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दक्षिण एशियाई मीडिया भारत में छात्र प्रदर्शनों पर क्या कह रहा है?
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दक्षिण एशियाई मीडिया भारत में छात्र प्रदर्शनों पर क्या कह रहा है?

L'essentiel

भारत में NEET प्रश्नपत्र लीक के बाद शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर युवा संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल का मीडिया इन प्रदर्शनों को प्रमुखता से कवर कर रहा है, इसे भारत सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बता रहा है।

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Pourquoi c'est important

भारत में NEET प्रश्नपत्र लीक होने के बाद शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर युवा संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

Taille de police

पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत दक्षिण एशिया का मीडिया जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शनों पर क्या बोल रहा है?

पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के मीडिया ने शिक्षा सुधारों को लेकर भारत में जारी युवाओं के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) दिल्ली में प्रदर्शनों का नेतृत्व करने वाला एक युवा संगठन है जो नीट के प्रश्नपत्र लीक होने के बाद शिक्षा सुधारों की मांग कर रहा है.

प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल है.

20 जुलाई को सीजेपी के संसद मार्च के बाद इस प्रदर्शन को व्यापक पहचान मिली. इस दौरान दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग जुटे. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया. इन प्रदर्शनकारियों में ज़्यादातर छात्र-छात्राएं और युवा थे.

जंतर-मंतर से संसद तक का ये मार्च सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन के बीच निकाला गया.

वांगचुक नीट का पेपर लीक होने के बाद प्रदर्शन कर रहे हैं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

इस बीच 23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के मामलों में शामिल लोगों को "तेज़ और कड़ी सज़ा" दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाने की घोषणा की है.

हालांकि, सीजेपी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की अपनी मांग नहीं छोड़ी है.

केंद्र सरकार पर दबाव

पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेज़ी अख़बार डॉन ने 23 जुलाई को लिखा, "भारत में असंतोष दिखाई दे रहा है."

डॉन ने संपादकीय में लिखा, "ऐसा लगता है कि अब डर के सहारे शासन की पकड़ कमज़ोर पड़ रही है, क्योंकि सरकार एक बुनियादी सवाल का जवाब देने में संघर्ष कर रही है कि आम भारतीय युवाओं का भविष्य क्या है?"

लेख में कहा गया कि "सभी प्रदर्शनों का दमन" अब "कठोर' हो गया है.

डॉन ने लिखा, "ऐसे समय में जब अपनी बात रखने के ज़्यादातर रास्ते या तो असुरक्षित हैं या नियंत्रण में हैं, इस आंदोलन ने कुछ हद तक लोगों को डर से मुक्त किया है."

पाकिस्तान के एक अन्य प्रमुख अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने लिखा है, "कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रति सरकार की प्रतिक्रिया भारत के लोकतांत्रिक होने के दावों की वास्तविकता को उजागर कर रही है."

पाकिस्तान के न्यूज़ एंकर शाहज़ेब ख़ानज़ादा ने 21 जुलाई को उर्दू समाचार चैनल जियो न्यूज़ पर कहा कि भारत में छात्रों का प्रदर्शन अब बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी आंदोलन का रूप ले चुका है.

उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार ने इस आंदोलन को गंभीरता से नहीं लिया और प्रदर्शनकारियों को राष्ट्र विरोधी तत्व बताया.

इसी तरह एआरवाई न्यूज़ के एंकर कमरान ख़ान ने कहा कि भारत अपने सबसे बड़े युवा नेतृत्व वाले आंदोलनों में से एक का सामना कर रहा है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है.

नेपाल के प्रमुख अख़बार काठमांडू पोस्ट ने 22 जुलाई को लिखा कि सीजेपी की बढ़ती लोकप्रियता भारत के युवाओं में नौकरी की कमी और बार-बार होने वाले परीक्षा प्रश्नपत्र लीक जैसे मुद्दों को लेकर बढ़ती नाराज़गी को दिखाती है.

रिपोर्ट में कहा गया कि इससे विपक्षी दलों को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी पर दबाव बनाने का एक अवसर मिला है, जिनके लिए युवा मतदाता एक अहम आधार माने जाते हैं.

श्रीलंका की समाचार वेबसाइट अदा देराना ने 22 जुलाई को कहा कि दिल्ली में सीजेपी समर्थकों के लगातार प्रदर्शन के कारण भारत सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है.

उसने कहा, "हाल के वर्षों में यह आंदोलन मोदी के ख़िलाफ़ सार्वजनिक असहमति की सबसे प्रमुख अभिव्यक्तियों में से एक बन गया है."

बांग्लादेश के प्रमुख अख़बार 'द डेली स्टार' में 23 जुलाई को प्रकाशित एक टिप्पणी में कहा गया कि 20 जुलाई का सीजेपी प्रदर्शन कई वर्षों में मोदी सरकार को चुनौती देने वाला सबसे बड़ा प्रदर्शन था और यह आंदोलन जल्दी समाप्त होता नहीं दिख रहा.

हाल के वर्षों में भारत के अन्य बड़े आंदोलनों से इसकी तुलना करते हुए लेख में कहा गया कि सीजेपी का प्रदर्शन नागरिकता कानून या कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ हुए आंदोलनों की तुलना में अधिक गहरी और लंबे समय तक असर डालने वाली चुनौती बन सकता है.

अख़बार लिखता है कि 'यह किसी एक समुदाय के हितों के बजाय पूरी एक पीढ़ी की उम्मीदों से जुड़ा है.'

गौरतलब है कि 21 जुलाई को बांग्लादेश के कई छात्र संगठनों ने भारत के छात्र आंदोलन के साथ एकजुटता जताई.

À surveiller

Perspective IA — des possibilités, pas des certitudes

  • परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मामलों में शामिल लोगों को तेज़ और कड़ी सज़ा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित की जाएंगी।

    Très probable · En quelques mois

  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में प्रदर्शन जारी रहेंगे।

    Probable · En quelques semaines

Questions ouvertes

  • क्या केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देंगे?
  • सरकार प्रदर्शनकारियों की अन्य मांगों पर कैसे प्रतिक्रिया देगी?
  • क्या फास्ट-ट्रैक अदालतें प्रश्नपत्र लीक के मामलों को प्रभावी ढंग से संबोधित कर पाएंगी?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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