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Backसतलुज फ़िल्म की स्क्रीनिंग पर रोक के बावजूद लोग कर रहे हैं प्रदर्शन
सतलुज फ़िल्म की स्क्रीनिंग पर रोक के बावजूद लोग कर रहे हैं प्रदर्शन
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सतलुज फ़िल्म की स्क्रीनिंग पर रोक के बावजूद लोग कर रहे हैं प्रदर्शन

Auf einen Blick

3 जुलाई 2026 को ज़ी-5 पर रिलीज़ हुई दिलजीत दोसांझ की फ़िल्म 'सतलुज' को 48 घंटे बाद हटा दिया गया. इसके बावजूद, पंजाब और राजस्थान के विभिन्न गांवों और शहरों में लोग अपने स्तर पर फ़िल्म डाउनलोड कर गुरुद्वारों और खुले स्थानों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. बीजेपी की पंजाब इकाई ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से पुनर्विचार की मांग की है.

KI-generierte Zusammenfassung

Warum es wichtig ist

जसवंत सिंह खालड़ा की फ़िल्म 'सतलुज' को भारत सरकार के आदेश पर ज़ी-5 से हटा दिया गया था. इसके बाद लोग अपने स्तर पर फ़िल्म का प्रदर्शन कर रहे हैं.

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Author, हरमनदीप सिंह

पदनाम, बीबीसी संवाददाता

और

Author, नवजोत कौर

पदनाम, बीबीसी संवाददाता

प्रकाशित 3 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 8 मिनट

"1989 में मेरे पति लापता हो गए थे. आज तक उनके बारे में कुछ पता नहीं चला. मैं अपनी ज़िंदगी के उस पुराने दौर को फिर से देखने आई थी."

भावुक होते हुए ये शब्द बलविंदर कौर ने कहे. वह मोगा के एक गुरुद्वारे में जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर बनी फ़िल्म 'सतलुज' देखने पहुंची थीं.

दिलजीत दोसांझ की मुख्य भूमिका वाली ये फ़िल्म 3 जुलाई 2026 को ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म ज़ी-5 पर रिलीज़ हुई थी, लेकिन 48 घंटे बाद ये ज़ी-5 से हटा दी गई.

इसके बाद पंजाब के अलग-अलग गांवों और शहरों में लोग अपने स्तर पर फ़िल्म डाउनलोड कर बड़ी एलईडी स्क्रीनों पर इसका प्रदर्शन कर रहे हैं. लोग गुरुद्वारों और खुले स्थानों पर एक साथ बैठकर यह फ़िल्म देख रहे हैं.

बीजेपी की पंजाब इकाई ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से इस मामले में पुनर्विचार करने की मांग की है.

पिछले कुछ दिनों में गुरदासपुर, संगरूर, जालंधर, रूपनगर (रोपड़), बठिंडा, फ़िरोज़पुर, मोगा और पटियाला समेत कई ज़िलों के अलग-अलग गांवों में 'सतलुज' की स्क्रीनिंग की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं.

ऐसी ही स्क्रीनिंग की तस्वीरें राजस्थान के श्री गंगानगर इलाक़े से भी वायरल हुईं, जिन्हें दिलजीत ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर भी साझा किया था.

'मैं अपने पति को फ़िल्म में तलाशने आई हूं'

मंगलवार को मोगा के गुरुद्वारा बीबी काहन कौर जी में फ़िल्म की स्क्रीनिंग पर पहुंचे बीबीसी संवाददाता हरमनदीप सिंह से बात करते हुए बलविंदर कौर बेहद भावुक हो गईं.

फ़िल्म देखने के बाद रोते हुए बलविंदर कौर ने कहा, "शायद इस फ़िल्म से मेरे बारे में भी कुछ पता चल जाए. मैंने उस दौर को ख़ुद अपनी ज़िंदगी में झेला है. मुझे लगा जैसे यह फ़िल्म मेरी ही कहानी पर बनी हो. भगवान करे, ऐसा दौर फिर कभी वापस न आए."

बलविंदर कौर के पहले पति वर्ष 1989 में लापता हो गए थे और फिर कभी घर वापस नहीं लौटे. बलविंदर कौर बताती हैं कि इसके बाद उनकी दूसरी शादी मोगा में हुई.

उन्होंने कहा, "1989 में मैं अपने मायके तरनतारन में थी. मेरे पति दर्ज़ी का काम करते थे. मेरी शादी चोहला साहिब में हुई थी. उनका नाम रविंदरपाल सिंह था. पुलिस उन्हें तड़के घर से उठाकर ले गई थी. मुझे आज तक उनका शव भी नहीं मिला."

