Eilmeldung
TRİsrail Güçleri Kudüs'teki UNRWA Kalendiya Enstitüsü'ne Baskın DüzenlediTRPolis memurunu, atıldığı gece kulübüne silahlı saldırı düzenlerken vurmuşTRLahor'da Dershane Çatısı Çöktü: 14 Çocuk Hayatını KaybettiTRAlanya'da Çatıya Çıkan Şahıs İkna Edildi: Üçüncü İntihar GirişimiTRİzmir'de Eğlence Mekanında Cinayet: Bir Kişi Hayatını Kaybetti, İki Kişi YaralandıTRPençe Kilit Harekatı'nda Kaza: Ulaştırma Uzman Çavuş Abdurrahman Hilal Şehit DüştüTRTÜRK-İŞ: Açlık Sınırı Haziran'da 35.759 TL'ye YükseldiTRCHP'de MYK Toplantısı Sonrası Görevden Almalar ve Parti İçi Süreçler AçıklanıyorTRGülistan Doku cinayetinin zanlısı Umut Altaş'ın ABD'deki duruşması 21 Temmuz'a ertelendiTRKırkpınar'da altın kemer yolunda öne çıkan başpehlivanlarTRİsrail Güçleri Kudüs'teki UNRWA Kalendiya Enstitüsü'ne Baskın DüzenlediTRPolis memurunu, atıldığı gece kulübüne silahlı saldırı düzenlerken vurmuşTRLahor'da Dershane Çatısı Çöktü: 14 Çocuk Hayatını KaybettiTRAlanya'da Çatıya Çıkan Şahıs İkna Edildi: Üçüncü İntihar GirişimiTRİzmir'de Eğlence Mekanında Cinayet: Bir Kişi Hayatını Kaybetti, İki Kişi YaralandıTRPençe Kilit Harekatı'nda Kaza: Ulaştırma Uzman Çavuş Abdurrahman Hilal Şehit DüştüTRTÜRK-İŞ: Açlık Sınırı Haziran'da 35.759 TL'ye YükseldiTRCHP'de MYK Toplantısı Sonrası Görevden Almalar ve Parti İçi Süreçler AçıklanıyorTRGülistan Doku cinayetinin zanlısı Umut Altaş'ın ABD'deki duruşması 21 Temmuz'a ertelendiTRKırkpınar'da altın kemer yolunda öne çıkan başpehlivanlar
Newsgather
Backगर्मी, जलवायु परिवर्तन और ग़रीबों पर इसका क़हर
गर्मी, जलवायु परिवर्तन और ग़रीबों पर इसका क़हर
NACHRICHT
BBC हिंदी10 sa önceEnvironment4 dk okumaIndia

गर्मी, जलवायु परिवर्तन और ग़रीबों पर इसका क़हर

Auf einen Blick

लेखक गर्मी के बढ़ते प्रकोप, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और अमीर-ग़रीब के बीच इसके असमान असर पर प्रकाश डालते हैं। वह प्राकृतिक शीतलन स्रोतों (पेड़, पानी) के विनाश और 2015 की कराची हीटवेव में 1000 से अधिक मौतों का जिक्र करते हुए सामाजिक असमानता पर सवाल उठाते हैं।

KI-generierte Zusammenfassung

Warum es wichtig ist

लेखक हर साल बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर चर्चा करते हैं, जो विशेष रूप से ग़रीबों और मज़दूरों को प्रभावित करते हैं, जबकि अमीर वर्ग एसी और मिनरल वॉटर से राहत पाता है।

Schriftgröße

गर्मी हर साल आती है और हर साल एक ही शोर होता है कि 'क़हर ख़ुदा का! भाई, इतनी गर्मी हमने पहले भी नहीं देखी.'

हर साल तापमान के रिकॉर्ड भी टूटते रहते हैं. जहाँ कभी 40-42 डिग्री सेल्सियस पर क़यामत जैसा लगता था. वहीं, अब तापमान 50-52 तक पहुँच जाता है.

शहरों में जो रईस लोग हैं, वे अपने एसी वाले ठंडे घरों से निकलकर, ठंडी कार में बैठकर, ठंडे ऑफिस में पहुँच जाते हैं. उनके हाथ में मिनरल वॉटर की ठंडी बोतल होती है.

बाकी जो ग़रीब और मज़दूर हैं, वे कड़कती धूप में भी शहर की सड़कों पर या बसों में या रिक्शों पर, बस सिर पर एक कपड़ा बांधकर अपने-अपने काम में लगे रहते हैं.

अगर आप ग़रीब हैं तो..

बड़े शहरों में अब मीलों तक पैदल चलते चलें, तो आपको कहीं भी वॉटर कूलर या पानी का नल नहीं मिलेगा. जिस आदमी को दिनभर मजदूरी करके 500-700 रुपये कमाने हैं, वो 50 रुपये की आधा लीटर मिनरल वॉटर की बोतल कहां से खरीदेगा?

वैज्ञानिकों की बात मानें या न मानें, आपका अपना शरीर आपको बताता है कि क्लाइमेट चेंज अब हो रहा है.

अगर आप अमीर या मिडिल क्लास इंसान हैं, तो भले ही आप बिजली के बिल की शिक़ायत करते रहें, आपका टेम्परेचर 20 से 22 डिग्री ही रहता है और अगर आप एक मज़दूर हैं तो आप जाने और क्लाइमेट चेंज जाने.

