सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला: भारत में धर्म का पालन कैसे करेंगे लोग?
सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की पीठ ने धर्म के मौलिक अधिकार से जुड़े मामले पर फ़ैसला सुरक्षित रखा है। यह फ़ैसला सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामले से जुड़ा है और इसका असर भारत में धर्म के पालन के तरीके पर पड़ेगा।
संविधान के अनुच्छेद-25 और 26 के तहत धर्म के पालन का अधिकार दिया गया है, लेकिन इसके साथ ही लोक व्यवस्था, सदाचार, स्वास्थ्य जैसी पाबंदियाँ भी हैं।
साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी, जिसके ख़िलाफ़ कई याचिकाएँ फ़ाइल हुईं।
नौ जजों की पीठ ने इस मामले में कई महत्वपूर्ण सवालों पर फ़ैसला देना है, जिनमें धर्म के मामलों में कोर्ट की भूमिका, 'एसेंशियल रिलीजियस प्रैक्टिसेज टेस्ट' की स्थिति, और सदाचार की परिभाषा शामिल हैं।
इस फ़ैसले का प्रभाव न केवल सबरीमाला मंदिर पर, बल्कि दाऊदी बोहरा समुदाय, पारसी मंदिरों और अन्य धर्मों से जुड़े मामलों पर भी होगा।
