महाराष्ट्र में किसानों को खाद की भारी किल्लत, बुवाई का मौसम नजदीक
L'essentiel
महाराष्ट्र में किसान खाद की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं, जहाँ यूरिया को छोड़कर रासायनिक उर्वरकों की कीमतों में पिछले साल की तुलना में 300-400 रुपये की वृद्धि हुई है। बुवाई का मौसम नजदीक आने के साथ, किसानों को प्रति एकड़ केवल एक से डेढ़ बोरी खाद मिल रही है, जबकि उन्हें अधिक की आवश्यकता है।
Résumé généré par IA
Pourquoi c'est important
महाराष्ट्र में किसान बुवाई के मौसम के नजदीक आने के साथ खाद खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भारी किल्लत और बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ रहा है।
Author, श्रीकांत बंगाले
पदनाम, बीबीसी मराठी के लिए
प्रकाशित 3 मिनट पहले
पढ़ने का समय: 7 मिनट
महाराष्ट्र में धाराशिव के किसान विनायक कावड़े कहते हैं, "आज खाद नहीं मिल रही है. अगर मिल भी जाए, तो 50 किलो के एक बैग की कीमत ₹2,000 से ₹2,200 है."
एक अन्य किसान शरद घोगरे सरकार से पूछते हैं, "आपने 1,800 रुपये कीमत वाले खाद के बोरे की कीमत बढ़ाकर 2,300 रुपये कर दी है. यह किस तरह की सरकार है?"
बुवाई का मौसम नजदीक आ रहा है और किसान खाद खरीदने में जुटे हैं. हमारी मुलाकात छत्रपति संभाजीनगर के गोलाटगांव फाटा में किसान भानुदास थोम्ब्रे से भी हुई.
वह यहाँ एक दुकान पर खाद खरीदने आए थे.
भानुदास ने कहा, "मैं कम से कम दो महीने से खाद की तलाश कर रहा हूँ. कभी मिल जाती है, कभी नहीं. कभी-कभी बीजों की कमी हो जाती है. वे प्रति एकड़ केवल एक से डेढ़ बोरी ही देते हैं."
यूरिया को छोड़कर रासायनिक उर्वरकों की कीमत में इस साल पिछले साल की तुलना में 300 से 400 रुपये की वृद्धि हुई है.
भानुदास ने कहा, "पिछले साल और इस साल कीमत में बहुत बड़ा अंतर आया है. पहले जो खाद करीब 1,900 रुपये में बिक रही थी वह अब 2,250 रुपये में बिक रही है."
दुकानदारों ने अपनी दुकानों में ज़िला प्रशासन के आदेश चिपका रखे थे कि वे अन्य जिलों के किसानों को उर्वरक न बेचें.
'प्रति एकड़ एक बोरी'
कई दुकानों के बाहर ऐसे बोर्ड लगे दिखे जिन पर लिखा था कि उनके पास डीएपी और यूरिया उर्वरक का स्टॉक खत्म हो गया है.
रामेश्वर बुरकुल खाद विक्रेता हैं. कुछ किसान उनकी दुकान के बाहर खाद खरीदने आए थे.
रामेश्वर ने कहा, "अप्रैल-मई के महीने में कोई खाद नहीं आई. न यूरिया आया, न डीएपी आया. 10-26-26 नाम की खाद आई, लेकिन उनके दाम बढ़ गए हैं."
उन्होंने बताया, "कृषि अधिकारियों का कहना है कि प्रति एकड़ एक बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी दी जानी चाहिए."
महाराष्ट्र के जालना जिले के बदनपुर में एक दुकान पर कुछ किसान हमसे मिले.
उनमें से कुछ को यूरिया के छह बोरे चाहिए थे, लेकिन उन्हें केवल दो ही मिले. कुछ को 30 बोरे चाहिए थे, लेकिन उन्हें केवल 10 ही मिले.
छत्रपति संभाजीनगर के एक फ़र्टिलाइज़र डीलर ने हमें बताया कि ढाई एकड़ ज़मीन वाले एक किसान को यूरिया के 18 बैग देने के कारण उनका सेल्स लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया था.
उसके बाद दुकानदार को एक महीने तक खाद की ख़रीद-बिक्री बंद करनी पड़ी. इसलिए, किसान की खाद की मांग करने पर भी दुकानदार मना कर रहा है.
इस बीच, स्थानीय कृषि प्रशासन ने कहा है कि उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है.
छत्रपति संभाजीनगर के संभागीय कृषि संयुक्त निदेशक सुनील वानखेड़े ने बीबीसी मराठी से कहा, "छत्रपति संभाजीनगर मंडल (बीड, जालना और छत्रपति संभाजीनगर के 3 ज़िले) में 3 लाख 33 हजार 602 मीट्रिक टन उर्वरक का भंडार उपलब्ध है. हो सकता है कि किसी दुकान पर कोई विशेष उर्वरक उपलब्ध न हो."
"लेकिन अगर आप दूसरी दुकानों में पूछताछ करेंगे तो वहां वह खाद उपलब्ध है."
