होर्मुज़ स्ट्रेट को अब कौन कंट्रोल कर रहा है?
Auf einen Blick
अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर 60 दिनों के स्थाई समझौते पर बातचीत जारी है. समझौते के तहत अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा और ईरान कमर्शियल जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करेगा. यह जलमार्ग दुनिया का 20% तेल सप्लाई करता है.
KI-generierte Zusammenfassung
Warum es wichtig ist
होर्मुज़ स्ट्रेट फ़ारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है और दुनिया के तेल व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है. ईरान और अमेरिका के बीच हालिया संघर्षों ने इस जलमार्ग पर नियंत्रण को लेकर तनाव बढ़ा दिया था.
होर्मुज़ स्ट्रेट को अब कौन कंट्रोल कर रहा है?
प्रकाशित 4 घंटे पहले
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अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में संघर्ष ख़त्म करने के लिए एक समझौते पर सहमति बनी है.
साथ ही दोनों देशों के बीच अगले 60 दिनों के अंदर-अंदर स्थाई समझौता लागू करने के लिए बातचीत जारी है.
ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले के बाद से ही ये जलमार्ग प्रभावित हुआ है. दुनिया का लगभग 20% तेल आमतौर पर इसी जलडमरूमध्य से होकर गुज़रता है.
होर्मुज़ से सप्लाई प्रभावित होने की वजह से दुनियाभर में तेल और गैस के दामों में बढ़ोतरी हुई है. जंग के दौरान देखा गया जब ईरान और अमेरिका ने एक-दूसरे से जुड़े जहाज़ों पर हमले भी किए या फिर दोनों ने नाकेबंदी की.
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर जिन 14 बिंदुओं पर सहमति बनी है, उनमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य या होर्मुज़ स्ट्रेट का मुद्दा भी शामिल है.
दोनों देशों के बीच जिस मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टेंडिंग समझौते की बात कही जा रही है, उसका चौथा और पांचवां बिंदु होर्मुज़ स्ट्रेट से ही जुड़ा है.
चौथे बिंदु के मुताबिक़, अमेरिका "अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना शुरू कर देगा... और 30 दिनों के अंदर नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह ख़त्म कर देगा."
पांचवें बिंदु के मुताबिक़, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरान "60 दिनों तक बिना किसी चार्ज के कमर्शियल जहाज़ों के सुरक्षित आने-जाने को लेकर अपनी पूरी कोशिश करेगा."
होर्मुज़ स्ट्रेट क्या है?
होर्मुज़ स्ट्रेट एक जलडमरूमध्य है जो ओमान की खाड़ी और फ़ारस की खाड़ी को आपस में जोड़ता है.
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के नियमों के मुताबिक़, देश अपनी तटरेखा से समुद्री सीमा में 12 नॉटिकल मील (13.8 मील) तक नियंत्रण का अधिकार रखते हैं.
अपने सबसे संकरे हिस्से में, होर्मुज़ स्ट्रेट और उसकी शिपिंग लेन पूरी तरह ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जलसीमा के भीतर आते हैं. इस वजह से भी ये दोनों देश इस पर अपना दावा करते हैं.
ईरान की सेना इस इलाक़े में भारी दबदबा रखती है और सबसे संकरे समुद्री मार्ग ईरान के जलक्षेत्र में आते हैं, जिससे ईरान अक्सर अपनी रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाकर जहाज़ों को नियंत्रित करता है.
इस वजह से भी ये माना जा रहा था कि इस जंग के दौरान ईरान इस इलाक़े से गुज़रने वाले जहाज़ों से टोल वसूल रहा था. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे इनकार किया था.
ईरान और ओमान के इलाक़े के पानी से होकर जाने वाले एक प्राकृतिक जलमार्ग के तौर पर जहाज़ पहले से ही बिना पेमेंट के होर्मुज़ स्ट्रेट से आज़ादी से गुज़रते रहे हैं.
यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ़ द सी के तहत जहाज़ों को दूसरे देश के पानी से सुरक्षित गुज़रने की गारंटी है लेकिन ईरान और अमेरिका दोनों ही ने इस कन्वेंशन को मंज़ूरी नहीं दी है.
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका का मानना है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से बिना किसी रोक-टोक के गुज़रना प्रथागत अंतरराष्ट्रीय क़ानून का हिस्सा है.
पनामा और स्वेज़ जैसी कुछ इंसानों की बनाई नहरें कुछ ख़ास सर्विस के लिए टोल और फ़ीस लेती हैं.
इस जंग के दौरान ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट पर अपनी संप्रभुता दिखाने की कोशिश की है, जिसमें "पर्सियन गल्फ़ स्ट्रेट अथॉरिटी" बनाना भी शामिल है, जिसके बारे में उसने कहा था कि वह "सुरक्षित रूप से जाने के परमिट" को मैनेज करेगी.
