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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सबसे ज़्यादा सवाल किस पर हैं, आरएसएस, वीएचपी या मुख्यमंत्री योगी पर?
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BBC हिंदी2/7/2026Política7 min de lecturaIndia

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सबसे ज़्यादा सवाल किस पर हैं, आरएसएस, वीएचपी या मुख्यमंत्री योगी पर?

En resumen

राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित चढ़ावा चोरी के मामले में आरएसएस, वीएचपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सवाल उठ रहे हैं। पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने गबन का आरोप लगाया है, जिसमें ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा और चंपत राय की भूमिका पर संदेह है।

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सबसे ज़्यादा सवाल किस पर हैं, आरएसएस, वीएचपी या मुख्यमंत्री योगी पर?

Author, रजनीश कुमार

पदनाम, बीबीसी संवाददाता

प्रकाशित एक मिनट पहले

पढ़ने का समय: 8 मिनट

महिपाल सिंह राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में जनवरी 2021 से मई 2022 तक लेखा प्रभारी थे.

महिपाल सिंह ने पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को दिए इंटरव्यू में बताया था कि उनकी ड्यूटी पुलिस चौकी के काउंटिंग सेंटर पर थी. यहाँ राम मंदिर के चढ़ावे में मिले कैश की गिनती होती थी.

महिपाल सिंह ने अभिषेक उपाध्याय से बातचीत में कहा था, ''रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप नाम के दो बैंक अधिकारी आया करते थे. 14 लड़के नोटों को अलग-अलग करते थे और मैं उसका प्रभारी था. मेरे सामने ही काउंटिंग होती. लेकिन वे लड़के रोज़ ज़्यादा नोट पैक करके ले जाते थे और पर्चे पर कम भरते थे. मुझे शुरू में पता नहीं चल पाया था. लेकिन बाद में पता चल गया कि ये वाउचर पर नोटों की गड्डियों की संख्या कम भरते हैं और ले ज़्यादा जाते हैं.''

महिपाल सिंह ने कहा, ''एक दिन मुझे शक हुआ तो मैंने बॉक्स खुलवाया. ये पाँच लाख रुपए ज़्यादा ले जा रहे थे. इसकी जानकारी मैंने गोपाल राव और चंपत राय भाई जी को दे दी थी. ये बात दिसंबर 2021 की है. लेकिन मेरी शिकायत का असर ये हुआ कि अनिल मिश्रा (ट्रस्टी) जी ने मेरी जगह पर एक और व्यक्ति को लगा दिया. फिर मैंने वहाँ जाना बंद कर दिया.''

महिपाल सिंह ने कहा, ''चंपत राय के ड्राइवर रहे टिन्नू यादव ही वाउचर पर हस्ताक्षर करते थे और इसी में हेर-फेर किया जाता था. टिन्नू यादव पर चंपत राय को बहुत भरोसा था और वह किसी से उनकी शिकायत सुनना पसंद नहीं करते थे. सीसीटीवी के फुटेज भी डिलीट कर दिए गए थे. आठ महीने की सीसीटीवी फुटेज डिलीट किए गए थे. मैंने पूरी बात राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र के आजीवन ट्रस्टी दीनेंद्र दास जी को बताई थी तो उन्होंने कहा था कि इसकी सज़ा प्रभु राम जल्द ही देंगे. ''

चंपत राय की भूमिका पर सवाल

अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है. महिपाल सिंह जिस टिन्नू यादव का नाम ले रहे हैं, वो भी इन आठ लोगों में शामिल हैं. राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चंपत राय समेत ज़्यादातर वे लोग हैं, जिनकी पृष्ठभूमि आरएसएस और विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) की है.

चंपत राय आरएसएस के प्रचारक हैं और फिर विश्व हिन्दू परिषद में महासचिव भी रहे. 2018 में राय वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष बन गए थे. जब चढ़ावे में कथित चोरी का मामला उठा तब चंपत राय ही ट्रस्ट के महासचिव थे और ट्रस्ट में इनका काफ़ी दख़ल था. पूरा मामला सामने आने के बाद चंपत राय ने ट्रस्ट से इस्तीफ़ा दे दिया है.

अनिल मिश्रा भी इस ट्रस्ट के सदस्य थे और गबन का मामला आने के बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया है. मिश्रा उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में आरएसएस के प्रांत सह-कार्यवाह हैं. महिपाल सिंह का दावा है कि उन्होंने गबन की पूरी बात गोपाल राव को भी बताई थी, राव राम मंदिर दर्शन के प्रभारी हैं. गोपाल राव भी आरएसएस के पदाधिकारी और वीएचपी में सचिव रहे हैं.

