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चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या
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BBC हिंदी1/7/2026Crime6 min de lecturaIndia

चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या

En resumen

चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की राजस्थान की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या कर दी गई. हत्या का आरोप उसी बैरक में बंद कैदी विष्णु जाट पर है. परिजनों ने सीबीआई जांच और सुरक्षा की मांग को लेकर शव लेने से इनकार कर दिया था.

Resumen generado por IA

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राजस्थान की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में सोमवार को चंबल के डकैत जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई. हत्या का आरोप उसी बैरक में बंद कैदी विष्णु जाट पर है.

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में विष्णु जाट ने हत्या करने की बात स्वीकार की है. घटना के बाद जगन के शव को ज़िला अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया, जहाँ उनके परिजनों ने दिनभर धरना दिया.

वे हत्या की सीबीआई जांच करवाने, परिवार को सुरक्षा देने, समेत अन्य मांगों को लेकर धरने पर बैठे रहे. मंगलवार की शाम उनकी कुछ मांगों पर पुलिस के साथ सहमति बनने के बाद वे शव ले जाने पर राज़ी हुए.

चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की जेल में हुई हत्या ने न केवल जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि एक बार फिर उस डकैत की कहानी को चर्चा में ला दिया है, जिसका नाम तीन राज्यों के बीहड़ों में दशकों तक भय का पर्याय रहा.

धौलपुर में भी जगन गुर्जर के परिजनों ने ज़िला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर परिवार की सुरक्षा की मांग की है.

उधर, जगन गुर्जर के परिजनों के साथ शव लेने अजमेर गए बाड़ी पुलिस थाना प्रभारी देवेंद्र शर्मा ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया है कि "प्रशासन के साथ परिजनों की सहमति बन गई है."

उन्होंने कहा है, "परिवार को सुरक्षा देने की मांग पर सहमति बनी है. जगन गुर्जर के बेटे आसाराम को सुरक्षा गार्ड दिया जाएगा और अजमेर जेल में बंद जगन के छोटे भाई को अन्य जेल में स्थानांतरित किया जाएगा. जेल अधिकारियों और जेल प्रशासन के खिलाफ जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी."

थाना प्रभारी के मुताबिक, "परिजनों की मांग पर जगन गुर्जर के अंतिम संस्कार में उनके भाई पप्पू गुर्जर, धौलपुर जेल में बंद लाल सिंह और पान सिंह को शामिल होने की अनुमति मिलेगी. इसके साथ ही तत्कालीन बाड़ी एसएचओ की जांच की जाएगी."

परिजन मंगलवार देर शाम को अपना धरना ख़त्म करके लौट गए हैं, मगर उनकी मांगों पर बनी सहमति को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं मिल सकी है.

कौन थे जगन गुर्जर?

धौलपुर ज़िले के बाड़ी थाना क्षेत्र के भवूतिपुरा गांव में एक सामान्य किसान परिवार में जन्मे जगन गुर्जर का बचपन साधारण था.

आगे चलकर जगन गुर्जर का नाम चंबल के सबसे चर्चित डकैतों में शामिल हो गया. राजस्थान, मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश के चंबल बीहड़ों में दशकों तक उनका ख़ौफ़ रहा.

पुलिस अधिकारियों और स्थानीय लोगों का मानना है कि चंबल के बीहड़ों में सक्रिय रहे डकैतों में वह आख़िरी बड़ा नाम थे.

जगन गुर्जर की तीन पत्नियां हैं. उन्होंने अपनी पहली पत्नी को बाड़ी विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव भी लड़वाया था लेकिन वह हार गईं.

जगन ख़ुद भी राजनीति में आने के इच्छुक थे लेकिन आपराधिक छवि और लंबित मुक़दमों के कारण ऐसा संभव नहीं हुआ.

उनकी एक पत्नी कोमलेश भी दस्यु गतिविधियों के कारण चर्चाओं में रही हैं. जगन अपने चार भाइयों में तीसरे नंबर के थे.

उनके सबसे छोटे भाई पप्पू गुर्जर भी अजमेर जेल में बंद हैं, जबकि दो अन्य भाई भरतपुर जेल में सजा काट रहे हैं.

हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या से उठे सवाल

राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद जगन गुर्जर की हत्या से जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद हनुमान बेनीवाल ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है.

हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या होने को लेकर बीबीसी ने राजस्थान के डीजी (जेल) अशोक कुमार राठौड़ से सवाल किया, जिसका उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया.

उन्होंने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "यह हत्या सोमवार सुबह लगभग 11 बजे से दोपहर तीन बजे के बीच हुई है. मामले की जांच जारी है."

वहीं, अजमेर के पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला ने बीबीसी को बताया कि जगन गुर्जर के साथ एक ही सेल में बंद विष्णु जाट के खिलाफ हत्या के आरोप में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है.

उन्होंने बताया कि "गमछे की मदद से गला दबाकर हत्या की गई."

हालांकि पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि विष्णु जाट ने जगन गुर्जर की हत्या क्यों की और क्या दोनों के बीच कोई संबंध था.

