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तमिलनाडु: विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को पुलिस ने पूछताछ के बाद दी ज़मानत
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तमिलनाडु: विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को पुलिस ने पूछताछ के बाद दी ज़मानत

विवादास्पद टिप्पणी के मामले में मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर उदयनिधि स्टालिन को चेंगीपट्टी पुलिस स्टेशन में पूछताछ के बाद रिहा किया गया।

L'essentiel

तमिलनाडु पुलिस ने विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को तंजावुर रैली के दौरान की गई विवादास्पद टिप्पणी के मामले में पूछताछ के बाद ज़मानत दे दी है। मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार को उन्हें रिहा करने का आदेश दिया था।

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सोमवार को तंजावुर रैली के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने सीएम विजय और एक तमिल अभिनेत्री के खिलाफ कथित तौर पर विवादास्पद टिप्पणी की थी।

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प्रकाशित 4 अगस्त 2026

पढ़ने का समय: 9 मिनट

तमिलनाडु पुलिस ने विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन से तंजावुर के चेंगीपट्टी पुलिस स्टेशन में पूछताछ करने के बाद ज़मानत दे दी है.

मंगलवार की दोपहर डीएमके नेता और राज्य के नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन को मद्रास हाई कोर्ट ने पूछताछ होने के बाद रिहा करने का आदेश दिया था.

सोमवार को उदयनिधि ने अपनी तंजावुर रैली के दौरान सीएम विजय और एक तमिल अभिनेत्री के ख़िलाफ़ विवादास्पद टिप्पणी की थी.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ़ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने इस मामले में पुलिस और राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) में शिकायत दर्ज कराई थी.

चेन्नई (साउथ) के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त नरेंद्रन नायर ने पुष्टि की थी कि उदयनिधि स्टालिन के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है.

तंजावुर पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ 9 धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाली बात कहना, दंगे भड़काना, सार्वजनिक शांति भंग करना, अश्लील बातें करना शामिल है.

इसके बाद मंगलवार को चेन्नई स्थित उनके आवास से उन्हें पुलिस अपने साथ लेकर तंजावुर गई थी.

काफ़ी समय तक चली पूछताछ ख़त्म होने के बाद उदयनिधि मंगलवार रात लगभग 8.15 बजे पुलिस स्टेशन से बाहर आए.

वह अपनी कार से उतरे और वहां मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ का हाथ हिलाकर अभिवादन किया.

उदयनिधि के ख़िलाफ़ मामला तंजावुर दक्षिण पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है, लेकिन उन्हें चेंगीपट्टी पुलिस स्टेशन ले जाया गया था.

बीबीसी संवाददाता सिराज ने मौके पर बताया कि डीएमके के बड़ी संख्या में समर्थक वहां जमा हो गए, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई.

इससे पहले, डीएमके सदस्यों ने चेंगीपट्टी पुलिस स्टेशन के सामने पुलिसकर्मियों के साथ बहस की थी.

डीएमके सदस्य सवाल उठा रहे हैं कि जब मामला तंजावुर में दर्ज किया गया था तो उन्हें चेंगीपट्टी पुलिस स्टेशन क्यों ले जाया गया.

डीएमके के वकील सरवनन ने मीडिया को बताया कि पुलिस उदयनिधि को परेशान कर रही है.

उन्होंने कहा, "पुलिस विपक्षी नेता उदयनिधि को परेशान कर रही है, जिन्हें चेन्नई से तंजावुर लाया गया है."

सरवनन ने यह भी कहा, "जब मैंने पुलिस से पूछा कि वे मुझे चेंगीपट्टी पुलिस स्टेशन क्यों लाए हैं, तो उन्होंने कहा कि तंजावुर में डीएमके सदस्यों की भारी भीड़ थी."

विपक्षी नेता उदयनिधि, जिन्हें चेंगीपट्टी पुलिस स्टेशन लाया गया था, काफी देर तक पुलिस वाहन के अंदर ही बैठे रहे और बाहर नहीं निकले.

सरवनन ने कहा, "विपक्षी नेता ने कहा कि वह तभी नीचे आएंगे जब उन्हें अदालत में दिए गए निर्देशानुसार पुलिस स्टेशन ले जाया जाएगा."

चेन्नई हाई कोर्ट में क्या हुआ?

वहीं मंगलवार को दिन में उदयनिधि की मद्रास हाई कोर्ट में दायर अग्रिम ज़मानत याचिका पर दोपहर 2.15 बजे जस्टिस इलंधिरयन के समक्ष सुनवाई हुई.

उस समय सरकारी वकील विजय नारायण ने कहा, "उदयनिधि स्टालिन को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें तंजावुर ले जाया जा रहा है. उन्हें हिरासत में रखने का कोई इरादा नहीं है."

