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चीन में महिलाएँ क्यों पहन रही हैं पुरुषों के कपड़े?
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BBC हिंदी16/06/2026Other4 min de lectureIndia

चीन में महिलाएँ क्यों पहन रही हैं पुरुषों के कपड़े?

L'essentiel

चीन में युवा महिलाएँ पुरुषों के कपड़े अपना रही हैं, बेहतर क्वालिटी, कम दाम, ज़्यादा आराम और कम बॉडी शेमिंग जैसी वजहों से। यह ट्रेंड शाओहोंग्शु जैसे सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो रहा है, जहाँ महिलाएँ पुरुषों के कपड़ों की सुविधा और कम कीमत की सराहना कर रही हैं।

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चीन में महिलाएँ क्यों पहन रही हैं पुरुषों के कपड़े?

प्रकाशित 2 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 8 मिनट

गर्मी आते-आते, केक्सिन ने अपनी अलमारी में बदलाव देखा. अब उनके पास महिलाओं के कपड़ों से ज़्यादा पुरुषों के कपड़े हो गए थे.

शर्ट, टी-शर्ट और शॉर्ट्स उनके बॉयफ्रेंड या पिता के लिए नहीं खरीदे गए थे - ये सब उनके लिए थे.

केक्सिन अकेली नहीं है. चीन की कई युवा महिलाएँ अपने सामाजिक दायरे में और ऑनलाइन भी कह रही हैं कि वे पुरुषों के कपड़े अपना रही हैं.

इसके पीछे की वजहें मिलती-जुलती हैं. बेहतर क्वालिटी, कम दाम, ज़्यादा आराम और कम बॉडी शेमिंग (शरीर को लेकर शर्मिंदगी).

लेकिन यह ट्रेंड चल क्यों पड़ा है?

शुरुआत कैसे हुई

चीन के लोकप्रिय सोशल मीडिया ऐप शाओहोंग्शु, जिसे रेडनोट भी कहते हैं, उस पर महिलाएँ पुरुषों के कपड़े पहन रही हैं. इस टैग को आठ करोड़ से ज़्यादा बार देखा गया है, जबकि इस मामले में 'जेंडर-न्यूट्रल ड्रेसिंग' टैग नौ करोड़ से ऊपर पहुँच चुका है.

इस विषय पर पोस्ट लगातार बढ़ रहे हैं, जिनमें पुरुषों के कपड़ों के फ़ायदे बताए जाते हैं -मसलन ज़्यादा कॉटन और लिनेन, साफ़ कट, बड़ी जेबें, मुलायम सिलाई, बेहतर फ़िनिशिंग और कम दाम.

केक्सिन को याद है कि उनकी अलमारी में यह बदलाव साल 2023 में शुरू हुआ, जब उनके सोशल मीडिया फ़ीड पर पुरुषों की टी-शर्ट बेचने वाले लाइवस्ट्रीम आने लगे.

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शुरुआत में उन्हें अजीब लगा. वह कभी अपने पिता या बॉयफ्रेंड के लिए शॉपिंग नहीं करती थीं, तो एल्गोरिदम यह कंटेंट क्यों दिखा रहा था?

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केक्सिन ने सोचा यह कोई गड़बड़ी है, लेकिन एक दिन उन्होंने बाथरूम में रहने के दौरान फ़ोन को कपड़ों के लाइवस्ट्रीम पर ही छोड़ दिया.

इसमें बताया जा रहा था- "लड़कियाँ इसे छोटे साइज़ में ख़रीदकर खुद पहन सकती हैं."

"यह यूनिसेक्स है - महिलाएँ भी पहन सकती हैं."

कुछ ही मिनटों में ये लाइनें बार-बार दोहराई गईं.

महिलाओं को टार्गेट करने वाले लाइवस्ट्रीम्स में अक्सर स्लिम दिखने या महिलाओं के लिए आसानी से उपलब्ध कपड़ों को बढ़ावा देने पर ज़ोर होता है. लेकिन इस लाइवस्ट्रीम में कपड़े की क्वालिटी और मटीरियल पर ध्यान था.

वह कहती हैं, "यह मुझे सचमुच अच्छा लगा. मैंने कभी नहीं समझा कि महिलाओं के कपड़े हमेशा मुख्यधारा की सुंदरता के स्टैंडर्ड क्यों थोपते हैं, ख़ासकर जब उनके डिज़ाइन अक्सर असुविधाजनक होते हैं."

इन कपड़ों की कीमत भी कम थी जो उनके लिए मददगार रही. ज़्यादातर शर्ट एक सौ युआन (1325 रुपए) से कम की थीं. अगर लौटानी भी पड़तीं, तो उन्हें इसमें जोखिम कम लगता था.

उन्होंने अपने लिए पहली बार 'पुरुषों की टी-शर्ट' ख़रीदी और हैरान रह गईं. यह पहले ख़रीदी गई महिलाओं की टी-शर्ट्स से कहीं ज़्यादा आरामदायक, मोटी और हवादार थी, जबकि इसकी कीमत उनकी एक तिहाई ही थी.

ज़्यादा समय नहीं लगा कि उन्होंने पुरुषों के और कपड़े ख़रीदने शुरू कर दिए, और जो झिझक पहनने से पहले लग रही थी, वह कभी सामने आई ही नहीं.

धीरे-धीरे ये कपड़े उनकी अलमारी पर कब्ज़ा करने लगे.

