Última hora
TRKıbrıs'ta Yeni Diplomasi Süreci: 5+1 Formatı ve Türkiye'nin RolüINTLJapan Condemns Putin's Visit to Disputed Kuril IslandsDEClacton-on-Sea: Farages Wahlkampf in einer Stadt, die ihre beste Zeit hinter sich hatARمشرعون ديمقراطيون يطالبون بإجابات بشأن ظروف بحارة حاملة الطائرات الأمريكية "يو إس إس أبراهام لينكولن"ESDos semanas después de la entrada masiva de inmigrantes en Ceuta, Sánchez no vuelve a visitar la ciudadTRKırım'da Bombalı Saldırı: Rus Subay Hayatını KaybettiTRSavunma Bakanı Katz: 'Yerleşimci Şiddeti Gibi Bir Şey Yok'CN日本股市專家:長久生存關鍵在「不賺錢的準備」DEBefristete Arbeitsverträge in Deutschland: Anteil sinkt auf 6 ProzentTRTCMB Haftalık Para ve Banka İstatistiklerini Açıkladı: Döviz ve Altın Rezervleri ArttıTRKıbrıs'ta Yeni Diplomasi Süreci: 5+1 Formatı ve Türkiye'nin RolüINTLJapan Condemns Putin's Visit to Disputed Kuril IslandsDEClacton-on-Sea: Farages Wahlkampf in einer Stadt, die ihre beste Zeit hinter sich hatARمشرعون ديمقراطيون يطالبون بإجابات بشأن ظروف بحارة حاملة الطائرات الأمريكية "يو إس إس أبراهام لينكولن"ESDos semanas después de la entrada masiva de inmigrantes en Ceuta, Sánchez no vuelve a visitar la ciudadTRKırım'da Bombalı Saldırı: Rus Subay Hayatını KaybettiTRSavunma Bakanı Katz: 'Yerleşimci Şiddeti Gibi Bir Şey Yok'CN日本股市專家:長久生存關鍵在「不賺錢的準備」DEBefristete Arbeitsverträge in Deutschland: Anteil sinkt auf 6 ProzentTRTCMB Haftalık Para ve Banka İstatistiklerini Açıkladı: Döviz ve Altın Rezervleri Arttı
Newsgather
Atrásधूप के फ़ायदे और नुक़सान: हमें वास्तव में कितनी धूप की जरूरत होती है?
धूप के फ़ायदे और नुक़सान: हमें वास्तव में कितनी धूप की जरूरत होती है?
Salud
BBC हिंदीhace 16 horasSalud6 min de lecturaIndia

धूप के फ़ायदे और नुक़सान: हमें वास्तव में कितनी धूप की जरूरत होती है?

कुछ लोगों के लिए गर्मियों में रोजाना कुछ मिनट धूप में रहना काफ़ी है, लेकिन सूरज के साथ हमारा रिश्ता अब जटिल हो गया है। जानिए धूप के फ़ायदे और जोखिम।

En resumen

धूप हमारे मानसिक स्वास्थ्य, विटामिन डी और इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाती है, लेकिन अत्यधिक धूप से त्वचा कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार सीमित समय और बार-बार धूप में रहना फायदेमंद हो सकता है।

Resumen generado por IA

Por qué importa

ऐतिहासिक रूप से 1923 में कोको शनेल के कारण टैनिंग लोकप्रिय हुई। आधुनिक समय में त्वचा कैंसर के मामलों के कारण धूप को लेकर नजरिया बदला है।

Tamaño de fuente

कुछ लोगों के लिए गर्मियों में रोजाना कुछ मिनट धूप में रहना ही काफ़ी है, जबकि कुछ लोगों को इससे कहीं ज्यादा समय की जरूरत होती है.

1923 में भूमध्यसागरीय समुद्री यात्रा से लौटने के बाद कोको शनेल की सांवली त्वचा वाली तस्वीरों ने टैनिंग और धूप सेंकने के चलन को लोकप्रिय बनाया.

उनका टैन स्टेटस सिंबल बन गया और इससे पश्चिमी देशों में धूप को लेकर लोगों का नज़रिया बदल गया.

1900 के शुरुआती दौर से लेकर उस सदी के मध्य तक हेलियोथेरेपी यानी इलाज के लिए धूप के इस्तेमाल का चलन था.

सेनेटोरियम में रिकेट्स और टीबी जैसी बीमारियों के इलाज के लिए धूप का इस्तेमाल किया जाता था और लोगों को "स्वस्थ टैन" पाने के लिए धूप में रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था.

