Eilmeldung
ITUcraina lancia oltre 430 droni verso la Russia, un morto a BelgorodITDisagi all'aeroporto di Catania per l'Etna: voli sospesiPLKraków chce zwiększyć liczbę mieszkań komunalnychITMarine Le Pen: attesa sentenza d'appello per presunti falsi impieghi all'EuroparlamentoRUБуданов: Война с Украиной для Белоруссии завершится крахомRUВ Крыму и Севастополе введен аварийный роумингKRKAIST, 세계 최초 원천기술…무전원 DNA 온도 블랙박스 등 신산업 응용 가능PLNFZ nałożył 54 mln zł kar na placówki medyczne w pierwszym kwartaleCN藍白聯手阻擋無人載具條例 國防自主受阻?KR감사원, 독립기념관장 추천위 운영 문제 지적ITUcraina lancia oltre 430 droni verso la Russia, un morto a BelgorodITDisagi all'aeroporto di Catania per l'Etna: voli sospesiPLKraków chce zwiększyć liczbę mieszkań komunalnychITMarine Le Pen: attesa sentenza d'appello per presunti falsi impieghi all'EuroparlamentoRUБуданов: Война с Украиной для Белоруссии завершится крахомRUВ Крыму и Севастополе введен аварийный роумингKRKAIST, 세계 최초 원천기술…무전원 DNA 온도 블랙박스 등 신산업 응용 가능PLNFZ nałożył 54 mln zł kar na placówki medyczne w pierwszym kwartaleCN藍白聯手阻擋無人載具條例 國防自主受阻?KR감사원, 독립기념관장 추천위 운영 문제 지적
Newsgather
Backफ़ोलारिन बालोगुन रेड कार्ड: अमेरिकी खिलाड़ी को मिली राहत पर फ़ुटबॉल जगत में क्यों उठ रहे सवाल?
फ़ोलारिन बालोगुन रेड कार्ड: अमेरिकी खिलाड़ी को मिली राहत पर फ़ुटबॉल जगत में क्यों उठ रहे सवाल?
In Entwicklung
BBC हिंदी13 sa önceSport5 dk okumaIndia

फ़ोलारिन बालोगुन रेड कार्ड: अमेरिकी खिलाड़ी को मिली राहत पर फ़ुटबॉल जगत में क्यों उठ रहे सवाल?

Auf einen Blick

अमेरिकी फ़ॉरवर्ड फ़ोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड निलंबन विवादास्पद रूप से रद्द कर दिया गया है, जिससे वह वर्ल्ड कप के अगले मैच में खेल सकेंगे। यह फ़ैसला कथित तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ़ीफ़ा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो के बीच बातचीत के बाद आया, जिससे फ़ीफ़ा के नियमों और राजनीतिक तटस्थता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

KI-generierte Zusammenfassung

Warum es wichtig ist

फ़ोलारिन बालोगुन को बोस्निया-हर्ज़ेगोविना के ख़िलाफ़ मैच में रेड कार्ड दिखाया गया था, जिसके बाद उन्हें वर्ल्ड कप के अगले मैच से स्वतः निलंबित कर दिया गया था। फ़ीफ़ा के नियमों के अनुसार रेड कार्ड के ख़िलाफ़ अपील की अनुमति नहीं है।

Schriftgröße

अगर आपको वर्ल्ड कप में रेड कार्ड मिल जाता है तो आप चार साल में एक बार होने वाले फ़ुटबॉल के इस महाकुंभ का अगला मैच नहीं खेल सकते.

इस नियम में कोई किंतु-परंतु या अपील काम नहीं करती.

लेकिन अमेरिका के स्टार फ़ॉरवर्ड फ़ोलारिन बालोगुन को दिखाए गए रेड कार्ड को प्रभावी रूप से रद्द करने के फ़ैसले ने कई सवालों को जन्म दिया है.

बोस्निया-हर्ज़ेगोविना के ख़िलाफ़ मिली जीत के दौरान मैदान से बाहर भेजे गए बालोगुन अब सोमवार को बेल्जियम के ख़िलाफ़ अंतिम 16 में खेलने के लिए उपलब्ध रहेंगे.

वह टूर्नामेंट में तीन गोल के साथ अमेरिका के शीर्ष स्कोरर हैं.

