बनता है, जो जल्दी ग़ायब हो जाता है.

मेरे दोस्त अक्सर मज़ाक में कहते हैं कि मेरा खून "बहुत मीठा" है, इसलिए मच्छर मुझे ज़्यादा काटते हैं. दिलचस्प बात यह है कि इस बात में थोड़ी सच्चाई हो सकती है.

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असल में, हमारे शरीर से कई तरह के जैविक संकेत निकलते हैं, जैसे हमारी सांस और शरीर की गंध. यही संकेत तय करते हैं कि मच्छर किस व्यक्ति की ओर ज़्यादा आकर्षित होंगे. कुछ लोगों में ये संकेत इतने मजबूत होते हैं कि मच्छर उनकी तरफ़ खुद-ब-खुद खिंचे चले आते हैं.

आइए वे तीन प्रमुख कारण समझते हैं जिनके चलते ये खून चूसने वाले कीट हमें ढूंढ़ लेते हैं.

ऐसे पता चलता है कि शिकार आस-पास है

सिर्फ़ मादा मच्छर ही इंसानों को काटते हैं. ये हमारे खून से इसलिए आकर्षित होती हैं क्योंकि इससे उन्हें प्रोटीन मिलता है जो अंडे विकसित करने में मददगार है.

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मच्छर लगभग 10 मीटर (33 फ़ुट) की दूरी से ही अपने शिकार को पहचान सकते हैं. वे अपनी देखने और सूंघने की क्षमता की मदद से ऐसा करते हैं.

लक्ष्य पहचानने में वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) के वे कण भी भूमिका निभाते हैं जो हम अपनी सांस और त्वचा के माध्यम से बाहर छोड़ते हैं.

इंसान की सांस में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड मच्छरों को यह संकेत देती है कि आसपास कोई संभावित शिकार मौजूद है. यह संकेत मिलते ही मच्छरों के शिकार खोजने की प्रक्रिया सक्रिय हो जाती है और वे उस व्यक्ति की ओर बढ़ने लगते हैं.

वयस्कों को बच्चों की तुलना में मच्छर अधिक काटते हैं, क्योंकि वे हवा में ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं.

यही कारण है कि मच्छर सिर्फ़ इंसानों की ओर ही आकर्षित नहीं होते, बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड के अन्य स्रोतों की ओर भी खिंचे चले आते हैं.

यही वजह है कि मच्छरों को फंसाने वाले जालों में ड्राइ आइस और बोतलों में भरी कार्बन डाइऑक्साइड का भी इस्तेमाल किया जाता है.

शरीर की गर्मी से भी मच्छर होते हैं आकर्षित

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शोध बताते हैं कि मच्छर किसी शरीर की गर्मी और नमी की ओर भी खिंचे चले आते हैं. कार्बन डाइऑक्साइड के कारण पैदा होने वाली गर्मी और नमी इस आकर्षण को और बढ़ा देती है.

इसी वजह से गर्भवती महिलाओं को अन्य महिलाओं की तुलना में लगभग दोगुना अधिक मच्छर काट सकते हैं.

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान शरीर का मेटाबॉलिज्म और सांस लेने की गति बढ़ जाती है. इससे शरीर ज़्यादा गर्मी पैदा करता है और अधिक कार्बन डाइऑक्साइड बाहर छोड़ता है.

ब्रिटेन की डरहम यूनिवर्सिटी में सार्वजनिक स्वास्थ्य कीट-विज्ञान के प्रोफेसर स्टीव लिंडसे कहते हैं, "आपके शरीर के अंदर एक छोटी भट्ठी की तरह काम चल रहा होता है, इसलिए वह ज़्यादा गर्म हो जाता है."

जो लोग व्यायाम या कसरत करते हैं, वे भी मच्छरों को ज़्यादा आकर्षित करते हैं, ख़ासकर कसरत करते समय या उसके तुरंत बाद.

इसकी वजह यह है कि व्यायाम के दौरान शरीर का मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है, जिससे अधिक कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है. साथ ही शरीर ज़्यादा गर्म हो जाता है और पसीना भी अधिक आता है.

इसी तरह, भारी शरीर वाले लोग भी मच्छरों को ज़्यादा आकर्षित कर सकते हैं, क्योंकि उनका शरीर आमतौर पर अधिक गर्मी पैदा करता है और वे ज़्यादा कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं.

त्वचा की गंध तय करती है कि मच्छर किसे काटेंगे

जब मच्छर अपने लक्ष्य के 10 मीटर (33 फ़ुट) से कम दूरी पर पहुंच जाते हैं तो वे त्वचा और सांस से आने वाली गंध सहित कई संकेतों की मदद से अपने शिकार की पहचान करते हैं.

प्रोफ़ेसर स्टीव लिंडसे कहते हैं, "यह सब गंध का खेल है. मच्छर किसे काटेंगे, यह काफी हद तक उस व्यक्ति के शरीर की गंध पर निर्भर करता है. शरीर से निकलने वाले रासायनिक पदार्थों की गंध में अंतर ही यह तय करता है. मच्छर एक रासायनिक दुनिया में रहते हैं."

लिंडसे और उनके साथी वैज्ञानिकों ने उस धारणा को भी ग़लत साबित किया है, जिसमें कहा जाता है कि "जिसका खून मीठा होता है, उसे मच्छर ज्यादा काटते हैं."

