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Back'कॉकरोच से छुटकारा नहीं मिलेगा': 'सीजेपी इज़ बैक' पर क्या कह रहे हैं लोग
'कॉकरोच से छुटकारा नहीं मिलेगा': 'सीजेपी इज़ बैक' पर क्या कह रहे हैं लोग
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BBC हिंदी22.05.2026Política6 dk okumaIndia

'कॉकरोच से छुटकारा नहीं मिलेगा': 'सीजेपी इज़ बैक' पर क्या कह रहे हैं लोग

En resumen

सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत के कॉकरोच वाले बयान के बाद सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) की चर्चा चरम पर है। सीजेपी का एक्स हैंडल भारत में बैन होने का दावा किया गया, लेकिन 'कॉकरोच इज़ बैक' के साथ नया हैंडल लॉन्च हुआ, जिसने लाखों फॉलोअर्स जुटाए।

Resumen generado por IA

Por qué importa

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से की थी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) नामक कैंपेन शुरू हुई। इस कैंपेन का एक्स हैंडल भारत में बैन कर दिया गया, लेकिन 'कॉकरोच इज़ बैक' के साथ नया हैंडल लॉन्च हुआ।

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‘कॉकरोच से छुटकारा नहीं मिलेगा’: ‘सीजेपी इज़ बैक’ पर क्या कह रहे हैं लोग

प्रकाशित 14 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 7 मिनट

सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत के कॉकरोच वाले बयान के बाद सोशल मीडिया पर चली कैंपेन 'कॉकरोच जनता पार्टी' की चर्चा चरम पर है.

गुरुवार को कैंपेन को चलाने वाले अभिजीत दीपके की ओर से दावा किया गया कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' का एक्स हैंडल भारत में नहीं दिख रहा है. इसे बैन कर दिया गया है.

लेकिन फिर कुछ ही घंटों बाद 'कॉकरोच इज़ बैक' के पोस्टर के साथ नया एक्स हैंडल शुरू कर दिया गया.

इस अकाउंट पर लिखा गया था, "आप क्या सोचते हैं, आपको हमसे छुटकारा मिल जाएगा."

लॉन्च होने के कुछ ही घंटों में इसके फ़ॉलोअर्स की संख्या एक लाख की संख्या को पार कर गई.

'कॉकरोच जनता पार्टी' कैंपेन की सोशल मीडिया में भी काफ़ी चर्चा है और लोग इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

'कॉकरोच इज बैक' पर क्या कह रहे हैं लोग

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, '' मैं कॉकरोच जनता पार्टी के तेज़ी से उभरने को लेकर बेहद उत्सुक हूं. इसने जिसने सिर्फ़ पांच दिनों में ही इंस्टाग्राम पर 1.5 करोड़ से ज़्यादा फॉलोअर्स हासिल कर लिए हैं,''

उन्होंने लिखा, ''मैं युवाओं की निराशा को समझता हूं और यह भी देख पा रहा हूं कि वे इससे क्यों जुड़ाव महसूस कर रहे हैं. यही वजह है कि एक्स पर इस अकाउंट को रोका जाना बेहद नुक़सानदेह और समझदारी से परे है.''

''युवाओं के पास अपनी भावनाएं व्यक्त करने का एक मंच होना चाहिए, इसलिए सीजेपी का अकाउंट बंद करने के बजाय उसे चलने दिया जाना चाहिए. लोकतंत्र में असहमति, हास्य, व्यंग्य और यहां तक कि नाराज़गी व्यक्त करने के लिए भी जगह होनी चाहिए.''

राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने बीबीसी से एक इंटरव्यू में कहा, "यह जो 'कॉकरोच जनता पार्टी' सोशल मीडिया पर एक मीम की तरह शुरू हुई, यह केवल हँसी-मजाक या गुस्सा नहीं है. देश के भीतर नीचे से एक सुगबुगाहट और छटपटाहट है क्योंकि व्यवस्था के बने-बनाए रास्ते और दरवाज़े बंद हो गए हैं. मजाक या चुटकुला हमेशा किसी न किसी गहरे दर्द से जुड़ा होता है, इसलिए हम इसका विश्लेषण मज़ाक में नहीं कर सकते. सरकार द्वारा इसे बैन करना एक गंभीर बदलाव की शुरुआत हो सकता है."

सीपीआईएमएल लिबरेशन ने एक्स पर पोस्ट कर कॉकरोच जनता पार्टी का बचाव किया है.

पार्टी ने एक्स पर लिखा, "क्या मोदी सरकार को लगता है कि कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल्स को ब्लॉक करके वह जेनज़ी को रोक सकती है?"

"क्या होगा अगर कॉकरोच जनता पार्टी, बीजेपी और नमो के हैंडल्स के ख़िलाफ़ 'अनफॉलो कैंपेन' शुरू कर दे? एक्स को इंटरनेट की आज़ादी का सम्मान करना चाहिए और बिना किसी देरी के कॉकरोच जनता पार्टी के हैंडल को बहाल करना चाहिए."

शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स पर लिखा, ''सोशल मीडिया पर बनी सीजेपी जैसी एक कल्पनात्मक सोच का जेन ज़ी की कल्पना और भावनाओं पर छा जाना इस बात का दुखद संकेत है कि युवाओं ने मौजूदा विपक्षी दलों से उम्मीद खोनी शुरू कर दी है".

