यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह पर मिसाइल हमले में उत्तर प्रदेश के देवरिया के नाविक अभिषेक निषाद की मौत
यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुए कार्गो जहाज़ पर हुए मिसाइल हमले में चार भारतीय नाविकों समेत लगभग 10 लोगों की जान चली गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले के 22 वर्षीय अभिषेक निषाद भी शामिल हैं।
L'essentiel
यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुए एमवी गोल्डन लियो कार्गो जहाज़ पर हुए मिसाइल हमले में उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले के 22 वर्षीय नाविक अभिषेक निषाद सहित चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई है।
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यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुए एमवी गोल्डन लियो कार्गो जहाज़ पर 19 जुलाई की रात मिसाइल हमला हुआ, जिसमें चार भारतीय नागरिकों सहित लगभग 10 लोगों की मौत हो गई।
"पहली बार जब मेरा बेटा घर से जा रहा था, गौरीबाज़ार स्टेशन पर मुझे गले लगाया, पीठ थपथपाई और दोनों गालों को चूमा. मैंने भी अपने बेटे को गले लगाया. आंखें भर आईं उस समय. बेटा बोला था कि पापा अब चिंता नहीं करना है, मैंने कदम बढ़ा दिया है."
यह कहते हुए कौशल निषाद की आंखें भर आती हैं. उन्हें नहीं मालूम था कि जिस बेटे को वे बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ पहली बार कार्गो जहाज़ पर नौकरी के लिए विदा कर रहे हैं, वह फिर कभी घर लौटकर नहीं आएगा.
उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले के करमेल गांव का यह परिवार शोक में डूबा है. परिवार अपने 22 वर्षीय बेटे अभिषेक निषाद के पार्थिव शरीर के वापस आने का इंतज़ार कर रहा है. अभिषेक निषाद की समुद्र में यह पहली नौकरी थी.
भारतीय समय के अनुसार, 19 जुलाई की रात यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुए कार्गो जहाज़ पर मिसाइल हमला हुआ जिसमें लगभग 10 लोगों की जान चली गई. इसमें चार भारतीय नाविक भी शामिल थे.
मालवाहक जहाज़ों को निशाना बनाए जाने की निंदा करते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने 20 जुलाई को जारी एक बयान में कहा कि एमवी गोल्डन लियो पर ओडेसा बंदरगाह से रवाना होने के दौरान हमला हुआ. घटना के समय जहाज़ पर चालक दल के 17 सदस्य सवार थे, जिनमें पांच भारतीय नागरिक शामिल थे.
मंत्रालय के मुताबिक़, इस हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई, जबकि एक भारतीय नागरिक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है.
अभिषेक निषाद कार्गो जहाज़ पर ओएस (ऑर्डिनरी सीमैन) पद पर कार्यरत थे. आमतौर पर मर्चेंट नेवी में करियर की शुरुआत ओएस पद से होती है.
अभिषेक जहाज़ पर साफ़-सफ़ाई, रखरखाव, निगरानी और संचालन से जुड़ा काम करते थे.
इस काम के लिए कंपनी अभिषेक को 300 अमेरीकी डॉलर (क़रीब 28 हज़ार रुपये) दे रही थी.
परिवार के अनुसार, जब जहाज़ पर मिसाइल का हमला हुआ तो उससे कुछ समय पहले तक अभिषेक की व्हाट्सऐप के जरिए पिता कौशल निषाद से बात हो रही थी.
कौशल निषाद बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताते हैं, "बेटे से मेरी अंतिम बात 19 जुलाई की शाम 05:18 बजे (भारतीय समय के अनुसार) हुई थी. उसने वॉयस नोट में मैसेज भेजा था कि वह ड्यूटी पर है, शाम में बात करेगा. उसके बाद से उसका इंटरनेट बंद हो गया."
"रात भर मैं, उसकी मां और दोनों बहनें इंतज़ार करती रहीं लेकिन सुबह तक कोई रिप्लाई नहीं आया. सुबह बेटी ने इंटरनेट पर देखा तो बताया कि मिसाइल हमले में जहाज़ क्षतिग्रस्त हो गया है."