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समाप्त

पूरे मामले में आरएसएस और वीएचपी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है क्योंकि ये दोनों संगठन नैतिकता के ऊंचे मानदंड की बात करते हैं. विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार से मैंने पूछा कि दान में मिले रुपयों की गिनती आरएसएस और वीएचपी के पदाधिकारियों की मौजूदगी में होती थी, ऐसे में इस चोरी से दोनों संगठनों की छवि पर कैसा असर पड़ा है?

इसके जवाब में आलोक कुमार ने कहा, ''अयोध्या में मंदिर के चढ़ावे में चोरी दुर्भाग्यपूर्ण है. इससे हम सब बहुत दुखी हैं. दुनिया भर में हिन्दुओं को इससे धक्का लगा है. हमें लगता है कि इसका प्रायश्चित होना चाहिए. पुलिस इस जाँच को जल्दी अंजाम तक पहुँचाए. इसमें बड़े लोग हैं तो उन्हें भी छोड़ा नहीं जाना चाहिए. मामला फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चले और अब से चार-पाँच महीनों में अपराधियों को सज़ा मिले. बिना डर और अनुकंपा के जांच होगी तभी प्रायश्चित पूरा होगा.''

आरएसएस पर सवाल

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राम जन्मभूमि आंदोलन ने बीजेपी को सत्ता तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई थी. इसी आंदोलन ने आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों को मुख्यधारा में ला दिया था. लेकिन चढ़ावे में चोरी की बात सामने आने से इन संगठनों की साख और ईमानदारी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. चंपत राय के ख़िलाफ़ एफ़आईआर क्यों नहीं दर्ज की गई़?

ये सवाल आरएसएस सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर से पूछा तो उन्होंने कहा, ''हमने आधिकारिक रूप से अभी कुछ कहा नहीं है. ये बात सही है कि चंपत राय आरएसएस के प्रचारक हैं. इस मामले में हम जब आधिकारिक रूप से कुछ कहेंगे तो आपको भी पता चल जाएगा.''

इस सवाल के जवाब में वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने बीबीसी हिन्दी से कहा, ''बड़े से बड़े व्यक्ति के ख़िलाफ़ जांच होनी चाहिए. हमारी तरफ़ से कोई दबाव नहीं है. पुलिस स्वतंत्र होकर जांच करे.''

महिपाल सिंह ने दावा किया है कि चढ़ावे में चोरी 2021 से ही हो रही है. चढ़ावे की संपत्ति की देख-रेख राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट करता है. इस ट्रस्ट में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नहीं हैं लेकिन अयोध्या के ज़िलाधिकारी इसके सदस्य होते हैं और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि संजय प्रसाद भी ट्रस्टी हैं.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मुख्यमंत्री को इस गड़बड़ी का अंदाज़ा नहीं था? वरिष्ठ पत्रकार और योगी आदित्यनाथ पर एक किताब लिख चुके शरत प्रधान कहते हैं कि ऐसा संभव ही नहीं है कि मुख्यमंत्री को पता नहीं होगा.

क्या योगी को पता नहीं था?

शरत प्रधान कहते हैं, ''क्या अयोध्या के डीएम और संजय प्रसाद ने इन्हें कभी नहीं बताया? मुख्यमंत्री हर हफ़्ते अयोध्या आते हैं और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी? ये बात सही है कि चंपत राय और योगी में नहीं बनती है. योगी ख़ुद ट्रस्ट में अपना दख़ल चाहते थे लेकिन उन्हें इसमें शामिल नहीं किया गया.''

''ऐसा करने में चंपत राय की अहम भूमिका थी. योगी की पृष्ठभूमि न तो आरएसएस की रही है और न ही वीएचपी की. उनके गुरु महंत दिग्विजय नाथ और अवैद्यनाथ राम जन्मभूमि आंदोलन में शामिल थे. योगी भी इससे जुड़े थे. ऐसे में वह भी ट्रस्ट में अपना हक़ मानते थे लेकिन चंपत राय ने ऐसा नहीं होने दिया.''

शरत प्रधान कहते हैं, ''इस मामले में योगी, आरएसएस और बीजेपी बँट गए हैं. केंद्र सरकार किसी भी सूरत में चंपत राय को बचाना चाहती है. योगी चाहते हैं कि चंपत राय भी ना बचें. दोनों के बीच पुरानी अनबन है. जिस दिन ट्रस्ट बना, उस दिन से ही योगी से उनकी नहीं बनती थी. ये संभव है कि चंपत राय ने भी ट्रस्ट में योगी की भागीदारी रोकी होगी. आरएसएस भी चंपत राय को बचाने की कोशिश कर रहा है. चंपत राय के व्यक्तित्व में अहंकार बहुत रहा है और योगी के भीतर तो है ही. ऐसे में यह अहम की भी लड़ाई हो गई है.''