वह कहती हैं, "जैसे कोई बाहरी प्रजाति पुरानी और मूल चीज़ों को बाहर धकेल रही हो."

कम ख़र्च

इस ट्रेंड की पृष्ठभूमि में चीन की कमज़ोर उपभोक्ता अर्थव्यवस्था भी है, जो साल 2022 के अंत में कोविड-19 प्रतिबंधों के हटने के बाद से जारी है.

केक्सिन जैसी कामकाजी महिलाएं जो शंघाई में '996' शेड्यूल (हफ़्ते में छह दिन, सुबह 9 से रात 9) पर काम करती हैं, आर्थिक मामलों में उनकी सतर्कता अब सामान्य हो गई है.

वह नौकरी बदलने को लेकर कम इच्छुक हैं और कपड़ों जैसी ज़रूरी चीज़ों पर भारी ख़र्च करने को लेकर उनकी सावधानी बढ़ गई है.

इस संदर्भ में, कुछ उपभोक्ताओं ने तेज़ी से बदलते फैशन को छोड़ कर कीमत और टिकाऊपन को प्राथमिकता देते हुए 'रिवर्स कन्ज़म्प्शन' ट्रेंड अपनाया है.

केक्सिन कहती हैं, "अगर कुछ फिट नहीं होता, तो लौटाना आसान है. अब मुझे कपड़ों पर ज़्यादा ख़र्च करने का मतलब नहीं दिखता. वैसे भी मैं शायद ही किसी चीज़ को एक सीज़न से ज़्यादा पहनती हूँ."

साइज़िंग की समस्या

कई लोगों के लिए यह बदलाव जेंडर पर बयान देने से ज़्यादा व्यवहारिकता का मामला है. चीन में महिलाओं के कपड़ों की साइज़िंग सबसे ज़्यादा आलोचना का विषय है.

डूईन और शाओहोंग्शु जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर स्लिम इन्फ्लुएंसर्स अक्सर दिखाते हैं कि तथाकथित बड़े साइज़ मुश्किल से फिट होते हैं.

एक्सएल (एक्स्ट्रा लार्ज) लिखी हुई ड्रेसेज़ जो जांघ तक नहीं चढ़ पातीं, या ऐसे साइज़िंग सिस्टम जो अपेक्षाकृत पतली महिलाओं को सबसे छोटी कैटेगरी में डाल देते हैं. वहीं लंबी महिलाएँ जल्दी ही बड़े साइज़ में धकेल दी जाती हैं.

एक वायरल वीडियो में, एक ब्लॉगर ने एल-साइज़ का टॉप अपने पूडल को पहनाया और वह ठीक से फ़िट हो गया.

शंघाई की वकील ली, जिन्होंने अपना परिचय सिर्फ़ इसी उपनाम से देने को कहा, कहती हैं कि उन्होंने जल्दी ही पुरुषों के कपड़े पहनना शुरू कर दिए क्योंकि महिलाओं के कपड़े शायद ही कभी फिट होते थे.

उनकी लंबाई 170 सेमी है और कंधे चौड़े हैं. यूरोप में पढ़ाई करने तक उन्हें पता ही नहीं चला कि स्टैंडर्ड एम (मीडियम) साइज़ उन पर ठीक से फिट हो सकता है.

वह कहती हैं, "ऐसा लगता है कि यहाँ महिलाओं के कपड़े मेरे जैसे शरीर वाले लोगों के लिए बने ही नहीं हैं."

वह पुरुषों के कपड़ों की व्यवहारिकता की ओर भी इशारा करती हैं. वह कहती हैं कि एम-साइज़ की पुरुषों की पैंट की जेब में 11-इंच का टैबलेट और एक किताब आराम से आ सकती है, बिना फिटिंग बिगाड़े.

वह सवाल करती हैं, "महिलाओं के कपड़े ऐसा कर सकते हैं क्या? उनमें एक लिपस्टिक रखने से भी भारी लगने लगता है."

उद्योग पर दबाव

कोविड महामारी के बाद से चीन का कपड़ा क्षेत्र काफ़ी सिकुड़ा है. इसके उत्पादन और निर्यात घटे हैं. रिटेल ग्रोथ भी तेज़ी से गिरी है. साल 2023 में लगभग 15% की तुलना में साल 2024 में यह सिर्फ़ 0.1% बढ़ी.

कंपनियाँ अब नए डिज़ाइन के कपड़े कम बना रही हैं, और उपभोक्ता, जिनके पास पहले से ही बहुत कपड़े हैं, वे ख़र्च घटा रहे हैं.

ख़र्च कम करने के लिए, कुछ ब्रांड अब अपने डिज़ाइन बनाने की बजाय दक्षिण-पूर्व एशिया से पहले से तैयार पैटर्न ख़रीद रहे हैं.

लेकिन ये डिज़ाइन अक्सर चीनी शरीर के आकारों पर फिट नहीं बैठते, जिससे ख़राब फिटिंग और तथाकथित 'चाइल्ड-साइज़' महिलाओं के कपड़ों का चलन बढ़ रहा है.

केक्सिन जैसी ख़रीदारों के लिए, यह बदलाव शायद उस शिफ्ट को और तेज़ कर दे जो पहले से ही उनकी अलमारी को नया रूप दे रहा है.

अतिरिक्त रिपोर्टिंग: लुइस बारुचो

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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