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बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत और नीट पेपर लीक प्रदर्शनों का असर
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बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत और नीट पेपर लीक प्रदर्शनों का असर

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की जीत और नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलनों के राजनीतिक प्रभावों का विश्लेषण।

L'essentiel

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 19,324 वोटों से जीत दर्ज की है। यह चुनाव नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलनों के तुरंत बाद हुआ, हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर ने इस मुद्दे को मुख्य चुनाव प्रचार नहीं बनाया था।

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नीट पेपर लीक मामले में जंतर-मंतर से संसद तक मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिसके बाद बिहार में कई हिंसक प्रदर्शन हुए। इसी दौरान बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव संपन्न हुआ।

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"देश के बच्चों को कल जिस तरह सरकार ने डंडे से पिटवाया है. उसका जवाब बांकीपुर की जनता यहां पर वोट के माध्यम से देगी. भाजपा को बताएगी कि ये लोकतंत्र है, किसी का एकाधिकार नहीं है."

21 जुलाई को ये बात जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर उप चुनाव में उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार के दौरान कही थी.

दरसल 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने नीट पेपर लीक मामले में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालना चाहा था. लेकिन इस दौरान पुलिस और सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया था और संसद मार्च सफल नहीं हो सका था.

दिल्ली में स्टूडेंट्स के आंदोलन के साथ ही 22, 23 और 25 जुलाई को बिहार के अलग-अलग इलाक़ों में नीट पेपर लीक को लेकर कई हिंसक प्रदर्शन हुए.

राजधानी पटना समेत कई इलाक़ों में हुए इन प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ पुलिस ने बल प्रयोग भी किया.

जब देश की राजधानी और बिहार में ये प्रदर्शन चल रहे थे उसी दौरान राज्य की राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव को लेकर भी प्रचार ज़ोरों पर था.

बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर 19,324 वोटों से जीत चुके हैं. उनकी जीत को लेकर अलग-अलग विश्लेषण किए जा रहे हैं.

इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान हुआ और 25 जुलाई को 'बिहार बंद' के दौरान स्टूडेंट्स समेत कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया था.

राजनीतिक विश्लेषक माधुरी कुमार बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहती हैं कि प्रदर्शन और वोटिंग का समय लगभग आसपास था लेकिन एक बात ये ज़रूर देखी गई कि प्रशांत किशोर ने इन प्रदर्शनों को अपना मुख्य मुद्दा नहीं बनाया था.

प्रशांत किशोर ने 21 जुलाई के अलावा समय-समय पर प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान स्टूडेंट्स आंदोलन से जुड़े सवालों पर जवाब दिया और पुलिस कार्रवाइयों की निंदा की.

साल 2024 में बिहार पब्लिक सर्विस कमिशन (बीपीएससी) की प्रीलिम्स परीक्षा को दोबारा कराने को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान भी प्रशांत किशोर आगे थे.

परीक्षा फिर से कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे स्टूडेंट्स पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था.

हालांकि बांकीपुर में चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर को स्टूडेंट्स के आंदोलन को मुख्य मुद्दा बनाते हुए कम ही देखा गया.

बिहार में हुए आंदोलन का सीजेपी ने समर्थन किया था. एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में प्रशांत किशोर से पूछा गया था कि क्या सीजेपी अगर बिहार आए तो वो क्या करेंगे?

इस सवाल पर उन्होंने कहा था कि सीजेपी का बिहार में स्वागत है. उन्होंने कहा था, "हर व्यक्ति जो इस सरकार के अलोकतांत्रिक व्यवहार को और उनके कामकाज को चुनौती देना चाहता है. हम लोग उनके साथ हैं."

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़, मुंबई के पूर्व प्राध्यापाक पुष्पेंद्र बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहते हैं कि प्रशांत किशोर को स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट को मुद्दा बनाने को लेकर पूरी तरह भरोसा नहीं था इसीलिए उन्होंने चुनाव प्रचार में इसका कम ही ज़िक्र किया.

वो कहते हैं कि प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में इस मुद्दे पर थोड़ा बहुत बोलना शुरू किया था लेकिन उन्होंने खुलकर रैलियों में इस पर कुछ नहीं बोला.

बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज की जीत के लिए विश्लेषक कई मुद्दों को ज़िम्मेदार मानते हैं.

पुष्पेंद्र कहते हैं कि विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय मुद्दे पहले से ही उपचुनाव पर हावी थे.

वो कहते हैं, "जो पारंपरिक रूप से बीजेपी के कोर वोटर रहे हैं या अपने आप को आरएसएस से जोड़ते हैं, वो इस बार मन बना चुके थे कि वोट नहीं देना है. उनमें नाराज़गी थी कि इस सीट को एक जागीर के तौर पर समझ लिया गया है. एक तरह से कहा जाए तो लोगों में एक फ़टीग (थकावट) था कि हमेशा वादे किए जाते हैं लेकिन होगा कुछ नहीं है."