सरकारी अभियोजक ने यह भी कहा कि पुलिस स्टेशन में पूछताछ के बाद उदयनिधि को ख़ुद ज़मानत पर रिहा कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के कल्याण की रक्षा करना चाहती है.

इसके बाद न्यायाधीश ने अपना आदेश जारी किया. न्यायाधीश ने आदेश दिया, "जांच पूरी होने के बाद उदयनिधि को आज ही रिहा कर दिया जाए. चूंकि यह अग्रिम ज़मानत याचिका है, इसलिए यह जांच के लिए उपयुक्त नहीं है. उदयनिधि को पुलिस जांच में सहयोग करना चाहिए."

डीएमके के वकील ने क्या कहा?

इस मामले में डीएमके की ओर से पेश हुए वकील एनआर इलांगो ने पत्रकारों से कहा, "तंजावुर पुलिस ने उदयनिधि द्वारा विरोध प्रदर्शन के दौरान कहे गए कुछ शब्दों को ही आधार बनाकर और उनका आंतरिक अर्थ निकालकर मामला दर्ज किया है. वे आज सुबह 8:30 बजे उन्हें गिरफ्तार करने आए थे."

"हमने मद्रास हाई कोर्ट से अनुरोध किया था कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर अवैध है और इसकी तत्काल जांच की जानी चाहिए, और हमने उनसे तब तक उन्हें गिरफ्तार न करने का अनुरोध किया था. लेकिन तंजावुर पुलिस ने हमारी बात नहीं मानी और उन्हें गिरफ्तार कर लिया."

इससे पहले, जब दोपहर में मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो तमिलनाडु सरकार ने तर्क दिया कि "विपक्षी नेता को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, इसलिए अग्रिम ज़मानत मान्य नहीं है."

एनआर इलंगो ने कहा, "उदयनिधि को जबरन गिरफ्तार कर ले जाया गया. हमने कहा था कि जब कुछ मामलों में पुलिस का दुर्व्यवहार स्पष्ट रूप से सामने आया, तो अदालत ने एक अंतरिम आदेश जारी किया था कि अगर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया जाता है, तो उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करके हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए. अदालत ने इस बात पर ध्यान दिया है और एक आदेश जारी किया है."

एनआर इलांगो ने कहा कि उन्होंने कहा कि चूंकि विधानसभा की बैठक कल होनी है, इसलिए उन्होंने अनुरोध किया कि जांच आज ही पूरी कर ली जाए और उन्हें रिहा कर दिया जाए, और अदालत ने भी इसके लिए आदेश जारी कर दिया है.

एनआर इलांगो ने कहा, "दोपहर 2.15 बजे जब मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल ने पुलिस को बताया कि विपक्षी नेता को अदालत ले जाने और हिरासत में लेने की कोई आवश्यकता नहीं है; उनसे पुलिस स्टेशन में ही पूछताछ की जाएगी, उनका बयान दर्ज किया जाएगा और उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया जाएगा."

"सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि गिरफ्तारी से पहले पुलिस इंस्पेक्टर को क्या करना चाहिए. हालांकि, पुलिस ने इस तरह मामला दर्ज किया जैसे उन्हें इसकी जानकारी हो और न भी हो. उन्होंने योजना बनाई थी कि उदयनिधि विधानसभा सत्र में न आएं. अदालत के आदेश से तमिलनाडु में एक बार फिर तानाशाही को रोका गया है."

क्या है पूरा मामला

बीबीसी तमिल के मुताबिक़, कावेरी मुद्दे को लेकर सोमवार को तंजावुर में डीएमके ने टीवीके सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था.

प्रदर्शन के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय पर कावेरी मुद्दे की चिंता न करने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, "उनकी एकमात्र चिंता डीएमके के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराना है."

भाषण के दौरान भीड़ की ओर से लगाए गए नारों के बाद उदयनिधि की कुछ टिप्पणियों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया.

केवल टीवीके ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दल भी इसे मुख्यमंत्री जोसेफ़ विजय का अपमान बता रहे हैं.

टीवीके सरकार में मंत्री एन आनंद ने सवाल उठाया कि क्या विनम्रता और आत्मसंयम से रहित व्यक्ति कैसे हमारे तमिलनाडु का उपमुख्यमंत्री बना था. उदयनिधि पिछली डीएमके सरकार में उपमुख्यमंत्री थे.

एन आनंद ने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है. इसी तरह अधव अर्जुना और राजमोहन समेत कई मंत्रियों ने भी उदयनिधि स्टालिन के भाषण की निंदा की है.

