Última hora
FRLes États-Unis et Israël suspendent les frappes contre l'Iran en échange d'un accord rapideFRSébastien Ogier et Julien Ingrassia victimes d'un grave accident au Rallye de FinlandeFRLorena Wiebes remporte la 1re étape du Tour de France Femmes et s'empare du maillot jauneFRExplosion dans un café à Moscou : trois morts et 21 blessésFRGuerre en Ukraine : Kiev frappée par des missiles russes, un navire de Rosatom coulé en mer NoireFRVague migratoire massive à Ceuta : la classe politique européenne inquiète et en colèreFRDes milliers de migrants retournent au Maroc depuis Ceuta, fatigués et déçusFRCanicule et incendies : 20 départements en vigilance orange, situation sous contrôle mais précaireFRÉclipse solaire partielle du 12 août : quatre points à savoir pour admirer le spectacle en toute sécuritéFRIncendie en Gironde : le feu est fixé, mais des points chauds subsistentFRLes États-Unis et Israël suspendent les frappes contre l'Iran en échange d'un accord rapideFRSébastien Ogier et Julien Ingrassia victimes d'un grave accident au Rallye de FinlandeFRLorena Wiebes remporte la 1re étape du Tour de France Femmes et s'empare du maillot jauneFRExplosion dans un café à Moscou : trois morts et 21 blessésFRGuerre en Ukraine : Kiev frappée par des missiles russes, un navire de Rosatom coulé en mer NoireFRVague migratoire massive à Ceuta : la classe politique européenne inquiète et en colèreFRDes milliers de migrants retournent au Maroc depuis Ceuta, fatigués et déçusFRCanicule et incendies : 20 départements en vigilance orange, situation sous contrôle mais précaireFRÉclipse solaire partielle du 12 août : quatre points à savoir pour admirer le spectacle en toute sécuritéFRIncendie en Gironde : le feu est fixé, mais des points chauds subsistent
Newsgather
Atrásप्रधानमंत्री मोदी के 'माफ़ी' बयान पर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
प्रधानमंत्री मोदी के 'माफ़ी' बयान पर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
En desarrollo
BBC हिंदीhace 6 horasPolítica7 min de lecturaIndia

प्रधानमंत्री मोदी के 'माफ़ी' बयान पर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

En resumen

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान उन्हें अपशब्द कहने वाले बच्चों को माफ़ करने की बात कही, जिस पर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्षी नेता उनके बयान पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष के लोग उनकी प्रशंसा कर रहे हैं।

Resumen generado por IA

Por qué importa

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान उन्हें और उनकी मां को अपशब्द कहने वाले बच्चों को माफ़ करने की बात कही, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ गया है।

Tamaño de fuente

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार रात अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर एक वर्टिकल वीडियो साझा करते हुए जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान उन्हें अपशब्द बोलने वाले बच्चों को माफ़ करने की बात कही थी।

उन्होंने कहा, "कुछ शरारती बच्चों ने मुझे और मेरी मां को भद्दी-भद्दी गालियां दीं। बचपन ग़लतियों को सुधारने का अवसर भी होता है। ये गुमराह बच्चे हैं, इन्हें राह दिखाने का समय है, मैं इन्हें माफ़ करना चाहता हूं।"

इस वीडियो में उन्होंने लड़कियों की ओर से अपशब्दों के इस्तेमाल को 'कल्चरल शॉक' बताया था और हैरानी जताई थी कि 'हमारी बेटियां इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकती हैं?'

उनके 'माफ़ करने वाले' बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अब विवाद तेज़ हो गया है।

एक तरफ़ कांग्रेस के कई नेताओं, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, विपक्षी सांसद और बॉलीवुड से जुड़े लोगों ने पीएम मोदी के 'माफ़ी देने' को लेकर सवाल उठाए हैं।

वहीं सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े कई नेताओं ने पीएम मोदी की प्रशंसा की है।

अभिजीत दीपके ने क्या कहा?

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शनिवार शाम एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए सवाल किया, "मुझे लगता है कि आज रात भी मोदी जी एक वीडियो डालेंगे। मैं उम्मीद करता हूं कि 20 जुलाई को जो बर्बर लाठीचार्ज हुआ है, उसके लिए भी वो माफ़ी मांगेंगे।"

पेपर लीक मामले पर मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके धरने पर बैठ गए थे।

उनके इस अनशन में पर्यावरणविद सोनम वांगचुक और नेहा सिंह समेत कई स्टूडेंट्स भी आमरण अनशन पर बैठ गए थे। लेकिन 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को ज़बरदस्ती हटाए जाने के बाद यह आंदोलन और तेज़ हो गया।