बलविंदर कौर ने कहा, "जैसा फ़िल्म में दिखाया गया है कि उस समय किसी की कोई सुनवाई नहीं होती थी, हमारे साथ भी बिल्कुल वैसा ही हुआ. हमने बहुत कोशिश की, लेकिन आज तक उनका कोई पता नहीं चल सका."

मोगा में डॉक्टर सरबजीत कौर अपना क्लीनिक बंद करके ख़ासतौर पर यह फ़िल्म देखने पहुंची थीं.

उन्होंने कहा, "यह कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं है. यह वही सच्चाई है, जो हमने ख़ुद झेली है. पहले जिस तरह जसवंत सिंह खालड़ा की आवाज़ दबाने की कोशिश की गई थी, उसी तरह आज उनकी फ़िल्म को रोकने की कोशिश की जा रही है. आज भी हमें ऐसा महसूस होता है, जैसे जसवंत सिंह खालड़ा हमारे बीच मौजूद हों."

उन्होंने कहा, "जब हम छोटे थे, तब इस तरह एक साथ बैठकर टीवी पर फ़िल्में देखा करते थे. आज पहली बार मैंने किसी गुरुद्वारे में लोगों के साथ मिलकर इस तरह कोई फ़िल्म देखी है. हमारे इलाक़े से बड़ी संख्या में लोग एक साथ यह फ़िल्म देखने आए हैं."

'फ़िल्म देखकर परिवारों का इंतज़ार ख़त्म हो गया'

बीबीसी के सहयोगी पत्रकार गुरप्रीत चावला के मुताबिक, गुरदासपुर के गांव मानचोपड़ा में सार्वजनिक रूप से फ़िल्म देखने पहुंचे लोगों ने 'सतलुज' फ़िल्म पर लगाई गई रोक पर सवाल उठाए और अपने स्तर पर फ़िल्म दिखाए जाने का समर्थन किया.

फ़िल्म देखने आए एक युवक ने कहा, "हमारा फ़िल्म दिखाने का मक़सद यह है कि लोगों को पता चले कि किस तरह पंजाब के निर्दोष नौजवानों को उनके घरों से उठाकर मार दिया गया और किस तरह जसवंत सिंह खालड़ा ने उनके लिए लड़ाई लड़ी. पहली बार किसी ने फ़िल्म के ज़रिए इसे दिखाने की कोशिश की है, इसलिए ऐसी फ़िल्म का लोगों तक पहुंचना ज़रूरी है. लेकिन सरकार फ़िल्म को रिलीज़ नहीं होने दे रही, इसलिए हम अपने स्तर पर लोगों को यह फ़िल्म दिखा रहे हैं."

गांव में अपने स्तर पर फ़िल्म की स्क्रीनिंग करवाने वाले नौजवानों में से एक ने कहा, "फ़िल्म देखने के बाद उन परिवारों का इंतज़ार ख़त्म हो गया, जिनके परिवार के सदस्य उस दौर में लापता हो गए थे. हमें पंजाब के इतिहास और खालड़ा साहिब के बारे में कई ऐसी बातें पता चलीं, जिनके बारे में पहले जानकारी नहीं थी. हम कोई ग़लत काम नहीं कर रहे हैं. अगर फ़िल्म बनाई गई है, तो हमें इसे देखने दिया जाना चाहिए. हम सरकार से अपील करते हैं."

मोगा में अपने पति और बच्चों के साथ फ़िल्म देखने आईं वीरपाल कौर ने कहा, "जिस दिन हमें पता चला कि फ़िल्म रिलीज़ हो गई है, तभी से हमारा मन था कि हम इसे देखें. फिर इसे ज़ी-5 से हटा दिया गया. मंगलवार शाम जैसे ही हमें पता चला कि फ़िल्म गुरुद्वारा साहिब में दिखाई जा रही है, तो हम पूरा परिवार बच्चों को साथ लेकर फ़िल्म देखने आ गए."

'क़ानूनी कार्रवाई के लिए भी तैयार हैं : आयोजक'

हालांकि फ़िल्म के निर्देशक हनी त्रेहन और ज़ी-5 की ओर से दर्शकों से अपील की गई है कि वे फ़िल्म के दोबारा रिलीज़ होने का इंतज़ार करें.

निर्देशक हनी त्रेहन ने ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से फ़िल्म डाउनलोड करके दिखाने वाले लोगों से भी अपील की है कि वे ऐसा न करें.

लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग, संगठन और नौजवान अपने स्तर पर अलग-अलग गांवों में फ़िल्म की स्क्रीनिंग करवा रहे हैं.

