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Zurückपश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर बीजेपी की भारी जीत के टीएमसी के लिए क्या मायने हैं?
पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर बीजेपी की भारी जीत के टीएमसी के लिए क्या मायने हैं?
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BBC हिंदी25.5.2026Politik5 Min. LesezeitIndia

पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर बीजेपी की भारी जीत के टीएमसी के लिए क्या मायने हैं?

Auf einen Blick

पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने टीएमसी उम्मीदवार के नाम वापस लेने के बाद 1 लाख 9 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की। यह जीत टीएमसी के लिए एक बड़ा झटका है, जो संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है।

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पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार देबांग्शु पांडा को 1 लाख 9 हज़ार से भी ज़्यादा वोटों से जीत हासिल हुई.

उनकी जीत हैरान करती भी नहीं है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर ख़ान ने आख़िरी लम्हों में अपना नाम वापस ले लिया.

लेकिन हैरान करने वाली बात ये रही कि एक ऐसी सीट जहां अच्छी ख़ासी संख्या मुस्लिम मतदाताओं की है वहां बीजेपी उम्मीदवार को 71 प्रतिशत वोट मिले.

राज्य में हाल ही में हुए चुनाव में हार के बाद लगातार ख़बरें आ रही हैं कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है.

पार्टी के कई नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई है. कई नेताओं के पार्टी छोड़ने की भी ख़बरे हैं.

टीएमसी लगातार अपना संगठनात्मक ढांचा मज़बूत करने के लिए संघर्ष कर रही है. ऐसे में इस नतीजे ने कई अहम संकेत दिए हैं.

पिछले कई सालों से फाल्टा सीट पर टीएमसी का कब्ज़ा था. बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी के साथ-साथ हिंदू वोटर्स के भी एक बड़े हिस्से का सपोर्ट और महिलाओं के लिए चलाई जा रही कई स्कीम का फ़ायदा टीएमसी को मिलता रहा है.

ऐसे में टीएमसी के लिए ये सीट लगभग गढ़ बन गई थी.

ऐसे में पहले उनका चुनाव से नाम वापस लेना और फिर बीजेपी की इतनी बड़ी जीत, पहले से ही जूझ रही टीएमसी के लिए एक और बड़ा झटका है.

बीजेपी की भारी जीत

कल (रविवार) को फाल्टा सीट पर हुए उपचुनाव का रिज़ल्ट आया. इसमें बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया मार्क्सिस्ट (सीपीएम) के शंभू नाथ कुर्मी को 1 लाख 9 हज़ार वोट से हराया. पांडा को क़रीब 71 प्रतिशत वोट मिले. कुर्मी को क़रीब 20 प्रतिशत वोट मिले.

कांग्रेस यहां तीसरे नंबर पर रही जिसके प्रत्याशी अब्दुर रज़्ज़ाक को 10084 (4.8%) वोट मिले.

वरिष्ठ पत्रकार अभिजीत मजुमदार ने एक्स पर लिखा, "बीजेपी को फाल्टा में 71 प्रतिशत वोट मिले. यहां क़रीब 66 प्रतिशत हिंदू हैं और 33 प्रतिशत मुसलमान. इसका मतलब है कि कई मुस्लिम मतादाताओं ने भी बीजेपी को वोट दिया और क़रीब 90 प्रतिशत हिंदुओं ने तो एकमुश्त बीजेपी को ही वोट दिया. इतनी बड़ी संख्या में हिंदुओं का किसी एक पक्ष में लामबंद होना और कई अनुसूचित जातियों का भी बीजेपी के पक्ष में वोट देना भविष्य की ओर महत्वपूर्ण संकेत देता है."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिज़ल्ट के बाद एक्स पर पोस्ट किया, "फाल्टा की जनता ने अपना फैसला सुना दिया है. लोकतंत्र की जीत हुई है और डराने-धमकाने की राजनीति हार गई है. फाल्टा में रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल करने पर श्री देबांग्शु पांडा जी को बधाई. यह पश्चिम बंगाल की जनता के बीजेपी के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाता है."

वहीं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसे तानाशाही की हार और विकास की जीत बताया.

