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दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यूज़क्लिक मामले में FIR और ED जांच रद्द की
विकासशील
BBC हिंदी6/11/2026Law4 min readभारत

दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यूज़क्लिक मामले में FIR और ED जांच रद्द की

त्वरित दृष्टि

दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यूज़क्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ के ख़िलाफ़ FIR और ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच रद्द कर दी। कोर्ट ने इसे स्वतंत्र पत्रकारिता के ख़िलाफ़ शक्तियों का दुरुपयोग बताया।

एआई-जनित सारांश

फ़ॉन्ट आकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने समाचार पोर्टल न्यूज़क्लिक और उसके संस्थापक और प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस की एफ़आईआर और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मनी लॉन्ड्रिंग जाँच को रद्द कर दिया है.

लाइव लॉ और बार एंड बेंच के मुताबिक़, फ़ैसला सुनाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि 'यह कार्रवाई स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के ख़िलाफ़ शक्तियों के दुरुपयोग का मामला है.'

न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने यह फ़ैसला 29 मई को दिया था लेकिन यह 10 जून को अपलोड हुआ. इस फ़ैसले में कोर्ट ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की एफ़आईआर और उसके आधार पर शुरू की गई पीएमएलए की कार्रवाई को रद्द कर दिया.

अदालत ने कहा, "मौजूदा कार्यवाही न केवल दुर्भावनापूर्ण है, बल्कि याचिकाकर्ताओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के ख़िलाफ़ शक्तियों का मनमाना हमला और दुरुपयोग भी है."

हाई कोर्ट ने ईडी के दावे को 'पूरी तरह ग़लत और आधारहीन' माना.

बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और डी कृष्णन ने दलील रखी जबकि जांच एजेंसियों की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू अदालत में पेश हुए थे.

प्रबीर पुरकायस्थ को मई 2024 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रिहा किया गया था. उन्हें अक्तूबर 2023 में चीन से अवैध फ़ंडिंग लेने के आरोपों में यूएपीए के तहत गिरफ़्तार किया गया था.

हाई कोर्ट ने क्या कहा

बार एंड बेंच के मुताबिक़, न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने अपने आदेश में कहा कि मामले में लगाए गए आरोपों के समर्थन में अपराध के आवश्यक तत्व नहीं पाए गए.

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अदालत ने 2020 में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की ओर से दर्ज एफ़आईआर को रद्द करते हुए कहा, "इस एफ़आईआर को जारी रखना क़ानून की प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग है और इसे रद्द किया जाता है."

चूंकि मूल आपराधिक मामला ही रद्द कर दिया गया, इसलिए हाई कोर्ट ने ईडी की कार्रवाई भी समाप्त कर दी.

अदालत ने कहा कि ईडी ने करीब डेढ़ साल तक व्यापक जांच की, लेकिन अब तक ऐसा कोई भी आपत्तिजनक तथ्य सामने नहीं आया जो मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 4 के तहत अपराध होने का संकेत भी देता हो.

धोखाधड़ी के आरोप पर अदालत ने कहा कि ऐसे मामले में किसी ऐसे व्यक्ति का होना ज़रूरी है जिसे संपत्ति से वंचित कर धोखा दिया गया हो. इस मामले में ऐसा कोई व्यक्ति सामने नहीं आया.

अदालत ने अपने आदेश में कहा, "ईडी के जवाब से भी साफ़ है कि वह यह दावा करने की कोशिश कर रही है कि आईपीसी की धारा 120बी के तहत आपराधिक साज़िश का अपराध अब भी बनता है."

"हालांकि, यह नहीं बताया गया कि साज़िश का आधार क्या है. केवल यह तथ्य कि प्रबीर पुरकायस्थ और डब्ल्यूडब्ल्यूएमएच के प्रबंधक जेसन फेचर के बीच एक समझौता हुआ था, अपने आप में आपराधिक साज़िश साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है."

अदालत ने कहा, "जब तक यह नहीं दिखाया जाता कि उसका गैरक़ानूनी उद्देश्य क्या था या कौन से गैरक़ानूनी तरीक़े अपनाए गए थे, तब तक उसे आपराधिक साज़िश नहीं कहा जा सकता."

