बांकीपुर उपचुनाव: कम मतदान, प्रशांत किशोर के आरोप और बीजेपी के गढ़ में सेंध की संभावना
En resumen
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में 35% से कम मतदान हुआ, जो 2025 की तुलना में 7% कम है। जनसुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने अपनी उम्मीदवारी से मुकाबला दिलचस्प बनाया, लेकिन मतदाताओं में उत्साह कम दिखा। उन्होंने पुलिस पर कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने का आरोप भी लगाया।
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Por qué importa
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के इस्तीफ़े के बाद उपचुनाव हुआ, जिसमें जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी उम्मीदवारी पेश की। बांकीपुर में परंपरागत रूप से मतदान कम रहता है, लेकिन इस बार 2025 की तुलना में 7% कम मतदान हुआ।
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव को जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपनी उम्मीदवारी से भले दिलचस्प बना दिया था लेकिन मतदाताओं ने बहुत उत्साह नहीं दिखाया।
बांकीपुर में 35 फ़ीसदी से भी कम लोगों ने मतदान किया। बांकीपुर में परंपरागत रूप से मतदान कम रहता है लेकिन 2025 की तुलना में इस बार सात फ़ीसदी कम मतदान हुआ है।
बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव बीजेपी के लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल है, क्योंकि यह सीट पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के इस्तीफ़े के बाद ख़ाली हुई थी। बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर और राजद की रेखा गुप्ता भी मैदान में हैं।
बांकीपुर बिहार के सबसे अधिक शहरी मतदाताओं वाली सीट में से एक है और इसे बीजेपी का गढ़ माना जाता है।
2025 के विधानसभा चुनाव में यहाँ 41.35% मतदान हुआ था। तब नितिन नबीन ने आरजेडी की रेखा गुप्ता को 51,936 मतों से हराया था।
गुरुवार को बांकीपुर के अलावा मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट और गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव थे। इन दोनों सीटों की तुलना में भी बांकीपुर में कम मतदान हुआ।
दतिया विधानसभा सीट पर 71.41% मतदान दर्ज किया गया। 2023 के विधानसभा चुनाव में यहां 80% मतदान हुआ था। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद यह सीट ख़ाली हुई थी। यहाँ मुख्य मुकाबला कांग्रेस के घनश्याम सिंह और बीजेपी के अशुतोष तिवारी के बीच है।
गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर 37.5% मतदान हुआ। 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां 63.61% मतदान दर्ज किया गया था। बीजेपी विधायक योगेशभाई पटेल के निधन के बाद यह सीट ख़ाली हुई थी। यहां मुख्य मुकाबला बीजेपी के सतीश पटेल और कांग्रेस के भीखाभाई रबारी के बीच है।
इन तीनों सीटों के लिए मतगणना तीन अगस्त को होगी। बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 3,79,611 मतदाता हैं और इस चुनाव में 25 उम्मीदवार मैदान में हैं।
प्रशांत किशोर ने बिहार पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मतदान प्रक्रिया में लगे उनकी पार्टी के कम से कम 20 कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
प्रशांत किशोर ने तड़के क़रीब एक बजे पुलिस का सामना किया। जब वे बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ जक्कनपुर थाने पहुंचे तो कथित तौर पर जेएसपी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर उनकी थाना प्रभारी ऋतुराज सिंह से तीखी बहस हुई।
क्यों कम रहा उत्साह और क्या हैं मायने
इस विधानसभा सीट पर एक साल से भी कम अंतराल पर उपचुनाव हुआ। ऐसे में मतदाताओं के लिए बहुत आकर्षण नहीं रहा। दूसरी बात यह है कि इस सीट पर किसी के भी जीतने से बिहार में सरकार की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ने जा रहा है। अगर सरकार की सेहत पर कोई असर पड़ता है तो मतदाताओं का रुझान बढ़ता है।
बांकीपुर विधानसभा सीट पर पारंपरिक रूप से कम मतदान होता है। 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 37% मतदान हुआ था। 2015 में 40.3% मतदान हुआ था, 2020 के विधानसभा चुनाव में 36.9% और 2025 के विधानसभा चुनाव में 41.35% मतदान हुआ था।
लेकिन हर बार बीजेपी की जीत हुई। भले मतदान कुछ फ़ीसदी कम हुए या बढ़े। ऐसे में एक साल बाद के उपचुनाव में सात फ़ीसदी मतदान कम होना चौंकाता नहीं है। लेकिन 2010 से लेकर 2025 तक के वोटर टर्नआउट में सात फ़ीसदी की गिरावट नहीं आई।
लेकिन पिछले 20 सालों के बिहार विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ने का ट्रेंड है और 2015 को छोड़ हर बार एनडीए की जीत हुई है। 2015 में नीतीश कुमार ने आरजेडी के साथ गठबंधन कर लिया था। अक्तूबर 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव में 45.9% मतदान हुआ।
