Última hora
ARإجلاء عشرات الآلاف في فرنسا وإسبانيا مع اتساع حرائق الغاباتARرومانيا تسقط طائرة مسيّرة في مجالها الجوي للمرة الأولى منذ بدء حرب أوكرانياARالحرس الثوري الإيراني يعلن تدمير مقر أمريكي في الأردن ومنظومة باتريوت في أربيلARضربات إيرانية على قاعدة أمريكية في البحرين.. صفارات الإنذار وتصاعد الدخانARالتحالف العربي يعلن تنفيذ عملية عسكرية ضد أهداف حوثية في اليمنARترامب يعلن عن جريان محادثات مع إيران ويصفها بأكثر جديةARفرنسا تواجه حرائق غابات تاريخية.. ماكرون يفعل فريق الأزمات وطلب استعانة بالجيشARزيلينسكي: روسيا تستعد لموجة جديدة من التعبئة العسكرية هذا الخريفARترامب يضطر إلى التخلي عن طائرته الجديدة بسبب تهديد إيرانيAR«حماس» في مرحلة جديدة بعد خسارة معظم قادتها السياسيين والعسكريينARإجلاء عشرات الآلاف في فرنسا وإسبانيا مع اتساع حرائق الغاباتARرومانيا تسقط طائرة مسيّرة في مجالها الجوي للمرة الأولى منذ بدء حرب أوكرانياARالحرس الثوري الإيراني يعلن تدمير مقر أمريكي في الأردن ومنظومة باتريوت في أربيلARضربات إيرانية على قاعدة أمريكية في البحرين.. صفارات الإنذار وتصاعد الدخانARالتحالف العربي يعلن تنفيذ عملية عسكرية ضد أهداف حوثية في اليمنARترامب يعلن عن جريان محادثات مع إيران ويصفها بأكثر جديةARفرنسا تواجه حرائق غابات تاريخية.. ماكرون يفعل فريق الأزمات وطلب استعانة بالجيشARزيلينسكي: روسيا تستعد لموجة جديدة من التعبئة العسكرية هذا الخريفARترامب يضطر إلى التخلي عن طائرته الجديدة بسبب تهديد إيرانيAR«حماس» في مرحلة جديدة بعد خسارة معظم قادتها السياسيين والعسكريين
Newsgather
Atrásश्री अकाल तख़्त साहिब ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु गद्दार' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित किया
श्री अकाल तख़्त साहिब ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु गद्दार' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित किया
En desarrollo
BBC हिंदी16/6/2026Política7 min de lecturaIndia

श्री अकाल तख़्त साहिब ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु गद्दार' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित किया

En resumen

श्री अकाल तख़्त साहिब ने एक विवादित वीडियो मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु गद्दार' और 'खालसा पंथ विरोधी' करार दिया है। मुख्यमंत्री ने वीडियो को AI-जनित और फर्जी बताया है, लेकिन फोरेंसिक जांच में छेड़छाड़ का सबूत नहीं मिला।

Resumen generado por IA

Tamaño de fuente

प्रकाशित 3 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 9 मिनट

श्री अकाल तख़्त साहिब में सोमवार को पांच 'सिंह साहिबान' की एक बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु ग़द्दार' और 'खालसा पंथ विरोधी' क़रार दिया गया.

यह फ़ैसला एक विवादित वीडियो के मामले में लिया गया. मुख्यमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि ये वीडियो एआई (आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस) से तैयार किया गया और फ़र्ज़ी है.

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को एक वीडियो जारी कर इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा. उन्होंने वायरल वीडियो का साफ़तौर पर खंडन किया.

उन्होंने कहा कि जब वो श्री अकाल तख़्त साहिब के सामने पेश हुए थे, तब भी उन्होंने स्पष्ट किया था कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वो नहीं हैं.

सिंह साहिबान से मतलब सिख धर्म के पांच तख़्तों के पांच सर्वोच्च पदाधिकारियों, यानी जत्थेदारों से है. सिंह साहिबान धार्मिक आदेश (हुक्मनामा) जारी करते हैं और दुनियाभर के सिख समुदाय से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं.