एक सदी बाद सूरज के साथ हमारा रिश्ता कहीं ज्यादा जटिल हो गया है. पिछले 50 वर्षों में त्वचा कैंसर के बढ़ते मामलों ने चिकित्सा जगत को अपना नज़रिया बदलने पर मजबूर किया है.

पब्लिक हेल्थ अभियानों में अब धूप से बचने और सनस्क्रीन के इस्तेमाल पर ख़ासा जोर दिया जाता है.

इस बात के पर्याप्त प्रमाण आज भी मौजूद हैं कि बहुत ज्यादा धूप में रहने से त्वचा कैंसर का ख़तरा बढ़ता है.

लेकिन हाल के वर्षों में यह भी पाया गया है कि दिन में सीमित समय के लिए धूप में रहना हमारे लिए फ़ायदेमंद हो सकता है.

इससे मानसिक स्वास्थ्य, विटामिन डी का स्तर और इम्यून सिस्टम बेहतर हो सकता है.

अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि इससे कुछ ख़ास तरह के कैंसर का ख़तरा कम हो सकता है, हृदय और रक्त वाहिकाओं की सेहत बेहतर हो सकती है और याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और नींद में सुधार हो सकता है.

तो सवाल यह है कि हम धूप के इन फ़ायदों को लेते हुए इसके नुक़सान से कैसे बच सकते हैं? और आख़िर हमें वास्तव में कितनी धूप की जरूरत होती है?

हमें धूप की जरूरत क्यों होती है?

मध्यम मात्रा में धूप में रहने से शरीर विटामिन डी बनाता है. यह हड्डियों की सेहत और मांसपेशियों के कामकाज के लिए ज़रूरी है.

धूप ब्लड प्रेशर भी कम करती है. जब अल्ट्रा वॉयलेट किरणें हमारी त्वचा पर पड़ती हैं, तो वे शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड के स्राव को बढ़ाती हैं.

इससे रक्त वाहिकाएं फैलती हैं और ब्लड प्रेशर कम होता है. इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा घट सकता है.

20 साल तक 29,518 स्वीडिश महिलाओं पर किए गए एक अहम अध्ययन में पाया गया कि जो महिलाएं धूप से बचती थीं, उनमें सभी कारणों से होने वाली मौत की दर सबसे ज्यादा धूप लेने वाले समूह की तुलना में दोगुनी थी.

ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी में फिजियोलॉजी की प्रोफेसर रेबेका मेसन कहती हैं कि शरीर में पर्याप्त विटामिन डी का स्तर होने से सूजन को कम करने, शरीर में घुसने वाले रोगाणुओं से मुकाबला करने और प्रतिरक्षा तंत्र को इस तरह नियंत्रित करने में मदद मिलती है कि वह शरीर की अपनी कोशिकाओं पर हमला न करे.

धूप में रहने से नींद बेहतर होने और दिमाग की सेहत में सुधार होने के प्रमाण मिले हैं.

दिन में ज्यादा प्राकृतिक रोशनी के संपर्क में रहने से सोचने-समझने की क्षमता, प्रतिक्रिया देने की गति और याददाश्त बेहतर हो सकती है

इसके उलट, दिन की प्राकृतिक रोशनी का पर्याप्त संपर्क न होने से अवसाद के लक्षण, खराब मूड और अनिद्रा का ख़तरा बढ़ सकता है.

हमें कितनी धूप की जरूरत है?

उम्र, भौगोलिक स्थिति और त्वचा के रंग के हिसाब से सलाह अलग-अलग हो सकती है. लेकिन विशेषज्ञ आम तौर पर कम समय के लिए, बार-बार धूप में रहने की सलाह देते हैं.

मेसन कहती हैं कि विटामिन डी बनाने के लिहाज से धूप में रहना "दिन के बीच में, थोड़ी-थोड़ी देर के लिए" सबसे प्रभावी होता है. इस समय यूवीबी किरणों का स्तर सबसे ज्यादा होता है.

हल्की त्वचा वाले लोगों के लिए मेसन सप्ताह के ज्यादातर दिनों में नियमित रूप से थोड़ी देर धूप लेने की सलाह देती हैं.

इसके लिए हाथ, बांह या पैर कुछ मिनटों के लिए खुले रखे जा सकते हैं. जिन इलाकों में अल्ट्रा वॉयलेट किरणों का स्तर बहुत ज्यादा होता है, वहां यह धूप सुबह या दोपहर के बीच के समय लेनी चाहिए.

गहरी त्वचा वाले लोगों को काफी ज्यादा समय धूप में रहने की जरूरत पड़ सकती है.

इसकी वजह यह है कि त्वचा में मेलानिन की मात्रा ज्यादा होने के कारण सूर्य की रोशनी से विटामिन डी बनने में ज्यादा समय लगता है.