बीजेपी की वरिष्ठ नेता तमिलिसाई सुंदरराजन और तमिलनाडु कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर समेत कई नेताओं ने उदयनिधि की 'टिप्पणी' की आलोचना की है.

उदयनिधि ने क्या कहा

पुलिस वाहन में ले जाए जाते समय उदयनिधि स्टालिन ने मीडिया से कहा, "मैंने जो नहीं कहा, उसे काट-छांट कर और जोड़कर मेरे नाम से फर्जी खबरें फैलाई जा रही हैं. आज मेरे ख़िलाफ़ झूठा मामला दर्ज कर मुझे गिरफ़्तार किया गया है."

"मैं इससे डरने वाला नहीं हूं. मैं कलैग्नर (करुणानिधि) का वंशज हूं, डीएमके परिवार का सदस्य हूं और नेता स्टालिन का बेटा हूं. मैंने उस प्रदर्शन में करीब 22 मिनट तक भाषण दिया था."

उदयनिधि ने कहा, "सरकार ने किसानों को धोखा दिया है, अपने वादे पूरे नहीं किए हैं और मेकेदातु बांध के निर्माण के ख़िलाफ़ आवाज नहीं उठाई है. मैंने कहा था कि मुख्यमंत्री को इस बारे में बोलना चाहिए."

"मैंने यह भी कहा था कि एमके स्टालिन किसानों का समर्थन करेंगे. इस समय टीवीके ध्यान भटकाने वाली गतिविधियों में लगी हुई है. मुख्यमंत्री और सभी मंत्री सिर्फ़ रीलों में जी रहे हैं."

टीवीके ने दर्ज कराई थी शिकायत

टीवीके की ओर से उदयनिधि के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग करते हुए तंजावुर (पूर्व) पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी.

टीवीके की तंजावुर ज़िला महिला इकाई की संयोजक भैरवी की ओर से दी गई शिकायत में कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान मौजूद लोगों के नारों का जवाब देने का दावा करते हुए उदयनिधि ने 'द्विअर्थी संकेत' वाले और 'अपमानजनक' बयान दिए.

शिकायत में यह भी कहा गया है कि डीएमके आईटी विंग ने उदयनिधि के भाषण का 2 मिनट 39 सेकंड का वीडियो अपने एक्स सोशल मीडिया पेज पर पोस्ट और प्रसारित किया.

शिकायत में मांग की गई है कि सार्वजनिक शांति भंग करने के लिए उदयनिधि स्टालिन और वीडियो प्रसारित करने वाले डीएमके आईटी विंग के पदाधिकारियों के ख़िलाफ़ सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जाए.

कई नेता कर रहे आलोचना

उदयनिधि स्टालिन की ओर से कथित तौर पर की गई टिप्पणी को लेकर विपक्षी नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है.

बीजेपी छोड़ चुके अन्नामलाई ने कहा, "जब मैं कल वैगई नदी की सफ़ाई कर रहा था, तो मैंने सोचा, क्या इससे भी ज़्यादा गंदगी हो सकती है? फिर मैंने उदयनिधि स्टालिन का भाषण सुना."

तमिलनाडु बीजेपी की उपाध्यक्ष ख़ुशबू सुंदर ने कहा, "मैंने उदयनिधि स्टालिन का भाषण सुना. यह बेहद घटिया और बहुत अपमानजनक था. इससे वही राजनीतिक सोच दिखती है, जिसे वह आगे बढ़ाना चाहते हैं. अगर ऐसी सोच रखने वाले लोग किसी राजनीतिक पार्टी की अगुवाई करना चाहते हैं और एक दिन राज्य चलाना चाहते हैं, तो भगवान ही बचाए."

"लेकिन डीएमके का एक विपक्षी दल के रूप में सामना करने का साहस न होने के कारण सरकार का इस तरह दमनकारी तरीकों का सहारा लेना क़ानून के ख़िलाफ़ है."

"कल से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में उन्हें भाग लेने से रोकने के लिए विपक्ष के नेता को इस तरह गिरफ़्तार करना खुली कायरता है."

डीएमके के ट्रेजरार टीआर बालू ने उदयनिधि पर लगे आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा, "उदयनिधि ने किसी विशेष महिला के बारे में कुछ नहीं कहा है और मीडिया में पूरी बात को ग़लत तरीके से पेश किया जा रहा है."

À surveiller

Perspective IA — des possibilités, pas des certitudes

  • विधानसभा सत्र में इस मुद्दे पर हंगामा होने की संभावना है।

    Probable · En quelques jours

Questions ouvertes

  • क्या उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी?
  • विधानसभा सत्र में इस मामले का क्या असर होगा?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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