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भरत तिवारी कौन थे जिनके 'एनकाउंटर' पर उठ रहे हैं सवाल, अब तक क्या-क्या हुआ?
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BBC हिंदी30/06/2026Politique6 min de lectureIndia

भरत तिवारी कौन थे जिनके 'एनकाउंटर' पर उठ रहे हैं सवाल, अब तक क्या-क्या हुआ?

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बिहार के भोजपुर ज़िले में भरत तिवारी के कथित 'फ़र्ज़ी एनकाउंटर' ने राजनीतिक और क़ानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस का दावा है कि आत्मरक्षा में गोली चली, लेकिन ग्रामीण इसे 'एनकाउंटर राज' की बहस तक ले गए हैं.

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भरत तिवारी कौन थे जिनके 'एनकाउंटर' पर उठ रहे हैं सवाल, अब तक क्या-क्या हुआ?

Author, प्रीति प्रभा

पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए

प्रकाशित 9 घंटे पहले

पढ़ने का समय: 8 मिनट

बिहार के भोजपुर ज़िले के भरत भूषण तिवारी के 'एनकाउंटर' का मामला लगातार सुर्ख़ियों में है.

भरत तिवारी के फ़ेसबुक लाइव, सरेंडर के दावे और न्यायिक जांच के आदेश ने इस घटना को 'फ़र्ज़ी एनकाउंटर' से 'एनकाउंटर राज' की बहस तक पहुंचा दिया है.

ऐसे में ये सवाल उठता है कि आख़िर कौन थे भरत भूषण तिवारी, जिनके 'एनकाउंटर' ने राजनीतिक और क़ानूनी तौर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

शाहपुर के जवइनियां गाँव में हमारी कोशिश इस सवाल के तह तक पहुंचने की थी.

गाँव के मुहाने पर भरत तिवारी की तस्वीर के साथ एक बड़ा बोर्ड लगाया गया है. जिस पर लिखा है- 'शहीद भरत नगर जवइनियां, आपका बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा.'

यहां के ग्रामीण कहते हैं कि यह नाम भरत तिवारी की श्रद्धांजलि में लोगों ने रखा है.

ये वही गाँव है जहाँ बीती 17 जून को पुलिस ने भरत तिवारी का 'एनकाउंटर' किया, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

हालांकि भोजपुर के एसपी की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ के अनुसार, "पुलिस टीम ने ख़ुद और लोगों की सुरक्षा के लिए गोली चलाई थी, जो भरत भूषण के पाँव में लगी."

जवइनियां गाँव के लोग पुलिस के इस दावे को ग़लत बताते हैं.

इन गांव वालों का कहना है कि अगर भरत तिवारी ने इस गांव के लिए आवाज़ नहीं उठाई होती तो शायद पुनर्वास, बिजली और पानी के मुद्दे भी सामने नहीं आते.

कई गांव वाले हमसे बातचीत में दावा करते हैं, "भरत ने हमारी मांग के लिए अपनी जान क़ुर्बान कर दी."

जवइनियां से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर बिलौटी गाँव में आरा-बक्सर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक सरकारी स्कूल है. इसके सामने भरत का निर्माणाधीन एक मंज़िला मकान है.

यहां उनके माता-पिता से मिलने लगभग हज़ारों की संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, ग्रामीण, मीडियाकर्मी और विभिन्न दलों के नेताओं के आने का सिलसिला लगातार जारी है.

घर के बरामदे में भरत के 70 वर्षीय पिता काशीनाथ तिवारी भीड़ से घिरे रहने के बावजूद बेटे की मौत के सदमे से बेसुध दिखते हैं.

वहीं, भरत की मां 57 वर्षीय आशा देवी घर के एक कमरे में गाँव और रिश्तेदारी की महिलाओं के बीच रोते हुए एक ही बात बार-बार कहती हैं, "पुलिस ने मेरे सामने ही मेरे बेटे को गोली मार दी, ऐसे तो किसी उग्रवादी को भी नहीं मारा जाता है. मेरा बेटा समाजसेवक था. पुलिस ने उसे क्यों मार डाला?"

घर के बरामदे पर बैठे भरत के बड़े भाई 35 वर्षीय वसंत तिवारी अपने छोटे भाई के साथ आँखों में आंसू भरे चुपचाप अपनी माँ और पिताजी को देख रहे हैं.

वसंत तिवारी अपने भाई को याद करते हैं कि भरत उनके चारों भाई-बहनों में सबसे प्रतिभाशाली थे. उन्होंने आरा कॉलेज से बीएससी तक पढ़ाई की थी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे थे.

उन्होंने बताया, "भरत ने समाज सेवा के लिए शादी न करने का फ़ैसला लिया था. शादी के लिए कोई मजबूर न करे, इसके लिए भरत ने करीब 10 साल पहले अपनी मर्ज़ी से ख़ुद का पिंडदान किया था और अंगदान का भी प्रण लिया था."

ग्रामीण विनय कुमार कहते हैं, "निडर, चंचल मन और सभी धाराओं में बहने वाला जवान ख़ून था. वो अति उत्साही ज़रूर था लेकिन बात सही बोलता था और काम समाज के लिए ही करता था."

क्या भरत भूषण तिवारी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड था?

वैसे भरत भूषण का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था पर बीते साल 24 मार्च 2025 को शाहपुर थाने के दारोगा रामाशंकर बैठा ने उन पर एक एफ़आईआर दर्ज कराई थी.

इस एफ़आईआर के मुताबिक़, "ज़मीन विवाद संबंधित काग़ज़ात मांगे जाने पर भरत भूषण तिवारी ने मौजूद दारोगा रामाशंकर बैठा का कॉलर पकड़ लिया और धक्का-मुक्की की."