यूवी इंडेक्स जमीन तक पहुंचने वाली कुल यूवी किरणों, यानी यूवीए और यूवीबी दोनों, की मात्रा को मापता है. इसका पैमाना 0 से 11+ तक होता है.

0 का मतलब है कोई यूवी विकिरण नहीं और 11+ का मतलब बेहद ज्यादा विकिरण.

मेसन के मुताबिक, जिन लोगों की त्वचा बहुत ज्यादा गोरी है, जिनके परिवार में या खुद उन्हें मेलानोमा हो चुका है या जिनके शरीर पर बहुत सारे तिल हैं, उनमें त्वचा कैंसर का खतरा ज्यादा होता है.

ऐसे लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है. यह बात उन लोगों पर भी लागू होती है जो इम्यून सिस्टम को दबाने वाली दवाएं लेते हैं.

गोरी त्वचा वाले लोगों के मामले में कुछ शोध बताते हैं कि विटामिन डी बनाने के लिए जरूरी थोड़ी-सी धूप भी कैंसर का खतरा बढ़ा सकती है.

हालांकि, इस बारे में और शोध की जरूरत है. खासकर यह जानने के लिए कि क्या यही बात गहरी त्वचा वाले लोगों पर भी लागू होती है.

मेसन कहती हैं, "वे फिर भी कुछ मिनट धूप में रह सकते हैं, लेकिन बेहतर यह है कि कम समय के लिए ज्यादा त्वचा खुली रखी जाए और ऐसा ज्यादा बार किया जाए, बजाय इसके कि कम बार लेकिन ज्यादा देर तक धूप में रहा जाए."

सर्दियों में पर्याप्त विटामिन डी बनाने के लिए लोगों को ज्यादा देर बाहर रहने की जरूरत पड़ सकती है.

यह इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर का कितना हिस्सा खुला है और आप किस जगह रहते हैं.

मेलबर्न और होबार्ट जैसे दुनिया के कुछ हिस्सों में सर्दियों के दौरान विटामिन डी बनाने के लिए पर्याप्त यूवीबी उपलब्ध ही नहीं होता.

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और बोस्टन के ब्रिघम एंड विमेन्स हॉस्पिटल में मेडिसिन की प्रोफेसर जोएन मैन्सन कहती हैं, "अच्छी सेहत के लिए हमें केवल थोड़ी से मध्यम मात्रा में धूप की जरूरत होती है."

मैन्सन जोर देती हैं कि लंबे समय तक बिना किसी सुरक्षा के धूप में रहने से बचना चाहिए, खासकर सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच.

उनका कहना है कि रोजमर्रा के काम करते हुए मिलने वाली थोड़ी-बहुत धूप भी पर्याप्त हो सकती है, जैसे बाहर व्यायाम करना या किसी काम से बाहर जाना.

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर में डर्मेटोलॉजी और फोटोबायोलॉजी की प्रोफेसर लेस्ली रोड्स कहती हैं, "धूप में रहने के फ़ायदे और जोख़िम का संतुलन हर व्यक्ति की त्वचा के प्रकार और रंग के हिसाब से अलग होता है."

अध्ययनों से पता चलता है कि गहरी त्वचा यूवी किरणों से होने वाले डीएनए के नुकसान से बेहतर सुरक्षा देती है, जबकि हल्की त्वचा बहुत कम यूवी स्तर पर भी नुकसान की चपेट में आ सकती है.

गहरी त्वचा में मेलानिन की मात्रा ज्यादा होती है. मेलानिन शरीर में हानिकारक यूवी किरणों के खिलाफ एक प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करता है.

मेसन का कहना है कि हर व्यक्ति, यहां तक कि गहरी त्वचा वाले लोगों को भी धूप में चश्मा पहनना चाहिए.

बहुत ज्यादा धूप में रहने के क्या जोख़िम हैं?

बहुत ज्यादा देर तक धूप में रहने से शरीर में विटामिन डी का उत्पादन नहीं बढ़ता. इसके बजाय सनबर्न, त्वचा पर दाग-धब्बे और समय से पहले त्वचा बूढ़ी होने का खतरा बढ़ जाता है. बहुत ज्यादा धूप त्वचा कैंसर का सबसे प्रमुख कारण भी है.

ब्रिटेन में हर साल सामने आने वाले मेलानोमा के नए मामलों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. मेलानोमा त्वचा कैंसर का सबसे खतरनाक प्रकार है. पहली बार एक साल में इसके मामलों की संख्या 20,000 से ऊपर चली गई है.

