Dernière minute
BRPassarela desaba após ser atingida por caminhão na Rodovia Fernão DiasCN特朗普称不会与伊朗进行任何会谈或对话ITGuerra in Iran, Trump minaccia l'Oman: "Non ci sono colloqui in corso"CN川普政府將對加拿大加徵關稅,雙方談判進入最後階段CN美國與伊朗談判窗口到期 無延長跡象,華盛頓與伊朗的關係再添緊張CNIsraeli Military Struggles to Evict Settlers in Occupied West BankKR'대통령 패싱'은 헌법·국민 무시…후보 동의안 부결시켜야ARكارين مراد تعيد رؤيتها بفضل تطبيق شقيقها، وتأخير اجتماع لجنة (4+4) الليبية يثير تساؤلاتUSDisney's ABC files First Amendment lawsuit against FCC over license reviewJPコロンビア地震、死者289人に 新政権の対応に批判もBRPassarela desaba após ser atingida por caminhão na Rodovia Fernão DiasCN特朗普称不会与伊朗进行任何会谈或对话ITGuerra in Iran, Trump minaccia l'Oman: "Non ci sono colloqui in corso"CN川普政府將對加拿大加徵關稅,雙方談判進入最後階段CN美國與伊朗談判窗口到期 無延長跡象,華盛頓與伊朗的關係再添緊張CNIsraeli Military Struggles to Evict Settlers in Occupied West BankKR'대통령 패싱'은 헌법·국민 무시…후보 동의안 부결시켜야ARكارين مراد تعيد رؤيتها بفضل تطبيق شقيقها، وتأخير اجتماع لجنة (4+4) الليبية يثير تساؤلاتUSDisney's ABC files First Amendment lawsuit against FCC over license reviewJPコロンビア地震、死者289人に 新政権の対応に批判も
Newsgather
Retourहितोमी सोगा: उत्तर कोरिया द्वारा अपहरण और 24 साल के संघर्ष की कहानी
हितोमी सोगा: उत्तर कोरिया द्वारा अपहरण और 24 साल के संघर्ष की कहानी
Monde
BBC हिंदीhierMonde4 min de lectureIndia

हितोमी सोगा: उत्तर कोरिया द्वारा अपहरण और 24 साल के संघर्ष की कहानी

जापान के सादो द्वीप से अगवा की गईं हितोमी सोगा की उत्तर कोरिया में बिताए 24 वर्षों और वापसी की दास्तान।

L'essentiel

जापान की हितोमी सोगा को 19 साल की उम्र में उत्तर कोरिया द्वारा अगवा कर लिया गया था, जहां उन्होंने 24 साल बिताए, एक अमेरिकी सैनिक से शादी की और अंततः जापान लौटकर अपहृतों के लिए अभियान चलाया।

Résumé généré par IA

Pourquoi c'est important

उत्तर कोरिया ने 1970 और 1980 के दशक में कई जापानी नागरिकों का अपहरण किया था, जिसे 2002 में उत्तर कोरियाई नेतृत्व ने स्वीकार किया था।

Taille de police

जापान के सादो द्वीप पर अगस्त की एक सुहावनी शाम थी, जब 19 वर्षीय हितोमी सोगा का जीवन हमेशा के लिए बदल गया.

वह अपनी मां के साथ किराने का सामान खरीदने गई थी, और दोनों थोड़ी दूर पैदल चलकर अपने घर वापस आ रही थीं.

अचानक, तीन आदमी पीछे से आए और उन मां-बेटी का अपहरण कर लिया.

सोगा याद करती हैं, "हमारे मुंह पर कुछ लगा दिया गया था. फिर हमारे सिर पर एक तरह का बैग डाल दिया गया था."

अगले कुछ दिन धुंधले से गुज़रे. उन्हें तट से पहले एक तेज़ रफ़्तार नाव और फिर शायद एक बड़े जहाज़ पर ले जाया गया.

सोगा कहती हैं कि उन्हें अपनी मां से बात करने का कोई मौक़ा नहीं मिला. उन्हें अपनी मां एक उदार, उज्ज्वल और उन्हें बेहद प्यार करने वाली महिला के रूप में याद हैं.

वह कहती हैं, "मैं अपनी मां से आख़िरी बार भी कुछ नहीं कह सकी."

कुछ दिन बाद आख़िरकार उनकी आंखों से पट्टी हटाई गई. तब उन्होंने सोचा, "यह जापान नहीं है."

सोगा को उत्तर कोरिया ले जाया गया था. वह 1970 और 1980 के दशक में चलाए गए एक गुप्त, राज्य-प्रायोजित अपहरण अभियान की शिकार थीं.

इसके बाद वह अगले 24 साल तक वहीं रहीं.