हालांकि 24 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के साथ यह अनशन समाप्त कर दिया गया। लेकिन उसके बाद प्रदर्शन के दौरान अपशब्दों के इस्तेमाल पर बहस छिड़ गई।

प्रदर्शन के दौरान अपशब्द को लेकर पुलिस की कार्रवाई का मामला तब तूल पकड़ गया जब बीते शुक्रवार को पीएम मोदी के ख़िलाफ़ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में नोएडा पुलिस ने एक युवती पर ज़ीरो एफ़आईआर दर्ज की।

पुलिस ने बताया कि यह एफ़आईआर संसद मार्ग थाने में स्थानांतरित कर दी गई है।

हालांकि उस युवती ने शुक्रवार को एक वीडियो जारी कर अपनी उम्र 15 साल बताते हुए माफ़ी मांगी थी। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। बीबीसी इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

इस एफ़आईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दीपके ने कहा, "क्या आईटी सेल के उन सदस्यों के ख़िलाफ़ भी एफ़आईआर दर्ज की जाएगी, जिन्होंने इतने सालों तक महिलाओं के साथ बेहद बुरा बर्ताव किया है?"

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने भी प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में एफ़आईआर दर्ज की है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से ऐसी सामग्री हटाने को कहा है।

जब शुक्रवार रात पीएम मोदी ने बच्चों को माफ़ करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया तो अभिजीत दीपके ने तंज़ करते हुए लिखा, "फ़्रैंड, सिर्फ़ रील पर ही माफ़ करेंगे या केस भी वापस लेंगे?"

पीएम मोदी ने क्या कहा था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार रात सोशल मीडिया पर एक वर्टिकल वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर कुछ शरारती बच्चों ने मुझे और मेरी मां को भद्दी-भद्दी गालियां दीं।

उन्होंने कहा कि "बचपन ग़लतियों को सुधारने का अवसर भी होता है। ये गुमराह बच्चे हैं, इन्हें राह दिखाने का समय है, मैं इन्हें माफ़ करना चाहता हूं।"

उन्होंने कहा, "जंतर-मंतर पर जो हुआ देश और दुनिया ने देखा। कुछ शरारती बच्चों ने भद्दी और अपशब्दों वाली भाषा का इस्तेमाल किया, ऐसे शब्द जो किसी भी सभ्य समाज के लिए ठीक नहीं हैं। मुझे व्यक्तिगत रूप से अपशब्द कहे गए, और मेरी स्वर्गीय मां को भी गाली दी गई।"

पीएम मोदी ने कहा, "बचपन में ग़लतियां होती हैं, बचपन ग़लतियों को सुधारने का अवसर भी होता, यही तो बचपना है। मैं समाज के अंदर मौजूद आक्रोश को भली-भांति समझ सकता हूँ। यह एक कल्चरल शॉक जैसा है कि हमारी बेटियां इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकती हैं। मैं उन बच्चों को माफ़ करना चाहता हूं।"

"समय आ गया है कि हम इन बच्चों को अपनाएं और उन्हें सही रास्ता दिखाएं। वे रास्ता भटक गए हैं, और उन्हें सही रास्ता दिखाना हमारा कर्तव्य है। उन्हें सज़ा देना, अदालती कार्यवाही में उलझाना और समाज में परेशान करना, इनमें से किसी से भी स्थिति नहीं बदलेगी। मैं उन्हें माफ़ करना चाहता हूं। समाज को भी इसे स्वीकार करना चाहिए। मेरे दिल में बस एक ही भावना है।"

उन्होंने कहा, "ये बच्चे भी हमारे ही हैं। उन्हें सही रास्ता दिखाना हमारा कर्तव्य है। जो भटक गए हैं, उन्हें सही रास्ता दिखाना मुश्किल है, लेकिन यह एक ऐसा काम है जो हमें करना ही होगा। मैं इन बच्चों से कहता हूं, आइए देश के लिए हम सब मिलकर आगे बढ़ें। आइए कुछ नया सीखें और अपनी ग़लतियों से भी सीखें।"

इससे पहले उन्होंने प्रदर्शन के दौरान भी इंस्टाग्राम पर आकर जेन ज़ी को 'फ्रेंड्स' बताते हुए संबोधित किया था।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, "अपने बच्चों को खोने वाले माता-पिता के आंसू, उनका बिलखना- इससे बड़ा कोई दुःख नहीं होता। ये एक ग़म उनके साथ हमेशा ज़िंदा रहेगा और साथ ही रह जाते हैं इस टूटी और भ्रष्ट एजुकेशन के बारे में कई सवाल।"

"पेपर लीक, रद्द परीक्षाएं, सालों की तैयारी एक पल में बर्बाद। हमारे छात्रों को उस सिस्टम में ईमानदारी से मेहनत करने के लिए कहा जाता है जो खुद बेईमान है।"

"और उसके बाद भी प्रधानमंत्री की ये हिम्मत है कि वो छात्रों को "माफ़" करने की बात करते हैं। क्या वो एक भी शोकाकुल परिवार से मिले जिन्होंने अपने बच्चे को खोया है या उन लोगों से जिनकी जमा पूंजी, ज़िंदगी, वक्त और सपने सब पेपर लीक से छीन लिए गए? जवाब है नहीं!"

