Dernière minute
INTLKeir Starmer Resigns as UK Prime Minister After Just Over a Year in OfficeINFrance Braces for Week of Scorching Heat Above 40C, Schools CloseINTLPalantir Contracts Have Become ‘An Unacceptable Point of Weakness,’ UK Politicians WarnAUAlice Springs teen fell through mental health system cracks, inquest findsGLOBALEasyJet Rejects £4.74bn Takeover Bid, Calling it 'On the Cheap'INTLDemocrat challenges incumbent in New York congressional raceGLOBALOliver Tree's Body Returned to California After Helicopter CrashGLOBALBoy, 3, No Longer Critical After Crocodile Attack at Cambridgeshire ZooINRo Khanna Raises Concerns Over Tech Billionaires' Influence in Global PolicymakingINLebanese Diplomat Accuses Elon Musk of Promoting Anti-Muslim Hatred in UKINTLKeir Starmer Resigns as UK Prime Minister After Just Over a Year in OfficeINFrance Braces for Week of Scorching Heat Above 40C, Schools CloseINTLPalantir Contracts Have Become ‘An Unacceptable Point of Weakness,’ UK Politicians WarnAUAlice Springs teen fell through mental health system cracks, inquest findsGLOBALEasyJet Rejects £4.74bn Takeover Bid, Calling it 'On the Cheap'INTLDemocrat challenges incumbent in New York congressional raceGLOBALOliver Tree's Body Returned to California After Helicopter CrashGLOBALBoy, 3, No Longer Critical After Crocodile Attack at Cambridgeshire ZooINRo Khanna Raises Concerns Over Tech Billionaires' Influence in Global PolicymakingINLebanese Diplomat Accuses Elon Musk of Promoting Anti-Muslim Hatred in UK
Newsgather
Backशिवसेना (यूबीटी) की बैठक में तीन लोकसभा सांसदों की गैरमौजूदगी पर सवाल
शिवसेना (यूबीटी) की बैठक में तीन लोकसभा सांसदों की गैरमौजूदगी पर सवाल
En développement
BBC हिंदी3 g öncePolitique7 dk okumaIndia

शिवसेना (यूबीटी) की बैठक में तीन लोकसभा सांसदों की गैरमौजूदगी पर सवाल

L'essentiel

शिवसेना (यूबीटी) की दिल्ली में हुई पार्टी कार्यालय की बैठक में लोकसभा के तीन सांसद और राज्यसभा के एक सांसद अनुपस्थित रहे. पार्टी ने इसे व्हिप का उल्लंघन मानते हुए सभी अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का फैसला किया है.

Résumé généré par IA

Pourquoi c'est important

शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों ने पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग नहीं लिया, जिसे पार्टी व्हिप का उल्लंघन माना जा रहा है. पार्टी ने ऐसे सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है.

Taille de police

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) यानी शिवसेना (यूबीटी) की दिल्ली में संसद भवन स्थित पार्टी कार्यालय में 18 जून को बैठक हुई.

बैठक से एक दिन पहले, यानी 17 जून को पार्टी प्रमुख अनिल देसाई ने सभी सांसदों से इसमें शामिल होने की अपील की थी. लेकिन गुरुवार को हुई इस बैठक में लोकसभा के सिर्फ तीन सांसद और राज्यसभा के एक सांसद ही पहुंचे.

बैठक में राज्यसभा सांसद संजय राउत मौजूद थे. लोकसभा से अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे शामिल हुए.

बाकी लोकसभा सांसद ओमराजे निंबालकर, संजय दीना पाटिल, नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय (बंडू) जाधव बैठक में नहीं पहुंचे.

सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) की इस आधिकारिक बैठक में शामिल नहीं होकर इन सांसदों ने पार्टी के व्हिप का उल्लंघन किया है.

उन्होंने कहा कि इन सभी सांसदों को कारण बताओ नोटिस भेजा जाएगा.

