ईरान पर हमले के संकेत के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने फैसला टाला, तेल संकट की आशंका
L'essentiel
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमले को फिलहाल टाल दिया है। यह फैसला सऊदी क्राउन प्रिंस से बातचीत के बाद आया है, जबकि ईरान ने हमले की स्थिति में तेल ठिकानों पर बड़े हमले की चेतावनी दी है।
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Pourquoi c'est important
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव जून में होर्मुज स्ट्रेट में हुए एक समझौते की व्याख्या को लेकर बढ़ गया था, जिसमें ईरानी जहाजों की आवाजाही को लेकर अस्पष्टता थी। अमेरिका ने ओमान के सहयोग से वैकल्पिक समुद्री मार्ग का प्रयास किया, जिससे तनाव और बढ़ा।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ़िलहाल ईरान पर अपने संभावित हमले को रोकने का एलान किया है।
वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट में दावा किया गया है इससे पहले उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फ़ोन पर बातचीत की थी।
दरअसल अमेरिका और सऊदी अरब ने संयुक्त रूप से इराक़ में ईरान समर्थित समूहों को निशाना बनाते हुए सार्वजनिक तौर पर घोषित पहला हमला किया था।
माना जा रहा था कि इसके बाद ट्रंप ईरान के ख़िलाफ़ फिर बड़ा हमला कर सकते हैं। हालांकि ये आशंका फ़िलहाल टल गई है।
कुछ मीडिया ख़बरों के मुताबिक़ ईरान ने हमले की स्थिति के लिए एक ऐसा प्लान बनाकर रखा है, जो पूरी दुनिया को फिर से गंभीर तेल संकट में डाल सकता है।
इन ख़बरों के मुताबिक़ हमले की स्थिति में ईरान खाड़ी देशों के तेल कुओं पर बड़े हमले करेगा।
ईरान की चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने शनिवार को तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के वरिष्ठ अधिकारियों से अलग-अलग फोन पर बातचीत में यह बात कही थी कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो उनका देश निर्णायक हमले करेगा।
यह बातचीत ऐसे समय हुई जब कुछ घंटे पहले कुवैत की सेना ने दावा किया था कि उसने ईरान की ओर से कुछ अहम ठिकानों पर भेजे गए दुश्मन के ड्रोन मार गिराए हैं।
अरागची ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान से कहा कि अगर ईरान के खिलाफ कोई "आक्रामक कार्रवाई" हुई तो उसका निर्णायक जवाब दिया जाएगा।
बाद में अराग़ची ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से भी कहा कि अगर अमेरिका और इसराइल हमला करते हैं, या क्षेत्र का कोई देश ऐसी कार्रवाई में शामिल होता है, तो ईरान उसी हिसाब से जवाब देगा।
एक्सियोस के मुताबिक़ सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने शनिवार को राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर बात की।
किन जगहों को निशाना बनाने की आशंका
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद से जुड़े मीडिया संस्थान नूर न्यूज़ ने शनिवार को कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमला किया, तो ईरान सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के तेल क्षेत्रों, साथ ही क़तर और इसराइल के तेल और गैस फ़ील्ड को निशाना बनाएगा।
आईआरजीसी से जुड़ी समाचार एजेंसी तस्नीम का कहना कि ईरान ने एक सूची बना रखी है।
इसमें इस बात का ज़िक्र है कि खाड़ी के किन-किन देशों के किन तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।
हालांकि ये पूरी सूची के बारे में सटीक जानकारी नहीं है। लेकिन अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, क़तर के अहम तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।
सऊदी अरब
लिस्ट में दुनिया का सबसे बड़ा पारंपरिक तेल क्षेत्र घवार, अबकैक तेल प्रसंस्करण संयंत्र और खुरैस ऑयल फ़ील्ड शामिल हैं। ये तीनों सऊदी अरब के तेल उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं।
यूएई
संयुक्त अरब अमीरात में ईरान ने कथित तौर पर जाकुम और ऑयल फ़ील्ड और रुवैस रिफाइनरी को संभावित को निशाना बना सकता है।
क़तर
क़तर का नॉर्थ फील्ड दुनिया का सबसे बड़ा नेचुरल गैस फ़ील्ड है। रास लफ्फान औद्योगिक परिसर, दुनिया में एलएनजी निर्यात का एक बड़ा केंद्र है। ये भी इस कथित सूची में शामिल बताया जाता है।
होर्मुज़ पर जारी खींचतान
मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो रॉस हैरिसन का कहना है कि ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका की कोई स्पष्ट रणनीति अभी भी दिखाई नहीं देती। इसकी वजह यह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार बड़े सैन्य कदम उठाने के संकेत देते रहे हैं, लेकिन बाद में पीछे हट जाते हैं।
हैरिसन ने अल जज़ीरा से कहा कि अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि ट्रंप ने ईरान पर प्रस्तावित हमले क्यों टाल दिए। यह भी साफ नहीं है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची की तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत के दौरान ईरान ने अमेरिका को क्या भरोसे दिए होंगे।
उन्होंने कहा, "ईरान के नज़रिए से मुझे लगता है कि उसे यही लगेगा कि संभावित बड़े टकराव के खतरे को देखते हुए डोनाल्ड ट्रंप पीछे हट गए।"
हैरिसन के मुताबिक, जब तक अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को फिर से पूरी तरह खोलने पर स्पष्ट समझौता नहीं होता, तब तक इसे वास्तविक तनाव कम होना नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा, "पिछले कुछ हफ्तों में यह टकराव इसलिए बढ़ा क्योंकि जून में हुए समझौता ज्ञापन की व्याख्या को लेकर दोनों पक्षों में अस्पष्टता थी। मेरा मानना है कि समझौते के बाद ईरान ने अनुच्छेद 5 की ऐसी व्याख्या की कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही का नियंत्रण उसके हाथ में होगा और वही तय करेगा कि रास्ता कब खुलेगा।"
"इसके बाद अमेरिका ने ओमान के साथ मिलकर जहाज़ों को दक्षिणी तट के पास से गुज़रने की व्यवस्था की, ताकि वे ईरान की पहुंच से बाहर रहें। यहीं से तनाव फिर बढ़ना शुरू हुआ।"
उन्होंने कहा, "इसलिए जब तक समुद्री मार्ग को खोलने और नाकेबंदी हटाने पर कोई स्पष्ट समझौता नहीं होता, तब तक यह स्थिति टिकने वाली नहीं है। अभी की घोषणा केवल कुछ समय के लिए तनाव में विराम भर है।"
À surveiller
Perspective IA — des possibilités, pas des certitudes
तनाव को कम करने के प्रयास के तहत अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू हो सकती है।
Probable · En quelques semaines
होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात को लेकर एक नई या स्पष्ट समझ विकसित की जा सकती है।
Probable · En quelques mois
यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं, तो मध्य पूर्व में तनाव फिर से बढ़ सकता है और ईरान फिर से आक्रामक रुख अपना सकता है।
Possible · En quelques mois
Questions ouvertes
- डोनाल्ड ट्रंप ने हमले का फैसला क्यों टाला?
- ईरान ने अमेरिका को हमले से बचने के लिए क्या आश्वासन दिए?
- होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भविष्य में क्या समझौता हो सकता है?
- ईरान द्वारा संभावित हमलों की सूची कितनी सटीक है?

