Última hora
FRAttentat à la Marche des fiertés de Berlin : au moins 1 mort et 29 blessésFRIncendie à Lège-Cap-Ferret : Une nuit d'enfer pour les pompiers et les riverainsFRExplosion à la distillerie Montebello à Petit-Bourg : plusieurs blessés et forte émotionFRGuerre en Ukraine : 10 morts dans une attaque russe près de Kiev, des sanctions EU contournéesFRTadej Pogacar domine le Tour de France avec une 5e victoire d'étape à l'Alpe d'HuezFRIncendie en Gironde : Évacuation maritime du Cap Ferret face à la progression du feuFRIncendies en France : La situation « très défavorable » en GirondeFRIncendies en Gironde et Landes : Macron déploie les Armées, 1 000 militaires sur le terrainFRIncendies près de Bordeaux : transports perturbés, trafic ferroviaire interrompuFRUn « orage de feu » (pyrocumulonimbus) observé pour la première fois en France, dans la GirondeFRAttentat à la Marche des fiertés de Berlin : au moins 1 mort et 29 blessésFRIncendie à Lège-Cap-Ferret : Une nuit d'enfer pour les pompiers et les riverainsFRExplosion à la distillerie Montebello à Petit-Bourg : plusieurs blessés et forte émotionFRGuerre en Ukraine : 10 morts dans une attaque russe près de Kiev, des sanctions EU contournéesFRTadej Pogacar domine le Tour de France avec une 5e victoire d'étape à l'Alpe d'HuezFRIncendie en Gironde : Évacuation maritime du Cap Ferret face à la progression du feuFRIncendies en France : La situation « très défavorable » en GirondeFRIncendies en Gironde et Landes : Macron déploie les Armées, 1 000 militaires sur le terrainFRIncendies près de Bordeaux : transports perturbés, trafic ferroviaire interrompuFRUn « orage de feu » (pyrocumulonimbus) observé pour la première fois en France, dans la Gironde
Newsgather
Atrásभारत में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच में देरी: खाली पद और राज्यों की प्राथमिकताएं
भारत में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच में देरी: खाली पद और राज्यों की प्राथमिकताएं
En desarrollo
BBC हिंदी21/5/2026Política8 min de lecturaIndia

भारत में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच में देरी: खाली पद और राज्यों की प्राथमिकताएं

En resumen

भारत में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की नियमित जांच नहीं हो पा रही है क्योंकि भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) में हजारों पद खाली हैं। 2017 में CAG की रिपोर्ट में 73% संविदा कर्मचारी थे, और 2026 तक 39% पद खाली हैं। राज्यों द्वारा प्राथमिकता न देना और लंबी भर्ती प्रक्रिया इसके मुख्य कारण हैं।

Resumen generado por IA

Tamaño de fuente

बाज़ार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की क्वालिटी की नियमित जांच क्यों नहीं हो पा रही है?

Author, उमंग पोद्दार

पदनाम, बीबीसी संवाददाता

प्रकाशित 21 मई 2026, 12:39 IST

पढ़ने का समय: 10 मिनट

आए दिन 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया' यानी भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफ़एसएसएआई) के बारे में सोशल मीडिया पर चर्चा द‍िखाई देती है.

जब कभी नक़ली पनीर की बरामदगी, खाने-पीने के सामान की क्वालिटी या मिलावटी दूध से जुड़ी चर्चा होती है तो लोगों का सवाल रहता है कि एफ़एसएसएआई क्या कर रहा है.

एफ़एसएसएआई साल 2008 में बना एक सरकारी संस्थान है. यह खाद्य सुरक्षा मानकों को तय करता है. उन्हें राज्य सरकारों के साथ मिल कर लागू करता है. खाने-पीने के सामान में मिलावट की जाँच के ल‍िए निरीक्षण भी करता है. एफ़एसएसएआई के कामकाज से जुड़े एक मुद्दे पर हमेशा बात होती है – वह है इसमें पड़े खाली पदों की.

इस कहानी में हम आँकड़ों के ज़रिए यह जानने की कोशिश करेंगे कि वर्षों से यह संख्या कहाँ रही है और समझेंगे हैं कि इससे खाद्य पदार्थों के निरीक्षण पर क्या असर पड़ सकता है.

एफ़एसएसएआई में ख़ाली पड़े पद

क़रीब दस साल पहले साल 2017 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की एफ़एसएसएआई पर एक विस्तृत रिपोर्ट आई थी.

उसमें सीएजी ने एफ़एसएसएआई के कामकाज में अनेक खामियाँ बताई थीं. जैसे, कई मुद्दों पर रेगुलेशन का न होना, एफ़एसएसएआई का समय पर असुरक्षित खाने के सामान का लाइसेंस कैंसिल नहीं करना और वक़्त पर सर्वे नहीं करना…वग़ैरह.