वर्ल्ड कप के इतिहास में अब तक 189 रेड कार्ड दिखाए गए हैं, और केवल दो खिलाड़ियों ने निलंबन की सज़ा नहीं भुगती है.

पहला मामला 1962 में पेश आया, जब ब्राज़ील के गैरिंचा को सेमीफ़ाइनल में चिली के ख़िलाफ़ मैच में रेड कार्ड दिखाया गया, लेकिन उन्होंने फ़ाइनल में चेकोस्लोवाकिया पर मिली जीत में हिस्सा लिया.

हालांकि, उस ज़माने में प्रतिबंध नहीं लगता था. रेड कार्ड दिए जाने के बाद अधिकारी सबूतों के आधार पर सज़ा तय करते थे.

1962 में फ़ीफ़ा की अनुशासनात्मक समिति का निर्णय राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से घिरा हुआ था.

व्हाइट हाउस और फ़ीफ़ा के बीच नज़दीकी संबंधों को देखते हुए, मौजूदा वर्ल्ड कप के को-होस्ट के पक्ष में लिए गए इस अत्यंत असामान्य निर्णय पर सवाल उठ रहे हैं.

बीबीसी के अमेरिकी मीडिया सहयोगी सीबीएस न्यूज़ ने पुष्टि की है कि बालोगुन की बहाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फ़ीफ़ा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से फ़ोन पर बातचीत के बाद हुई है. सीबीएस के मुताबिक इस दौरान निलंबन पर बातचीत हुई थी.

क्या इस क़दम के बाद फ़ुटबॉल के इतिहास में एक नई मिसाल कायम हो गई है.

बालोगुन को राहत क्यों दी गई है, जबकि इस वर्ल्ड कप में मैदान से बाहर भेजे गए अन्य 11 खिलाड़ियों को निलंबन की सज़ा भुगतनी पड़ी है?

क्या इससे फ़ुटबॉल में रेड कार्ड के ख़िलाफ़ अपीलों की संख्या बढ़ेगी?

फ़ीफ़ा ने नहीं दिया स्पष्टीकरण

अब लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आख़िर ऐसा हुआ कैसे?

फ़ीफ़ा के नियमों के मुताबिक़ बालोगुन को "गंभीर फ़ाउल प्ले के लिए कम से कम दो मैचों का प्रतिबंध" मिलना चाहिए. इतना ही नहीं, वर्ल्ड कप के नियमों के अनुसार टीमों को रेड कार्ड के ख़िलाफ़ अपील करने की अनुमति नहीं है.

फ़ीफ़ा के बयान में बालोगुन पर लगे प्रतिबंध को निलंबित करने का कोई कारण या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया. इसमें केवल "फ़ीफ़ा अनुशासनात्मक संहिता के अनुच्छेद 27" का हवाला दिया गया.

अनुच्छेद 27 फ़ीफ़ा को "सज़ा को पूर्ण या आंशिक रूप से निलंबित करने" की अनुमति देता है.

यह एक व्यापक नियम है जो फ़ीफ़ा को प्रभावी रूप से बिना किसी अन्य मानदंड को पूरा किए, अपनी इच्छानुसार कोई भी निर्णय लेने की अनुमति देता है.

वर्ल्ड कप में अनुच्छेद 27 का प्रयोग इससे पहले कभी नहीं किया गया है.

इसके अलावा, बालोगुन पर लगा निलंबित प्रतिबंध अनुशासन संहिता के अनुसार दो मैचों का नहीं बल्कि केवल एक मैच का था. फ़ीफ़ा ने इसका भी कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है.

बीबीसी स्पोर्ट ने इस घटना के कारणों की पड़ताल की है.

लेकिन हमें इसका कोई कारण नहीं बताया गया. हमें बस इस टूर्नामेंट से पहले क्रिस्टियानो रोनाल्डो पर लगे निलंबन प्रतिबंध की ओर ध्यान दिलाया गया.

फ़ीफ़ा की अनुशासनात्मक संहिता के तहत, नवंबर में आयरलैंड के ख़िलाफ़ पुर्तगाल की 2-0 से क्वालीफाइंग हार के दौरान दारा ओ'शे को कोहनी मारने के लिए रोनाल्डो को तीन मैचों का प्रतिबंध मिलना चाहिए था.

