Dernière minute
FRIncendie hors norme en Gironde : Phénomène de pyrocumulonimbus sans précédent en FranceFRAttentat à la Marche des fiertés de Berlin : au moins 1 mort et 29 blessésFRIncendie à Lège-Cap-Ferret : Une nuit d'enfer pour les pompiers et les riverainsFRExplosion à la distillerie Montebello à Petit-Bourg : plusieurs blessés et forte émotionFRGuerre en Ukraine : 10 morts dans une attaque russe près de Kiev, des sanctions EU contournéesFRTadej Pogacar domine le Tour de France avec une 5e victoire d'étape à l'Alpe d'HuezFRIncendies en Gironde et Landes : Macron déploie les Armées, 1 000 militaires sur le terrainCRYPTO-FRCorée du Sud : Google Play bloque 29 exchanges de dérivés crypto pour non-conformitéFRIncendies près de Bordeaux : transports perturbés, trafic ferroviaire interrompuFRAffaire Jeffrey Epstein : les connexions du diplomate français Fabrice Aidan examinées par le Quai d’OrsayFRIncendie hors norme en Gironde : Phénomène de pyrocumulonimbus sans précédent en FranceFRAttentat à la Marche des fiertés de Berlin : au moins 1 mort et 29 blessésFRIncendie à Lège-Cap-Ferret : Une nuit d'enfer pour les pompiers et les riverainsFRExplosion à la distillerie Montebello à Petit-Bourg : plusieurs blessés et forte émotionFRGuerre en Ukraine : 10 morts dans une attaque russe près de Kiev, des sanctions EU contournéesFRTadej Pogacar domine le Tour de France avec une 5e victoire d'étape à l'Alpe d'HuezFRIncendies en Gironde et Landes : Macron déploie les Armées, 1 000 militaires sur le terrainCRYPTO-FRCorée du Sud : Google Play bloque 29 exchanges de dérivés crypto pour non-conformitéFRIncendies près de Bordeaux : transports perturbés, trafic ferroviaire interrompuFRAffaire Jeffrey Epstein : les connexions du diplomate français Fabrice Aidan examinées par le Quai d’Orsay
Newsgather
Retourईरान में हिजाब विवाद: सरकारी मीडिया में बिना हिजाब महिला की तस्वीर पर हंगामा
ईरान में हिजाब विवाद: सरकारी मीडिया में बिना हिजाब महिला की तस्वीर पर हंगामा
En développement
BBC हिंदी22/05/2026Monde3 min de lectureIndia

ईरान में हिजाब विवाद: सरकारी मीडिया में बिना हिजाब महिला की तस्वीर पर हंगामा

L'essentiel

ईरान में एक अनाथ बच्चे की देखभाल करने वाली महिला की बिना हिजाब वाली तस्वीर सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए द्वारा प्रकाशित करने पर विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में एजेंसी के एमडी को तलब किया गया है, जिससे हिजाब नियमों के दोहरे मापदंडों पर बहस तेज हो गई है।

Résumé généré par IA

Taille de police

ईरान में एक अनाथ बच्चे की देखभाल करने वाली महिला की फ़ोटो को लेकर विवाद पैदा हो गया है. इस फ़ोटो में महिला बिना हिजाब के दिख रही है और ईरान में हिजाब पहनने की सख़्त हिदायत है.

वहां की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के प्रबंध निदेशक को वहां के संस्कृति और मीडिया अभियोजक कार्यालय में तलब किया गया है.

न्यायपालिका की मीज़ान समाचार एजेंसी ने 21 मई को बताया कि आईआरएनए ने एक ऐसी महिला की तस्वीरें प्रकाशित की थीं, जिस पर देश के इस्लामी ड्रेस कोड का पालन न करने का आरोप है.

यह समन आईआरएनए की एक फ़ोटो रिपोर्ट को लेकर पैदा हुए विवाद के बाद जारी किया गया.

इस रिपोर्ट में तेहरान की 37 वर्षीय लेखिका और कलाकार सारा कनानी को दिखाया गया था, जिन्होंने सरकार की फोस्टर योजना के तहत कुछ समय के लिए एक अनाथ बच्चे की देखभाल की थी.

अधिकारियों ने एजेंसी को कथित तौर पर ये तस्वीरें हटाने को कहा जिसके बाद यह फोटो सेट हटा दिया गया.

क्या है विवाद

"40 दिनों का मातृत्व प्रेम" शीर्षक वाली मूल रिपोर्ट में कनानी उस बच्चे की देखभाल करते दिख रही हैं, जिसे अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच युद्ध के दौरान बेहरोयेश इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम के तहत उनके पास रखा गया था.