ईरान ने जब होर्मुज़ पर किया अपना दावा
बीते महीने ईरान ने दावा किया था कि वो होर्मुज़ स्ट्रेट के आस-पास के इलाक़े को काफ़ी बढ़ा रहा है, जिस पर उसका मिलिट्री कंट्रोल है, ताकि वो इस ख़ास ट्रेड रूट पर अपनी संप्रभुता को साबित कर सके.
ईरान की नई बनी "पर्सियन गल्फ़ स्ट्रेट अथॉरिटी" के पब्लिश किए गए एक मैप में 22,000 स्क्वायर किलोमीटर से ज़्यादा इलाके में "ईरानी आर्म्ड फोर्सेज़ की निगरानी" का दावा किया गया.
यह ओमान और यूएई के जलक्षेत्र तक फैला हुआ था. यूएई ने ईरान के कंट्रोल के दावों को "सपनों के टुकड़ों के अलावा कुछ नहीं" बताया था.
ईरान की नई अथॉरिटी ने यह भी कहा था कि स्ट्रेट से होकर जाने वाले सभी ट्रांज़िट के लिए "पर्सियन गल्फ़ स्ट्रेट अथॉरिटी के साथ कोऑर्डिनेशन और ऑथराइज़ेशन की ज़रूरत होती है."
अमेरिका और खाड़ी के उसके साथी देश स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की ईरान की कोशिशों को बार-बार ख़ारिज करते रहे हैं. अमेरिका ने जहाज़ों से कहा था कि वे ईरान के नियमों का पालन न करें.
यूएई के राष्ट्रपति के कूटनीतिक सलाहकार अनवर गारगाश ने कहा था कि ईरान "एक साफ़ मिलिट्री हार से पैदा हुई एक नई सचाई को पवित्र करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन होर्मुज़ स्ट्रेट को कंट्रोल करने या यूएई की समुद्री संप्रभुता पर क़ब्ज़ा करने की कोशिशें सपनों के टुकड़ों के अलावा कुछ नहीं हैं."
समझौते के बाद अब किसका कंट्रोल
अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगी देश स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की ईरान की कोशिशों को बार-बार ख़ारिज करते रहे हैं.
रविवार को ईरान के साथ समझौते की घोषणा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि स्ट्रेट "टोल फ्री" होगा.
ईरान की फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने बताया था कि अमेरिका के साथ नए समझौते के तहत होर्मुज़ स्ट्रेट को आख़िरकार ईरान ओमान के साथ कोऑर्डिनेशन में मैनेज करेगा, जिसमें पानी के रास्ते से गुज़रने वाले जहाज़ों के लिए संभावित "सर्विस फ़ीस" भी शामिल है.
हालांकि यह साफ़ नहीं है कि ऐसी फ़ीस किस तरह की सर्विस के लिए देनी होगी.
ट्रेड एनालिटिक्स फ़र्म केप्लर में सीनियर ऑयल एनालिस्ट नवीन दास बीबीसी से कहते हैं कि स्ट्रेट का इस्तेमाल करने के लिए कोई भी नया पेमेंट सिस्टम "काम में एक और अड़चन डालेगा" क्योंकि इस स्ट्रेट से हर दिन न जाने कितने जहाज़ गुज़र सकते हैं, जिस वजह से इस पर "लॉजिस्टिकल लिमिट या रोक" लग सकती है.
नवीन दास ने आगे कहा कि कई सवाल अब भी बरक़रार हैं जैसे, "इसे कौन लागू कर रहा है? इसे कैसे लागू किया जाएगा? फ़ीस कैसे इकट्ठा की जाएगी? दूसरे खाड़ी देश इस बारे में क्या सोचते हैं?"
ईरान और अमेरिका के बीच एक स्थाई समझौते पर सहमति के लिए बातचीत के दौरान इनमें से कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह मुश्किल है कि तेहरान जहाज़ों को होर्मुज़ स्ट्रेट से उतनी आसानी से गुज़रने देगा जितनी वह लड़ाई शुरू होने से पहले देता था.
Worauf zu achten ist
KI-Ausblick — Möglichkeiten, keine Fakten
ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से संभावित 'सर्विस फीस' वसूल सकता है.
Wahrscheinlich · Mittelfristig
समझौते के बावजूद होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाजों का गुजरना पहले जितना आसान नहीं रहेगा.
Wahrscheinlich · Langfristig
Offene Fragen
- नई सर्विस फीस का स्वरूप क्या होगा?
- इसे कौन और कैसे लागू करेगा?
- अन्य खाड़ी देश इस पर क्या प्रतिक्रिया देंगे?