पहली बार नीतीश कुमार के नेतृत्व में अपने दम पर एनडीए की सरकार बनी थी। 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में 52.7% मतदान हुआ और नीतीश कुमार की बंपर वापसी हुई। 2015 के विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार ने आरजेडी से हाथ मिला लिया था और जीत इसी गठबंधन को मिली।
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में 58.7% मतदान हुआ और एनडीए की जीत हुई। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में 66.4% मतदान हुआ और फिर से एनडीए को जीत मिली।
भारत की चुनावी राजनीति में लंबे समय तक ज़्यादा टर्नआउट को सत्ता परिवर्तन के तौर पर देखा जाता था लेकिन पिछले कई चुनावों में यह ट्रेंड बदला है।
ऐसे में बांकीपुर में सात प्रतिशत मतदान कम होना इस ट्रेंड से थोड़ा अलग दिखता है लेकिन इस सीट पर 2010 से 2025 तक के ट्रेंड को देखें तो चार से पाँच प्रतिशत की बढ़ोतरी और गिरावट हुई है लेकिन जीत बीजेपी को ही मिली है।
लेकिन बांकीपुर में इस बार मामला थोड़ा अलग है। बांकीपुर में सवर्ण वोटर अच्छी ख़ासी तादाद में हैं। उनमें भी कायस्थ बहुसंख्यक हैं। बीजेपी के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा कायस्थ हैं जबकि प्रशांत किशोर ब्राह्मण जाति से ताल्लुक रखते हैं।
ऐसे में कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर बीजेपी के वोट बैंक में भी सेंध लगा सकते हैं। इसके अलावा प्रशांत उन मुद्दों को उठा रहे हैं, जिनसे बिहार के आम लोग जूझ रहे हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि जो एनडीए और आरजेडी दोनों से नाराज़ हैं, वे प्रशांत के साथ आएंगे।
क्या सवर्ण बीजेपी को छोड़ प्रशांत किशोर को वोट करेंगे?
लेकिन 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जनसुराज पार्टी बिल्कुल हाशिए पर रही थी। पिछले विधानसभा चुनाव में बांकीपुर विधानसभा सीट से जन सुराज पार्टी की उम्मीदवार वंदना कुमारी को आठ हज़ार से भी कम वोट मिले थे।
वहीं बीजेपी के नितिन नबीन को 98 हज़ार से ज़्यादा वोट मिले थे। बीजेपी यहाँ से 1995 से चुनाव हारी नहीं है। वंदना कुमारी कहती हैं कि बीजेपी को चुनाव में जीत नीतीश कुमार के चेहरे पर मिली थी लेकिन अब सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री हैं और यह जनसुराज के पक्ष में जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषक और टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस में प्रोफ़ेसर रहे पुष्पेंद्र कहते हैं कि यह प्रशांत किशोर का कैलकुलेटड रिस्क है।
पुष्पेंद्र कहते हैं, ''अभी बिहार में सम्राट चौधरी को लेकर कई सवाल हैं। सम्राट चौधरी को लेकर बीजेपी का पढ़ा-लिखा वोटर बहुत ख़ुश नहीं है। बांकीपुर पूरी तरह से अर्बन सीट है और यहाँ कथित ऊंची जातियों की आबादी बहुत ज़्यादा है। राम मंदिर में चोरी से भी बीजेपी घेरे में है। जेन ज़ी के आंदोलन के बाद पहली बार चुनाव हुआ है। ऐसे में प्रशांत किशोर इसे मौक़े के रूप में देख रहे हैं।''
इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश 2025 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के आधार पर करें तो ऐसा लगता नहीं है। मिसाल के तौर पर पटना की कुम्हरार सीट को लीजिए।
कुम्हरार सीट पर प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी से गणित के चर्चित प्रोफ़ेसर कृष्ण चंद्र सिन्हा यानी केसी सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था। अब केसी सिन्हा बीजेपी में शामिल हो गए हैं। इस सीट पर भी कायस्थों का वोट सबसे ज़्यादा है।
केसी सिन्हा कायस्थ जाति से ही ताल्लुक रखते हैं। लेकिन जीत बीजेपी के संजय कुमार को मिली जो बनिया जाति से हैं। केसी सिन्हा 15 हज़ार से ज़्यादा वोट के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे और बीजेपी के संजय कुमार को एक लाख से ज़्यादा वोट मिले थे।
यानी इस सीट के आधार पर आकलन करें तो जनसुराज के कायस्थ उम्मीदवार को भी कायस्थों ने वोट नहीं किया। ऐसे में प्रशांत किशोर को बांकीपुर में कायस्थों का वोट मिलेगा या नहीं, इसे लेकर अभी स्पष्ट रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।
Qué observar
Perspectiva de IA — posibilidades, no hechos
बांकीपुर, दतिया और मंजलपुर विधानसभा सीटों के लिए मतगणना 3 अगस्त को होगी।
Muy probable · En días
Preguntas abiertas
- बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे क्या होंगे?
- क्या प्रशांत किशोर बीजेपी के सवर्ण वोट बैंक में सेंध लगा पाएंगे?
- पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं की हिरासत के आरोपों की सच्चाई क्या है?

