Dernière minute
TRUsta Sanatçı Zihni Göktay 81 Yaşında Hayatını KaybettiPLEwakuacja trzech tysięcy osób we Wrocławiu z powodu niewybuchu z czasów II wojny światowejINTLPrison Clash in Sri Lanka Leaves at Least 25 Dead, Over 100 InjuredCN因應颱風逼近 桃園蘆竹羊稠步道甲蟲季提前至7/8-9GLOBALUkraine Air Force Reports "Serious Shortage" of Missiles After Kyiv AttackCN台北市啟動強颱巴威防禦整備 蔣萬安指示全面翻轉防汛思維TRAnkara, 7-8 Temmuz'da NATO Zirvesi'ne Ev Sahipliği YapacakRUМишустин: Россия прошла значительную часть пути к технологической независимости в авиастроенииSEÅtal väcks efter jordskredet vid E6 i StenungsundJP西日本豪雨から8年、犠牲者追悼 避難の重要性訴える声もTRUsta Sanatçı Zihni Göktay 81 Yaşında Hayatını KaybettiPLEwakuacja trzech tysięcy osób we Wrocławiu z powodu niewybuchu z czasów II wojny światowejINTLPrison Clash in Sri Lanka Leaves at Least 25 Dead, Over 100 InjuredCN因應颱風逼近 桃園蘆竹羊稠步道甲蟲季提前至7/8-9GLOBALUkraine Air Force Reports "Serious Shortage" of Missiles After Kyiv AttackCN台北市啟動強颱巴威防禦整備 蔣萬安指示全面翻轉防汛思維TRAnkara, 7-8 Temmuz'da NATO Zirvesi'ne Ev Sahipliği YapacakRUМишустин: Россия прошла значительную часть пути к технологической независимости в авиастроенииSEÅtal väcks efter jordskredet vid E6 i StenungsundJP西日本豪雨から8年、犠牲者追悼 避難の重要性訴える声も
Newsgather
Backईरान: अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में पीएम मोदी जाएंगे या नहीं, भारत के लिए क्यों है दुविधा?
ईरान: अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में पीएम मोदी जाएंगे या नहीं, भारत के लिए क्यों है दुविधा?
En développement
BBC हिंदी27.06.2026Monde4 dk okumaIndia

ईरान: अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में पीएम मोदी जाएंगे या नहीं, भारत के लिए क्यों है दुविधा?

L'essentiel

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की अटकलें तेज हैं। भारत की दुविधा इसराइल और अमेरिका के साथ उसके संबंधों और ईरान के प्रति उसकी विदेश नीति पर निर्भर करती है।

Résumé généré par IA

Pourquoi c'est important

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की फरवरी में इसराइल और अमेरिकी हमलों में मौत हो गई थी। उनके अंतिम संस्कार में दुनिया भर के नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।

Taille de police

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार अगले महीने होगा. उनकी इस साल फरवरी में इसराइल और अमेरिकी हमलों में मौत हो गई थी. इस अंतिम संस्कार में दुनिया भर के कई नेताओं सहित लाखों विदेशी नागरिकों के शामिल होने की उम्मीद है.

पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने खामेनेई के अंतिम संस्कार और दफ़न में राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी की पुष्टि की है.

वहीं, भारतीय मीडिया में खबरें चल रही हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ईरान ने अंतिम संस्कार में आमंत्रित किया है. ईरान ने अभी तक किसी भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को आमंत्रित करने की पुष्टि नहीं की है.

हालांकि तेहरान नगर पालिका में सांस्कृतिक और सामाजिक मामलों के उप प्रमुख मोहम्मद अमीन तवाकलिज़ादेह के अनुसार, "4, 5, 6, 7 और 8 जुलाई को अली खामेनेई के अंतिम संस्कार और दफ़न समारोहों में राजधानी तेहरान में 15 से 20 मिलियन (डेढ़ से दो करोड़) से अधिक लोगों की संभावित भागीदारी को देखते हुए तैयारियां की जा रही हैं."

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया और द हिंदू सहित भारतीय मीडिया आउटलेट्स ने 'राजनयिक सूत्रों' का हवाला देते हुए बताया है कि ईरान ने मोदी को खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है.

देश में इस बात पर बहस शुरू हो गई है कि मोदी ईरान जाएंगे या नहीं.

हालांकि, भारतीय सरकार ने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार में शामिल होने का निमंत्रण मिलने की आधिकारिक तौर पर पुष्टि या खंडन नहीं किया है.

खामेनेई की मौत पर भारत की चुप्पी

ईरान पर इसराइल और अमेरिका के हमलों से ठीक दो दिन पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसराइल की यात्रा पर थे, और भारत ने 28 फरवरी को हुए उन हमलों में अली खामेनेई की हत्या की निंदा नहीं की थी. जबकि पाकिस्तान समेत कई देशों ने खुलकर खामेनेई की हत्या की निंदा की थी.

हालांकि बाद में भारतीय विदेश मंत्रालय ने ईरानी दूतावास जाकर खामेनेई की मौत पर शोक पुस्तिका में हस्ताक्षर कर भारत की तरफ़ से दुख जताया था.

भारत में विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर भाजपा सरकार की कड़ी आलोचना की थी.