दो साल सेना के बैरक में रखी गईं

एक सिद्धांत यह है कि उत्तर कोरियाई अधिकारियों का उद्देश्य अपहृत लोगों को तथाकथित "जीवित पाठ्यपुस्तकों" के रूप में उपयोग करना था, जिससे जासूस जापानी भाषा और व्यवहार सीख सकें ताकि वे बाद में उस देश में घुसपैठ कर सकें.

जापान ने कम से कम 17 ऐसे लोगों की पहचान की है जिनका 1977 और 1983 के बीच अपहरण किया गया था, हालांकि यह संख्या इससे अधिक हो सकती है.

'मुझे अब भी नहीं पता... कि मुझे जानबूझकर निशाना बनाया गया था या यह एक आकस्मिक घटना थी,' सोगा कहते हैं.

पहले दो साल उसे सैन्य बैरक में रखा गया. उसे नहीं पता था कि उसकी माँ कहाँ है, और उसने कभी भी कर्मियों से यह नहीं पूछा कि उसे क्यों लाया गया था. सोगा को आभास हो गया था कि उसे सच नहीं बताया जाएगा.

"मैं बैरक से बाहर जाकर आसमान को देखती थी, चांद और तारों को देखती थी और जापान में अपने परिवार के बारे में सोचकर रो पड़ती थी और सोचती थी कि मैं उन्हें फिर कब देख पाऊंगी."

भय और अलगाव के बावजूद, उसने इस उम्मीद को बनाए रखने की कोशिश की कि एक दिन वह मुक्त हो जाएगी.

"मैंने हमेशा उस बात को अपने दिल में संजोकर रखा. मुझे उम्मीद थी कि यह सब खत्म हो जाएगा, और वह उम्मीद कभी दूर नहीं हुई."

अमेरिकी सैनिक से जबरन शादी

आख़िरकार 1980 में सोगा को बैरक से बाहर जाने की अनुमति मिल गई.

उन्हें बताया गया कि उन्हें एक ऐसे व्यक्ति से शादी करनी होगी, जिससे वे पहले कभी नहीं मिली थीं. उनका नाम चार्ल्स जेनकिंस था, जो एक अमेरिकी सैनिक थे और 1965 में उत्तर कोरिया चले गए थे.

जेनकिंस ने सैन्य सीमा क्षेत्र (डीमिलिटराइज़्ड ज़ोन) पार कर लिया था.

उन्हें विश्वास था कि उन्हें वियतनाम में लड़ाई के लिए भेजा जाने वाला है. वह सोचते थे कि अगर वह उत्तर कोरिया के सामने आत्मसमर्पण कर देंगे तो बाद में उन्हें अमेरिका लौटने का मौक़ा मिल जाएगा.

उत्तर कोरिया के लिए यह एक असरदार प्रचार था. उसने जापान और अमेरिका के लोगों को एक जोड़े के रूप में पेश किया, जबकि ये दोनों देश उसके सबसे बड़े विरोधियों में गिने जाते थे.

सोगा कहती हैं, "मुझे वह दिन याद है जब हम पहली बार मिले थे. उस दिन बहुत तेज़ बारिश हो रही थी और मैं बहुत चिंतित और घबराई हुई थी."

हालांकि इस शादी में उनकी अपनी कोई पसंद नहीं थी, लेकिन समय के साथ सोगा अपने पति की बहुत परवाह करने लगीं.

उनकी दो बेटियां हुईं. जेनकिंस उनके लिए खिलौने और फ़र्नीचर की छोटी-छोटी चीज़ें बनाया करता था.

सोगा याद करते हुए कहती हैं, "यह सब बहुत स्वाभाविक लगने लगा था. मेरी ज़िंदगी के सबसे ख़ुश दिन वे थे जब हमारे बच्चों का जन्म हुआ था."

"वह बच्चों के साथ बहुत प्यार और दयालुता से पेश आता था. वह उनका बहुत ख़याल रखता था. यही बात मुझे उसके बारे में सबसे ज़्यादा पसंद थी."

पाबंदियों में जीवन

इस दंपती के पास कोई औपचारिक और वेतन वाली नौकरी नहीं थी. उत्तर कोरिया की सरकार के कड़े नियंत्रण और निगरानी में उनकी ज़िंदगी बंधी हुई थी. वे अपना समय कैसे बिताएं, इस पर भी काफ़ी पाबंदियां थीं.

सोगा कहती हैं कि वह अक्सर सब्ज़ियां उगाने में ख़ुद को व्यस्त रखती थीं.

वह कहती हैं, "न कोई संगीत कार्यक्रम था और न ही सिनेमा. मनोरंजन के लिए करने को कुछ भी नहीं था."