अरविंद सावंत ने यह भी कहा कि अगर नोटिस जारी होने के सात दिन के भीतर जवाब नहीं मिलता है, तो पार्टी उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी.

अब जानते हैं कि बैठक में शामिल नहीं होने वाले ये सांसद कौन हैं.

1. सांसद संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम)

संजय उत्तमराव देशमुख 2024 से यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

इससे पहले वह दिग्रस विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं.

वह 2008 से यवतमाल जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के निदेशक भी हैं.

संजय देशमुख ने बी.कॉम तक पढ़ाई की है.

उन्होंने 90 के दशक की शुरुआत में शिवसेना से जुड़कर राजनीति शुरू की.

इसके बाद उन्होंने 1999 और 2004 में दिग्रस से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव जीता.

वह 2001 से 2004 तक महाराष्ट्र सरकार में खेल मंत्री भी रहे.

यवतमाल-वाशिम विदर्भ की अहम लोकसभा सीटों में गिनी जाती है.

2024 का चुनाव यहां बेहद करीबी रहा.

इस सीट पर पिछले पांच चुनावों से शिवसेना की भावना गवली का दबदबा था.

लेकिन शिवसेना के शिंदे गुट ने उन्हें टिकट नहीं दिया.

उनकी जगह तत्कालीन सांसद हेमंत पाटिल की पत्नी राजश्री पाटिल (महाले) को उम्मीदवार बनाया गया.

संजय देशमुख ने चुनाव में राजश्री पाटिल को हराया.

2. सांसद संजय जाधव (परभणी)

संजय हरिभाऊ जाधव, जिन्हें बंडू जाधव के नाम से भी जाना जाता है, पिछले तीन कार्यकाल से परभणी लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

वह शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के उपनेता भी रह चुके हैं.

उन्हें पार्टी का वफादार नेता माना जाता है.

उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव लगातार जीते.

कुछ वेबसाइटों के मुताबिक उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की है. जबकि कुछ वेबसाइटें उनकी शैक्षणिक योग्यता 12वीं बताती हैं.

2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने राष्ट्रीय समाज पार्टी के महादेव जानकर को हराया.

इससे पहले वह 2004 और 2009 में परभणी से विधायक भी चुने गए थे.

जब शिवसेना में विभाजन हुआ, तब संजय जाधव मजबूती से उद्धव ठाकरे के साथ खड़े रहे.

3. सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली)

मराठवाड़ा के नांदेड़ जिले के रहने वाले नागेश पाटिल आष्टीकर ने 2024 के लोकसभा चुनाव में हिंगोली सीट से जीत हासिल की.

उन्होंने शिवसेना के शिंदे गुट के उम्मीदवार बाबूराव कदम कोहलीकर को हराया.

नागेश पाटिल ने एम.कॉम तक पढ़ाई की है.

उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत सरपंच के पद से की थी.

इसके बाद वह 2014 में नांदेड़ जिले की हदगांव विधानसभा सीट से विधायक बने.

हिंगोली लोकसभा सीट में हदगांव विधानसभा क्षेत्र भी शामिल है.

नागेश पाटिल शिवसेना के पुराने कार्यकर्ता हैं.

वह नांदेड़ जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के निदेशक भी हैं.

2024 के चुनाव में शिंदे गुट ने इस सीट से तत्कालीन सांसद हेमंत पाटिल की जगह बाबूराव कदम को उम्मीदवार बनाया था.

4. सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी)

भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी हैं.

वह इस समय शिर्डी लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने शिंदे गुट के तत्कालीन सांसद सदाशिव लोखंडे को हराया.

उस समय इस सीट पर सदाशिव लोखंडे के खिलाफ काफी नाराजगी थी.

कहा जाता है कि इसका फायदा भाऊसाहेब वाकचौरे को मिला.

भाऊसाहेब वाकचौरे ने अपने राजनीतिक जीवन में कई बार पार्टी बदली है.

वह अलग-अलग समय पर शिवसेना, कांग्रेस और भाजपा में रहे हैं.

