
बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड (बीजीबी) के प्रमुख ने भारत के गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की। यह मुलाकात गोपनीय रखी गई, जबकि दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बलों के बीच सीमा पर 'पुश-इन' और 'पुश-बैक' को लेकर तनाव जारी है।
एआई-जनित सारांश
Author, शुभज्योति घोष
पदनाम, बीबीसी संवाददाता
प्रकाशित 4 मिनट पहले
पढ़ने का समय: 7 मिनट
भारत की यात्रा के दौरान बीते सप्ताह बांग्लादेश के सीमा सुरक्षा बल बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड (बीजीबी) के प्रमुख ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की.
हालांकि, दोनों पक्षों ने इस मुलाक़ात के बारे में सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा.
बीबीसी को पता चला है कि लगभग एक घंटे तक चली इस बैठक के दौरान बीजीबी प्रमुख ने व्यक्तिगत रूप से अमित शाह को बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद का एक पत्र सौंपा.
यह बैठक 10 जून को दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक में दोपहर 2 बजे से 3 बजे के बीच हुई थी.
हालांकि यह मुलाक़ात बीजीबी महानिदेशक मेजर जनरल मोहम्मद अशरफ़ुज़्ज़मां सिद्दीक़ी की भारत यात्रा के आधिकारिक कार्यक्रम में शामिल थी, लेकिन न तो भारतीय और न ही बांग्लादेशी पक्ष ने इसे सार्वजनिक किया.
बीजीबी प्रमुख मुख्य रूप से बीएसएफ़ महानिदेशक प्रवीण कुमार के साथ निर्धारित वार्ता में भाग लेने के लिए भारत आए थे.
भारत की सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ़) और बांग्लादेश की बीजीबी के बीच चार दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक 8 से 11 जून तक दिल्ली के लोधी रोड स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में आयोजित हुई थी.
अमित शाह से मुलाक़ात को रखा गया गोपनीय
लेकिन जो बात पूरी तरह गोपनीय रखी गई, वह यह थी कि इन वार्ताओं के बीच बीजीबी प्रमुख नॉर्थ ब्लॉक जाकर भारत के गृह मंत्री से भी मुलाक़ात करेंगे.
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हाल के महीनों में बीएसएफ़ द्वारा संदिग्ध विदेशी नागरिकों को बांग्लादेश सीमा के पार भेजने की कोशिशों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव पहले से ही चरम पर पहुंच चुका है.
भारत इस प्रक्रिया को "पुशबैक" कहता है, जबकि बांग्लादेश इसे "पुश-इन" कहता है.
इसी पृष्ठभूमि में बीजीबी महानिदेशक और भारत के गृह मंत्री की यह मुलाक़ात बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
ख़ास बात यह है कि हाल के वर्षों में किसी वरिष्ठ बांग्लादेशी अधिकारी की अमित शाह के साथ ऐसी मुलाक़ातें बहुत कम हुई हैं.
इससे पहले नवंबर 2022 में अमित शाह ने दिल्ली में बांग्लादेश के तत्कालीन गृह मंत्री असदुज़्ज़मां ख़ान से मुलाक़ात की थी. अगस्त 2024 में ढाका में शेख़ हसीना सरकार के पतन के बाद यह पहली बार है जब अमित शाह ने किसी वरिष्ठ बांग्लादेशी अधिकारी से मुलाक़ात की है.
दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बल गृह मंत्रालय के अधीन
वरिष्ठ भाजपा नेताओं और मंत्रियों में अमित शाह को बांग्लादेशी घुसपैठ रोकने के मुद्दे पर सबसे मुखर नेता माना जाता है.
वो पहले अवैध प्रवासियों को "दीमक" बता चुके हैं और अक्सर उन्हें घुसपैठिया कहते रहे हैं. इन टिप्पणियों पर बांग्लादेश में काफ़ी नकारात्मक प्रतिक्रिया हुई थी.
इसी पृष्ठभूमि में बीजीबी प्रमुख का दिल्ली आकर अमित शाह से व्यक्तिगत रूप से मिलना काफ़ी महत्व रखता है.
ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत और बांग्लादेश दोनों में सीमा सुरक्षा बल अपने-अपने गृह मंत्रालयों के अधीन काम करते हैं. इसलिए भारत की बीएसएफ़ अमित शाह को और बांग्लादेश की बीजीबी सलाहुद्दीन अहमद को रिपोर्ट करती है.
अगस्त 2024 में सक्रिय राजनीति में लौटने से पहले बीएनपी नेता सलाहुद्दीन अहमद लगभग एक दशक तक मेघालय के शिलॉन्ग में रहे थे. इस साल फ़रवरी से वो बांग्लादेश के गृह मंत्री हैं.