प्राथमिकी में दो सिपाहियों के घायल होने का भी उल्लेख किया गया है.

इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के अलावा एससी/एसटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया गया था.

भरत तिवारी अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर स्थानीय मुद्दों को उठाने और सत्ता से सवाल पूछने वाले पोस्ट किया करते थे और कई पोस्ट में उन्होंने जवइनियां गांव का मुद्दा उठाया था.

उन्होंने एक फ़ेसबुक पोस्ट करके सरकारी कामकाज के तरीक़े पर नाराज़गी जताई थी और एक अधिकारी का 'एनकाउंटर' करने की बात कही थी.

उनका यह पोस्ट वायरल होने के बाद स्थानीय पुलिस उनके घर गई. पुलिस का दावा है कि उन्होंने भरत तिवारी को समझाने की कोशिश भी कि लेकिन उन्होंने (भरत ने) पिस्टल निकाल ली.

भरत तिवारी ने फ़ेसबुक पर 16 जून की रात से लेकर 17 जून की सुबह तक 10 लाइव किए. जिसमें पुलिस द्वारा उनके घर को घेरने, भरत द्वारा पुलिस पर पिस्टल लहराने और कथित एनकाउंटर वाले वीडियो शामिल हैं.

उनके फ़ेसबुक पर 6,000 फॉलोअर्स थे लेकिन 16 जून के बाद फॉलोअर्स की संख्या ख़बर लिखे जाने तक दो लाख 49 हज़ार हो गई.

भरत तिवारी के फ़ेसबुक पेज पर भगत सिंह और महात्मा गाँधी समेत नेल्सन मंडेला के संदेश और उनकी जीवनी वाले वीडियो दिखाई दे रहे हैं.

वो खुद को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का फ़ैन और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से प्रभावित बताते हैं.

वो अपने सोशल मीडिया पर हथियारों से जुड़े वीडियो शेयर करते थे.

साल 2023 में वो बिहार के भोजपुर से बागेश्वर धाम तक पैदल यात्रा कर चुके थे. इस यात्रा के दौरान उनके कई वीडियो और फ़ोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे. यहां उनकी मुलाक़ात धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से हुई.

क्या है जवइनियां गाँव की कहानी?

ग्रामीण विनय कुमार ने बताया कि शाहपुर प्रखंड का जवइनियां गाँव, पिछले साल जुलाई में भयंकर कटाव और बाढ़ के कारण गंगा नदी में विलीन हो गया था.

इस त्रासदी ने 350 से अधिक घरों को उजाड़ दिया और 1500 से ज़्यादा लोग रातों-रात बेघर हो गए. फिर पुनर्वास के लिए पहले खेप में लगभग 70 ग्रामीणों को बिहार सरकार ने शाहपुर में रहने के लिए ज़मीन दी.

ग्रामीणों का कहना है कि भरत तिवारी ने पुनर्वास का मुद्दा सोशल मीडिया पर ज़ोर-शोर से उठाया और वे इसी वजह से भरत के साथ बेहद जुड़ाव महसूस करते हैं.

गाँव वालों का कहना है कि इसी गाँव के मुहाने पर भरत का 'एनकाउंटर' किया गया.

गांव की तेतरी देवी रोते हुए कहती हैं, "एक तो सरकार ने हमारे साथ धोखा किया, हमको पानी से निकालकर पानी में ही डाल दिया है. यहां से नदी काफ़ी नज़दीक है. जब पानी भरता है तब ये पूरा इलाका भी डूब जाता है. बाढ़ आने या जलजमाव होने पर तो लोगों के घरों में पानी घुस जाएगा, छोटे-छोटे बच्चे हैं, डूबने की भी आशंका रहती है. भरत इसी गड्ढे को भरने की मांग लगातार कर रहे थे लेकिन पुलिस ने उन्हें मार दिया."

ग्रामीणों के इस आरोप पर भोजपुर के ज़िलाधिकारी तनय सुल्तानिया से फ़ोन पर बात करने की कोशिश की लेकिन अभी उनका जवाब नहीं मिल पाया है. जवाब आते ही इस रिपोर्ट में उसे शामिल किया जाएगा.

भरत के दोस्त और ग्रामीण गणेश बताते हैं, "यही तो दुर्भाग्य है कि ज़िन्दा रहते हुए उसका साथ किसी ने नहीं दिया. वो बेचारा अकेले ही लड़ता रहा प्रशासन से."

इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ ?

'एनकाउंटर' के मामले ने तूल पकड़ा तब घटना के तीन दिन बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए शाहपुर थाना अध्यक्ष समेत पांच पुलिस कर्मियों को निलंबित किया.

साथ ही, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर जज के द्वारा न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया.

भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद 22 जून को पहली बार मीडिया के सामने आए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) सुधांशु कुमार ने इसे पुलिस की लापरवाही माना है.

उन्होंने कहा, "एनकाउंटर से पहले 16 जून को जो पुलिस वाले उससे बात करने गए, वह उसे ठीक से हैंडल नहीं कर पाए."

इस बारे में बीबीसी न्यूज़ हिन्दी की टीम ने भोजपुर एसपी राज और ज़िलाधिकारी तनय सुल्तानिया से कई बार फ़ोन पर बात करने की कोशिश की लेकिन उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई, उनका जवाब आने पर इस रिपोर्ट में उसे जोड़ा जाएगा.

वसंत तिवारी मांग करते हैं कि अगर केस से नाम हटा दिया गया है, तो लिखित प्रमाण दिया जाए. साथ ही उन्होंने इस मामले की जाँच सेवानिवृत्त न्यायाधीश से नहीं बल्कि वर्तमान जज से कराए जाने की मांग की है.

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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