कौशल निषाद और अनीता देवी की तीन संतानों में अभिषेक निषाद इकलौते बेटे थे. उनसे बड़ी बहन साधना निषाद और छोटी बहन आराधना निषाद हैं.
कौशल निषाद बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहते हैं, "मेरा बेटा मुंबई से तुर्की गया और वहां से 11 जून को नौकरी ज्वाइन कर ली. वहीं से अनाज लादकर जहाज़ यूक्रेन गया. यूक्रेन में बमबारी शुरू हो गई. मेरा बेटा दहशत में पड़ गया. उसको और मुझे भी नहीं मालूम था कि ये जहाज़ यूक्रेन जा रहा था. अगर मुझे मालूम होता तो मैं अपने बाबू (बेटा) को यूक्रेन न भेजता."
हालांकि, ओशन ग्रेस शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड के साथ अभिषेक निषाद के रोज़गार कॉन्ट्रैक्ट में साफ़ तौर पर उल्लेख है कि नौकरी के दौरान उन्हें युद्ध, सशस्त्र संघर्ष और कई अन्य हाई रिस्क वाले क्षेत्रों में काम करना पड़ सकता है.
कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार, कर्मचारी इन जोखिमों को स्वीकार करते हुए सेवा देने और केवल इसी आधार पर काम से इनकार या अनुबंध समाप्त करने का दावा नहीं करेगा.
पिछले महीने 8 जून को देवरिया के रहने वाले शिवानंद चौरसिया की मौत होर्मुज़ स्ट्रेट के पास अमेरिकी हमले में हो गई थी. वे जहाज़ पर क्रू मेंबर के रूप में तैनात थे.
देवरिया और आसपास के इलाक़ों से बड़ी संख्या में युवक मर्चेंट नेवी या विदेशों में नौकरी की तलाश में जाते हैं.
दुनिया में कई देशों के बीच चल रहे युद्ध और कार्गो जहाज़ पर हो रहे हमलों की घटनाओं ने भारतीय परिवारों की चिंता बढ़ा दी है.
भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री वर्क फ़ोर्स उपलब्ध कराने वाले देशों में शामिल है.
भारत सरकार के जहाज़रानी महानिदेशालय के अनुसार, साल 2024 तक लगभग 3.08 लाख भारतीय समुद्री नाविक दुनिया भर के वाणिज्यिक जहाज़ों पर कार्यरत थे.
साल 2019 की तुलना में यह संख्या क़रीब 31 प्रतिशत बढ़ी है, जो कोविड-19 के बाद इस क्षेत्र में तेज़ी से आई रिकवरी और वैश्विक स्तर पर भारतीय नाविकों की बढ़ती मांग दिखाती है.
कौशल निषाद खेती-बाड़ी करते हैं, उनके पास ज़्यादा ज़मीन भी नहीं है. उनका कहना है कि बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज़ लेकर बेटे को मर्चेंट नेवी का कोर्स कराया था. उन्होंने बताया कि अभी तक बैंक का कर्ज़ नहीं चुका सके हैं.
कौशल निषाद बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहते हैं, "जब बेटे को 22 साल की उम्र में मर्चेंट नेवी में नौकरी मिली तो पूरा परिवार बहुत खुश था. गांव में सब खुश थे. मैंने किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लेकर बेटे को पढ़ाया था. ढाई लाख रुपये उसकी पढ़ाई में लग गए थे."
उन्होंने बताया, "जब बेटे से बात होती थी तो वह कहता था कि पहले कर्ज़ चुकाऊंगा फिर दीदी की शादी करूँगा और छोटी बहन को पढ़ाऊंगा. मेरे आंसू सूख चुके हैं और दिल पत्थर हो चुका है. जिसका जवान बेटा बाप के सामने चला जाता है, उसकी रीढ़ की हड्डी टूट जाती है."
अभिषेक परिवार का पहला सदस्य था जो विदेश में नौकरी के लिए घर से निकला था. परिवार को उनसे काफ़ी उम्मीदें थीं लेकिन उनकी मौत ने उन उम्मीदों को तोड़ दिया.