उन्होंने आगे कहा, "रासायनिक उर्वरकों का उपयोग अन्य स्थानों पर किया जा सकता है. कुछ अन्य उद्योगों में ख़ासकर यूरिया का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसलिए हमने औद्योगिक उपयोग को रोकने के लिए एक अभियान शुरू किया."
"पेंट उद्योग, फ़र्नीचर उद्योग, जहां इसका उपयोग संभव है. यह सुनिश्चित करने के लिए सभी जांच की गई हैं कि यूरिया का कोई दुरुपयोग न हो और यह किसानों के लिए उपलब्ध हो."
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों को उनकी भूमि के क्षेत्रफल के अनुसार आवश्यक मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा.
कृषि आयुक्त सूरज मंधारे ने कहा, "हम किसानों को उनकी ज़मीन के आकार, उनके द्वारा उगाई जाने वाली फ़सलों और खाद की सुझाई गई मात्रा के आधार पर मार्गदर्शन देने की कोशिश कर रहे हैं."
"हम इस तरह से योजना बना रहे हैं कि किसी को भी अनावश्यक रूप से अधिक खाद न दी जाए और किसी को भी इसकी कमी न हो."
युद्ध से उर्वरक आपूर्ति प्रभावित हुई
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच युद्ध ने परिवहन व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है और उर्वरकों की आपूर्ति पर भी असर डाला है.
विजयराव पाटिल उर्वरक उद्योग के विशेषज्ञ हैं.
उन्होंने कहा, "कुछ देशों में, विशेषकर बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात में, कुछ परियोजनाएं बंद पड़ी हैं. भारत में उर्वरक कारखानों को पर्याप्त कच्चा माल नहीं मिल रहा है. इसलिए, कहीं भी पूर्ण पैमाने पर उत्पादन नहीं हो रहा है."
"उत्पादन नहीं हो रहा है. परिवहन लागत बढ़ गई है. समुद्री बीमा की लागत बढ़ गई है. आपूर्ति में कमी के कारण, बाज़ार में इन उर्वरकों की थोड़ी कमी है."
विजयराव पाटिल ने आगे कहा, "यदि बारिश अच्छी होती है, तो निश्चित रूप से उर्वरक की कमी होने की संभावना है."
राज्य के अधिकांश हिस्सों में किसान फ़िलहाल बारिश का इंतजार कर रहे हैं. किसानों ने अपने खेतों को बुवाई के लिए तैयार कर लिया है. बारिश शुरू होते ही किसान तुरंत खाद ख़रीदना शुरू कर देंगे.
उर्वरकों को लेकर कोई चुनौती नहीं है - केंद्र का दावा
केंद्र सरकार ने दावा किया है कि मौजूदा ख़रीफ सीज़न के लिए उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर कोई बड़ी चुनौती नहीं है.
केंद्र सरकार के दावे के अनुसार , युद्ध के बाद भी देश ने 114 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का उत्पादन किया है, जबकि 33 लाख मीट्रिक टन उर्वरक आयात किया गया है.
वर्तमान ख़रीफ़ सीजन के लिए देश की उर्वरक की आवश्यकता 383 लाख मीट्रिक टन है. इसमें से 197 लाख मीट्रिक टन यानी उर्वरक भंडार का 51% हिस्सा जून के पहले सप्ताह में देश में उपलब्ध है.
भारत ने 17 लाख मीट्रिक टन यूरिया की ख़रीद के लिए एक और वैश्विक निविदा जारी की है, जिसकी प्रक्रिया चल रही है.
खाद की ऑनलाइन बुकिंग, लेकिन...
केंद्र सरकार ने रियायती रासायनिक उर्वरकों की बिक्री के लिए 'उर्वरक बिक्री ढांचा' नामक एक पहल शुरू की है. इस पहल का उद्देश्य उर्वरकों की बिक्री में पारदर्शिता लाना और उनकी कालाबाज़ारी को रोकना है.
यह पहल राज्य के छत्रपति संभाजीनगर और कोल्हापुर ज़िलों में प्रायोगिक आधार पर लागू की जा रही है. 'फ़्रेमवर्क फॉर फ़र्टिलाइज़र सेल' नामक एप्लिकेशन के माध्यम से घर बैठे ही उर्वरक बुक किए जा सकते हैं.
हालांकि, किसानों को इस प्रक्रिया में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उर्वरकों के पंजीकरण के दौरान सही जानकारी दर्ज करने के बावजूद, किसानों के रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहे हैं.
उन्होंने कहा, "एप्लिकेशन कुछ किसानों के आधार कार्ड स्वीकार नहीं कर रहा है, ओटीपी भी काम नहीं कर रहा है. मशीन में भी कुछ ख़राबी है."
सरकार का कहना है कि उर्वरकों का संतुलित उपयोग आवश्यक है, लेकिन किसान शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें ज़रूरत के हिसाब से पर्याप्त मात्रा में उर्वरक नहीं मिल रहे हैं.
À surveiller
Perspective IA — des possibilités, pas des certitudes
बारिश अच्छी होने पर उर्वरक की कमी की संभावना है।
Probable · Court terme
Questions ouvertes
- क्या सरकार किसानों की खाद की मांग पूरी कर पाएगी?
- क्या युद्ध का असर उर्वरक आपूर्ति पर जारी रहेगा?