भारत के कई राजनीतिक नेताओं के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध और परिचय सार्वजनिक हैं. बीबीसी को जानकारी मिली है कि दिल्ली में अमित शाह के साथ बैठक आयोजित कराने में मुख्य भूमिका उन्हीं की थी.
सलाहुद्दीन अहमद के पत्र में क्या था?
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बांग्लादेश के गृह मंत्री ने बीजीबी प्रमुख के ज़रिए भारत के गृह मंत्री को जो पत्र भेजा, उसकी सामग्री किसी भी पक्ष ने सार्वजनिक नहीं की है.
हालांकि बीबीसी को जानकारी मिली है कि बांग्लादेश सरकार ने इस पत्र के ज़रिए भारत का ध्यान सीमा पर बार-बार हो रही उन घटनाओं की ओर आकर्षित किया, जिन्हें बांग्लादेश भारत की ओर से "पुश-इन" बताता है.
पत्र में भारत से यह भी आग्रह किया गया कि वह रात के अंधेरे में सीमा पर बाड़ के बीच से पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को बिना पहचान सत्यापित किए बांग्लादेश में न धकेले. इसके बजाय उनकी पहचान की पुष्टि करने के बाद ही उन्हें वापस भेजा जाए.
पत्र में यह भी याद दिलाया गया कि भारत में पाए जाने वाले अवैध विदेशी नागरिकों की वापसी के लिए पहले से एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) मौजूद है और ऐसे मामलों में उसी का पालन किया जाना चाहिए.
हालांकि भारतीय अधिकारियों का तर्क है कि संदिग्ध व्यक्तियों की सूचियां बांग्लादेश को भेजी जाती हैं, लेकिन उनकी पहचान और पते के सत्यापन में इतना समय लग जाता है कि बीएसएफ़ को मजबूरन पुशबैक का सहारा लेना पड़ता है.
बीजेपी नेताओं के दावे और पुशबैक का तरीक़ा
पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में इस नीति का बचाव करते हुए कहा था, "हम इन घुसपैठियों को होल्डिंग सेंटरों में कब तक खाना खिलाते रहेंगे? इन्हें वापस भेजना ही होगा."
पिछले सप्ताह ही उन्होंने दावा किया था कि उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद से लगभग 5,000 "बांग्लादेशियों" को सीमा पार भेजा जा चुका है, जबकि क़रीब 1,000 लोग अब भी होल्डिंग सेंटरों में हैं.
गौरतलब है कि हाल ही में हुई बीएसएफ़-बीजीबी उच्चस्तरीय वार्ता में भी पुश-इन और पुशबैक का मुद्दा प्रमुखता से उठा था. हालांकि वहां भी इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया.
9 जून मंगलवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान पत्रकारों से पुष्टि की थी कि सीमा मुद्दों को लेकर बीजीबी और बीएसएफ़ डीजी के बीच में बैठक चल रही है.
साथ ही उनसे पुशबैक को लेकर सवाल किया गया था जिस पर उन्होंने कहा था कि "कोई भी विदेशी नागरिक जो भारत में अवैध रूप से रह रहा है तो उन पर भारतीय क़ानूनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी. नो मेन्स लैंड में कुछ लोगों के होने की जो बात कही जा रही है, तो दोनों पक्षों के बीच में बातचीत चल रही है तो शायद इस पर भी बात हो."
वहीं भारत-बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाकों में बीते कुछ दिनों से 'पुश इन' या 'पुश बैक' के मुद्दे पर तनाव बढ़ रहा है.
बीजीबी और बीएसएफ़ के बीच बार-बार फ़्लैग मीटिंग और वाद-विवाद की घटनाएं तो हो ही रही हैं, कई ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं जब बांग्लादेश के लोगों ने बीएसएफ़ के जवानों का पीछा किया है.
बीजीबी का दावा है कि मई की शुरुआत से जून के शुरुआती दस दिनों के दौरान बीएसएफ़ ने सीमा के 20 इलाकों में कम से कम दो सौ लोगों को बांग्लादेश की सीमा पर धकेलने की कोशिश की है.
उसका कहना है कि ऐसे तमाम मामलों में बीजीबी के जवानों के साथ स्थानीय लोगों के विरोध के कारण एक भी व्यक्ति बांग्लादेश सीमा में प्रवेश नहीं कर सका.
बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड (बीजीबी) के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल महमूदुल हसन बताते हैं, "हर बार पुश इन से पहले भारतीय सीमावर्ती इलाक़े में बत्तियां बंद कर दी जाती हैं. यही इस बात का सबसे बड़ा संकेत है कि बीएसएफ़ 'पुश इन' करने की तैयारी में है."
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