एक अप्रैल को एक बयान में, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि उनकी पार्टी "ईरान के खिलाफ अवैध युद्ध और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की हत्या पर प्रधानमंत्री मोदी की आपराधिक चुप्पी की निंदा करती है."

कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी कहा कि ईरानी दूतावास प्रधानमंत्री कार्यालय से महज़ कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, लेकिन फिर भी मोदी वहां शोक व्यक्त करने नहीं गए.

भाजपा सरकार ने इन आरोपों पर आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सांसदों से कहा कि 'भारत शांति का समर्थक है' और प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप से अपनी बातचीत में इस युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त करने का अनुरोध किया क्योंकि यह पूरी विश्व अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है.

सोशल मीडिया पर बहस जारी है

इन्हीं कारणों से कुछ भारतीय विश्लेषकों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सकते हैं, जबकि कुछ अन्य उन्हें ईरान जाने की सलाह दे रहे हैं.

भारत ने आधिकारिक तौर पर ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच युद्धविराम का स्वागत किया, लेकिन कुछ लोगों के अनुसार, संघर्ष के दौरान देश की विदेश नीति 'तटस्थता' पर आधारित रही.

भारतीय विश्लेषक प्रवीण साहनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "प्रधानमंत्री मोदी ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के साथ बैठक में शामिल होंगे या नहीं, यह भारत की विदेश नीति की एक महत्वपूर्ण परीक्षा होगी, जिसे विश्व नेता ध्यान से देखेंगे."

उन्होंने दावा किया, "मुझे यकीन है कि मोदी इसमें भाग नहीं लेंगे (मुझे गलत साबित होने में खुशी होगी)... क्योंकि यह सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने के लिए साहस चाहिए कि भारत की विदेश नीति गलत थी."

अन्य विश्लेषक भी इसे भारत की विदेश नीति की परीक्षा बता रहे हैं.

डॉक्टर ब्रह्मा चेलानी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि इस मामले ने "नई दिल्ली को एक असामान्य राजनयिक स्थिति में धकेल दिया है."

उन्होंने आगे लिखा कि "एक ओर, फरवरी में अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद अपनी चुप्पी के कारण भारत को 'राजनयिक ऋण' का सामना करना पड़ सकता है. दूसरी ओर, अंतिम संस्कार में शामिल होने से अमेरिका और इसराइल नाराज़ हो सकते हैं."

प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने या ना होने की चर्चा केवल विश्लेषकों के बीच ही नहीं हो रही है , बल्कि कई भारतीय राजनेताओं का भी मानना ​​है कि भारत को इस अवसर पर ईरान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए.

सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा कि अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए "प्रधानमंत्री को जाना चाहिए".

"क्योंकि प्रधानमंत्री ने इसराइल में खड़े होकर कहा, 'मैं इसराइल के साथ खड़ा हूं,' इसलिए प्रधानमंत्री को अब ईरान भी जाना चाहिए."

"हमारी विदेश नीति यही रही है कि हम सबके साथ मिलकर रहें. हम अपने देश के हित को देखते हैं."

वहीं मोदी सरकार ने अब तक इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन जब उसके सहयोगी शिवसेना के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने ये तो माना कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के लिए पीएम मोदी को भी बुलाया है लेकिन मोदी के उसमें शामिल होने या ना होने के बारे में उन्होंने कहा, "कहा जा रहा है कि विश्व भर के प्रतिनिधिमंडल उस कार्यक्रम में शामिल होंगे, लेकिन भारत उसमें जाएगा या नहीं ये सम्मानीय प्रधानमंत्री जी तय करेंगे. ये उनका सर्वोच्च अधिकार है. हम इस बारे में कुछ नहीं कह सकते."

कई पुस्तकों की लेखिका सबा नक़वी कहती हैं, "हालिया शांति प्रयासों में अपनी भूमिका के बाद पाकिस्तान खुद को इस्लामी दुनिया में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में प्रस्तुत कर रहा है. परंपरागत रूप से, ईरान का भारत के प्रति हमेशा से नरम रुख रहा है."

"लेकिन इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ हमारे संबंधों के कारण हमने स्थिति को और बिगाड़ दिया."

उन्होंने सरकार को सलाह दी कि "यदि ईरान से आर्थिक प्रतिबंध हटा दिए जाते हैं, तो ईरान के भीतर हमारे लिए वाणिज्यिक और मानवीय अवसर भी उत्पन्न हो सकते हैं."

अन्य विश्लेषक भी इसे भारत की विदेश नीति की परीक्षा बता रहे हैं.

खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां

ईरान ने पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार के लिए चार दिनों के समारोहों का कार्यक्रम जारी किया है.

सरकारी प्रवक्ता फातिमा महाजिरानी के अनुसार, मंत्रिमंडल ने तेहरान प्रांत में 4 और 5 जुलाई को सार्वजनिक अवकाश को मंजूरी दे दी है, जबकि 6 जुलाई को पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा ताकि देश भर के लोग अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकें.

À surveiller

Perspective IA — des possibilités, pas des certitudes

  • प्रधानमंत्री मोदी ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार में भाग नहीं लेंगे।

    Spéculatif · En quelques jours

Questions ouvertes

  • क्या पीएम मोदी अंतिम संस्कार में शामिल होंगे?
  • भारत की विदेश नीति का अगला कदम क्या होगा?

Sujets liés

This article was originally published by BBC हिंदी.

Articles liés