पाकिस्तान के गृह मंत्री ने क्यों कहा, 'सिस्टम ढह गया है'
L'essentiel
वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद हनीफ़ का विश्लेषण: पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी के इस बयान पर कि 'सिस्टम ढह गया है', और देश के मौजूदा हाइब्रिड राजनीतिक तंत्र व नई लीडरशिप की स्थिति पर।
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Pourquoi c'est important
पाकिस्तान में हाइब्रिड राजनीतिक व्यवस्था और गृह मंत्री मोहसिन नक़वी के बयानों पर आधारित एक विश्लेषणात्मक लेख।
पहले हाइब्रिड गाड़ियाँ आईं, जो आधी पेट्रोल और आधी बिजली से चलती थीं. फिर पाकिस्तान में हाइब्रिड सियासी निज़ाम, पॉलिटिकल सिस्टम (कानून-व्यवस्था) आया.
इसका मतलब ये है कि फ़ैसले कहीं और बंद कमरे में लिए जाएंगे और बाक़ी नेता, अदालतें, नौकरशाही, मीडिया... वही काम करेंगे जो पुराने नवाबों के मुंशी किया करते थे.
मतलब, वे हिसाब-किताब और रिकॉर्ड संभालेंगे. अगर कोई नुक़सान या फ़ायदा हुआ तो जूते भी खाने पड़ेंगे.
अगर इस हाइब्रिड सिस्टम के केंद्र में कोई इंजन है, तो वह हमारे गृह मंत्री मोहसिन नक़वी साहब. पुलिस, जेल, रेंजर्स... सब उन्हीं के मातहत आते हैं.
बाकी इस क़ौम को क्रिकेट का जुनून था, अब पाकिस्तान क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का इंतज़ाम भी उनके पास ही है.
पहले इस्लामाबाद में कहा जाता था, 'इस हुकूमत के अंदर एक और हुकूमत है', अब नक़वी साहब ने हुकूमत के ऊपर एक अपनी हुकूमत बनाई हुई है.
समझदार लोगों ने क़ामयाबी का एकमात्र राज़ बताया है कि 'सुनो ज़्यादा और बोलो कम', आख़िरकार भगवान ने आपको दो कान और एक ज़बान दी है.
नक़वी साहब भी क़ामयाब हैं और कम बोलते हैं. लेकिन हाल ही में बोले तो पूरे ज़ोरदार ढंग से बोले.
उन्होंने कहा कि यह सिस्टम कोलैप्स (ढह) हो गया है.
उन्होंने अपनी ही लीडरशिप पर ताना मारते हुए कहा कि मिलिट्री लीडरशिप ने दुनिया आपकी प्लेट में लाकर रख दी है, लेकिन आपसे देश फिर भी संभल नहीं रहा है.
उन्होंने नए राज्यों की नई लीडरशिप की बात की.
उनकी बातें सुनकर सरकार के कुछ वरिष्ठ लोगों ने कुछ ऐसा बुदबुदाया, जिसे उर्दू में कहते हैं - "दामन को ज़रा देख ज़रा बंद-ए-क़बा देख"
लेकिन सरकार के असली बड़े कुछ बोले भी नहीं. नए राज्यों का हिसाब तो पुराने राज्य स्वयं ही रख लेंगे.
हमने नई लीडरशिप कई बार आते देखी है. शरीफ़ ख़ान नाम की एक नई नस्ल हमारे पास मौजूद है. ये, भुट्टो परिवार के बच्चे भी आगे आ गए हैं.
लेकिन सबसे अहम नई लीडरशिप नक़वी साहब की अपनी ही है.
करीब चार-पांच साल पहले उन्हें सिर्फ़ सहाफ़ी बिरादरी (मीडिया जगत) ही जानती थी, और अच्छी तरह जानती थी.
फिर वह पंजाब के अंतरिम मुख्यमंत्री बने और उसके बाद गृह मंत्री बने.
अब जिस भी बंद कमरे में हमारी क़िस्मत का जो भी फ़ैसला होता है, वे उस कमरे में ज़रूर मौजूद होते हैं.
अब, हमारी यह नई लीडरशिप भी एक नई लीडरशिप की मांग कर रही है. सिस्टम कोलैप्स की बातें कर रही है और बता रही है कि वह निज़ाम ढह चुका है.
अब सिस्टम खुद कहता है कि वह अब ढह चुका है और उसका कुछ किया जाए. जनता भी कह रही है कि सिस्टम ढह चुका है.
यह सरकार उस गिरे हुए सिस्टम का मलबा है और हमें इसलिए पता है क्योंकि यह मलबा हम पर ही गिरा है.
हम बहुत ही कश्मकश करके एक नई लीडरशिप लेकर आए, जो चार साल भी नहीं टिक पाई.
इमरान ख़ान को अब जेल में तीन साल हो चुके हैं, और अगर यह हाइब्रिड सिस्टम चलता रहा, तो उन्हें तीस साल तक भी जेल में रख सकता है.
नई लीडरशिप की बातें करने से पहले यह भी सोच लीजिए कि जो पहले की नई लीडरशिप थी, उसका क्या अंजाम हुआ था?
बात उनकी सही है कि सिस्टम ढह चुका है, मलबे पर आपका राज है और आप राज करते रहें.
Questions ouvertes
- गृह मंत्री के इस बयान के बाद सरकार में क्या बदलाव होंगे?
- क्या नई लीडरशिप की मांग पर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?


