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उत्तराखंड: रुद्रप्रयाग गुरुद्वारे की छत पर निहंग सिखों का कब्ज़ा, तनाव जारी
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BBC हिंदी23/06/2026Monde5 min de lectureIndia

उत्तराखंड: रुद्रप्रयाग गुरुद्वारे की छत पर निहंग सिखों का कब्ज़ा, तनाव जारी

L'essentiel

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित गुरुद्वारा लंगर दमदमा साहिब में सात निहंग सिखों ने छत पर कब्ज़ा कर लिया है। दो निहंग नीचे उतर आए हैं, लेकिन पांच अभी भी वहीं हैं। प्रशासन बातचीत कर रहा है। यह घटना कर्णप्रयाग विवाद से जुड़ी हो सकती है।

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प्रकाशित 22 जून 2026

पढ़ने का समय: 8 मिनट

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले में एक गुरुद्वारे में कथित तौर पर सात निहंग सिखों के छत पर क़ब्ज़ा करने और नीचे आने से इनकार किए जाने के बाद तनाव की स्थिति बनी हुई है.

गढ़वाल के आईजी ने बताया है कि दो निहंग सिख छत से उतर आए हैं. मौके़ पर मौजूद लोगों के मुताबिक़, सात निहंग सिखों में से दो छत से नीचे उतर आए हैं और प्रशासन से बात करके जा चुके हैं. इसके बावजूद पांच निहंग अभी भी गुरुद्वारे की छत पर हैं और नीचे आने को तैयार नहीं हैं.

बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर नगरासू स्थित गुरुद्वारा लंगर दमदमा साहिब में शनिवार से विवाद जारी है.

शनिवार दोपहर क़रीब 3:40 बजे शुरू हुई इस घटना के बाद से ज़िला प्रशासन और पुलिस लगातार मौके पर मौजूद है और समाधान निकालने के प्रयास जारी हैं.

वहीं सोमवार को एक निहंग के भोजन लेने के लिए नीचे आने के दौरान गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल से पत्थर फेंके जाने की घटना सामने आई। क्षेत्र पंचायत सदस्य सतीश राणा का आरोप है कि इस दौरान पुलिस पर भी पथराव किया गया.

हालात को देखते हुए गुरुद्वारे के बाहर आईटीबीपी (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) के जवान तैनात किए गए हैं.

वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बातचीत की.

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि मामले का शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जा सके.

वहीं पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि उनकी प्रशासन से बात हुई है और कहा गया है कि इस मामले में निष्पक्ष रूप से काम किया जाए.

क्या है मामला?

बीबीसी के सहयोगी पत्रकार आसिफ़ अली के मुताबिक़, पुलिस ने बताया कि गुरुद्वारे के सेवादारों और कुछ निहंग सिख तीर्थयात्रियों के बीच किसी मुद्दे को लेकर विवाद हुआ था. इसके बाद कुछ निहंग सिख गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए और वहां जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया.

तब से प्रशासन, पुलिस और गुरुद्वारा प्रबंधन समिति लगातार उनसे बातचीत कर रही है.

इस बीच, गुरुद्वारा प्रबंधन ने दावा किया है कि छत पर मौजूद लोग मान्यता प्राप्त निहंग संगठनों से संबद्ध नहीं हैं.

विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि निहंग सिख कर्णप्रयाग विवाद के सिलसिले में पहले हिरासत में लिए गए चार निहंग सिखों की रिहाई की मांग कर रहे हैं.

इस बारे में समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में गुरुद्वारा लंगर दमदमा साहिब के प्रबंधक बाबा बेअंत सिंह ने कहा, "मुझे इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं है. मैंने एसपी से बात की है. उन्होंने आश्वासन दिया है कि हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा कर दिया जाएगा."

दूसरी ओर, रुद्रप्रयाग की पुलिस अधीक्षक (एसपी) निहारिका तोमर ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा कि गुरुद्वारे पर किसी तरह का क़ब्ज़ा नहीं किया गया है और न ही किसी को बंधक बनाया गया है.

उन्होंने कहा कि बातचीत के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और एक निहंग सिख छत से नीचे आकर प्रशासन से बातचीत कर रहा है, जबकि अन्य लोगों के साथ भी संवाद जारी है.

गढ़वाल के आईजी राजीव स्वरूप ने कहा है कि इस घटना में सबसे पहले निहंग श्रद्धालु और वहां के प्रबंधकों के बीच लंगर के दौरान ये विवाद पैदा हुआ. विवाद होने के बाद प्रबंधक के द्वारा 112 पर कॉल की गई और पुलिस वहां गई.

"पुलिस को देखकर निहंग श्रद्धालु डर गए और ख़ुद को छत पर बंद कर लिया. इस दौरान काफ़ी बातचीत हुई. प्रमुख रूप से ये प्रबंधकों और निहंग श्रद्धालुओं के बीच का विवाद है. प्रबंधक भी निहंग समुदाय से संबंध रखते हैं."

"हमारे डीएम-एसपी मौके पर गए, उनसे वार्ता की गई और उन्हें समझाया गया. सात में से दो निहंग श्रद्धालु अपने-अपने गंतव्य को चले गए हैं. शांतिपूर्ण माहौल है और हेमकुंड साहिब की यात्रा अच्छी तरह चल रही है."

"किन परिस्थितियों में सोशल मीडिया पर इस तरह की अफ़वाह फैलाई गई कि ये घटना कर्णप्रयाग से संबंधित घटना है इसकी हम स्वयं जांच कर रहे हैं. एसएसपी एसटीएफ़ से इस पर बात हुई है कि किन लोगों ने शरारतपूर्ण तरीक़े से चारधाम और श्री हेमकुंड साहिब यात्रा को प्रभावित करने की दुर्भावना से ये भ्रम फैलाया है, इसकी जांच करें."

