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ममता बनर्जी के बयान पर बांग्लादेश की पार्टियों की प्रतिक्रिया
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ममता बनर्जी के बयान पर बांग्लादेश की पार्टियों की प्रतिक्रिया

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बांग्लादेश में हत्या' से जुड़े ममता बनर्जी के बयान पर पड़ोसी देश के राजनीतिक दलों ने क्या कहा?

प्रकाशित 5 मिनट पहले

पढ़ने का समय: 6 मिनट

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बांग्लादेश में हुई एक हत्या से जुड़े बयान ने बांग्लादेश की राजनीतिक पार्टियों में हलचल पैदा कर दी है.

सत्तारूढ़ बीएनपी सरकार ने इस पर सधी प्रतिक्रिया दी है, लेकिन जमात-ए-इस्लामी और जातीय नागरिक पार्टी (एनसीपी) का मानना है कि ममता बनर्जी का इशारा बांग्लादेश में उस्मान हादी की हत्या की ओर था.

एनसीपी का कहना है कि ममता बनर्जी के बयान में भारत के गृह मंत्री का नाम आने के कारण बांग्लादेश सरकार को भारत सरकार से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए.

वहीं, जमात-ए-इस्लामी ने कहा कि ममता बनर्जी का बयान "बांग्लादेशी राजनीति में भारत के खेल करने" का संकेत है.

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राजनीतिक विश्लेषक मोहिउद्दीन अहमद ने कहा है कि ममता बनर्जी के बयान में बांग्लादेश और भारतीय गृह मंत्री का नाम भी शामिल होने के कारण, बांग्लादेश की सरकार इस पर स्पष्टीकरण मांग सकती है.

दूसरी ओर, विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद ने कहा कि ममता बनर्जी अपने देश की सरकार से मुख़ातिब हुई हैं और उन्हें लगता है कि इस पर बांग्लादेश को टिप्पणी नहीं करनी चाहिए.

ममता ने क्या कहा?

पश्चिम बंगाल राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता के धर्मतला में दो जून को एक धरने को संबोधित करते हुए एक बयान दिया था.

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उन्होंने राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की सराहना करते हुए कहा था, "जान लीजिए कि एसटीएफ ने बांग्लादेश से एक बड़े हत्यारे को गिरफ्तार किया था. बांग्लादेश में तब कई आंदोलन हुए. मैं दूसरे देशों के बारे में बात नहीं कर रही हूं, मेरा यह अधिकार नहीं है, लेकिन मेरी मुख्य बात यह है कि वे मेघालय के रास्ते बंगाल में आए. फिर हमारी एसटीएफ ने उन्हें पकड़ लिया."

उन्होंने फिर कहा, "इसके बाद गृह मंत्री ने खुद मुझे फोन किया और कहा… आप बंगाल पुलिस से कहें कि यह बाहर न जाए. यह देश के हित में है."

ममता बनर्जी ने कहा, "आपने उसे मरवाने के लिए किसे लगाया? किसका नाम सामने आया? आज भले ही सरकार बदल गई हो, लेकिन मैं सब जानती हूं. मेरा दिल शब्दों का खजाना है, सूचनाओं का खजाना है और सच का खजाना है."

घटना की पृष्ठभूमि

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बता दें कि इसी साल मार्च में पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ ने बांग्लादेश में उस्मान हादी की हत्या के मामले में दो मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था. मारे गए इन दोनों की पहचान फैसल करीम मसूद उर्फ़ राहुल और आलमगीर हुसैन के रूप में हुई थी.

पश्चिम बंगाल पुलिस के अनुसार, दोनों अभियुक्त मेघालय के रास्ते पश्चिम बंगाल में दाखिल हुए थे. बाद में एसटीएफ ने नदिया ज़िले के शांतिपुर से फिलिप संगमा नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया.

इससे पहले, ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) की डिटेक्टिव ब्रांच ने उस्मान हादी हत्या मामले में फैसल करीम मसूद को मुख्य अभियुक्त घोषित किया था.

हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह इसी घटना की बात कर रहीं थीं या नहीं.

पिछले साल 12 दिसंबर को ढाका में उस्मान हादी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

शरीफ उस्मान हादी, अगस्त 2024 में बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के बाद अपने भाषणों और गतिविधियों के कारण चर्चा में आए थे.

