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Retourभारत में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का उदय: सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक व्यंग्य
भारत में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का उदय: सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक व्यंग्य
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BBC हिंदी22/05/2026Politique6 min de lectureIndia

भारत में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का उदय: सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक व्यंग्य

L'essentiel

भारत में सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) नामक एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक दल का जन्म हुआ है। यह दल युवाओं की हताशा और असंतोष को व्यक्त करने का माध्यम बन गया है, और इसके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या सत्ताधारी बीजेपी से दोगुनी हो गई है।

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प्रकाशित 2 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 6 मिनट

भारत में राजनीतिक पार्टियों का जन्म सामान्य तौर पर आंदोलनों से होता है. लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का जन्म 16 मई को सोशल मीडिया पर अचानक से हुआ था.

इसका जन्म कटाक्ष करने वाले ऑनलाइन प्रोजेक्ट के रूप में हुआ था.

दरअसल, 15 मई को भारत के सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था, "समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. क्या आप भी उनके साथ जुड़ना चाहते हैं? कुछ युवा ऐसे हैं, जो रोज़गार नहीं मिलने और पेशे में जगह न बना पाने के कारण कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं.''

जस्टिस सूर्यकांत की इस टिप्पणी की बहुत आलोचना हुई. हालांकि इस आलोचना के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्टीकरण दिया और कहा कि उनकी टिप्पणी को ग़लत तरीक़े से पेश किया गया है.

उन्होंने कहा, "मुझे यह देखकर दुख हुआ कि मीडिया के एक वर्ग ने कल (15 मई को) एक निरर्थक मामले की सुनवाई के दौरान की गई मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया. मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी, जिन्होंने फर्ज़ी और नकली डिग्रियों की मदद से बार (कानूनी पेशे) जैसे क्षेत्रों में प्रवेश किया है. ऐसे ही लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य सम्मानित पेशों में भी घुस आए हैं, इसलिए वे परजीवियों की तरह हैं."

लेकिन तब तक कॉकरोच भारत की राजनीतिक बहस में शामिल हो चुका था. 16 मई को 30 साल के अभिजीत दीपके ने एक्स पर एक गूगल फॉर्म पोस्ट किया, जिसमें लोगों को कॉकरोच जनता पार्टी में रजिस्ट्रेशन के लिए आमंत्रित किया.

कुछ ही घंटों में अभिजीत को 5,000 से अधिक रजिस्ट्रेशन मिल गए और इंटरनेट पर शुरू हुआ एक मज़ाक धीरे-धीरे सार्वजनिक असंतोष, हास्य और राजनीतिक हताशा को अभिव्यक्त करने वाले एक अनौपचारिक संगठन में बदल गया.

अभिजीत इस समय अमेरिका में बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स कर रहे हैं. उन्होंने अपनी पार्टी को लेकर कहा, ''कॉकरोच युवाओं की उस असहमति के भाव को व्यक्त करती है, जो माननीय मुख्य न्यायाधीश के उस बयान के ख़िलाफ़ है, जिसमें उन्होंने युवाओं को कॉकरोच और परजीवी कहा था. भारत जैसे लोकतंत्र में यह स्वीकार्य नहीं था, जहाँ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षक माना जाता है. उन्होंने आलोचना करने के कारण युवाओं को अपमानित किया."

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इंस्टा पर दुनिया की 'सबसे बड़ी पार्टी' बीजेपी पिछड़ी

देखते ही देखते भारत में सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी के फॉलोवर्स लाखों में हो गए. इंस्टाग्राम पर तो कॉकरोच जनता पार्टी के फॉलोवर्स दो करोड़ के क़रीब हो गए हैं जो सत्ताधारी बीजेपी के फॉलोवर्स से दोगुने हैं.

सोशल मीडिया पर बनी कॉकरोच पार्टी की चर्चा भारत में आम लोगों की बातचीत में भी शुरू हो गई है. यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इस पर अच्छी ख़ासी चर्चा हो रही है.

ब्रिटिश न्यूज़ वेबसाइट द गार्डियन ने 21 मई को कॉकरोच जनता पार्टी पर विस्तार से एक कहानी प्रकाशित की है.

गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''कॉकरोच जनता पार्टी को लाखों भारतीय युवा अपनी हताशा और ग़ुस्से को व्यक्त करने के माध्यम के रूप में अपना रहे हैं. कॉकरोच को चुनाव चिह्न बनाने वाली एक पैरोडी राजनीतिक पार्टी ने हास्यास्पद और व्यंग्यात्मक हास्य को विरोध के माध्यम में बदलते हुए भारतीय सोशल मीडिया पर विस्फोटक लोकप्रियता हासिल कर ली है.''

''भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और राजनीतिक अव्यवस्था का मज़ाक उड़ाने वाले मीम्स और छोटे वीडियो सोशल मीडिया पर भर गए हैं. लाखों यूज़र्स अब कॉकरोच, एक ऐसा कीड़ा जो कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहने की क्षमता के लिए जाना जाता है, को संघर्ष और टिके रहने के प्रतीक के रूप में व्यंग्यात्मक अंदाज़ में अपना रहे हैं. इस ऑनलाइन आंदोलन का विस्तार असाधारण रूप से रहा है.

