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37-year-old woman posed as an autistic child to defraud families in Brazil
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BBC हिंदी11.06.2026Crime5 dk okumaIndia

37-year-old woman posed as an autistic child to defraud families in Brazil

En resumen

  • A 37-year-old woman, Amanda Maria Souza de Oliveira, has been arrested in Brazil for posing as a 12-year-old autistic girl to defraud families.
  • She allegedly lived with one family for 14 months, using a baby bottle and toys to maintain her deception.

Resumen generado por IA

Por qué importa

A 37-year-old woman in Brazil, Amanda Maria Souza de Oliveira, has been arrested for impersonating a 12-year-old autistic girl to defraud families. She allegedly lived with one family for 14 months, using deceptive tactics and claiming physical abnormalities due to forced hormone treatments.

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Author, वीतोर तावारेस और इआरा दिनीज़

पदनाम, बीबीसी न्यूज़, ब्राज़ील

प्रकाशित 32 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 7 मिनट

जब एक लड़की ने मदद की गुहार लगाते हुए कहा कि वह 12 साल की है, उत्पीड़न से बचकर भागी है और बिल्कुल अकेली है, तो ब्राज़ील में लोगों ने उसकी मदद के लिए अपने घरों के दरवाजे खोल दिए.

लेकिन ब्राज़ील के अधिकारियों ने 'गैब्रिएल' की एक बिल्कुल अलग सच्चाई उजागर की है. उनका कहना है कि वह वास्तव में 37 वर्षीय एक महिला थी, जो खुद को एक असहाय ऑटिस्टिक बच्ची बताकर लोगों को धोखा दे रही थी.

पुलिस ने तीन जून को बताया कि उन्होंने उस महिला को गिरफ्तार कर लिया है. अदालत के दस्तावेज़ों में उनकी पहचान अमांडा मारिया सूज़ा डी ओलिवेरा के रूप में की गई है. उन पर धोखाधड़ी और झूठी पहचान का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है.

जांचकर्ताओं के अनुसार, ओलिवेरा ने 14 महीनों तक एक परिवार के साथ झूठी पहचान के तहत रहकर समय बिताया.

यह मामला ब्राज़ील में सुर्खियों में है. पुलिस का कहना है कि उस पर साओ पाउलो, रियो डी जनेरियो, मिनास जेराइस, रियो ग्रांडे दो सुल और गोयास राज्यों में इसी तरह की धोखाधड़ी करने का संदेह है.

पुलिस ने एक बयान में कहा, "बच्ची की भूमिका को विश्वसनीय बनाने के लिए संदिग्ध नियमित रूप से दूध पीने वाली बोतल और खिलौनों का इस्तेमाल करती थी और बच्चों जैसी हरकतें करती थी."

"वह उसके वयस्क दिखते चेहरे पर लोगों को यह कहकर समझाने का प्रयास करती थी कि बचपन में जबरन हार्मोन दिए जाने की वजह से उसकी शारीरिक बनावट ऐसी हो गई है."

जांच अधिकारी रोडरिगो गुसो ने बीबीसी न्यूज़ ब्राज़ील को बताया कि इस धोखाधड़ी का पता तब चला, जब जिस परिवार ने उसे अपने घर में शरण दी थी, उसके एक रिश्तेदार को उस पर शक हुआ. उस रिश्तेदार ने इंटरनेट पर खोजबीन की और लगभग इसी तरह के एक मामले की रिपोर्ट देखी.

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समाप्त

मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन

दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ जानकारी का मिलान करने के बाद रोडरिगो गुसो ने पुष्टि की कि दोनों मामलों में वही शामिल थीं.

उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी के समय संदिग्ध ने धोखाधड़ी करने की बात स्वीकार कर ली थी और यह भी माना था कि वह अक्सर झूठ बोलती रही हैं.

उन्होंने बीबीसी न्यूज़ ब्राज़ील से कहा, "उसमें ऐसी किसी स्थिति के संकेत नहीं दिखे जिससे मानसिक समस्या की वजह से अपराध होने का पता चलता हो. वह पूरी तरह समझदार, सहयोगी और तार्किक ढंग से सोचने वाली थीं."

ओलिवेरा के वकील राफ़ेल लुइस सिवर्ट ने बताया कि उन्होंने उसकी मानसिक स्थिति का आकलन करने के लिए मनोवैज्ञानिक जांच (मेंटल हेल्थ इवैल्युएशन) कराने का अनुरोध किया था, जिसे अदालत ने मंज़ूर कर लिया है.

उन्होंने कहा कि अब वह जांच के नतीजों का इंतज़ार करेंगे और उसके बाद ही आगे की कानूनी रणनीति तय की जाएगी.

रियो डी जनेरियो में उत्पीड़न का शिकार और ऑटिस्टिक बच्चों की सहायता करने वाली एक चैरिटी चलाने वाली दो महिलाओं ने बीबीसी को बताया कि इसी महिला ने 2023 में एक अलग नाम का इस्तेमाल कर उन्हें भी धोखा दिया था.

विवियन हेनरिक्स, जो माओज क्यू अबेनओम कॉम आमोर नामक संस्था चलाती हैं. वह कहती हैं कि उनकी मुलाकात ओलिवेरा से पहली बार संस्था के सोशल मीडिया पेज के माध्यम से हुई थी. उस समय ओलिवेरा ने अपना नाम 'डूडा' बताया था.

हेनरिक्स के अनुसार, ओलिवेरा ने दावा किया था कि वह ब्राज़ील के उत्तर-पूर्वी राज्य सेआरा से उत्पीड़न से बचकर भागी है.