कर्णप्रयाग में क्या हुआ था?

पीटीआई के मुताबिक़, उत्तराखंड सरकार ने शनिवार को कर्णप्रयाग में हाल ही में हुए उस विवाद की जांच के आदेश दिए, जो हेमकुंड साहिब से लौट रहे निहंग सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के बीच हुआ था.

16 जून को श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे में मत्था टेककर लौट रहे कुछ निहंग सिख श्रद्धालुओं और कर्णप्रयाग बाज़ार में स्थानीय लोगों के बीच एक होटल के पास गाड़ी पार्क करने को लेकर विवाद हो गया था.

आरोप है कि इसके बाद निहंगों ने तलवारों से लोगों पर हमला किया, जिसमें चार लोग घायल हो गए. इस झड़प में एक सिख श्रद्धालु भी घायल हुआ.

बाद में, इस घटना के संबंध में पंजाब के मोहाली ज़िले के चार सिख श्रद्धालुओं को गिरफ्तार किया गया.

गुरुद्वारे से जुड़े बाबा बेअंत सिंह ने क्या कहा?

गुरुद्वारा नगरासू के बाबा बेअंत सिंह ने मीडिया को बताया कि कुछ लोग दो दिन पहले गुरुद्वारा साहिब पहुंचे थे. उनके अनुसार, उनके आने के बाद इन लोगों और सेवादारों के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई.

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद गुरुद्वारा प्रबंधन ने उन्हें रातभर रुकने की अनुमति दी और लंगर तथा पानी की व्यवस्था भी की.

बाबा बेअंत सिंह ने बताया कि उस शाम कुल चार लोग आए थे, जबकि तीन अन्य पहले से वहां मौजूद थे. उनके अनुसार, इनमें से एक व्यक्ति ने गुरुद्वारे में रुकने की इच्छा जताई और कहा कि वह लंबे समय से इस स्थान के बारे में जानकारी जुटा रहा था.

उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा प्रबंधन ने इन व्यक्तियों से शांतिपूर्वक चले जाने की अपील की, जिसके बाद वे वहां से चले गए.

बाबा बेअंत सिंह के अनुसार, बाहर पुलिस की मौजूदगी देखकर वे लोग इमारत की ऊपरी मंज़िल पर चले गए. उनका दावा है कि इसके बाद इमारत को नुक़सान पहुंचाया गया और नीचे मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके गए.

उन्होंने बताया कि पूरी घटना ड्रोन के ज़रिए रिकॉर्ड की गई है.

बाबा बेअंत सिंह के मुताबिक़, ऊपर मौजूद लोग गुरुद्वारा प्रबंधन द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा भोजन नहीं खा रहे हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि पानी की आपूर्ति बाधित कर दी गई और भवन के कुछ सौर पैनल भी क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे आर्थिक नुक़सान हुआ है.

उन्होंने कहा कि पुलिस और गुरुद्वारा प्रबंधन लगातार छत पर मौजूद लोगों से नीचे आने की अपील कर रहे हैं और उन्हें आश्वासन दिया गया है कि उनके ख़िलाफ़ कोई सख़्त कार्रवाई नहीं की जाएगी.

रुद्रप्रयाग के ज़िला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "नगरासू स्थित गुरुद्वारे में निहंग सिखों, गुरुद्वारा प्रबंधन और वहां रहने वाले सिख सेवादारों के बीच विवाद उत्पन्न हुआ था. गुरुद्वारे में प्रार्थनाएं, लंगर और धार्मिक गतिविधियां सामान्य और शांतिपूर्ण ढंग से चल रही हैं."

उन्होंने कहा, "गुरुद्वारे में लोगों की आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी है. किसी को किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा है."

उन्होंने निहंग सिखों द्वारा किसी को बंधक बनाए जाने की ख़बरों को अफ़वाह बताते हुए ख़ारिज किया और कहा, "इन अफ़वाहों पर ध्यान न दें कि गुरुद्वारे पर क़ब्ज़ा कर लिया गया है, किसी को बंधक बना लिया गया है या कोई हिंसा हुई है."

ज़िला मजिस्ट्रेट ने कहा कि हेमकुंड साहिब यात्रा और गुरुद्वारे की नियमित गतिविधियां शांतिपूर्वक चल रही हैं और इलाक़े में क़ानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य है.

प्रशासन 16 जून को कर्णप्रयाग में हुए विवाद के बाद सामने आए इस नए घटनाक्रम पर लगातार नज़र बनाए हुए है.

यह लेख लिखे जाने तक बातचीत जारी थी और किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी.

राजनीतिक प्रतिक्रिया

उत्तराखंड में इस समय चारधाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा चल रही है. इस दौरान इन स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए आ रहे हैं. इन श्रद्धालुओं में पंजाब से भी भारी संख्या में लोग आ रहे हैं.

गौरतलब है कि कर्णप्रयाग में हुए विवाद के बाद मोहाली से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया गया. इसके बाद पंजाब के विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने भी इस घटना के संबंध में बयान दिए हैं.

उन्होंने पत्रकारों से हरिद्वार में कहा, "मेरी बात हुई है और हमने उन्हें कहा है कि हम निष्पक्ष रूप से काम करेंगे. देवभूमि उत्तराखंड सभी का सम्मान करती है. सिख धर्मगुरुओं ने अनेक स्थल यहां स्थापित किए हैं."

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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