उन्होंने एक्स पर लिखा, "यह जनादेश माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल के अटूट विश्वास और हमारे कार्यकर्ताओं के अथक समर्पण का सच्चा प्रतिबिंब है, जिन्होंने हर मुश्किल का बहादुरी से सामना किया. फाल्टा में कमल खिल चुका है, और यह तो बस शुरुआत है.. "

टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने कल दोपहर तक इस चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए लिखा, "फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के पुनर्मतदान की आज हुई मतगणना ने गंभीर विसंगतियों को उजागर किया है. आज दोपहर 3:30 बजे तक सभी 21 राउंड की गिनती पूरी हो गई, जबकि 4 मई को इसी समय तक केवल 2 से 4 राउंड ही पूरे हुए थे. देश चुनाव आयोग से इसका जवाब चाहता है. पिछले 10 दिनों में फाल्टा के 1000 से अधिक कार्यकर्ताओं को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा, लेकिन चुनाव आयोग ने लगातार आंखें मूंदे रखीं. आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद दिनदहाड़े पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई. चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की."

उन्होंने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए वोटिंग प्रक्रिया के स्वतंत्र सीसीटीवी ऑडिट की मांग की

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय और नेता स्मृति ईरानी ने इसे टीएमसी के डायमंड हार्बर मॉडल की हार बताया.

वहीं टीएमसी के सांसद सौगत रॉय ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "यह नतीजा आना तय था क्योंकि हमारे टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर ख़ान ने प्रचार खत्म होने से कुछ दिन पहले ही चुनाव से नाम वापस ले लिया था. नाम वापसी की आख़िरी तारीख़ निकल चुकी थी, इसलिए उनका नाम ईवीएम में बना रहा. यह जहांगीर ख़ान की ओर से विश्वासघात था. अगर उन्होंने आख़िरी तारीख़ से पहले नाम वापस लिया होता तो टीएमसी किसी अच्छे उम्मीदवार को मैदान में उतार सकती थी और मुकाबला बराबरी का होता. हमारे उम्मीदवार पर नाम वापस लेने का दबाव बनाया गया था, लेकिन वह उस दबाव को झेल नहीं पाए. मुझे इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है. अभिषेक बनर्जी इस बारे में बेहतर बता पाएंगे क्योंकि वह उस इलाके के सांसद हैं."

पिछले चुनावों में क्या हुआ था?

फाल्टा को टीएमसी का गढ़ इसलिए माना जाता था क्योंकि पिछले तीन विधानसभा चुनाव में यहां से पार्टी जीतती आई है. लेकिन इतनी बड़ी संख्या में टीएमसी को भी इन चुनावों में वोट नहीं मिले जितने इस बार बीजेपी को मिले हैं.

2021 में हुए चुनाव में टीएमसी उम्मीदवार को क़रीब 56 प्रतिशत वोट मिले थे वहीं 2016 के चुनाव में टीएमसी कैंडिडेट को 50 प्रतिशत और 2011 के चुनाव में 55 प्रतिशत वोट मिले थे.

2021 के चुनाव में बीजेपी दूसरे नंबर पर थी. उसके उम्मीदवार को क़रीब 36 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि 2016 में बीजेपी कुल 8 प्रतिशत वोट लेकर तीसरे नंबर पर और 2011 के चुनाव में 3.45 प्रतिशत वोट लेकर तीसरे नंबर पर रही थी.

माना जा रहा था कि फाल्टा सीट पर टीएमसी के जहांगीर ख़ान का मुकाबला बीजेपी के देबांग्शु पांडा और कांग्रेस के अब्दुर रज़्ज़ाक मोल्ला से है. सीपीआई (एम) के संभू नाथ कुर्मी को भी चुनावी मैदान में गिना जा रहा था.

जहांगीर ख़ान के ख़िलाफ़ मतदाताओं को कथित धमकी और चुनावी अनियमितताओं के मामले में पांच, 10 और 15 मई को कुल पांच एफ़आईआर दर्ज़ हुई थीं.

हालांकि 18 मई को कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने फाल्टा में फिर से मतदान प्रक्रिया पूरी होने तक जहांगीर ख़ान की गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी थी.

मैदान से हटे जहांगीर ख़ान

19 मई को जहांगीर ख़ान ने अचानक चुनावी रेस से बाहर होने की घोषणा कर दी. तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि यह उनका व्यक्तिगत फ़ैसला है न कि पार्टी का.

इस मामले पर जहाँगीर ख़ान ने कहा, "मैं फाल्टा की मिट्टी का बेटा हूँ. मैं हमेशा फाल्टा में शांति और विकास चाहता हूँ. मेरा सपना फाल्टा को सुंदर बनाना था. मुख्यमंत्री फाल्टा के लिए एक विशेष पैकेज देंगे और इसी वजह से मैं 21 मई को होने वाले मतदान से ख़ुद को अलग कर रहा हूँ."

उनकी इस घोषणा पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि 'जहांगीर ख़ान भाग गए क्योंकि उन्हें कोई पोलिंग एजेंट नहीं मिला.'

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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