वह 'इंक़लाब मंच' नाम का एक 'राजनीतिक-सांस्कृतिक मंच' बनाकर अपनी गतिविधियां चला रहे थे.

ढाका की प्रतिक्रिया

जैसे ही ममता बनर्जी का बयान मीडिया में आया, सोशल मीडिया पर हलचल मच गई. उस्मान हादी की हत्या, भारत और बांग्लादेश से जुड़े मुद्दों पर तरह तरह की पोस्ट और टिप्पणियां सामने आईं.

हालांकि, मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों ने मीडिया को कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया.

विदेश मंत्रालय में पत्रकारों के सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने कहा, "पड़ोसी देश में हाल में चुनाव हुए. वहां वह (ममता बनर्जी) हार गईं इसलिए उन्होंने अपनी सरकार से कुछ कहा. यह हमारे लिए चर्चा का विषय नहीं है."

उन्होंने आगे कहा, "अगर भारत सरकार हादी की हत्या के बारे में बांग्लादेश को जानकारी देती है… तो गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय इस पर काम कर रहे हैं. हादी के हत्यारों को वापस लाकर न्याय के सामने पेश करना होगा. हम इस पर ईमानदारी से काम कर रहे हैं और प्रगति हुई है. हमें भारत सरकार के साथ राजनयिक संबंधों के जरिए काम करना होगा."

बीएनपी के अन्य नेताओं ने और कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

हालांकि, बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के कुछ नेताओं ने इस पर बात की है, जिससे यह पता चलता है कि उनकी पार्टियों के अंदर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं और जिज्ञासाएं हैं.

बीएनपी के कुछ नेताओं ने अनौपचारिक बातचीत में ममता बनर्जी के बयान पर नाराज़गी जताई है.

जमात-ए-इस्लामी के कुछ लोगों का यह भी मानना है कि बीजेपी और ममता बनर्जी के बीच चुनावी टकराव के कारण बांग्लादेश के बारे में ऐसे बयान दिए जा सकते हैं.

जमात-ए-इस्लामी के महासचिव मियां गुलाम परवर ने कहा कि ममता बनर्जी ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन यह संकेत है कि भारत, बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल दोनों को अपने काबू में रखना चाहता है.

उन्होंने बीबीसी बांग्ला से कहा, "उनकी बातों से लगता है कि उस्मान हादी की हत्या को लेकर भारत किसी साज़िश में शामिल है. और वह उसी तरह का खेल खेल रहा है, जैसा कि कहा जाता है कि ऐसा भारत इस देश की सरकार के बनते बिगड़ते रहने की राजनीति में अपने प्रभुत्ववादी सोच के तहत करता है."

उन्होंने कहा, "कुल मिलाकर ममता बनर्जी के बयान को हल्के में नहीं लिया जा सकता. उनके बयान के आधार पर हमारी सरकार, भारत सरकार से जवाब मांग सकती है."

एनसीपी की भारत से मांग

दूसरी ओर, एनसीपी के सदस्य सचिव अख्तर हुसैन ने कहा कि ममता बनर्जी का बयान उस्मान हादी की हत्या की ओर इशारा करता है.

उनका मानना है कि अब बांग्लादेश सरकार को इस मुद्दे पर भारत सरकार से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए.

उन्होंने बीबीसी बांग्ला से कहा, "हादी की गतिविधियां और उस समय की परिस्थितियां, हत्यारों का भारत भाग जाना, इन सभी बातों पर विचार करना होगा."

"जब सीमा पर इतनी सख्ती थी तो हत्यारे इतनी जल्दी भारत कैसे पहुंच गए? ममता बनर्जी का बयान दिखाता है कि उन्हें इतने कम समय में भारत में कैसे शरण दी गई. हमारा मानना है कि सरकार को इन सवालों के जवाब मांगने चाहिए."

'दोष देने की प्रवृत्ति'

राजनीतिक विश्लेषक मोहिउद्दीन अहमद का कहना है कि बांग्लादेश और भारत में चुनाव हारने के बाद या चुनाव के दौरान एक-दूसरे को दोष देने की प्रवृत्ति रही है.

This article was originally published by BBC हिंदी.

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