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मध्य प्रदेश सरकार ने त्विषा शर्मा मामले की सीबीआई जांच की सिफ़ारिश की
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BBC हिंदी22/5/2026Crime6 min de lecturaIndia

मध्य प्रदेश सरकार ने त्विषा शर्मा मामले की सीबीआई जांच की सिफ़ारिश की

En resumen

मध्य प्रदेश सरकार ने दहेज उत्पीड़न के बाद मृत पाई गई त्विषा शर्मा मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की है। पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है, जबकि परिवार हत्या का आरोप लगा रहा है।

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पदनाम, बीबीसी संवाददाता

प्रकाशित 20 मई 2026

अपडेटेड 48 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 8 मिनट

मध्य प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को त्विषा शर्मा मामले की सीबीआई जांच की सिफ़ारिश की है.

त्विषा शर्मा नोएडा की रहने वाली थीं, जिनके साथ कथित तौर पर दहेज उत्पीड़न हुआ था और पिछले हफ्ते उनकी मौत हो गई थी.

सरकारी अधिसूचना में कहा गया है, "इस मामले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई- सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इनवेस्टीगेशन) को जांच के लिए सौंपने का प्रस्ताव है."

एक अधिकारी के अनुसार, यह अधिसूचना गृह विभाग की सचिव कृष्णवेणी देसावतु ने जारी की है.

पुलिस का दावा

"यह साफ़तौर पर आत्महत्या का मामला है, हत्या का नहीं." भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बीबीसी से बातचीत में ये बात कही.

12 मई की रात कटारा हिल्स स्थित घर में त्विषा का शव मिला था. उनके परिवार का आरोप है कि उनकी हत्या की गई, जबकि ससुराल पक्ष का कहना है कि उन्होंने ख़ुदकुशी की.

पुलिस ने त्विषा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास गिरिबाला सिंह के ख़िलाफ़ दहेज प्रताड़ना से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया है और इसकी जांच 6 सदस्यीय एसआईटी की टीम कर रही है. गिरिबाला सिंह सेवानिवृत्त जज हैं.

वहीं त्विषा का परिवार इसे हत्या बताते हुए आरोप लगा रहा है कि सबूतों से छेड़छाड़ की गई. परिवार ने पोस्टमार्टम पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि प्रभावशाली लोग जांच प्रभावित कर रहे हैं.

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आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की जीवन आस्था हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.

त्विषा शर्मा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की त्विषा के परिवार की मांग को भोपाल की अदालत ने ख़ारिज कर दिया है.

ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फ़र्स्ट क्लास की कोर्ट ने कटारा हिल्स पुलिस को निर्देश दिया है कि शव को ऐसी संसाधनयुक्त मॉर्च्यूरी (शवगृह) में सुरक्षित रखा जाए जहां उसे डीकंपोज़ होने से बचाया जा सके.

इस बीच राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लिया है. आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी को पत्र लिखकर सात दिनों के भीतर विस्तृत "एक्शन टेकन" रिपोर्ट मांगी है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह 'दम घुटना' बताई गई है लेकिन रिपोर्ट में शरीर पर मौत से पहले लगी कई चोटों का भी उल्लेख है. इसी को लेकर त्विषा का परिवार लगातार सवाल उठा रहा है.

परिवार के साझा किए गए चैट्स में त्विषा ने कई बार अपने पति और ससुराल पक्ष पर प्रताड़ित किए जाने की बात कही थी. हालांकि ससुराल पक्ष ने इन आरोपों से इनकार किया है.

पुलिस ने अब तक क्या कहा है?

बीबीसी से बातचीत में भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा, "यह साफ़तौर पर आत्महत्या का मामला है, हत्या का नहीं."

पुलिस कमिश्नर ने यह भी कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट या जांच में अब तक नशीले पदार्थ के इस्तेमाल जैसी कोई बात सामने नहीं आई है जैसा कि उनके ससुराल वालों ने आरोप लगाया था.

बीबीसी ने त्विषा शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखी है जिसमें दम घुटने से मौत की बात कही गई है.

रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि शरीर के दूसरे हिस्सों पर "मल्टीपल एंटी मॉर्टम इंजरीज़" यानी कई ऐसी चोटें थीं जो मौत से पहले लगी थीं. इनमें बाएं हाथ पर नीले निशान, कलाई और बांह के पास लाल चोटों जैसे निशान शामिल हैं.

उठ रहे हैं सवाल

हालांकि दम घुटने का मतलब ख़ुदकुशी करना ही है, ये बात त्विषा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से साफ़ नहीं निकलती. ये भी नहीं पता चल रहा है कि मौत से पहले उनका किसी तरह का किसी से शारीरिक संघर्ष हुआ.

हमने यही सवाल जब भोपाल पुलिस कमिश्नर से किया तो उन्होंने कहा, "हमारी जांच और अब तक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को मिलाकर ये आत्महत्या का ही मामला है."

रिपोर्ट के मुताबिक़ दम घुटने या मौत से जुड़ी सामग्री भी पोस्टमार्टम टीम को उपलब्ध नहीं कराई गई थी.

यही इस मामले के सबसे बड़े विवादों में से एक बन गया है. त्विषा के परिवार ने फ़ोरेंसिक साक्ष्यों के रख-रखाव और जांच में लापरवाही के आरोप लगाए हैं.

भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने भी माना है कि कथित तौर पर ख़ुदकुशी में इस्तेमाल की गई सामग्री शुरुआती पोस्टमार्टम के दौरान मेडिकल टीम तक नहीं पहुंची थी. उन्होंने कहा कि इस चूक की अलग से जांच कराई जाएगी.