इससे पहले बच्चे को ईरान के वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन की देखरेख में रखा गया था. इस दौरान कनानी बच्चे से गहराई से जुड़ गईं और उसकी कस्टडी चाहती थीं, लेकिन नियमों के अनुसार अविवाहित महिलाओं की तुलना में निःसंतान विवाहित जोड़ों को प्राथमिकता दी जाती है.

बाद में उन्हें बताया गया कि एक दूसरा परिवार बच्चे को गोद लेगा. इसके 40 दिनों के बाद उन्होंने बच्चे को वापस संस्था की देखरेख में सौंप दिया ताकि वह नए परिवार के साथ नई ज़िंदगी शुरू कर सके.

विवाद तब शुरू हुआ जब आईआरएनए ने कनानी के घर के भीतर ली गई तस्वीरें प्रकाशित कीं, जिनमें वह आधिकारिक मीडिया में सामान्यतः अनिवार्य माने जाने वाले पूरे हिजाब में नजर नहीं आ रही थीं.

मध्यमार्गी वेबसाइट अस्र-ए-ईरान ने कहा कि इन तस्वीरों पर ऑनलाइन मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं.

कुछ लोगों ने इसे रोज़मर्रा की सामाजिक वास्तविकताओं को दुर्लभ तरीके से दिखाने वाला कदम बताया, जबकि अन्य ने सरकारी मीडिया संस्थान के ऐसी तस्वीरें प्रकाशित किए जाने की आलोचना की.

वेबसाइट के मुताबिक, इस घटना ने सामाजिक जीवन को दिखाने और सरकारी प्रतिबंधों का पालन करने के बीच मौजूद तनाव को सामने ला दिया.

कट्टरपंथी वेबसाइट राजा न्यूज़ ने आईआरएनए पर "कानून और सामाजिक परंपराओं के खिलाफ" काम करने का आरोप लगाया. वेबसाइट ने उन तस्वीरों को "सामाजिक मानदंडों को तोड़ने वाली" तस्वीरें बताया.

वेबसाइट ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कनानी बच्चे की देखभाल के लिए उपयुक्त थीं. उसका तर्क था कि एक अविवाहित महिला होने के कारण वह न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती थीं. साथ ही आईआरएनए पर "अनुचित सामाजिक मानदंडों" को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया गया.

रिपोर्ट में आगे दावा किया गया कि कनानी के संबंध "विरोधी-क्रांतिकारी" गतिविधियों से रहे हैं. इसके लिए उनके सोशल मीडिया पोस्ट और "वुमन, लाइफ़, फ़्रीडम" नारे के संदर्भों का हवाला दिया गया.

लोगों की प्रतिक्रिया

कनानी ने 19 मई को इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि वह इस रिपोर्ट का विषय थीं और तस्वीरों के प्रकाशन की ज़िम्मेदारी उनकी नहीं थी. उन्होंने विदेशी मीडिया से बातचीत करने की बात से भी इनकार किया और पुराने सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर लगाए गए दावों को खारिज किया.

फोटोग्राफर मरज़िये मौसवी ने इस प्रोजेक्ट का बचाव करते हुए कहा कि इसका केंद्र "देखभाल और मातृत्व" था, न कि किसी की वेशभूषा या दिखावट. उन्होंने कहा कि विवाद के कारण उस फोस्टर योजना के मूल उद्देश्य पर ध्यान नहीं गया, जिसका मकसद ज़रूरतमंद बच्चों को अस्थायी सहारा देना है.

इस घटना ने ईरान में हिजाब नियमों के लागू किए जाने में कथित दोहरे मानदंडों को लेकर चल रही बड़ी बहस को भी हवा दे दी है. कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने हाल की उन तस्वीरों की ओर इशारा किया, जो सरकारी और रूढ़िवादी मीडिया संस्थानों में प्रकाशित हुई थीं और जिनमें सरकार समर्थक आयोजनों में कुछ महिलाएं बिना सिर ढके दिखाई दी थीं. वहीं आलोचना के बाद आईआरएनए ने कनानी की तस्वीरें हटा दीं.

कुछ अन्य लोगों का कहना था कि यह मामला दिखाता है कि बीच-बीच में कुछ ढील दिखाई देने के बावजूद, आधिकारिक मीडिया में ड्रेस कोड से जुड़े प्रतिबंध अब भी सख्ती से लागू हैं.

Sujets liés

This article was originally published by BBC हिंदी.

Articles liés

Plus sur ce sujetईरान