छोटी बहन आराधना निषाद ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "मेरा भाई 10 दिनों से यूक्रेन में फंसा था. वहां जब बम गिरता था तो कई बार वीडियो कॉल पर दिखाता था. वह डरा रहता था. उसका ज़्यादा समय बंकर में बीतता था. घर आने के लिए भी बोलता था. वह बोल रहा था कि सारे एयरपोर्ट बंद हैं, यहां से किसी सेफ़ कंट्री में जाऊंगा फिर वहां से घर आ सकता हूँ."
आराधना ने ही सबसे पहले इंटरनेट पर देखा कि उनके भाई जिस जहाज़ पर हैं उसपर मिसाइल से हमला हो गया है.
आराधना बताती हैं, "जब मैंने इंटरनेट पर एमवी गोल्डन लियो नाम के शिप को सर्च किया तो पता चला कि उस जहाज़ पर रूस ने मिसाइल से हमला किया है. कुछ लोगों के मारे जाने की भी ख़बर थी."
आराधना शिप कंपनी ओशन ग्रेस शिपिंग लिमिटेड पर आरोप लगाती हैं कि 'उन्होंने हमें पहले से नहीं बताया कि जहाज़ कहां जा रहा है.'
इस आरोप पर ओशन ग्रेस शिपिंग लिमिटेड का पक्ष जानने के लिए हमने कंपनी के आधिकारिक ईमेल पते पर प्रतिक्रिया मांगी है. लेकिन ख़बर लिखे जाने तक जवाब नहीं मिला है. कंपनी की ओर से जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा.
पिछले दो महीनों में देवरिया के दो युवकों की मौत जहाज़ पर हुए हमले में हो चुकी है. इन हमलों ने उन परिवारों की चिंता बढ़ा दी है जिनके अपने मर्चेंट नेवी में नौकरी करते हैं.
हमारी मुलाक़ात अभिषेक के चचेरे भाई जयराज निषाद से हुई. जयराज लगभग ग्यारह महीने की समुद्री यात्रा के बाद घर लौटे हैं लेकिन अब वे दोबारा जाना नहीं चाहते हैं.
जयराज बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताते हैं, "मैं मार्च 2025 को ईरान के बुशहर पोर्ट से ज्वाइन किया था. उस जहाज़ में तेल लोड होता था. लेकिन समुद्री यात्रा पर जाते हुए हमें नहीं बताया जाता कि जहाज़ जहां जाने वाला है, वहां युद्ध चल रहा है. मालिक प्रेशर डाल कर ख़तरे में भी भेज देते हैं. मौसम ख़राब रहने पर भी भेज देते हैं."
उन्होंने आगे कहा, "अभी क्रूज़ जहाज़ पर नहीं जाना चाहिए क्योंकि बिल्कुल सुरक्षा नहीं है. जब जहाज़ गुज़र रहे हों दोनों तरफ़ की सरकार को ख्याल रखना चाहिए कि शिप पर हमला न हो और निर्दोष लोग न मारे जाएं."
जयराज निषाद उन परिवारों से अपने बच्चों को क्रूज़ पर नौकरी के लिए न भेजने की अपील करते हैं जिनके बच्चे मर्चेंट नेवी में काम कर कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "हम यही कहेंगे कि अपने बच्चों को क्रूज़ पर नौकरी के लिए न भेजें. अभी दुनियाभर में युद्ध चल रहा है, आपके बच्चे जान गंवा सकते हैं. हमारे परिवार के लोग डर गए हैं, वो चाहते हैं हम यहां (देवरिया) कोई छोटा-मोटा काम करके जीवन यापन करें."
जयराज निषाद के पिता अपने बेटे को दोबारा क्रूज़ पर नहीं भेजना चाहते हैं.
वो बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहते हैं, "जब मेरा बेटा पहली बार जहाज़ पर गया तो उससे दस-पंद्रह दिन में एक बार बात होती थी. ग्यारह महीने बाद मेरा बेटा घर लौटा है लेकिन अब हम आधी रोटी खाएंगे लेकिन अपने बच्चे को दोबारा जहाज़ पर नहीं भेजेंगे."
"इसलिए क्योंकि सरकार कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है. बच्चे इंडियन पासपोर्ट पर जाते हैं लेकिन सरकार न कोई एग्रीमेंट करती है और न ही कोई बीमा करती है."
À surveiller
Perspective IA — des possibilités, pas des certitudes
शव को भारत वापस लाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी
Très probable · En quelques semaines
Questions ouvertes
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