उन्होंने आर्मेनिया के ख़िलाफ़ अंतिम क्वालीफायर में एक मैच खेला लेकिन प्रतिबंध के शेष दो मैच निलंबित कर दिए गए थे.

हालांकि, रोनाल्डो को क्वालीफाइंग मैच में रेड कार्ड मिला था. यह वर्ल्ड कप में मिला रेड कार्ड नहीं था.

रोनाल्डो ही नहीं, बल्कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें टूर्नामेंट से पहले खिलाड़ियों के प्रति कुछ नरमी बरती गई है.

2014 में फ्रांस के लॉरेंट कोसिएलनी को देखें, या इस वर्ल्ड कप से पहले इक्वाडोर के मोइसेस कैसिडो और अर्जेंटीना के निकोलस ओटामेंडी को देखें.

कम से कम रोनाल्डो के मामले में हमें कुछ जवाब दिया गया. फ़ीफ़ा ने कहा था कि उसने इस बात को ध्यान में रखा है कि "उनके (रोनाल्डो) अन्य 225 अंतरराष्ट्रीय मैचों में उन्हें कोई रेड कार्ड नहीं मिला है."

लेकिन बालोगुन के बारे में हमें कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया. इस वजह से अटकलों का बाज़ार गर्म हो गया.

तो यह एक स्पेशल केस क्यों था और रेड कार्ड पर सज़ा न देने का निर्णय किसने लिया?

बीबीसी स्पोर्ट को बताया गया है कि इस बात का कोई संकेत नहीं है कि रेफ़री ने निलंबन हटाने का अनुरोध किया था, या वीडियो सहायक रेफ़री प्रोटोकॉल का सम्मान नहीं किया गया था.

सज़ा न देने के फ़ैसले की वजहों के बारे में अमेरिका तो फ़ीफ़ा से पूछ सकता है लेकिन बेल्जियम नहीं.

बीबीसी स्पोर्ट के विश्लेषक और इंग्लैंड के पूर्व डिफेंडर मीका रिचर्ड्स ने इस सारे मामले को एक तमाशा बताया है.

उन्होंने कहा, "बालेगुन की सज़ा को एक साल के लिए निलंबित करना पूरे टूर्नामेंट का मज़ाक उड़ाने जैसा है. इसका मकसद बड़े सितारों को प्रतियोगिता में बनाए रखना है. यह कैसे संभव हो सकता है? फ़ीफ़ा से ये उम्मीद नहीं थी."

"इससे बहुत से लोगों के मन में कड़वाहट पैदा हो गई है."

ज़ाहिर है बेल्जियम ने इस पर आक्रोश व्यक्त किया है. रविवार को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि बालोगुन को खेलने की अनुमति दिए जाने से वे "हैरान" हैं.

बेल्जियम फुटबॉल एसोसिएशन ने कई नियमों और टूर्नामेंट से पहले आयोजित समन्वय बैठकों का हवाला दिया.

वे इस बात पर अड़े हैं कि यह निर्णय टूर्नामेंट के नियमों का उल्लंघन करता है. उनका कहना था कि नियमों के तहत जिस खिलाड़ी को रेड कार्ड दिखाया गया हो उसे "अपनी टीम के अगले मैच से स्वतः ही निलंबित कर दिया जाएगा."

उनका कहना है कि फ़ीफ़ा ने प्रतियोगिता नियमों को दरकिनार करने के लिए अपनी अनुशासनात्मक संहिता का इस्तेमाल किया.

बेल्जियम के मुख्य कोच रूडी गार्सिया ने एक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए इससे भी आगे बढ़कर कहा, "मुझे नहीं पता था कि फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में 5 जुलाई की जगह अब एक अप्रैल है, और वह अप्रैल फूल का दिन है."

"हम राष्ट्रीय टीम या महासंघ का बचाव नहीं कर रहे हैं, हम फुटबॉल का बचाव कर रहे हैं."

इस टूर्नामेंट से बाहर किए गए अन्य खिलाड़ी क्या सोच रहे होंगे?

क़तर के असीम मदीबो को ही ले लीजिए, जो एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना में शामिल थे जिसके कारण कनाडा के मिडफील्डर इस्माइल कोने का पैर टूट गया. यहां यह साफ़ था कि मडीबो ने कोई चुनौती ही नहीं दी, चोट संयोगवश लगी न कि रोकने की वजह से.