हालांकि आलोक कुमार इन आरोपों को ख़ारिज करते हैं कि पूरे मामले में योगी, बीजेपी, वीएचपी और आरएसएस के भीतर अंतर्विरोध है. आलोक कुमार कहते हैं, ''हम सब एक ही परिवार के सदस्य हैं. कोई अंतर्विरोध नहीं है. ट्रस्ट ने ही एसआईटी बनाने की मांग की थी और प्रदेश की सरकार ने तत्काल बना भी दी.''

महिपाल सिंह का इंटरव्यू करने वाले अभिषेक उपाध्याय कहते हैं कि यह मामला ट्रस्ट के संज्ञान में वर्षों से था लेकिन हर कोई इसे होने दे रहा था.

अभिषेक उपाध्याय कहते हैं, ''जब मैंने महिपाल सिंह का इंटरव्यू किया तो एक दिन बाद ही उनका फोन आया कि इस वीडियो को हटा दीजिए लेकिन मैंने इनकार कर दिया. उनके ऊपर बहुत दबाव था. दो हफ़्ते पहले तक उनसे अक्सर बात हो जाती थी लेकिन अब उनका मोबाइल हमेशा ऑफ़ रहता है.''

मैंने भी महिपाल सिंह को फोन किया तो उनका मोबाइल ऑफ़ था.

आरएसएस की साख को नुक़सान?

अभिषेक कहते हैं, ''ये बात सही है कि पूरे मामले में अगर सबसे ज़्यादा कोई बैकफुट पर है तो वो आरएसएस है. आरएसएस पब्लिक के बीच जो सादगी और ईमानदारी की बात करता था, उस पर इस मामले से कई गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. एक बात यह भी है कि जिस महिपाल सिंह ने मामले को पब्लिक किया, वह भी आरएसएस के ही हैं.''

22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यजमान बनकर अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा करवाई थी और इसका पूरा अनुष्ठान अनिल मिश्रा ने ही कराया था. वही अनिल मिश्रा भी चढ़ावे की चोरी के मामले में घेरे में हैं.

वरिष्ठ पत्रकार सुनीता एरोन कहती हैं कि इस मामले से सबसे ज़्यादा शर्मिंदगी विश्व हिन्दू परिषद और आरएसएस को हुई है. सुनीता एरोन कहती हैं, ''जितनी शर्मिंदगी आरएसएस और वीएचपी की हुई है, उतनी मुख्यमंत्री की नहीं हुई है. लेकिन सीएम जब कहते हैं कि वह भ्रष्टाचार नहीं होने देंगे तो उनकी भी ज़िम्मेदारी बनती है.''

सुनीता कहती हैं, ''देखिए चंपत राय के बारे में उनके क़रीबी पहली ज़ुबान में कह देते हैं कि बहुत घमंडी हैं. योगी के लिए भी ये बात कही जाती हैं. ऐसे में दोनों के बीच अहम का टकराव बहुत स्वाभाविक है. मैंने भी यह सुना है कि दोनों में अनबन थी. संतोष दुबे जैसे कारसेवक भी चोरी की बात उठा रहे थे. मेरा मानना है कि इस मामले में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री सख़्ती दिखाएंगे क्योंकि जब तक बड़ी मछलियों को नहीं पकड़ा जाएगा, तब तक कोई भरोसा नहीं करेगा. इस मुद्दे पर पर्दा डालना बहुत आसान नहीं होगा.''

हिंदुत्व और उसके समर्थकों को अब तीखे सवालों से असहज होना पड़ सकता है कि सब कुछ उनकी नाक के नीचे कैसे हुआ.

यानी गड़बड़ी की जानकारी किसे थी और किस स्तर तक थी, भले ही वे सीधे तौर पर गबन में शामिल न रहे हों.

अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में बीजेपी के लिए ज़रूरी होगा कि वह तेज़ी से जांच पूरी कराए, दोषियों की पहचान करे और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करे.

ट्रस्ट में वीएचपी के कई सदस्य और राम मंदिर आंदोलन से लंबे समय से जुड़े लोग बड़ी संख्या में मौजूद हैं.

वीएचपी के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन से मैंने पूछा कि कई लोग आरोप लगा रहे हैं कि चंपत राय को जान-बूझकर बचाया जा रहा है.

इसके जवाब में उन्होंने कहा, ''चंपत जी कितने ज़िम्मेदार है, यह जाँच के बाद ही पता चलेगा. जवाबदेही थी, इसीलिए उन्होंने इस्तीफ़ा दिया. कुछ लोग चाहते हैं कि चंपत जी को देखते ही गोली मार दिया जाए, तो ये संभव नहीं है. दोषी साबित होने के बाद ही सज़ा मिलेगी.''

सुरेंद्र जैन को लगता है कि इस मामले में आरएसएस और वीएचपी के प्रति लोगों का संदेह नहीं बढ़ेगा. जैन कहते हैं, ''मैं मानता हूँ कि ग़लती हुई है लेकिन जाँच के बाद सज़ा भी मिलेगी.''

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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