द गर्डियन से सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा , "यह सब जानबूझकर नहीं हुआ. इसमें लोगों की दिलचस्पी युवाओं के भीतर बढ़ती हताशा को दर्शाती है. असल में युवा बहुत निराश हैं. उनके पास अपनी बात कहने का कोई माध्यम नहीं है. वे सरकार से बेहद नाराज़ हैं."

गार्डियन ने लिखा है, ''दीपके पहले आम आदमी पार्टी के साथ काम कर चुके हैं. आम आदमी पार्टी 2012 में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उभरी थी. दीपके कहते हैं, हमें समझना होगा कि पाँच साल पहले तक कोई भी मोदी या सरकार के ख़िलाफ़ खुलकर बोलने को तैयार नहीं था लेकिन अब समय बदल रहा है."

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क़तर के प्रसारक अल जज़ीरा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''सीजेपी के अभियान से जुड़ने वालों में कई बड़े राजनीतिक नाम भी शामिल हैं. इनमें पश्चिम बंगाल से टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा और कीर्ति आज़ाद शामिल हैं. इसी साल केंद्र सरकार की सेवा से सेवानिवृत्त हुए नौकरशाह आशीष जोशी भी उन शुरुआती लोगों में थे, जिन्होंने सोशल मीडिया पर इसके बारे में पढ़ने के बाद पार्टी में रजिस्ट्रेशन कराया.''

जोशी ने अल जज़ीरा से कहा, "पिछले एक दशक में देश में बहुत डर का माहौल रहा है. लोग खुलकर बोलने से डरते हैं. भारत इतना नफ़रत से भर गया है कि सीजेपी ताज़ी हवा के झोंके जैसी लगती है. युवाओं की तुलना कॉकरोच से करने का एक दूसरा पहलू भी है. कॉकरोच बेहद जुझारू जीव होते हैं. वे हर हाल में जीवित रहते हैं."

अल जज़ीरा ने लिखा है, ''हाल के वर्षों में दक्षिण एशिया जेन-ज़ी आंदोलनों का बड़ा केंद्र बना है. श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश में युवा आंदोलनों ने सरकारों को गिरा दिया. दुनिया की सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश भारत भी कई समस्याओं से जूझ रहा है. हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ी है, लेकिन असमानता, बेरोज़गारी और महंगाई बढ़ी है. भारत हर साल 80 लाख से अधिक ग्रैजुएट तैयार करता है लेकिन उनमें बेरोज़गारी दर 29.1 प्रतिशत है.''

ब्रिटिश न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि महज़ पांच दिन पुराना एक समूह, जो जेन-ज़ी की चिंताओं को आवाज़ देता है, भारत में वायरल हो गया है.

रॉयटर्स ने लिखा है, ''यह इंस्टाग्राम पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से भी अधिक फॉलोअर्स हासिल कर चुका है. सीजेपी राजनीति, महंगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर हल्के व्यंग्य और हास्य के साथ चर्चा कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीजेपी जो ख़ुद को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बताती है के इंस्टाग्राम पर 90 लाख से भी कम फॉलोअर्स हैं जबकि सीजेपी के क़रीब दो करोड़ फॉलोवर्स हो चुके हैं.''

रॉयटर्स ने लिखा है, ''सीजेपी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर ग्राफिक्स और वीडियो पोस्ट किए जाते हैं, जिनमें मीडिया की स्वतंत्रता से लेकर संसद और मंत्रिमंडल की आधी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने जैसे मुद्दों तक पर चर्चा होती है. इसने हाल ही में नीट प्रवेश परीक्षा रद्द किए जाने के मुद्दे को भी उठाया, जिसका प्रश्न नपत्र लीक हो गया था और इससे लगभग 23 लाख छात्र प्रभावित हुए."

युवाओं में बेचैनी

रॉयटर्स ने लिखा है, ''भारत के युवाओं के भीतर बेचैनी इस सप्ताह प्रकाशित डीलॉइट ग्लोबल सर्वे में भी दिखाई दी.सर्वे में कहा गया कि भारत की जेन-ज़ी आबादी यानी 1995 से 2007 के बीच जन्मे युवा रोज़गार की कमी और बढ़ती महंगाई से बुरी तरह प्रभावित हुई है. सर्वे के अनुसार, "जेन-ज़ी में वित्तीय तनाव ज़्यादा है. बड़ी संख्या में युवा घर ख़रीदने की मुश्किलों और आर्थिक असुरक्षा की बात कर रहे हैं."

भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है और यहां दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी भी रहती है. देश की 1.42 अरब आबादी में लगभग 65 प्रतिशत लोग 35 वर्ष से कम उम्र के हैं.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में बेरोज़गारी दर 3.1 प्रतिशत थी. लेकिन 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग में यह दर कहीं अधिक, 9.9 प्रतिशत रही. इसमें शहरी क्षेत्रों में 13.6 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 8.3 प्रतिशत बेरोज़गारी दर्ज की गई.

यूएई की न्यूज़ वेबसाइट खलीज टाइम्स ने भी सीजेपी पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. खलीज टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''हालांकि इस आंदोलन का नाम किसी राजनीतिक पार्टी जैसा है, लेकिन फ़िलहाल ऐसा नहीं लगता कि यह पार्टी चुनाव लड़ेगी. क्या भारत अगला नेपाल या बांग्लादेश बनेगा? सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने अकाउंट पर पिन की गई पोस्ट में इसका जवाब नहीं में दिया है.

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This article was originally published by BBC हिंदी.