उनके अनुसार ओलिवेरा का कहना था कि उसके पिता ने उसे जबरन वेश्यावृत्ति में धकेला था और हार्मोन ट्रीटमेंट कराया था. उसका कहना था कि इसी कारण वह अपनी वास्तविक उम्र से कहीं अधिक बड़ी दिखाई देती है.

हेनरिक्स कहती हैं, "जब उसने अपनी कहानी सुनाई, तो मैं बहुत डर गई थी, क्योंकि मैं पहले से ही इस तरह के मामलों से जुड़ी रहती हूँ."

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उसकी कहानी से प्रभावित होकर हेनरिक्स और उनकी सहयोगी रेनाता मैगलहाइस ने ओलिवेरा के लिए एक छोटा-सा फ्लैट किराये पर लिया और उसकी देखभाल शुरू कर दी.

हेनरिक्स बताती हैं, "वह एक किशोरी जैसी लगती थी. वह बहुत बच्चों की तरह बात करती थी, कहती थी कि उसे ऑटिज्म है और हमेशा हुड पहनकर रहती थी."

अगले एक महीने के दौरान दोनों महिलाओं का उसके साथ भावनात्मक जुड़ाव बन गया. उनका कहना है कि ओलिवेरा बच्चों जैसी हरकतें करती थी, वह दूध की बोतल, और बच्चों का खाना मांगती थी, लेकिन कभी पैसे नहीं मांगती थी.

मैगलहाइस के अनुसार, वह उनसे बार-बार अनुरोध करती थी कि उसे चाइल्ड प्रोटेक्शन काउंसिल के पास न ले जाया जाए, क्योंकि उसे डर था कि उसे वापस सेआरा भेज दिया जाएगा.

दोनों महिलाओं का कहना है कि उसके शरीर पर कुछ ऐसे परेशान करने वाले शारीरिक संकेत भी दिखाई देते थे, जिनसे उसकी कहानी सच लगने लगी थी.

उनके अनुसार, वे उसे एक्स-रे कराने ले गईं, जिसमें उसके शरीर में 200 से अधिक सुइयां फंसी हुई दिखाई दीं. ओलिवेरा ने दावा किया था कि उसके पिता ने जादू-टोने से जुड़े अनुष्ठानों के दौरान ये सुइयाँ उसके शरीर में चुभोई थीं.

मैगलहाइस कहती हैं, "यह बेहद भयावह था."

वह आगे कहती हैं, "मैंने उसे स्नेह दिया, उसकी देखभाल की, उसे खाना दिया. मुझे उस पर शक करने की कोई वजह ही नहीं लगी."

शक तब पैदा हुआ जब 'डूडा' अलग-अलग लोगों के साथ अलग तरह का व्यवहार करने लगी.

मैगलहाइस के अनुसार, वह भावनात्मक रूप से अत्यधिक निर्भर हो जाती थी और अगर उसे अकेला छोड़ दिया जाता, तो खुद को नुकसान पहुँचाने की धमकी देती . वह लगातार लोगों का ध्यान अपनी ओर बनाए रखने की मांग करती थी.

मैगलहाइस कहती हैं, "उसने मेरी मानसिक सेहत और मेरी आर्थिक स्थिति को बर्बाद कर दिया. उसने मुझ पर इतना दबाव डाला कि मैं अपने बच्चों से भी दूर हो गई."

हालांकि, हेनरिक्स का कहना है कि उनके साथ रहते हुए ओलिवेरा का व्यवहार सामान्य और स्थिर बना रहा.

यही विरोधाभास संदेह का कारण बना और अंततः दोनों महिलाओं ने पुलिस से संपर्क किया. जांच के बाद पुलिस ने पूरे धोखे का पर्दाफाश कर दिया.

रियो में मामले की जांच का नेतृत्व करने वाली अधिकारी मोनिका एरियाल ने बीबीसी न्यूज़ ब्राज़ील को बताया कि ओलिवेरा के फोन में इंटरनेट सर्च हिस्ट्री मिली थी, जिसमें "ऑटिस्टिक लोग कैसे व्यवहार करते हैं" और "उत्पीड़न के शिकार व्यक्ति की तरह कैसे दिखें" जैसी खोज शामिल थीं.

'बेबस महसूस करती हूं'

ओलिवेरा को गिरफ़्तार किया गया और पूछताछ के दौरान उसने धोखाधड़ी स्वीकार भी कर ली. लेकिन अदालत ने फैसला दिया कि मुकदमे की प्रक्रिया चलने तक वह ज़मानत पर बाहर रह सकती है.

बाद में अभियोजकों ने उसके ख़िलाफ़ आरोप पत्र दायर किया, लेकिन इसके बाद अधिकारी उसका पता लगाने में असफल रहे.

एरियाल का कहना है कि ऐसे मामलों में अभियुक्तों को हिरासत में रखना 'मुश्किल' होता है, क्योंकि अदालतें धोखाधड़ी को ऐसा अपराध मानती हैं जिसमें हिंसा या गंभीर धमकी शामिल नहीं होती.

मैगलहाइस कहती हैं कि यह देखकर वह खुद को 'बेबस' महसूस करती हैं कि दूसरे लोग भी उसी धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं. वह उम्मीद करती हैं कि आखिरकार न्याय मिलेगा.

Qué observar

Perspectiva de IA — posibilidades, no hechos

  • Oliveira will undergo a psychological evaluation as requested by her lawyer.

    Muy probable · En semanas

  • Oliveira may face further charges if additional victims come forward.

    Probable · En meses

  • The legal proceedings against Oliveira will be complex due to the nature of the alleged fraud and her release on bail.

    Probable · En meses

Preguntas abiertas

  • What was Oliveira's motive for the repeated deceptions?
  • How many families has Oliveira defrauded in total?
  • What are the specific charges and potential penalties Oliveira faces?
  • Will Oliveira be apprehended again after being released on bail?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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