फिर भी फ़ीफ़ा ने मडीबो पर पांच मैचों का प्रतिबंध लगा दिया.

क्या बालोगुन का फ़ैसला एक मिसाल कायम करता है?

क्या बालोगुन को दिया गया रेड कार्ड अनुचित था? बिलकुल.

बालोगुन तारिक मुहारेमोविच को चुनौती दे रहे थे, और ग़लती से उनका पैर बोस्नियाई खिलाड़ी के टखने पर लग गया.

कठोर कहने का यह मतलब नहीं है कि यह एक ग़लत निर्णय था, या यह इतना गंभीर था कि फ़ीफ़ा को हस्तक्षेप करना ही पड़ा.

लेकिन सवाल ये है कि क्या फ़ीफ़ा को अब आकस्मिक घटना के कारण मिले रेड कार्ड के बाद निलंबन रद्द कर देना चाहिए?

अब कोच यह तर्क देंगे कि 'एक मिसाल कायम हो चुकी है, अब हमें उसमें निरंतरता बनाए रखनी चाहिए.'

कई साल पहले नियमों से 'इरादे' का तत्व हटा दिया गया था, और अब केवल चुनौती के परिणाम पर ही विचार किया जाता है.

ट्रंप की क्या भूमिका

फ़ीफ़ा की वर्ल्ड कप अनुशासनात्मक प्रक्रिया के मुख्य स्तंभों में से एक यह है कि आप अपील नहीं कर सकते. फिर फ़ीफ़ा ने मेजबान देश के स्टार खिलाड़ी के लिए विशेष व्यवस्था क्यों की है?

इस रेड कार्ड और निलंबन से अमेरिका में भारी हंगामा मच गया.

अमेरिका में यह दावा किया गया है कि स्ट्राइकर को दोहरी सज़ा दी गई. उनका कहना था कि बालोगुन ने बोस्निया के ख़िलाफ़ मैच के आख़िरी 27 मिनट नहीं खेले, और अब उन्हें अगले मैच में खेलने से भी रोका जा रहा है.

अमेरिकी मीडिया विश्लेषकों का कहना है कि यह घोर अन्याय था.

मीडिया और अमेरिकी सरकार की ओर से दबाव था. विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका को "रेड कार्ड से नुकसान हुआ है" और "अपील प्रक्रिया होनी चाहिए".

सूत्रों में से एक के अनुसार, इन्फेंटिनो ने राष्ट्रपति ट्रंप को बताया कि फ़ीफ़ा की अनुशासनात्मक समिति इस मामले की जांच करेगी.

व्हाइट हाउस के वर्ल्ड कप टास्क फोर्स के कार्यकारी निदेशक एंड्रयू गिउलियानी ने भी इस स्थिति के बारे में इन्फेंटिनो से बात की और वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक भी फ़ीफ़ा के साथ संपर्क में थे.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता लुटनिक और गिउलियानी ने सीबीएस न्यूज के टिप्पणी के अनुरोध पर तत्काल कोई जवाब नहीं दिया.

रविवार शाम को, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में "एक बड़े अन्याय को पलटने" के लिए फ़ीफ़ा को धन्यवाद दिया.

फ़ीफ़ा की नैतिकता समिति को पहले ही इन्फेंटिनो की जांच करने के लिए कहा जा चुका है. इन्फ़ेंटिनो पर आरोप है कि उन्होंने ट्रंप को 'फ़ीफ़ा शांति पुरस्कार' देकर फ़ीफ़ा के राजनीतिक तटस्थता के नियमों का उल्लंघन किया है.

फ़ीफ़ा के नियमों के मुताबिक़, फुटबॉल में राजनीतिक हस्तक्षेप की मनाही है. अमेरिकी प्रशासन के हस्तक्षेप से और भी कई सवालों के जवाब देने होंगे.

Offene Fragen

  • फ़ीफ़ा ने बालोगुन का प्रतिबंध क्यों निलंबित किया?
  • अनुच्छेद 27 का प्रयोग पहले क्यों नहीं किया गया?
  • अन्य 11 निलंबित खिलाड़ियों को राहत क्यों नहीं मिली?

Verwandte Themen

This article was originally published by BBC हिंदी.

Ähnliche Meldungen