उनकी शोध के अनुसार, मच्छर वास्तव में हर व्यक्ति की त्वचा से निकलने वाली ख़ास और अलग गंध की ओर आकर्षित होते हैं.

हमारी त्वचा पर रहने वाले सूक्ष्म जीव (माइक्रोऑर्गेनिज़्म) कार्बोहाइड्रेट, फैटी एसिड और पेप्टाइड जैसे पदार्थों को तोड़कर वाष्पशील जैविक यौगिक (वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स) बनाते हैं.

ये यौगिक आसानी से हवा में फैल जाते हैं और मच्छर इन्हें पहचान सकते हैं. हमारी त्वचा से 500 से अधिक प्रकार के वाष्पशील जैविक यौगिक निकलते हैं.

मच्छर पहले से ही त्वचा पर मौजूद अमोनिया और लैक्टिक एसिड की ओर आकर्षित होते हैं. अगर त्वचा पर कार्बोक्सिलिक एसिड भी मौजूद हों, तो उनका आकर्षण और अधिक बढ़ जाता है.

रॉकफेलर यूनिवर्सिटी की रिसर्च में क्या पता चला?

अमेरिका की रॉकफ़ेलर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 64 लोगों की त्वचा की गंध का अध्ययन किया. इसके लिए प्रतिभागियों को छह घंटे तक नायलॉन के कपड़े पहनाए गए, ताकि उन कपड़ों में त्वचा की गंध जमा हो सके.

इसके बाद मच्छरों को इन नमूनों में से अपनी पसंद चुनने का मौका दिया गया. नतीजों से पता चला कि मच्छर उन लोगों की गंध को अधिक पसंद करते हैं, जिनकी त्वचा पर कार्बोक्सिलिक एसिड का स्तर ज़्यादा होता है.

शोधकर्ताओं ने प्रत्येक व्यक्ति के लिए 'मच्छर आकर्षण स्कोर' तैयार किया. जिस व्यक्ति का स्कोर सबसे अधिक था, वह सबसे कम स्कोर वाले व्यक्ति की तुलना में 100 गुना अधिक आकर्षक पाया गया.

दिलचस्प बात यह रही कि लोगों की जीवनशैली में बदलाव आने के बावजूद यह अंतर कई वर्षों तक बना रहा. प्रोफ़ेसर स्टीव लिंडसे कहते हैं, "मच्छरों के लिए आपका आकर्षण काफी हद तक पहले से तय होता है."

त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया भी बढ़ा सकते हैं आकर्षण

त्वचा पर रहने वाले सूक्ष्म जीवों (माइक्रोऑर्गेनिज्म) का प्रकार भी यह तय करता है कि मच्छर किसी व्यक्ति की ओर कितना आकर्षित होंगे.

नीदरलैंड्स की वागेनिंगेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों की ओर मलेरिया फैलाने वाले मच्छर अधिक आकर्षित होते थे, उनकी त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया की संरचना दूसरों से अलग थी. उनकी त्वचा पर बैक्टीरिया की संख्या अधिक थी, लेकिन उनकी प्रजातियों (किस्मों) की विविधता कम थी.

इसका एक कारण यह हो सकता है कि त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया शरीर की ख़ास गंध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. वास्तव में, अगर त्वचा पर बैक्टीरिया न हों, तो इंसान के पसीने में लगभग कोई गंध नहीं होगी.

जुड़वां लोगों पर किए गए अध्ययनों में भी पाया गया कि एक जैसे जुड़वां लोगों के ऊपर मच्छर लगभग एक ही स्तर पर आकर्षित होते हैं. जबकि असमान जुड़वां लोगों के शरीर के प्रति मच्छरों के आकर्षित होने में अंतर देखा गया.

इससे संकेत मिलता है कि शरीर की वह गंध, जो यह तय करती है कि मच्छर किसी व्यक्ति की ओर कितना आकर्षित होंगे, आनुवंशिक (जेनेटिक) रूप से भी प्रभावित हो सकती है. यानी इसका संबंध हमारे जीन से भी हो सकता है.

हर व्यक्ति पर अलग होता है मच्छर के काटने का असर

मच्छर के काटने पर हर व्यक्ति के शरीर की प्रतिक्रिया अलग-अलग हो सकती है.

एक व्यापक आनुवंशिक अध्ययन में पाया गया कि हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम से संबंधित जीन इस बात से गहराई से जुड़े होते हैं कि मच्छर के काटने पर हमारा शरीर कैसी प्रतिक्रिया देगा.

इसके अलावा, कुछ लोगों में मच्छर के काटने के बाद त्वचा पर ज़्यादा सूजन और बड़े निशान बनने की संभावना होती है. इससे उन्हें लग सकता है कि मच्छर उन्हें चुंबक की तरह अपनी ओर खींचते हैं.

फर्ग्यूसन कहते हैं, "अगर आपको लगता है कि मच्छर आपको नहीं काटते, तब भी आपको उनसे बचाव के लिए ज़रूरी सावधानियां ज़रूर बरतनी चाहिए."

Offene Fragen

  • क्या मच्छरों के आकर्षण को नियंत्रित किया जा सकता है?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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