ये पांच तख़्त हैं: श्री अकाल तख़्त साहिब (अमृतसर), तख़्त श्री केसगढ़ साहिब (आनंदपुर साहिब), तख़्त श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो), तख़्त श्री पटना साहिब (पटना, बिहार) और तख़्त श्री हजूर साहिब (नांदेड़, महाराष्ट्र).

'सियासी आकाओं की शह पर झूठा प्रोपेगेंडा'…

मंगलवार को जारी बयान में भगवंत मान ने कहा कि न उनकी लंबाई और न ही उनका शारीरिक गठन वीडियो में दिख रहे व्यक्ति से मेल खाता है.

भगवंत मान ने कहा, "मुझे हैरानी होती है कि धर्म के इतने ऊंचे पदों पर बैठे लोग अपने राजनीतिक आकाओं की शह पर इस तरह का झूठा प्रचार कर रहे हैं. वे मुझे बदनाम करने के लिए ऐसा कर रहे हैं. क्योंकि मैं पंजाब के पानी की रक्षा, गुरु की बानी की रक्षा, किसानों के हितों की रक्षा और पंजाब के युवाओं के भविष्य के लिए फ़ैसले ले रहा हूं, जिन्हें वे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं."

छोड़कर सबसे अधिक पढ़ी गईं आगे बढ़ें

सबसे अधिक पढ़ी गईं

समाप्त

मान ने कहा कि उन्हें बदनाम करने के लिए ऐसी रणनीति अपनाई जा रही है और इसमें धर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है.

उन्होंने यह भी कहा, "मैं श्री अकाल तख़्त साहिब को सर्वोच्च मानता हूं, लेकिन सिख समुदाय अच्छी तरह जानता है कि वहां राजनीतिक रूप से नियुक्त अधिकारी किस तरह के फ़ैसले लेते हैं."

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बेअदबी क़ानून को लेकर भी कहा कि श्री अकाल तख़्त साहिब और एसजीपीसी के पदाधिकारी पहले ऐसे क़ानून की मांग कर रहे थे, लेकिन जब सरकार ने क़ानून बनाया तो सवाल उठाया गया कि उनसे पूछे बिना यह क़ानून क्यों बनाया गया.

मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं नानक का नाम लेने वाली संगत से अपील करता हूं कि वे ऐसी नापाक गतिविधियों का हिस्सा न बनें. बाक़ी फ़ैसला संगत ही करेगी. जब तक आपने मुझे यह ज़िम्मेदारी दी है, मैं पंजाब के हित में फ़ैसले लेता रहूंगा."

अकाल तख़्त से क्या कहा गया?

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें

दिनभर: पूरा दिन,पूरी ख़बर (Dinbhar)

वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.

एपिसोड

समाप्त

सोमवार को अकाल तख़्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने कहा कि भारत सरकार से मान्यता प्राप्त दो फोरेंसिक प्रयोगशालाओं की जांच में वीडियो के साथ छेड़छाड़ या एआई के इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला.

उन्होंने कहा कि पांच सिंह साहिबान ने इस मामले में पंथिक संगठनों, विद्वानों और क़ानूनी विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा करने के बाद यह फ़ैसला लिया.

कार्यवाहक जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने एक बयान में दावा किया कि वीडियो में मुख्यमंत्री सिख धार्मिक प्रतीकों और जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीर के साथ आपत्तिजनक हरकतें करते दिखाई दे रहे हैं.

जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने कहा, "श्री अकाल तख़्त साहिब में आज हुई बैठक में इस मामले पर चर्चा की गई. इसमें धार्मिक और राजनीतिक पंथिक संगठनों, संप्रदायों, दलों, विद्वानों और क़ानूनी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया. सभी पंथिक हस्तियों ने राय दी कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह को गुरु का ग़द्दार और पंथ विरोधी घोषित किया जाना चाहिए."

"मुख्यमंत्री का पद बेहद सम्मानजनक होता है. उन्हें राज्य के हर नागरिक का प्रतिनिधित्व करना होता है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह ने वीडियो मामले में श्री अकाल तख़्त साहिब जाकर झूठ बोला."

