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पीएम मोदी का इंस्टाग्राम वीडियो: युवाओं के विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की नई डिजिटल रणनीति
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BBC हिंदीhace 1 horaPolítica5 min de lecturaIndia

पीएम मोदी का इंस्टाग्राम वीडियो: युवाओं के विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की नई डिजिटल रणनीति

प्रधानमंत्री ने इंस्टाग्राम पर 'फ्रेंड्स' कहकर युवाओं को संबोधित किया, राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे छात्रों तक पहुंचने की रणनीति बताया.

En resumen

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं के विरोध प्रदर्शनों पर अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया, जो उनके सामान्य संबोधन से अलग था. राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे छात्रों तक सीधे पहुंचने की रणनीति बताया, जबकि युवा मुख्यधारा के मीडिया में कवरेज की कमी के कारण इंस्टाग्राम का उपयोग कर रहे हैं.

Resumen generado por IA

Por qué importa

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार रात को अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट कर युवाओं के विरोध प्रदर्शनों को संबोधित किया, जो उनके सामान्य राष्ट्रीय संबोधनों से अलग था.

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बुधवार रात 11 बजकर 52 मिनट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में युवाओं के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दे पर अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया. कई मायनों में यह उन तरीक़ों से अलग था, जिनसे प्रधानमंत्री आम तौर पर गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर देश को संबोधित करते हैं.

साल 2016 में नोटबंदी की घोषणा से लेकर कोविड-19 महामारी के दौरान दिए गए संबोधनों और हाल ही में संसद में परिसीमन विधेयक पारित न होने पर राष्ट्र के नाम दिए गए संबोधन तक, भारत के लोग पीएम मोदी को प्राइम टाइम में बोलते हुए देखने के आदी रहे हैं.

इस दौरान सरकारी यूट्यूब चैनल और टीवी चैनल उनका संबोधन लाइव प्रसारित करते रहे हैं.

हालांकि, बुधवार को उनका संदेश आधी रात के क़रीब इंस्टाग्राम वीडियो के रूप में आया, जिसे फ़ोन के फ्रंट कैमरे से वर्टिकल फ़ॉर्मेट में रिकॉर्ड किया गया था.

उन्होंने अपने संदेश की शुरुआत भी आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द 'मित्रों' की बजाय 'फ़्रेंड्स' कहकर की.

राजनीतिक विश्लेषकों ने बीबीसी से कहा कि पीएम के संदेश को इस तरह तैयार किया गया था ताकि वह उन लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचे, जिनके लिए इसे बनाया गया था.

वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार नीरजा चौधरी ने कहा, "बिल्कुल साफ़ है कि उन्होंने इंस्टाग्राम का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि यह स्टूडेंट्स का प्लेटफ़ॉर्म है. यह सिर्फ़ प्रदर्शनकारियों का ही नहीं, बल्कि देशभर के युवाओं द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला प्लेटफ़ॉर्म है."

चौधरी ने कहा कि "सख़्त" कार्रवाई और पेपर लीक के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का ज़िक्र करके प्रधानमंत्री स्टूडेंट्स को यह संदेश देना चाहते थे कि उनकी बात को गंभीरता से लिया जा रहा है.

उन्होंने कहा, "इसलिए यह बिल्कुल भी हैरानी की बात नहीं है कि उन्होंने ऐसा प्लेटफ़ॉर्म चुना, जिसे स्डूडेंट्स गंभीरता से लेते हैं."

दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान पढ़ाने वाले प्रोफ़ेसर चंद्रचूड़ सिंह ने भी कहा कि प्रधानमंत्री के लिए यह ज़रूरी था कि वह स्टूडेंट्स को ख़ुद सीधे संबोधित करते हुए दिखाई दें.

उन्होंने कहा, "उनकी मौजूदगी अहम है और शायद सरकार को लगता है कि उनका सीधा हस्तक्षेप इस आग को शांत कर सकता है."

प्रधानमंत्री का इंस्टाग्राम पर दिया गया संबोधन इस विरोध प्रदर्शन की एक व्यापक प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है, जिसमें युवा फ़ोन, सस्ते माइक्रोफ़ोन और सेल्फ़ी स्टिक के सहारे इसी प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल अपनी बात रखने के लिए कर रहे हैं.

दिल्ली विश्वविद्यालय की 22 वर्षीय छात्रा सखी कहती हैं कि जेन ज़ी को लगता है कि देश की मुख्यधारा का मीडिया उनकी नुमाइंदगी नहीं कर रहा है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "हमें लगा कि हमारी कवरेज की कमी है. हम जो कहना चाहते थे, उसे तुरंत सामने नहीं रख पा रहे थे. इसलिए लोग इंस्टाग्राम पर आए. अगर मीडिया हमें ब्लैकआउट भी कर दे, तब भी हमारे पास अपना प्लेटफ़ॉर्म था. कॉकरोच जनता पार्टी भी इंस्टाग्राम के ज़रिए लोगों तक पहुंची."

सखी बताती हैं कि 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के दौरान जो कुछ उन्होंने देखा, उसके बाद इंस्टाग्राम पर पोस्ट करना उनके लिए 'जज़्बाती राहत' जैसा था.

उस दिन जब हज़ारों प्रदर्शनकारी सेंट्रल दिल्ली की सड़कों पर उतरे, तब सोशल मीडिया पर पुलिस के लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के कई वीडियो सामने आए. कई प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, "मुझे दोस्तों से अलग खींचकर ले जाया गया. मेरा चश्मा खो गया. मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. मैंने अपने दोस्तों को पिटते हुए देखा. मैं वापस आई और पोस्ट किया, क्योंकि मैं चाहती थी कि लोगों को पता चले कि क्या हुआ था."