'' साफ़ है कि बीजेपी के खिलाफ नाराज़गी मौजूद है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वोटर स्थापित विपक्षी पार्टियों के बजाय एक नई काल्पनिक पार्टी पर भरोसा जताना ज़्यादा पसंद कर रहे हैं.''

'द कॉकरोच यूथ' नाम के एक्स हैंडल से लिखा गया, ''एक तरफ पूरा सिस्टम और सारे नेता खड़े हैं. दूसरी तरफ सिर्फ एक कॉकरोच.लेकिन याद रखो, जब युवा जागता है तो सबसे बड़ा तंत्र भी हिल जाता है. द कॉकरोच यूथ -आवाज़ उन छात्रों की जो अब चुप नहीं बैठेंगे.''

हेलिक्साटाएचआर नाम के एक्स हैंडल पर कहा गया, ''अगली बार कॉकरोच जनता पार्टी की सरकार''

रविप्रकाश ऑफिशियल पर लिखा गया, '' हां, हम कॉकरोच हैं. अब ये वायरल हो गया है. कॉकरोच जनता पार्टी ज़िंदाबाद.''

काजल निषाद नाम के एक्स हैंडल से लिखा गया, ''आ गया स्वाद? देख ली युवाओं की शक्ति? और बोलेंगे युवाओं को कॉकरोच?? अरे जब सिस्टम ही सड़ा हुआ गटर हो चुका है तो फिर कॉकरोच ही पैदा होंगे ना.''

अनकोट ने लिखा, '' दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी को 4 दिनों में घुटनों पर ला दिया''

कैंपेन चलाने वाले अभिजीत दीपके का दावा

कॉकरोच जनता पार्टी कैंपेन को लॉन्च करने वाले अभिजीत दीपके ने गुरुवार को दावा किया था कि इस कैंपेन का एक्स हैंडल भारत में बैन कर दिया गया है.

उन्होंने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, "जिसका डर था वही हुआ. पहले इन्होंने हमारा अकाउंट हैक करने की कोशिश की. जब इनसे हैक नहीं हुआ तो इन्होंने हमारा ट्विटर हैंडल इंडिया में बंद कर दिया है. आप लोग सभी ट्विटर पर जाकर देख सकते हैं कि हमारा कॉकरोच जनता पार्टी का ऑफिशियल ट्विटर हैंडल भारत में किसी को भी नहीं दिख रहा है.''

उन्होंने कहा, ''मैं चाहता हूं कि आप लोग सिर्फ़ आवाज़ उठाएं और पूछें कि हमारा ट्विटर हैंडल बैन क्यों किया गया. इसमें ऐसा क्या लिखा था. हमने तो कोई गलत चीज नहीं लिखी थी. हम तो सिर्फ़ मिनिस्टर का इस्तीफ़ा मांग रहे थे. स्टुडेंट ने सुसाइड किया था. इसलिए हम मंत्री का इस्तीफ़ा मांग रहे थे. आपलोग सब सवाल पूछें कि ऐसा क्यों किया गया. आप इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएं.''

दरअसल सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के युवाओं और कॉकरोच को लेकर दिए गए बयान के बाद एक सोशल मीडिया कैंपेन 'कॉकरोच जनता पार्टी' शुरू की गई है. इसके इंस्टाग्राम हैंडल पर करीब एक करोड़ 90 लाख से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हैं.

कैसे शुरू हुई कॉकरोच जनता पार्टी कैंपेन

कॉकरोच जनता पार्टी कैंपेन की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के युवाओं और कॉकरोच को लेकर दिए गए बयान के बाद हुई.

हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को अपनी टिप्पणियों पर सफ़ाई जारी करते हुए कहा था कि मीडिया के एक वर्ग ने उनकी बातों को ग़लत तरीक़े से पेश किया.

कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट पर इसके संस्थापक और संयोजक की जानकारी दी गई है और उनका नाम अभिजीत दीपके है.

अभिजीत दीपके से बीबीसी न्यूज़ मराठी ने विस्तार से बात की है जिसमें उन्होंने बताया है कि इस तरह का सोशल मीडिया कैंपेन उन्होंने किस वजह से शुरू की.

इस तरह के सोशल मीडिया कैंपेन का आइडिया कहां से आया? इस सवाल पर अभिजीत दीपके कहते हैं, "मैं ट्विटर (अब एक्स) पर सीजेई (भारत के मुख्य न्यायाधीश) का बयान देख रहा था जहां पर वो सिस्टम की आलोचना करने और राय देने के लिए देश के युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से कर रहे थे."

"मैंने इसे बेहद हास्यास्पद समझा क्योंकि सीजेआई को देश के संविधान का संरक्षक माना जाता है. वो संविधान जो हर किसी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आज़ादी देता है. अब एक ऐसा शख़्स जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए वो कैसे युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से कर सकता है."

Preguntas abiertas

  • एक्स (ट्विटर) ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' का हैंडल भारत में क्यों बैन किया?
  • क्या यह बैन सरकार के दबाव में हुआ?
  • क्या 'कॉकरोच जनता पार्टी' का प्रभाव भविष्य में बढ़ेगा?
  • जस्टिस सूर्यकांत ने अपने बयान पर क्या सफाई दी थी?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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