उन्होंने आगे कहा, "सिख समुदाय की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए आज पांचों सिंह साहिबान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को गुरु का ग़द्दार और खालसा पंथ का दुश्मन घोषित करते हैं. खालसा पंथ को इस पर आंखें बंद नहीं करनी चाहिए."

इसके साथ ही, कार्यवाहक जत्थेदार ने पंजाब विधानसभा के सभी सिख विधायकों को बेअदबी संशोधन अधिनियम के मामले में 29 जून को तलब किया है.

आम आदमी पार्टी ने वीडियो के बारे में क्या कहा?

श्री अकाल तख़्त साहिब की ओर से जारी फोरेंसिक जांच रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने कहा कि रिपोर्ट में केवल यह बताया गया है कि संबंधित वीडियो असली है और इसमें एआई या किसी भी तरह की डिजिटल छेड़छाड़ नहीं की गई है.

पन्नू ने कहा, "रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति कौन है. क्या फोरेंसिक जांच से यह साबित होता है कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान हैं या स्थान और परिस्थितियां वही हैं, जैसा दावा किया गया है?"

उन्होंने कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट का दायरा केवल वीडियो की प्रामाणिकता तक सीमित है, न कि उसमें दिख रहे व्यक्ति की पहचान तय करने तक.

उन्होंने कहा, "आने वाले दिनों में हम इस मामले से जुड़े और तथ्य सार्वजनिक करेंगे और पूरी सच्चाई सामने आएगी."

पार्टी ने आरोप लगाया कि श्री अकाल तख़्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने सार्वजनिक रूप से पक्ष लेकर खुद को राजनीतिक विवाद का हिस्सा बना लिया है.

उधर अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले पर बयान दिया है.

एक्स पर पोस्ट में केजरीवाल ने लिखा - भगवंत मान के अच्छे कामों से बौखला कर विरोधी उनको झूठ बोलकर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं.

अकाल तख़्त के फ़ैसले का क्या मतलब है?

सिख इतिहासकार डॉ. सुखदयाल सिंह का कहना है कि इस फ़ैसले का मतलब है कि भगवंत मान का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए और जहां भी वे जाएं, उनका स्वागत नहीं किया जाना चाहिए.

वरिष्ठ पत्रकार और सिख मामलों के विशेषज्ञ जसपाल सिद्धू का कहना है कि जत्थेदार ने सीधे तौर पर यह नहीं कहा है कि भगवंत मान का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए.

इस फ़ैसले को राजनीतिक नज़रिए से देखते हुए सिद्धू कहते हैं, "यह सत्ता के सीधे दुरुपयोग जैसा लगता है. ऐसा फैसला नहीं लिया जाना चाहिए था."

डॉ. सुखदयाल सिंह का कहना है कि यह फैसला चुनाव से ठीक पहले आया है. ऐसे में इसे भगवंत मान को राजनीतिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है और वह अपने ख़िलाफ़ धर्म के इस्तेमाल को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत भी कर सकते हैं.

अमृतसर स्थित गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में सिख अध्ययन विभाग के निदेशक डॉ. अमरजीत सिंह कहते हैं, "मुख्यमंत्री भगवंत मान को ज़्यादा अवसर नहीं दिया गया, न ही कोई दंड दिया गया, लेकिन पंथ को यह संदेश दिया गया कि उन्हें सहयोग नहीं करना चाहिए. यह संदेश बहुत व्यापक है, लेकिन यह देखना बाकी है कि सिख संगत इस पर कैसी प्रतिक्रिया देगी."

डॉ. अमरजीत सिंह कहते हैं, "निश्चित रूप से, अकाल तक़्त सर्वोच्च संस्था है, लेकिन इतिहास में ऐसे कई निर्णय हैं जिन्हें संगत ने सही नहीं माना और राजनीतिक रूप से प्रेरित माना."

अमरजीत सिंह कहते हैं, "संगत ने जनरल डायर को सरोपा दिए जाने का विरोध किया. डायर ने 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में गोलीबारी का आदेश दिया था."