अपनी रिपोर्ट में सीएजी ने लिखा था कि एफ़एसएसएआई की स्थापना के 10 साल के बाद भी नियुक्ति से जुड़े नियम तय नहीं किए गए थे. साथ ही कहा कि एफ़एसएसएआई में 356 स्‍वीकृत पद थे लेकिन उसमें केवल 115 न‍ियम‍ित कर्मचारी थे और 261 संव‍िदा (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारी.

कुल मिलाकर, एफ़एसएसएआई में 73 प्रतिशत लोग संव‍िदा पर काम कर रहे थे.

छोड़कर सबसे अधिक पढ़ी गईं आगे बढ़ें

सबसे अधिक पढ़ी गईं

समाप्त

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें

दिनभर: पूरा दिन,पूरी ख़बर (Dinbhar)

वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.

एपिसोड

समाप्त

साथ ही, दो समूहों के अफ़सरों की कमी पर सीएजी ने ज़ोर दिया था. एक थे, 'डेजिग्नेटेड अफ़सर'. इनकी ज़िम्मेदारी होती है खाद्य व्यवसाय को चलाने के लिए लाइसेंस जारी करना या रद्द करना, टेस्टिंग करवाना... वग़ैरह.

दूसरे थे, 'फ़ूड सेफ्टी अफ़सर'. इनकी ज़िम्मेदारी होती है खाने के सैंपल इकट्ठा करना, शिकायतों की जाँच करना और अपने क्षेत्र में खाद्य व्यवसायों की सूची रखना… वग़ैरह.

एफ़एसएसएआई की गाइडलाइन के मुताबिक़, हर ज़‍िले में एक 'डेजिग्नेटेड अफ़सर' होना चाहिए. हर ग्रामीण क्षेत्र के ब्लॉक में एक 'फ़ूड सेफ्टी अफ़सर' होना चाहिए. वहीं, शहरों में हर एक हज़ार खाद्य व्यवसायों पर एक 'फ़ूड सेफ़्टी अफ़सर' होना चाहिए.

खाद्य व्यवसायों को फ़ूड बिज़नेस भी कहा जाता है.

इनमें निजी, सरकारी, प्रॉफ़‍िट या नॉट-फ़ॉर-प्रॉफ़‍िट संस्थान आते हैं जो खाने की मैनुफैक्चरिंग, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन, डिस्ट्रीब्यूशन और आयात में जुड़े हुए हैं.

यहाँ तक कि खानपान की सेवाएँ और खाद्य सामग्री की बिक्री से जुड़े संस्थान भी खाद्य व्यवसाय की श्रेणी में आते हैं.

हर राज्य सरकार को एक 'कमिश्नर ऑफ़ फ़ूड सेफ़्टी' नियुक्त करना होता है. कमिश्नर डेजिग्नेटेड अफ़सर और फ़ूड सेफ्टी अफ़सर को नियुक्त करते हैं.

सीएजी ने 12 राज्यों का मुआयना करने पर पाया था कि उनमें पाँच प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत तक डेजिग्नेटेड अफ़सरों की कमी थी. और उसके मुताब‍िक़, जहाँ 17 हज़ार से ज़्यादा फ़ूड सेफ्टी अफ़सरों की ज़रूरत थी, वहाँ केवल करीब तीन हज़ार अफ़सर थे.

अब क्या हाल है?

ये बात थी 2017 की. हालाँकि, उसके बाद भी हाल के आँकड़े दिखाते हैं कि एफ़एसएसएआई में अफ़सरों की पर्याप्त तादाद नहीं है.

इस साल मार्च में राज्यसभा में कांग्रेस के अध्यक्ष मल्‍ल‍िकार्जुन खड़गे ने भी एफ़एसएसएआई में नियुक्तियों से जुड़ा सवाल पूछा था.

सरकार ने बताया कि एफ़एसएसएआई में अभी 822 स्‍वीकृत पद हैं. लेकिन एक जनवरी 2026 तक इसमें 320 पद खाली थे. यानी करीब 39% पद खाली हैं. भरे हुए पद में यह साफ़ नहीं था कि कितने फ़ुल-टाइम कर्मचारी हैं और कितने संव‍िदा कर्मचारी हैं.

सरकार के जवाब को देखें तो पता चलता है क‍ि खाली पदों की संख्या पिछले पाँच सालों से बढ़ती जा रही है और साल 2026 में यह संख्या इस दौर में सबसे ज़्यादा है. साल 2022 में 271 खाली पद थे तो साल 2023 में 275, साल 2024 में 286 और साल 2025 में तीन सौ.

वहीं, डेजिग्नेटेड अफ़सरों की संख्या पहले से बेहतर हुई है. सरकार ने बताया कि ऐसे अफ़सरों के 718 पदों में से 668 पदों पर लोग भर्ती हैं.