सखी ने कहा, "मैं चाहती थी कि लोगों को पता चले कि पुलिस ने क्या किया. मैं उन्हें पुलिस की बर्बरता के सबूत दिखाना चाहती थी."

उस दिन सखी ने तीन रील पोस्ट कीं, जो बाद में वायरल हो गईं. इनमें से एक को अब तक 3 करोड़ 56 लाख बार देखा जा चुका है. उनके फ़ॉलोअर्स की संख्या क़रीब 3,000 से बढ़कर लगभग 70,000 हो गई है.

सोशल मीडिया रिसर्च के अनुमानों के अनुसार, भारत में इंस्टाग्राम के 50 करोड़ से ज़्यादा अकाउंट हैं, जिनमें से अधिकांश 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के हैं.

सखी बताती हैं कि यह प्लेटफ़ॉर्म उनके हमउम्र लोगों के बीच इतना लोकप्रिय क्यों है.

उन्होंने कहा, "फ़ेसबुक हमारे माता-पिता की पीढ़ी के लिए है, व्हाट्सऐप हमसे पहले की पीढ़ी के लिए है, लेकिन इंस्टाग्राम जेन ज़ी का प्लेटफ़ॉर्म है. ख़ासतौर पर भारत में टिकटॉक जैसे शॉर्ट-फ़ॉर्म कंटेंट ऐप पर प्रतिबंध लगने के बाद, इंस्टाग्राम वही जगह है जहां हम उस रूप में कंटेंट देखते हैं जो हमें सबसे ज़्यादा पसंद आता है."

क्या सरकार अपनी रणनीति पर फिर से विचार कर रही है?

साल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद भारतीय जनता पार्टी और ख़ुद प्रधानमंत्री को लंबे समय तक भारतीय राजनीति में डिजिटल प्रचार और संदेश देने की रणनीति का अगुआ माना जाता रहा है.

लेकिन जेन ज़ी एक अलग सोशल मीडिया माहौल में पली-बढ़ी है. ऐसे में क्या बीजेपी और सरकार को अपनी डिजिटल रणनीति पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक रतन शारदा ने एक्स पर एक पोस्ट में विरोध प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ प्रभावी जवाबी नैरेटिव तैयार करने में विफल रहने के लिए बीजेपी की सोशल मीडिया सिस्टम को ज़िम्मेदार ठहराया.

उन्होंने लिखा, "बीजेपी मीडिया का ज़मीनी स्तर से कोई जुड़ाव नहीं दिखता. साफ़ तौर पर कोई फ़ीडबैक तंत्र नहीं है और महीनों से बढ़ रहे युवाओं के ग़ुस्से को समझा नहीं गया."

उन्होंने यह भी कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी की सोशल मीडिया रणनीति "मीम्स और व्हाटअबाउटरी" से आगे नहीं बढ़ सकी.

हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक राहुल वर्मा का कहते हैं कि "व्हाट्सऐप पीढ़ी" और "इंस्टाग्राम पीढ़ी" के बीच साफ़ विभाजन रेखा खींचना सही नहीं होगा.

राहुल वर्मा कहते हैं, "हम जानते हैं कि इस विरोध प्रदर्शन में शामिल ज़्यादातर युवा और मध्यम वर्ग पहले बड़े पैमाने पर बीजेपी के मतदाता रहे हैं. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि बीजेपी को उनसे संवाद करना नहीं आता."

लेकिन राहुल वर्मा का कहना है कि मौजूदा विरोध प्रदर्शन मोदी सरकार के ख़िलाफ़ पहले हुए आंदोलनों से अलग हैं.

उन्होंने कहा, "किसानों के आंदोलन या सीएए विरोधी प्रदर्शनों के विपरीत, जो विशेष नीतिगत मुद्दों पर केंद्रित थे, यह विरोध प्रशासनिक विफलताओं की वजह से है. इसलिए सरकार के पास कोई जवाबी नैरेटिव नहीं था."

"लेकिन प्रधानमंत्री ने इंस्टाग्राम का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि जेन ज़ी यही प्लेटफ़ॉर्म इस्तेमाल करती है और इस बार सरकार अपना संदेश पहुंचाने के लिए हर उपलब्ध माध्यम का इस्तेमाल करेगी."

वहीं, प्रोफ़ेसर चंद्रचूड़ सिंह का कहना है कि सोशल मीडिया पर जेन ज़ी की नाराज़गी और उससे निपटने के सरकारी प्रयासों को केवल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के नज़रिए से देखना सही नहीं होगा.

उन्होंने कहा, "युवाओं की निराशा कहीं ज़्यादा गहरी, व्यापक और तीव्र है, जिसे केवल डिजिटल अपील के ज़रिए नहीं संभाला जा सकता. जेन जी ने 2014 के बाद मतदान करना शुरू किया, इसलिए संभव है कि कुछ थकान भी महसूस होने लगी हो. जहां तक बीजेपी के सोशल मीडिया सेल की बात है, भारत के युवाओं की ऊर्जा और उनके संकल्प पर कोई भी भारी नहीं पड़ सकता."

Preguntas abiertas

  • सरकार की डिजिटल रणनीति कैसे विकसित होगी?
  • क्या पीएम की सीधी अपील से युवाओं की निराशा शांत होगी?
  • जेन ज़ी की नाराजगी से निपटने के लिए बीजेपी क्या कदम उठाएगी?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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