राहत देने के तरीक़े

क़ुदरत ने गर्मी से राहत के लिए दो तरीक़े बनाए हैं, एक- पेड़ों की छाँव और दूसरा- पानी. पेड़ हम काट-काटकर उनकी जगह सीमेंट, कांच और सरिए की इमारतें बनाते जा रहे हैं.

पानी, क़ुदरत ने मुफ़्त दिया था, हम उसे भी लोगों से चुराकर प्लास्टिक की बोतलों में बंद करके, फिर फ़्रिज़ में रखकर बेच रहे हैं.

गांवों को रोमांटिसाइज़ करने वाले लोग मुझे कभी भी पसंद नहीं आए, लेकिन जो वहां मिट्टी के घर होते थे वे गर्मी से बचाते थे और सर्दियों में गर्म रखते थे.

लेकिन ग़रीबी ख़त्म करने का पहला क़दम यह होता है कि सीमेंट और सरिए से घर को पक्का करना. फिर उस घर को गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गर्म रखने के लिए गैस और बिजली के बिल भरें. इसी का नाम तरक्क़ी है.

'कराची का मौसम किसी को नहीं मारता, मगर..'

जिसे ज़्यादा तरक्की करनी है या जो चार क्लास पढ़ जाता है, वह रोशनियों की ओर भागता है, यहां काम भी बहुत है.

मैंने भी गांवों में घरों को मिट्टी से सीमेंट का बनता हुआ देखा है. पंखे और एसी आते देखे हैं. ग़रीब आदमी तब पेड़ की छांव में चारपाई बिछाकर कच्ची लस्सी पीकर गर्मियां गुज़ार लेता था.

फिर हम क़राची पहुंच गए. वहां बड़े शहर की सारी सुविधाएं उपलब्ध थीं, काम भी मिला और प्यार भी मिला.

मेरे जैसे हज़ारों और लोग रोज़ाना कराची पहुँचते थे और अब भी पहुँचते हैं.

मैंने एक समझदार आदमी से पूछा कि अगर कोई व्यक्ति पेशावर के किसी गांव से चलता है तो वह सीधे कराची में आकर ही क्यों रुकता है ?

उन्होंने समझाया कि इसका एक कारण मौसम भी है. कराची समुद्र के किनारे है. यह एकमात्र ऐसा शहर है, जहाँ साल के बारह महीने इंसान खुले आसमान के नीचे सो सकता है.

गर्मी और सर्दी परेशान तो करेगी, यहां इंसान आपका दुश्मन हो सकता है, लेकिन मौसम आपको नहीं मारेगा.

फिर 2015 में गर्मियां आईं, हीटवेव आई. अल्लाह का क़हर, एक हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान चली गई.

सड़कों पर चलते हुए, इमारतों और फैक्ट्रियों में काम करते हुए और कंक्रीट की बनी अपनी झोपड़ियों में बैठे-बैठे लोग मरते रहे.

इससे पहले हम एक बात सुनते थे कि 'यहां कोई भूखा नहीं सोता', लेकिन वह भी झूठ था. फिर ये बात कि 'मौसम किसी को नहीं मारता', यह बात भी झूठ निकली.

'नोट रखने की मशीन के लिए एसी लगाया और मजदूरों की छांव छीन ली'

2015 की हीटवेव के दौरान मैं एक बैंक के एटीएम पर गया. आपने भी देखा होगा उसे जो एक छोटा सा कमरा होता है.

उस कमरे में एक पूरा परिवार, 2-3 औरतें, 5-7 बच्चे, गर्मी से बचने के लिए एक-दूसरे से सटकर बैठे हुए थे क्योंकि एटीएम रूम में एसी लगा होता है.

असली क़हर ख़ुदा का यह है कि हमने नोट मशीन को ठंडा रखने के लिए एसी लगा लिए हैं और मज़दूरों से पेड़ों की छाँव भी छीन ली है और उनका पानी भी चुरा लिया है।

Offene Fragen

  • शहरों में ग़रीबों के लिए मुफ्त पानी और छाँव कैसे उपलब्ध कराई जा सकती है?
  • जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से मज़दूरों को कैसे बचाया जा सकता है?
  • शहरीकरण और विकास को पर्यावरण-अनुकूल कैसे बनाया जा सकता है?

Verwandte Themen

This article was originally published by BBC हिंदी.

Ähnliche Meldungen

मनोरमा नदी: पीएम मोदी ने की सफ़ाई की सराहना, लेकिन ज़मीनी हकीकत चिंताजनक
In Entwicklung·7 sa önce

मनोरमा नदी: पीएम मोदी ने की सफ़ाई की सराहना, लेकिन ज़मीनी हकीकत चिंताजनक

प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' में बस्ती के आकाश गुप्ता और उनके साथियों द्वारा मनोरमा नदी की सफ़ाई के प्रयासों की सराहना की। हालांकि, बीबीसी की पड़ताल में नदी का अधिकांश हिस्सा प्रदूषित, सूखा और जलकुंभी से ढका पाया गया, जिससे स्थानीय जीवन और पारिस्थितिकी पर गंभीर असर पड़ रहा है।

BBC हिंदी
Mehr zu diesem Themaगर्मी