पुलिस के अनुसार, इस मामले का अभियुक्त विष्णु जाट पहले से एक हत्या के मामले में जेल में सजा काट रहा है.

पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाल ने बताया, "इस मामले की न्यायिक मजिस्ट्रेट स्तर पर जांच की जा रही है, जबकि पुलिस अपनी अलग से जांच कर रही है."

धौलपुर के पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने बताया कि जगन के गांव में स्थिति सामान्य है और एहतियातन पुलिस निगरानी रखी जा रही है.

परिवार और पुलिस के बीच मांगों को लेकर सहमति बनने से पहले कई घंटों तक जगन गुर्जर के बेटे आसाराम और अन्य परिजन अजमेर जिला अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठे रहे.

परिजनों की मांग थी कि जगन के भाई पप्पू गुर्जर को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी जाए, जिसे स्वीकार कर लिया गया है.

परिजनों ने यह भी मांग की है कि बाड़ी पुलिस थाने में दर्ज एक पुराने मामले में जगन गुर्जर को पहले हिरासत में लेने के बाद जेल भेजा गया था. इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए.

कैसे डकैत बने जगन गुर्जर

धौलपुर के पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से फ़ोन पर बातचीत में कहा है कि जगन गुर्जर के खिलाफ राजस्थान, मध्य प्रदेश और यूपी के अलग-अलग पुलिस थानों में करीब 128 मामले दर्ज हैं, जो हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, डकैती और लूट जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े हैं. करीब 70 मामलों में उन्हें बरी कर दिया गया.

जगन गुर्जर से जुड़े धौलपुर के एक शख़्स ने सुरक्षा का हवाला देकर नाम न छापने की शर्त पर बताया, "साल 1994 में जगन गुर्जर के बहनोई की हत्या हुई थी. इसी घटना ने अपराध की दुनिया में उनके प्रवेश की शुरुआत में अहम भूमिका निभाई."

उन्होंने आगे बताया, "अपने बहनोई की हत्या का बदला लेने के लिए जगन ने तीन लोगों की हत्या की. इसके बाद वह लगातार गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल होता चला गया."

धौलपुर में पुलिस अधीक्षक रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बीबीसी से कहा है, "जगन को पकड़ने के लिए कई बार हमने बीहड़ों में दबिश दी और कई बार मुठभेड़ हुईं. लेकिन चंबल के बीहड़ और तीन राज्यों की सीमाओं की भौगोलिक स्थिति की उन्हें अच्छी जानकारी थी, इसका फ़ायदा उन्हें अक्सर मिलता था."

उन्होंने कहा, "जगन गुर्जर ने चार बार आत्मसमर्पण भी किया. हालांकि, ज़मानत पर बाहर आने के बाद वह कई बड़ी घटनाओं को अंजाम देते रहे. जगन गुर्जर का खौफ़ इतना था कि उनके खिलाफ कोई गवाही देने ही नहीं आता था. यह एक बड़ा कारण रहा कि वह कई मामलों में बरी भी हो गए."

एक धमकी से देश में रहे चर्चाओं में

साल 2008 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित महल को उड़ाने की कथित धमकी देने के बाद जगन गुर्जर देशभर में चर्चाओं में आए.

उस दौरान धमकी के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने वसुंधरा राजे के महल पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात कर दिए थे.

साल 2019 में बाड़ी कस्बे में एक दुकानदार से विवाद के बाद बंदूक के दम पर मुख्य बाज़ार को बंद कराने और फ़ायरिंग की घटना ने भी उन्हें चर्चा में ला दिया.

बाड़ी से कांग्रेस के तत्कालीन विधायक गिर्राज मलिंगा ने बीबीसी से कहा, "मैंने उस दौरान इस मामले की पुलिस में शिकायत दी, जिसके बाद जगन गुर्जर ने मुझे भी धमकी दी थी."

2019 में जमानत पर बाहर आए जगन गुर्जर पर दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाने का आरोप भी लगा था. इस मामले के राष्ट्रीय सुर्खियों में आने के बाद वह फिर चर्चा में रहे.

ऐसे कई आपराधिक रिकॉर्ड हैं, जिनमें वह जमानत पर बाहर आने के बाद भी आपराधिक घटनाओं में शामिल रहे.

राजनीति में आने की थी इच्छा

वरिष्ठ पत्रकार हर्ष खटाना ने कई बार जगन गुर्जर का इंटरव्यू किया है. वे बताते हैं, "साल 2019 की बातचीत में जगन ने कहा था कि वह अपराध की दुनिया छोड़कर सामान्य जीवन और राजनीति में आना चाहते थे."

इधर, मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठे जगन गुर्जर के बेटे आसाराम ने पिता की हत्या को साज़िश बताया है.

उन्होंने कहा, "हत्या पूरी प्लानिंग के साथ की गई है. यह सिर्फ़ एक इंसान का काम नहीं हो सकता. मेरे पिता हट्टे-कट्टे इंसान थे. जब सेवर जेल में उन्हें मारने की साज़िश हुई थी, तब वे 15 लोगों पर भारी पड़े थे. उनकी हत्या में जेल प्रशासन की मिली भगत है."

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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