मोगा के गुरुद्वारा साहिब में फ़िल्म की स्क्रीनिंग करवाने वाले आयोजक राजवंत सिंह मल्ल कहते हैं, "हमारी देश की सरकार ने जसवंत सिंह खालड़ा पर बनी फ़िल्म को रिलीज़ नहीं होने दिया. हमारे मन में उत्सुकता थी कि हमारे नायक, जिन्होंने हमारे लिए लड़ाई लड़ी, उनकी फ़िल्म हमें देखने नहीं दी जा रही है. इसी वजह से हमने गुरुद्वारा कमेटी के साथ मिलकर गुरुद्वारा साहिब में यह फ़िल्म दिखाई."

उन्होंने कहा, "अगर फ़िल्म को इस तरह ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से दिखाने के कारण हमारे ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई होती है, तो हम उसके लिए तैयार हैं. सबसे बड़ा अपराध यह है कि मानवाधिकारों की बात करने वाले व्यक्ति की फ़िल्म लोगों को देखने नहीं दी जा रही है. लोगों ने हमारी उम्मीद से कहीं ज़्यादा हमारा समर्थन किया है."

दिलजीत ने फ़िल्म की पब्लिक स्क्रीनिंग का समर्थन किया

फ़िल्म अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ ने अपने इंस्टाग्राम लाइव के ज़रिए भी अलग-अलग जगहों पर फ़िल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग किए जाने का समर्थन किया. इंस्टाग्राम लाइव पर यूज़र्स को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अब यह फ़िल्म नहीं रुकेगी. यह फ़िल्म लोगों तक पहुंच चुकी है.

इसके साथ ही दिलजीत दोसांझ के इंस्टाग्राम अकाउंट पर लगभग हर दिन ऐसी स्टोरीज़ साझा की जा रही हैं, जिनमें दिखाया गया है कि प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी भारत में अलग-अलग जगहों पर लोग अपने स्तर पर फ़िल्म देख रहे हैं.

वहीं, फ़िल्म के निर्देशक हनी त्रेहन ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक स्टोरी शेयर करते हुए लोगों से ऐसा न करने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि फ़िल्म को डाउनलोड करके न देखा जाए. उन्होंने लोगों से धैर्य रखने को कहा था और भरोसा दिलाया था कि फ़िल्म दोबारा उनके पास आएगी.

हालाँकि अभी तक इस मामले में आयोजकों के ख़िलाफ़ पुलिस की तरफ़ से एफ़आईआर दर्ज करने की खबर सामने नहीं आई है.

मंज़ूरी के बिना फ़िल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग के बारे में क्या कहता है क़ानून

सिनेमा हॉल में रिलीज़ होने वाली फ़िल्मों की तरह, ज़ी-5 जैसे ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर सीधे रिलीज़ होने वाली फ़िल्मों के लिए सीबीएफ़सी सर्टिफ़िकेट की ज़रूरत नहीं होती.

लेकिन ये ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के दायरे में ज़रूर आते हैं.

मीडिया के रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत सरकार ने 'सतलुज' फ़िल्म को भारत से हटाने का आदेश देने के लिए आईटी अधिनियम की धारा 69A का इस्तेमाल किया है. यह धारा सरकार को ऑनलाइन सामग्री को ब्लॉक करने या हटाने का अधिकार देती है.

इसके तहत किसी भी फ़िल्म को भारत में सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाया जा सकता. इस क़ानून का उल्लंघन करने पर सात साल तक की सज़ा और जुर्माना लगाया जा सकता है.

राजनीतिक पार्टियां करवा रही हैं फ़िल्म की स्क्रीनिंग

शिरोमणि अकाली दल (बादल) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने बुधवार को एक बयान जारी कर कहा, "शिरोमणि अकाली दल फ़िल्म सतलुज को पंजाब के गांव-गांव और कोने-कोने में दिखाएगा, ताकि हमारे बच्चों और आने वाली पीढ़ियों को क़ौम पर किए गए अत्याचारों के बारे में अच्छी तरह जानकारी दी जा सके."

Worauf zu achten ist

KI-Ausblick — Möglichkeiten, keine Fakten

  • फ़िल्म को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.

    Wahrscheinlich · Innerhalb von Wochen

  • सरकार फ़िल्म को लेकर अपना रुख स्पष्ट करेगी.

    Möglich · Innerhalb von Monaten

Offene Fragen

  • फ़िल्म को दोबारा कब रिलीज़ किया जाएगा?
  • सरकार द्वारा फ़िल्म हटाने का अंतिम कारण क्या है?
  • क्या आयोजकों के खिलाफ़ कानूनी कार्रवाई होगी?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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