हालाँकि, फ़ूड सेफ्टी अफ़सर की तादाद अब भी कम है. क़रीब 4,200 स्‍वीकृत पद में से महज़ क़रीब तीन हज़ार पदों पर अफ़सरों की नियुक्ति हुई है यानी क़रीब 1,200 पद खाली हैं.

साल 2017 से लेकर अब तक फ़ूड सेफ़्टी अफसर की तादाद में ख़ास बढ़ोतरी नहीं हुई है. उस वक़्त सीएजी ने कहा था कि ऐसे क़रीब 17 हज़ार अफ़सरों की ज़रूरत है.

बीबीसी हिन्दी ने एफ़एसएसएआई से इस स‍िलस‍िले में ताज़ा आँकड़े जानने और उनके कामकाज के बारे में समझने के लिए ईमेल और व्‍हाट्सएप के ज़र‍िए संपर्क किया. हालाँकि, हमें उनसे जवाब नहीं मिला. जब भी उनसे जवाब म‍िलेगा, वह इस र‍िपोर्ट में जोड़ा जाएगा.

इसका क्या असर होता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि अफ़सरों की कमी का सबसे बड़ा असर एफ़एसएसएआई के नियमों को ज़मीन पर लागू करने में होता है. एफ़एसएसएआई की वेबसाइट के मुताबिक़, भारत में साठ लाख से ज़्यादा खाद्य व्यवसायों के पास एफ़एसएसएआई रजिस्ट्रेशन हैं.

हालाँकि, साल 2016 में एफ़एसएसएआई के एक अधिकारी ने कहा था कि व्यवसायों की संख्या असल में करीब पाँच करोड़ हो सकती है. तो इतने व्यवसायों पर निगरानी रखने की मुख्य ज़िम्मेदारी कुछ हज़ार अफ़सरों पर है.

सीएजी ने भी अपनी रिपोर्ट में दस राज्यों में जब क़रीब छह लाख से ज़्यादा खाद्य व्यवसायों को देखा तो पाया कि उसमें क़रीब एक लाख व्यवसायों में पाँच सालों में कोई न‍िरीक्षण नहीं हुआ है.

इसके साथ उन्होंने पाया कि पाँच सालों में सात लाख से ज़्यादा व्यवसायों में केवल 52 हज़ार खाने के सैंपलों को जाँच के लिए भेजा गया था.

जॉर्ज चेरियन, 'कंज्यूमर्स प्रोटेक्शन एसोसिएशन' नाम की संस्था के वर्किंग प्रेसिडेंट हैं. वे क़रीब दस साल तक एफ़एसएसएआई की सेंट्रल एडवाइज़री कमेटी के सदस्य भी रह चुके हैं.

उनका कहना है, "पर्याप्त लोगों का न होना भारत में खाने की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है."

उन्होंने कहा कि अभी कोई घटना होने के बाद खाने के व्यवसायों पर कार्रवाई होती है. लेकिन, घटना होने के पहले उसे रोकने के लिए जानकारी एकत्र करने और बाज़ार पर निगरानी करने पर ध्यान कम होता है.

उनका कहना है, "लोगों की कमी के लिए मैं एफ़एसएसएआई या केंद्र को दोषी नहीं समझता हूँ. इसमें राज्यों की बड़ी भूमिका होती है और वे खाने की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं देते."

उन्होंने कहा कि एफ़एसएसएआई के तय नियमों को लागू करने की पूरी ज़िम्मेदारी फ़ूड सेफ़्टी अफ़सर की होती है. इन्हें नियुक्त करने की ज़िम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है.

आशिम सान्याल, 'वॉल्‍यंटरी ऑर्गेनाइज़ेशन इन इंटरेस्ट ऑफ़ कंज्यूमर एजुकेशन' के मैनेजिंग ट्रस्टी और सेक्रेटरी हैं. वे भी एफ़एसएसएआई की सेंट्रल एडवाइज़री कमेटी के सदस्य रह चुके हैं.

उन्होंने कहा, "कई राज्यों में अलग से फ़ूड कमिश्नर भी नहीं हैं. ऐसे लोगों को कमिश्नर बनाया जाता है जिनके पास और भी कोई 'पोर्टफ़ोलियो' हैं."

साल 2025 की एक पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी रिपोर्ट में लिखा है कि केवल 10 राज्यों में अलग से फ़ूड सेफ्टी डिपार्मेंट है. बाक़ी में फ़ूड सेफ्टी के साथ ड्रग्स का डिपार्टमेंट जुड़ा हुआ है.

वे कहते हैं, "मैं पिछले 15 सालों से देख रहा हूँ. राज्य और केंद्र के स्तर पर पर्याप्त लोगों का नहीं होना खाद्य सुरक्षा पर अमल करने में सबसे बड़ी बाधा है."