राहुल गांधी ने लिखा, "भारत के छात्रों को प्रधानमंत्री की क्षमा की ज़रूरत नहीं- मोदी जी को उनसे माफ़ी मांगनी चाहिए।"

'माफ़ी देने' को लेकर छिड़ी बहस

पीएम मोदी के 'माफ़ी देने' वाले संदेश को लेकर सोशल मीडिया पर काफ़ी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पीएम मोदी को संबोधित करते हुए एक्स पर लिखा, "मोदी जी, आप डर नहीं फैला सकते और फिर हमदर्द होने का दावा नहीं कर सकते। आपकी हिंदुत्व ब्रिगेड और पुलिस ने 15 साल की एक लड़की को इतना डरा-धमका दिया कि उसने हाथ जोड़कर और नज़रें झुकाकर एक वीडियो जारी किया और अपनी बातों के लिए माफ़ी मांगी।"

"हो सकता है कि कोई उसकी बातों से सहमत न हो। लेकिन यह कैसा समाज है जो किसी बच्चे को इस तरह माफ़ी मांगने के लिए मजबूर कर देता है और फिर इसका जश्न मनाता है?"

पवन खेड़ा ने सवाल किया, "जब 20 तारीख़ (जुलाई) को स्टूडेंट्स पीटे जा रहा थे तब आपकी हमदर्दी कहां थी?"

टीएमसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व सांसद साकेत गोखले ने एक्स पर लिखा, "मोदी-शाह ने अपने ईको सिस्टम, पुलिस और मीडिया का इस्तेमाल करके एक 15 साल की नाबालिग लड़की को परेशान किया और उसकी पहचान उजागर की। जब उसने माफ़ी का वीडियो बनाया और अपनी उम्र बताई, तो डरपोक मोदी घबरा गए और पोस्ट किया कि वह 'उसे माफ़ करते हैं'।"

"56 इंच के सीने वाले प्रधानमंत्री को एक बच्चे की कुछ अपशब्दों से क्या खतरा महसूस होता है? यह कैसी डेमोक्रेसी है जो एक नाबालिग लड़की के पीछे सरकारी मशीनरी लगा देती है? और मोदी कौन होते हैं किसी को 'माफ़' करने वाले? खासकर तब, जब उन्हें छात्रों को निशाना बनाने के लिए खुद माफ़ी मांगनी चाहिए।"

वरिष्ठ पत्रकार सुहासिनी हैदर ने एक्स पर लिखा, "चूंकि पीएम मोदी ने अब खुले तौर पर भद्दी और अपशब्दों वाली भाषा के प्रति अपनी नापसंदगी और निराशा ज़ाहिर की है... तो अब सरकार के समर्थकों के लिए समय आ गया है कि वे अपनी टाइमलाइन पर नज़र डालें और उन लोगों पर लिंग, समुदाय और जाति के आधार पर अपमानजनक टिप्पणियाँ करके हमले करना बंद करें जिनसे वे सहमत नहीं हैं।"

सुहासिनी हैदर ने यशस्विनी राजे सिंह का एक पोस्ट साझा किया है जिसमें यशस्विनी ने कथित नफ़रती संदेशों का स्क्रीनशॉट लगाया है।

यशस्विनी राजे सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा है, "यहाँ कुछ महीनों से मेरे इनबॉक्स (डायरेक्ट मैसेज) में क्या-क्या आ रहा है, उसकी एक झलक है। मेरे कथित पाकिस्तानी बॉयफ़्रेंड, बीफ़ खाने और फ़लस्तीन पर मेरे रुख़ की वजह से। सीधी बात यह है कि इंटरनेट की सबसे घटिया जगहों से 'अपमानजनक भाषा' को लेकर जो हाय-तौबा मचाई जा रही है, वह बिल्कुल भी भरोसेमंद नहीं लगती।"

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने पीएम मोदी को धन्यवाद करते हुए एक्स पर लिखा, "आखिरकार 75 साल की उम्र में आपको समझ आ ही गया कि गाली-गलौज करना अच्छी बात नहीं है। अब अपने उन दोस्तों को भी यही सलाह दें जो दिन-रात हमें गालियां देते हैं।"

उन्होंने यूट्यूबर ध्रुव राठी का एक वीडियो साझा किया जिसमें उन्होंने यही बात कही है।

'बेटियों पर ज़ोर क्यों?'