फिर स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट की क्या भूमिका रही? इस सवाल पर पुष्पेंद्र कहते हैं कि सीजेपी और बिहार में हुए प्रदर्शनों ने ताबूत में एक आख़िरी कील ठोंकने का काम किया.

वो कहते हैं, "आप यह कह सकते हैं कि लोगों ने बीजेपी के ख़िलाफ़ मन बना लिया था लेकिन ये जो प्रदर्शन हुए उससे उनके फ़ैसले को बहुत बल मिल गया."

वहीं, माधुरी कुमार भी पुष्पेंद्र की बात से सहमत हैं. वो कहती हैं कि इस उपचुनाव में प्रदर्शन कोई बहुत बड़ा फ़ैक्टर नहीं था.

वो साल 2024 के प्रदर्शनों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहती हैं कि उस दौरान भी स्टूडेंट्स का बीपीएससी के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए और उस समय भी प्रशांत किशोर इस पर बोले थे लेकिन रिज़ल्ट बीजेपी के पक्ष में आए.

साल 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जन सुराज एक भी सीट नहीं जीत पाई थी और प्रशांत किशोर ने ख़ुद चुनाव नहीं लड़ा था.

माधुरी कुमार कहती हैं कि प्रदर्शन के तुरंत बाद वोटिंग हुई ये बात बिलकुल सही है लेकिन प्रशांत किशोर ने इस मुद्दे को भुनाया नहीं वो अपने कैंपेन में दूसरे मुद्दों पर फोकस करते रहे.

वो कहती हैं, "दूसरे दलों ने कैंपेनिंग में स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज के मुद्दों को उठाया और बिहार में एके-47 की फ़ायरिंग को भी मुद्दा बनाया. कहा गया कि गुंडा राज आ गया है तो कुछ हद तक कह सकते हैं कि युवाओं के एक तबके पर इस उपचुनाव में प्रदर्शनों का असर हुआ था."

हालांकि माधुरी कुमार बीजेपी की इस सीट पर हार के लिए उसके उम्मीदवार को ज़िम्मेदार मानती हैं.

नितिन नबीन के बीजेपी अध्यक्ष बनने और राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद ये सीट ख़ाली हुई थी. इसके बाद इस सीट पर बीजेपी ने अभिषेक कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था और नामांकन दाख़िल करने के अगले ही दिन उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया.

इसके बाद बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा को इस सीट पर अपना उम्मीदवार बनाया. वहीं आरजेडी ने रेखा कुमारी को अपना उम्मीदवार बनाया था.

साल 2008 से पहले बांकीपुर सीट को पटना पश्चिम नाम से जाना जाता था. 2008 में परिसीमन के बाद इसे बांकीपुर नाम दिया गया. साल 1995 से इस सीट पर बीजेपी का कब्ज़ा था. उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने बीजेपी उम्मीदवार को 19,324 वोट से हराया है.

माधुरी कुमार कहती हैं कि प्रशांत किशोर इस सीट पर बहुत बड़े मार्जिन से नहीं जीते हैं, बीजेपी की हार की वजह इस सीट पर बीजेपी का एक अजनबी चेहरे को उतारना था.

सीजेपी का प्रदर्शन ख़त्म हो गया है लेकिन झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी के पेपरों में कथित धांधलियों लेकर स्टूडेंट्स का आंदोलन चल रहा है.

क्या बिहार में आंदोलन की राजनीति आगे भी होगी?

इस सवाल पर माधुरी कुमार कहती हैं कि पटना में मंगलवार को भी स्टूडेंट्स का प्रदर्शन हुआ है, नीट पेपर लीक मामले में प्रदर्शन के दौरान गिरफ़्तार आंदोलनकारियों को जेल से छुड़ाने को लेकर आइसा के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं.

वो कहती हैं, "लोकतंत्र में प्रदर्शन होने चाहिए. झारखंड में जारी प्रदर्शनों में कोई शोर-शराबा और हिंसा नहीं है. वहां पर स्टूडेंट्स भूख हड़ताल पर भी हैं."

पुष्पेंद्र कहते हैं कि प्रशांत किशोर अगर कल स्टूडेंट्स जैसे किसी आंदोलन में शामिल होते हैं तो ज़ाहिर है कि ये उनके लिए बड़ा ट्रांसफ़ॉर्मेशन का काम करेगा, हालांकि वो आंदोलन वाले प्राणी नहीं हैं.

Questions ouvertes

  • क्या प्रशांत किशोर भविष्य में छात्र आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लेंगे?
  • क्या बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे बिहार की आगामी राजनीति को प्रभावित करेंगे?

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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