डॉ. अमरजीत सिंह कहते हैं कि अगर अमृतधारी सिख पर कोई आरोप लगता है तो उसे अकाल तख़्त साहिब में पेश होने को कहा जाता है. लेकिन जो व्यक्ति अमृतधारी नहीं है, उसकी गलती पर उसके विरुद्ध सामान्य आदेश जारी किया जाता है. उसे अकाल तख़्त के सामने पेश होने को नहीं बुलाया जाता.

वो कहते हैं, "गुरु गोविंद सिंह ने 1699 में अमृत लेने की प्रथा शुरू की थी. इसके तहत अगर कोई अमृतधारी धर्म की अवहेलना करता है, तो उसे तख़्त के सामने पेश होने को कहा जाता है लेकिन अन्य लोगों के ख़िलाफ़ सामान्य आदेश जारी किए जाते हैं. मिसाल के तौर पर डेरा सिरसा के प्रमुख राम रहीम के ख़िलाफ़ आदेश जारी किया गया था लेकिन उन्हें अकाल तख़्त में पेश होने को नहीं कहा गया था."

गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर और समाजशास्त्री परमजीत सिंह जज इस फैसले को राजनीतिक रूप से प्रभावित मानते हैं.

वो कहते हैं, "एक समय था जब सोहन सिंह जोश जैसे वामपंथी नेता भी एसजीपीसी के सदस्य थे, तब एसजीपीसी की व्यापक पहुंच थी, लेकिन अब सिख संस्थानों पर शिरोमणि अकाली दल का प्रभाव है."

तख्त श्री दमदमा साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी केवल सिंह कहते हैं, "किसी को भी हठपूर्वक धार्मिक नहीं होना चाहिए, दोनों पक्षों को बैठकर बातचीत के माध्यम से मामले को सुलझाना चाहिए."

वीडियो से जुड़ा मामला क्या है?

यह विवाद जनवरी 2026 की शुरुआत में सामने आया, जब श्री अकाल तख़्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को सिख आचार संहिता, अकाल तख़्त की सर्वोच्चता और "गुरु की गोलक" को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में तलब किया.

अकाल तख़्त की ओर से जारी पत्र में भगवंत मान से जुड़े कुछ आपत्तिजनक वीडियो का भी ज़िक्र किया गया, जिनमें उन पर सिख गुरुओं और जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीरों के साथ अनुचित गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया.

5 जनवरी 2026 को अकाल तख़्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने भगवंत मान को तलब करने का आदेश जारी किया.

15 जनवरी 2026 को अकाल तख़्त में पेश होकर भगवंत मान ने अपना पक्ष रखा. उन्होंने वीडियो को फ़र्ज़ी बताया. इसके बाद जांच, फोरेंसिक रिपोर्ट और अकाल तख़्त के फ़ैसले को लेकर विवाद और गहरा गया.

विपक्ष ने मान को घेरा

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा, "श्री अकाल तख़्त साहिब की ओर से कथित वीडियो की फोरेंसिक जांच के बाद भगवंत मान को पंथ विरोधी घोषित किया गया है और सिख समुदाय से उनसे दूरी बनाए रखने की अपील की गई है."

श्री अकाल तख़्त साहिब की इस घोषणा के बाद शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भगवंत मान पर सवाल उठाए.

उन्होंने कहा कि भगवंत मान श्री अकाल तख़्त साहिब गए और झूठ बोला कि वीडियो एआई से तैयार किया गया था, जबकि जांच में वीडियो सही पाया गया.

उन्होंने कहा, "कोई भी सिख इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता. सिख समुदाय को इस पर कड़ा फ़ैसला लेना चाहिए और इस मुख्यमंत्री को एक पल भी पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है."

Temas relacionados

This article was originally published by BBC हिंदी.

Noticias relacionadas

US President Donald Trump Attends Rescheduled White House Correspondents' Association Dinner
Política·hace 11 horas

US President Donald Trump Attends Rescheduled White House Correspondents' Association Dinner

US President Donald Trump attended the rescheduled White House Correspondents' Association dinner, three months after the event was postponed due to a shooting outside the original venue. The dinner, now held at the Waldorf Astoria under heightened security, aims to celebrate press freedom and raise funds for journalism scholarships, despite ongoing tensions between the Trump administration and the media over press access and freedom.

Times of India
2 min de lectura
Más sobre este temaभगवंत मान