स्वतंत्र पत्रकार रूही तिवारी ने एक्स पर एक लंबी पोस्ट लिखी है जिसमें अभद्र भाषा को लेकर बेटियों पर ज़ोर देने पर सवाल उठाया गया है।

रूही तिवारी ने लिखा, "सार्वजनिक जीवन में किसी को भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, यह बात स्वाभाविक है। लेकिन 'बेटियों' पर इतना विशेष ज़ोर क्यों? क्यों यह अपेक्षा की जाती है कि "बेटियां" ही शालीनता के सबसे ऊंचे मानकों का पालन करें और सारी ज़िम्मेदारी उन्हीं पर हो? और उनका किसी खास तरीके से व्यवहार करना 'कल्चरल' क्यों माना जाए?"

"और हम सभी को केवल बेटी या बहन की पहचान से ही क्यों देखा जाए? महिलाओं की अपनी स्वतंत्र पहचान भी हो सकती है, जो रिश्तों से परे हो।"

उन्होंने लिखा, "प्रिय प्रधानमंत्री मोदी, दुर्भाग्य से यह सोच उसी गहरे पितृसत्तात्मक और लैंगिक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसके खिलाफ आप 'बेटी बचाओ…' और 'नारी शक्ति' जैसे अभियानों के माध्यम से लड़ने का दावा करते हैं।"

वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले ने एक्स पर लिखा, "मिस्टर मोदी, कृपया पिछले 12 सालों में आपके द्वारा दी गई गालियों के लिए माफ़ी मांगें!"

कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. शमा मोहम्मद ने एक्स पर लिखा, "मैं प्रधानमंत्री से पूछना चाहती हूँ- उन्होंने रमेश बिधूड़ी और प्रज्ञा ठाकुर जैसे नेताओं को सही रास्ता क्यों नहीं दिखाया? जब मुसलमानों को बुरा-भला कहा जाता है और उन्हें निशाना बनाया जाता है, या जब ईसाइयों और दलितों के साथ बुरा बर्ताव होता है, तो वे चुप क्यों रहते हैं?"

"ऐसा नहीं हो सकता कि बीजेपी नेताओं की बदसलूकी तो मंज़ूर हो, लेकिन दूसरों की बदसलूकी ग़लत हो। हर तरह की बदसलूकी ग़लत है और हम इसका समर्थन नहीं करते। लेकिन क्या प्रधानमंत्री यही बात तब भी कह सकते हैं जब विपक्ष के नेताओं और अल्पसंख्यकों के साथ बदसलूकी होती है?"

बयान का समर्थन भी हो रहा

भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ की है।

उन्होंने सुहासिनी हैदर के पोस्ट को साझा करते हुए एक्स पर लिखा, "प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि सांस्कृतिक रूप से आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने वाले इन गुमराह युवाओं पर मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए। वे इस मामले को बंद करके आगे बढ़ना चाहते हैं।"

"हालांकि, प्रधानमंत्री को जान से मारने की धमकी देना और युवा लड़कियों द्वारा कैमरे पर यौन रूप से बेहद आपत्तिजनक गालियां देना, जो केवल सबसे घटिया किस्म के लोग ही इस्तेमाल कर सकते हैं, को महज़ 'अभद्र भाषा' कहकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए।"

"ऐसी घृणित भाषा को सामान्य नहीं बनाया जाना चाहिए। अगर ऐसे बेहद घटिया व्यवहार के लिए समाज में कोई बुराई या शर्म की बात नहीं मानी जाती और इसका बचाव किया जाता है, तो हम समाज के नैतिक पतन को बढ़ावा दे रहे हैं।"

टाइम्स नाउ चैनल के मैनेजिंग एडिटर ज़ाका जैकब ने एक्स पर लिखा, "पीएम मोदी हमेशा आगे रहकर नेतृत्व करते हैं। उनका कहना है कि अपशब्द या गाली-गलौज सभ्य बातचीत का हिस्सा नहीं हैं। सार्वजनिक जीवन में दशकों से उन्हें गालियां दी जाती रही हैं।"

"उन्होंने उन सभी बच्चों को माफ़ कर दिया है जिन्होंने उन्हें गालियां दीं। अब सवाल यह है कि क्या सभी एफ़आईआर वापस ले ली जाएंगी? क्या हम सार्वजनिक जीवन में बेहतर भाषा का इस्तेमाल देखेंगे?"

Preguntas abiertas

  • क्या सभी एफ़आईआर वापस ली जाएंगी?
  • क्या आईटी सेल के सदस्यों के ख़िलाफ़ भी एफ़आईआर दर्ज होगी?

Temas relacionados

This article was originally published by BBC हिंदी.

Noticias relacionadas