दूसरे पोस्टमार्टम की मांग ख़ारिज

वहीं त्विषा का परिवार कह रहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटें कई सवाल खड़े करती हैं और इसी वजह से वे एम्स दिल्ली में स्वतंत्र दूसरे पोस्टमार्टम की मांग कर रहे थे.

बीबीसी से बातचीत में त्विषा के पिता नवनिधि शर्मा ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच दोनों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "हर कोई इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है. रिपोर्ट खुद कह रही है कि शरीर पर कई एंटी मॉर्टम इंजरी थीं. फिर ये चोटें कैसे आईं? रिपोर्ट में यह भी नहीं लिखा कि यह आत्महत्या थी या किसी ने जबरन कर दिया. हम अदालत और सभी लोगों से फिर मांग कर रहे हैं कि दूसरा पोस्टमार्टम कराया जाए ताकि हर पहलू की जांच हो सके. मैं सिर्फ़ अपनी बेटी के लिए न्याय चाहता हूं."

हालांकि कोर्ट ने दूसरा पोस्टमार्टम कराने की मांग को ख़ारिज कर दिया है.

बीबीसी से बात करते हुए त्विषा के परिवार के पक्ष के वकील अंकुर पांडे ने कहा, "हमारे आवेदन, पुलिस द्वारा लगाया गया प्रतिवेदन और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद माननीय न्यायालय ने हमारी दोबारा पोस्टमार्टम कराने की अपील को ख़ारिज किया है. लेकिन हमारे द्वारा उठाए गए सवालों के मद्देनज़र कोर्ट ने त्विषा की बॉडी को तुरंत प्रिज़र्व करने के लिए आदेश दिया है".

उन्होंने आगे कहा, "माननीय न्यायालय ने इस मामले में फ़रार अभियुक्त समर्थ सिंह को भी 23 तारीख़ को उपस्थित होने के लिए कहा है."

दूसरी ओर भोपाल पुलिस ने त्विषा के पति समर्थ सिंह के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है. भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा है कि एसआईटी मामले की "हर एंगल" से जांच कर रही है और अभियुक्त की तलाश जारी है.

इसी बीच मध्य प्रदेश सरकार ने कहा है कि वह इस मामले की सीबीआई जांच कराने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखेगी.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार, 20 मई को त्विषा के परिवार से मुलाक़ात के दौरान यह आश्वासन दिया. सरकार ने यह भी कहा है कि वह त्विषा की सास और सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम ज़मानत के ख़िलाफ़ अदालत में आवेदन लगाएगी.

त्विषा के पिता नवनिधि शर्मा ने बुधवार को रिटायर्ड सैनिकों के एक समूह के साथ मुख्यमंत्री से मुलाक़ात की. परिवार का कहना है कि अगर अदालत भविष्य में दोबारा पोस्टमार्टम की अनुमति देती है तो सरकार ने पार्थिव शरीर को एम्स दिल्ली भेजने का भी भरोसा दिया है.

वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने अभियुक्तों की गिरफ़्तारी, फ़रार पति समर्थ सिंह की तलाश, पासपोर्ट इंपाउंड करने की स्थिति, सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड्स, इलेक्ट्रॉनिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़ी जानकारी मांगी है.

आयोग ने यह भी कहा है कि परिवार को किसी भी तरह की धमकी, दबाव या चरित्र हनन से सुरक्षा दी जाए.

मौत के आठ दिन बाद त्विषा की बॉडी एम्स भोपाल में

इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने त्विषा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबला सिंह के ख़िलाफ़ दहेज प्रताड़ना से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया था.

इस मामले में गिरिबाला सिंह को तो अदालत से अग्रिम ज़मानत मिल गई थी लेकिन समर्थ सिंह की ज़मानत याचिका को अदालत ने ख़ारिज कर दिया था.

मामले की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख एसीपी रजनीश कश्यप कौल ने बीबीसी से कहा था कि, "हमने अदालत में यह पक्ष रखा है कि समर्थ सिंह को ज़मानत मिलने की स्थिति में साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका हो सकती है, जिसके बाद उनकी याचिका ख़ारिज कर दी गई थी."

एसीपी रजनीश कश्यप कौल के मुताबिक़, "घटना के बाद पुलिस को तत्काल सूचना भी नहीं दी गई, जबकि संबंधित पक्ष (त्विषा का ससुराल पक्ष) क़ानून और प्रक्रिया की जानकारी रखने वाले लोग हैं."

घटना के आठ दिन बाद भी समर्थ सिंह फ़रार हैं. पुलिस कमिश्नर संजय कुमार का दावा है कि अभियुक्त को ढूंढने के लिए कई टीमें लगी हुई हैं और 10 हज़ार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है.

दूसरी ओर त्विषा के पिता नवनिधि शर्मा और उनके भाई मेजर हर्षित शर्मा लगातार कह रहे हैं कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का मामला है.

बीबीसी से बातचीत में नवनिधि शर्मा ने कहा, "हम एक बहुत बड़े सिस्टम से लड़ रहे हैं."

मंगलवार को जारी एक प्रेस नोट में परिवार ने कहा कि उन्होंने एम्स दिल्ली में स्वतंत्र दूसरे पोस्टमार्टम के लिए मजिस्ट्रेट का दरवाज़ा खटखटाया है.

परिवार ने यह भी आशंका जताई कि देरी होने पर शव के डिकंपोज़ होने की वजह से महत्वपूर्ण फ़ॉरेंसिक साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं.

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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