अदालत ने कहा, "अगर एफ़आईआर से किसी अपराध का पता नहीं चलता या आरोप स्पष्ट रूप से निराधार हैं और दुर्भावनापूर्ण मंशा से लगाए गए हैं, तो केवल यह कहकर कि जांच एक महत्वपूर्ण चरण में है, अदालत के लिए एफ़आईआर को रद्द करने में कोई बाधा नहीं होगी."

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से न्यूज़क्लिक को दिए गए जवाब का हवाला देते हुए अदालत ने कहा, "साल 2018 में जब निवेश प्राप्त हुआ था, तब डिजिटल मीडिया में 26 प्रतिशत निवेश सीमा लागू नहीं थी."

अदालत ने शेयरों के अधिक मूल्यांकन से जुड़े आरोपों को भी ख़ारिज कर दिया और उन्हें निराधार बताया.

अदालत ने कहा, "यह एक आर्थिक फ़ैसला है, जिससे किसी आपराधिक अपराध का संकेत नहीं मिलता."

आर्थिक अपराध शाखा की ओर से दर्ज एफ़आईआर को रद्द करते हुए अदालत ने कहा कि 'इसे जारी रखना क़ानून की प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग था.'

न्यूज़क्लिक की क्या थी दलील

मामलों को रद्द करने की मांग करते हुए न्यूज़क्लिक ने अदालत में कहा था कि एफ़आईआर, ईसीआईआर और उससे जुड़ी जांच राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता को दबाने की कोशिश है.

न्यूज़क्लिक ने दलील दी थी कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य पत्रकारों समेत विभिन्न लोगों में डर का माहौल पैदा करना है ताकि वे अभिव्यक्ति की संवैधानिक स्वतंत्रता का इस्तेमाल करने से हिचकें.

सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को भी किसी तरह की अनियमितता नहीं मिली थी.

ईडी ने आरोपित पक्षों को ईसीआईआर की प्रति भी उपलब्ध नहीं कराई थी.

इस संबंध में प्रबीर पुरकायस्थ और न्यूज़क्लिक की ओर से एक अलग याचिका भी दायर की गई थी.

हालांकि, ईडी की पूरी कार्रवाई रद्द होने के बाद उस याचिका को भी निष्प्रभावी मानते हुए बंद कर दिया गया.

क्या था मामला

26 अगस्त 2020 को दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने भारतीय दंड संहिता की धारा 406 (आपराधिक न्यास भंग), 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साज़िश) के तहत एफ़आईआर दर्ज की थी.

एफ़आईआर में आरोप लगाया गया था कि न्यूज़क्लिक की मालिक कंपनी पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिलेटड को 2018-19 के दौरान अमेरिकी कंपनी वर्ल्ड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी (डब्ल्यूडब्ल्यूएमएच) से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ़डीआई) मिला था.

आरोप लगाया गया था यह कथित रूप से एफ़डीआई नियमों और अन्य क़ानूनों का उल्लंघन था. इस निवेश के बाद डब्ल्यूडब्ल्यूएमएच के पास कंपनी की 7.69 प्रतिशत हिस्सेदारी आ गई थी.

हालांकि, निवेश के समय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने साफ़ किया था कि डिजिटल मीडिया में एफ़डीआई हासिल करने पर कोई सीमा या प्रतिबंध नहीं था.

आर्थिक अपराध शाखा की एफ़आईआर के आधार पर ईडी ने 2 सितंबर 2020 को पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया और फ़रवरी 2021 में तलाशी अभियान चलाया.

अक्तूबर 2023 में न्यूज़क्लिक से जुड़े कई पत्रकारों के घर पर दिल्ली पुलिस ने छापेमारी की थी.

ये छापेमारी अगस्त 2023 में न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के बाद की गई थी.

रिपोर्ट में न्यूज़क्लिक वेबसाइट पर आरोप लगाए गए थे कि उसने चीनी प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए एक अमेरिकी अरबपति से फ़ंडिंग ली है.

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This article was originally published by BBC हिंदी.

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