उन्होंने कहा कि एफ़एसएसएआई को भी सक्षम लोगों को अपने पास रोकने में संघर्ष करना पड़ता है.

साथ ही, उन्होंने कहा, "एफ़एसएसएआई के चेयरपर्सन की पोस्ट भी बहुत समय तक खाली थी."

एक रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2021 से अब तक तक एफ़एसएसएआई के पास 'फुल-टाइम चेयरपर्सन' नहीं है.

पवन अग्रवाल साल 2016 से 2020 तक एफ़एसएसएआई के सीईओ रह चुके हैं. उनका कहना था कि एफ़एसएसएआई में केंद्र में क़रीब पांच सौ अफ़सर होना पर्याप्त है.

उन्होंने कहा, "यह देखना ज़्यादा ज़रूरी है कि अगर कोई महत्वपूर्ण पद खाली है तो उसे जल्‍दी भरा जाए बजाए क‍ि सभी आठ से ज़्यादा पद भरने की च‍िंता की जाए."

उन्होंने कहा कि राज्यों के स्तर पर पर्याप्त फ़ूड सेफ्टी अफ़सर का न होना 'चिंता का विषय' है. उनका कहना है, "कई राज्य फ़ूड सेफ़्टी के काम को महत्व नहीं देते."

हालाँकि, उनके मुताबिक भारत में पाँच से छह हज़ार फ़ूड सेफ़्टी अफ़सर पर्याप्त रहेंगे.

उनका मानना था कि केवल फ़ूड सेफ़्टी अफ़सरों की संख्या बढ़ाने से खाने-पीने के सामानों पर निगरानी बेहतर नहीं होगी, बल्कि ये भी देखना होगा कि जो अफ़सर आ रहे हैं, वे कुशल हों.

उनके मुताबिक़ खाने से जुड़े व्यवसायों में फ़ूड सेफ़्टी का 'कल्चर' बनाना ज़्यादा ज़रूरी है. साथ ही, तकनीक के ज़र‍िए नमूना इकट्ठा करना और खाने की गुणवत्‍ता पर निगरानी रखना, यह भी ज़रूरी है.

क्यों नहीं हो रहीं नियुक्तियाँ?

विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं देते इसलिए ये पद ख़ाली रहते हैं.

आशिम सान्याल ने कहा, "किसी भी सरकारी पोस्ट में लोगों को भर्ती करने की लंबी प्रक्रिया होती है. उसमें भी वक़्त लगता है. समय पर वैकेंसी नहीं आती."

इसके साथ उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को फ़ूड सेफ़्टी अफ़सर के लिए ट्रेनिंग भी दी जाती है.

उनका कहना है, "किसी भी व्यक्ति को ट्रेन करने में भी क़रीब एक साल का वक़्त लग सकता है. तो इसलिए चीज़ें जल्दी आगे नहीं बढ़तीं."

राज्यों पर नज़र

साल 2025 में अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में दिए गए इंटरव्यू में महाराष्ट्र के फ़ूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर राजेश जे. नार्वेकर ने कहा था कि महाराष्ट्र को 1100 फ़ूड सेफ़्टी अफसरों की ज़रूरत है.

लेकिन उस वक़्त उनके पास केवल 130 अफ़सर थे और क़रीब दो सौ अफ़सर ट्रेनिंग में थे. साथ ही उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र में ही 11 लाख खाने के व्यवसाय हैं, तो सबका निरीक्षण करना संभव नहीं है.

हर साल एफ़एसएसएआई भी अलग-अलग बिंदुओं के आधार पर राज्यों की खाद्य सुरक्षा की रैंकिंग निकालता है. इस रैंकिंग में एफ़एसएसएआई यह देखता है कि राज्यों की खाद्य सुरक्षा की क्या स्‍थ‍ित‍ि है.

साल 2023-24 की रिपोर्ट एफ़एसएसएआई की वेबसाइट पर उपलब्ध सबसे नवीनतम रिपोर्ट है.

इसमें केरल, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर और गुजरात सबसे ऊपर हैं. जबकि आंध्र प्रदेश, झारखंड, मणिपुर, लद्दाख, मिज़ोरम और लक्षद्वीप सबसे नीचे हैं.

Temas relacionados

This article was originally published by BBC हिंदी.

Noticias relacionadas

US President Donald Trump Attends Rescheduled White House Correspondents' Association Dinner
Política·hace 22 horas

US President Donald Trump Attends Rescheduled White House Correspondents' Association Dinner

US President Donald Trump attended the rescheduled White House Correspondents' Association dinner, three months after the event was postponed due to a shooting outside the original venue. The dinner, now held at the Waldorf Astoria under heightened security, aims to celebrate press freedom and raise funds for journalism scholarships, despite ongoing tensions between the Trump administration and the media over press access and freedom.

Times of India
2 min de lectura
Más sobre este temaFSSAI