"हर दिन डर और चिंता के साथ गुज़रता था. लेकिन मेरा परिवार मेरे साथ था, इसलिए मुझे उससे कुछ सुकून मिल जाता था."

साल 2002 में उनकी ज़िंदगी का यह क्रम अचानक बदल गया. तब दुनिया को सोगा के अपहरण की सच्चाई पता चली.

जापान और उत्तर कोरिया के रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए एक शिखर बैठक हुई थी.

इस बैठक के दौरान उत्तर कोरिया के तत्कालीन सर्वोच्च नेता किम जोंग-इल ने माना कि जापान जिन 17 नागरिकों के अपहरण का संदेह जता रहा था, उनमें से 13 का अपहरण उत्तर कोरिया ने किया था.

अधिकारियों ने कहा कि उनमें से केवल पांच लोग ही ज़िंदा हैं. उन्होंने यह भी पुष्टि नहीं की कि सोगा की मां मियोशी कभी उत्तर कोरिया पहुंची थीं या नहीं.

इसके कुछ ही समय बाद सोगा को पता चला कि उन्हें थोड़े समय के लिए जापान लौटने की अनुमति दी जाएगी.

वह कहती हैं, "मैं बस यही सोच रही थी कि जापान में अपने परिवार से मिलना चाहती हूं."

"मुझे यह भी लग रहा था कि शायद मेरी मां से दोबारा मिलने का एक मौक़ा मिल जाए."

अपने परिवार से मिलने जापान लौटीं

सोगा ने उत्तर कोरिया में अपने पति और बेटियों से विदा ली. इसके बाद वह जापान जाने वाली फ़्लाइट में सवार हो गईं.

वह अपनी बहन और पिता से मिलने जा रही थीं. उनके परिवार ने दो दशक से भी ज़्यादा समय तक उनकी वापसी का इंतज़ार किया था. उन्हें यह भी नहीं पता था कि सोगा ज़िंदा हैं या नहीं.

सोगा कहती हैं, "जब हम दोबारा मिले और एक-दूसरे को गले लगाया, तो हम सब बस रोते ही रहे."

सोगा ने जापान में ही रहने का फ़ैसला किया. इसके बाद उन्हें अपने पति और बेटियों से दोबारा मिलने में दो साल लग गए.

उनके पति चार्ल्स को डर था कि अगर वह जापान गए, तो अमेरिकी सेना उन्हें गिरफ़्तार कर सकती है.

आख़िरकार बातचीत और समझौते के बाद मामला सुलझा. चार्ल्स ने सेना छोड़कर भाग जाने और दुश्मन की मदद करने का दोष स्वीकार कर लिया.

उन्हें 30 दिन की सज़ा सुनाई गई थी. लेकिन उन्होंने उसमें से 25 दिन की सज़ा काटी.

इसके बाद 2004 में पूरे परिवार को सादो द्वीप पर स्थायी रूप से रहने की अनुमति मिल गई.

सोगा कहती हैं, "मेरी बेटियां पहले कभी सादो द्वीप नहीं गई थीं."

"लेकिन वे जानती थीं कि यह उनकी मां का पैतृक घर है. उन्हें यह जगह बहुत पसंद आ गई."

अपहृत लोगों को बचाने के अभियान में जुटीं

जेनकिंस का 2017 में जापान में निधन हो गया. इसके बाद सोगा ने जापान से अपहरण करके ले जाए गए सभी लोगों को वापस लाने के अभियान में ख़ुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया.

सोगा कहती हैं, "मुझे लगता है कि वह कहेंगी, 'अगर मेरी बेटी लड़ रही है और कभी हार नहीं मान रही, तो मैं भी ऐसा ही करूंगी.'"

यह कहानी बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के कार्यक्रम आउटलुक के एक एपिसोड पर आधारित है. इस लेख को बेका जॉन्स ने लिखा है.

Questions ouvertes

  • क्या हितोमी सोगा की मां अभी भी जीवित हैं?
  • उत्तर कोरिया द्वारा अन्य कितने लोगों का अपहरण किया गया था?

Sujets liés

This article was originally published by BBC हिंदी.

Articles liés

मोहम्मद अली जिन्ना की तपेदिक की बीमारी का वह रहस्य, जो इतिहास बदल सकता था
Monde·il y a 5 heures

मोहम्मद अली जिन्ना की तपेदिक की बीमारी का वह रहस्य, जो इतिहास बदल सकता था

पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की गंभीर तपेदिक (टीबी) की बीमारी को उनके डॉक्टरों ने गुप्त रखा था। हाल ही में पाकिस्तान सरकार ने इस मौन सेवा के लिए उन पारसी डॉक्टरों को सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए नामित किया है।

BBC हिंदी
7 min de lecture