इससे पहले वह 2009 में भी शिर्डी लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे.

तब उन्होंने कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के उम्मीदवार रामदास आठवले को हराया था.

अपने पहले ही चुनाव में रामदास आठवले जैसे बड़े नेता को हराने के बाद वह पूरे महाराष्ट्र में चर्चा का विषय बन गए थे.

2014 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा.

लेकिन उस चुनाव में उन्हें शिवसेना के सदाशिव लोखंडे ने हरा दिया.

हार के बाद वह भाजपा में शामिल हो गए.

उन्होंने श्रीरामपुर विधानसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन वहां भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के खिलाफ बगावत की.

उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर सदाशिव लोखंडे के खिलाफ चुनाव लड़ा.

इस चुनाव में उनकी जमानत भी जब्त हो गई.

5. सांसद ओमराजे निंबालकर (धाराशिव)

ओमराजे निंबालकर को ऐसे नेता के रूप में जाना जाता है, जो आम लोगों के लिए 24 घंटे फोन पर उपलब्ध रहते हैं.

वह लगातार दूसरी बार धाराशिव, यानी उस्मानाबाद लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

उन्हें उद्धव ठाकरे के वफादार और जनसंपर्क वाले नेता के रूप में भी जाना जाता है.

धाराशिव की राजनीति में निंबालकर और पाटिल परिवार हमेशा चर्चा में रहे हैं.

दोनों परिवार लगातार इस सीट पर मुकाबला करते रहे हैं.

2024 के लोकसभा चुनाव में ओमराजे निंबालकर ने भाजपा विधायक राणाजगजीतसिंह पाटिल की पत्नी अर्चना पाटिल को बड़े अंतर से हराया.

2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने राणाजगजीतसिंह पाटिल को हराया था.

उस समय राणाजगजीतसिंह पाटिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार थे.

ओमराजे निंबालकर ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी.

बाद में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के चलते वह शिवसेना में शामिल हो गए.

6. सांसद संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व)

संजय दीना पाटिल राजनीतिक परिवार से आते हैं.

उनके पिता दीना पाटिल महाराष्ट्र की राजनीति के बड़े नेताओं में गिने जाते थे.

उन्होंने कई वर्षों तक इस क्षेत्र का विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया.

संजय पाटिल की मां मनोरमा पाटिल भी कई वर्षों तक मुंबई नगर निगम की पार्षद रहीं.

संजय दीना पाटिल ने 2024 का लोकसभा चुनाव शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के उम्मीदवार के तौर पर लड़ा.

उन्होंने भाजपा के मिहिर कोटेचा को हराया.

इससे पहले 2009 में उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था.

उस चुनाव में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया को हराया था.

2004 में वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के टिकट पर भांडुप विधानसभा सीट से विधायक भी चुने गए थे.

2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

इसके बाद वह शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में शामिल हो गए.

2024 में उन्होंने फिर लोकसभा चुनाव जीता.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता नवाब मलिक और संजय दीना पाटिल के बीच का विवाद भी काफी चर्चा में रहा.

Questions ouvertes

  • सांसद बैठक में क्यों शामिल नहीं हुए?
  • पार्टी इन सांसदों के खिलाफ क्या कार्रवाई करेगी?
  • क्या यह पार्टी में आंतरिक कलह का संकेत है?

Sujets liés

This article was originally published by BBC हिंदी.

Articles liés

एंडी बर्नहैम: लेबर पार्टी के नेता बनने की दौड़ में एक मज़बूत दावेदार
En développement·23 dk önce

एंडी बर्नहैम: लेबर पार्टी के नेता बनने की दौड़ में एक मज़बूत दावेदार

एंडी बर्नहैम, जो लेबर पार्टी के नेता बनने की दौड़ में शामिल हो सकते हैं, ने मेकरफ़ील्ड उपचुनाव में जीत हासिल की है. यह जीत उन्हें पार्टी नेतृत्व के लिए एक मज़बूत दावेदार बनाती है.

BBC हिंदी