गैर-लाभकारी संस्था कैंसर रिसर्च के मुताबिक, बहुत ज्यादा यूवी किरणों के संपर्क में आना या सनबेड का इस्तेमाल इसके कारणों में शामिल है. अनुमान है कि हर 10 में से करीब 9 मामले रोके जा सकते थे.

अमेरिका में भी त्वचा कैंसर सबसे आम प्रकार का कैंसर है. इस साल वहां 1.12 लाख लोगों में इनवेसिव मेलानोमा का पता चलने का अनुमान है.

बचपन और किशोरावस्था में धूप के संपर्क को सीमित करना बेहद महत्वपूर्ण है.

शोध से पता चलता है कि किसी व्यक्ति को जीवन के पहले 20 वर्षों में जितनी धूप मिलती है, उसका उसके आगे चलकर त्वचा कैंसर होने की संभावना पर काफी असर पड़ता है.

बहुत ज्यादा धूप में रहने से मोतियाबिंद भी हो सकता है. इसमें आंख के लेंस पर धुंधला-सा पर्दा बनने लगता है. आम तौर पर इसका इलाज ऑपरेशन से आसानी से किया जा सकता है, लेकिन इलाज न होने पर यह अंततः अंधेपन का कारण बन सकता है.

डॉक्टर सलाह देते हैं कि आंखों को हानिकारक किरणों से बचाने के लिए लोग यूवी 400 लेंस वाले धूप के चश्मे पहनें.

अगर आपको पर्याप्त धूप न मिले तो क्या होगा?

रोड्स के मुताबिक, अगर आप ऐसी जगह रहते हैं जहां धूप कम होती है, तो आपके शरीर में विटामिन डी का स्तर कम होने की आशंका रहती है, खासकर सर्दियों में.

गहरी त्वचा वाले लोग, जिनका बाहर निकलना सीमित है, जिन्हें प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता की समस्या है या जो अपने शरीर को ढककर रखते हैं, उनमें विटामिन डी की कमी का खतरा ज्यादा होता है.

लेकिन क्या सभी वयस्कों को विटामिन डी सप्लीमेंट लेने चाहिए, इस पर अभी भी विशेषज्ञों के बीच पूरी सहमति नहीं है. सप्लीमेंट लेने की सलाह उम्र और अलग-अलग देशों की गाइडलाइन के हिसाब से अलग होती है.

जहां सर्दियों में धूप बहुत कम होती है, जैसे अमेरिका और कनाडा, वहां खाने की कुछ चीजों में विटामिन डी मिलाना आम है. इनमें मशरूम, अनाज और डेयरी उत्पाद शामिल हैं.

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि विटामिन डी की मात्रा बहुत ज्यादा नहीं लेनी चाहिए. रोजाना 4,000 आईयू यानी 100 माइक्रोग्राम से ज्यादा लेना आम तौर पर नुकसानदायक माना जाता है.

इससे हाइपरकैल्सीमिया हो सकता है, जिसमें शरीर में कैल्शियम का स्तर बहुत बढ़ जाता है. इससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और किडनी और दिल को नुकसान पहुंच सकता है.

Preguntas abiertas

  • क्या विटामिन डी के लिए धूप से मिलने वाला जोखिम कम त्वचा वालों के लिए कैंसर का कारण बनता है?
  • गहरी त्वचा वाले लोगों को ठीक कितनी धूप की आवश्यकता होती है?

Temas relacionados

This article was originally published by BBC हिंदी.

Noticias relacionadas

बड़ी जांघें सेहत और लंबी उम्र के लिए कैसे हैं फायदेमंद?
Salud·anteayer

बड़ी जांघें सेहत और लंबी उम्र के लिए कैसे हैं फायदेमंद?

ब्रिटेन की धावक ताशा थॉम्पसन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी जांघों और मजबूत मांसपेशियों का संबंध लंबी उम्र, बेहतर ब्लड शुगर नियंत्रण और कम बीमारियों से हो सकता है।

BBC हिंदी
5 min de lectura
वज़न घटाने वाली दवाएँ कैसे कम कर रही हैं शराब पीने की तलब
Salud·hace 3 días

वज़न घटाने वाली दवाएँ कैसे कम कर रही हैं शराब पीने की तलब

वज़न घटाने वाली दवाएँ जैसे वेगोवी, माउंजारो और ओज़ेम्पिक लोगों में शराब की तलब को कम कर रही हैं। यूके के कई मरीज़ों ने बताया कि इन दवाओं के सेवन से उनकी शराब पीने की क्षमता काफ़ी कम हो गई है, हालाँकि कुछ युवा इसे अपनी सामाजिक ज़िंदगी के लिए एक चुनौती मान रहे हैं।

BBC हिंदी
7 min de lectura
Más sobre este temaधूप