Son Dakika
RUВСУ второй раз за ночь атаковали Белгород и Белгородский округKR신호 위반 사고로 9세 아동 숨지게 한 60대 남성 조사 받아INTLSearch Continues for Missing Arkansas Mom and Newborn BabyRUВ аэропортах Нижнего Новгорода и Ярославля введены временные ограниченияAUADFA Cadet Faces 79 New Charges Over Hidden Camera AllegationsAUTony Modra leaves hospital after serious truck crashGLOBALUS Soccer Team Loses to Belgium Amid Controversy Over Player EligibilityJP大東市、竹田恒泰氏監修の「古墳のお墓」をふるさと納税返礼品に - 最高750万円KRLG전자, 2026년 1분기 잠정 영업이익 167억원 기록CN強颱巴威路徑預測分歧:傳統模式與AI模式對決RUВСУ второй раз за ночь атаковали Белгород и Белгородский округKR신호 위반 사고로 9세 아동 숨지게 한 60대 남성 조사 받아INTLSearch Continues for Missing Arkansas Mom and Newborn BabyRUВ аэропортах Нижнего Новгорода и Ярославля введены временные ограниченияAUADFA Cadet Faces 79 New Charges Over Hidden Camera AllegationsAUTony Modra leaves hospital after serious truck crashGLOBALUS Soccer Team Loses to Belgium Amid Controversy Over Player EligibilityJP大東市、竹田恒泰氏監修の「古墳のお墓」をふるさと納税返礼品に - 最高750万円KRLG전자, 2026년 1분기 잠정 영업이익 167억원 기록CN強颱巴威路徑預測分歧:傳統模式與AI模式對決
Newsgather
Geriअमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में जंग ख़त्म करने का समझौता: क्या होगा भारत को फ़ायदा?
अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में जंग ख़त्म करने का समझौता: क्या होगा भारत को फ़ायदा?
Gelişiyor
BBC हिंदी15.06.2026Dünya6 dk okumaIndia

अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में जंग ख़त्म करने का समझौता: क्या होगा भारत को फ़ायदा?

Hızlı Bakış

पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान जंग ख़त्म करने के समझौते पर पहुंचे हैं. शुक्रवार को जिनेवा में हस्ताक्षर होने हैं. समझौते में प्रतिबंधों को ख़त्म करना, ईरान का परमाणु हथियार न बनाने का वादा और 30 दिनों में होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलना शामिल है. भारत को तेल, गैस, रेमिटेंस और भारतीयों की सुरक्षा में फ़ायदा होगा.

Yapay zekâ özeti

Neden Önemli?

मध्य पूर्व में फ़रवरी के आख़िर से जारी जंग के ख़त्म होने की उम्मीदें अब पूरी होती दिख रही हैं. पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान ने घोषणा की है कि दोनों देश जंग ख़त्म करने को लेकर एक समझौते पर पहुंच गए हैं.

Yazı boyutu

मोहम्मद शाहिद बीबीसी संवाददाता प्रकाशित एक मिनट पहले पढ़ने का समय: 8 मिनट

मध्य पूर्व में फ़रवरी के आख़िर से जारी जंग के ख़त्म होने की उम्मीदें आख़िर अब पूरी होती दिख रही हैं.

पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान ने घोषणा की है कि दोनों देश जंग ख़त्म करने को लेकर एक समझौते पर पहुंच गए हैं. शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में इस समझौते पर हस्ताक्षर होने हैं.

इस समझौते की सटीक रूपरेखा अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है.

हालांकि ईरान के सरकारी मीडिया का कहना है कि इस समझौते की शर्तों में प्रतिबंधों को ख़त्म करना, ईरान का परमाणु प्रतिबंधों को न बनाने का वादा करना और 30 दिनों के अंदर होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलना शामिल है.

ईरानी उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा है कि 60 दिनों के बाद एक अंतिम समझौते पर बातचीत होगी जहां ईरान "कई मुद्दों को देखा जाना है."

लेबनान के मुद्दे पर, मध्यस्थ पाकिस्तान का कहना है कि अमेरिका और ईरान दोनों ने "सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने" की घोषणा की है.

वहीं लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ़ औन ने कहा कि उनके देश के लोग "ऐसे व्यावहारिक क़दमों की उम्मीद कर रहे हैं जो हिंसा के इस चक्र को हमेशा के लिए समाप्त कर दें."

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि रूपरेखा की इस शर्त का इसराइल और ईरान समर्थित सशस्त्र राजनीतिक संगठन हिज़्बुल्लाह पालन करेंगे या नहीं.

इसराइल के रक्षा मंत्री का कहना है कि उनकी सेना लेबनान में बनी रहेगी, जबकि ईरान ने सभी सैन्य कार्रवाइयों को "पूरी तरह रोकने" की मांग की है.

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते पर सहमति बनने पर दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं आई हैं.

ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि वे अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर 'इस मौक़े का सदुपयोग' करने के लिए काम करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जब शुक्रवार को समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे तब "तेल की आवाजाही फिर से निर्बाध रूप से शुरू हो जाएगी."

इस समझौते के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक्स पर लिखा, "लंबी बातचीत के बाद, हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है. दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है."

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घोषणा पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एक्स पर लिखा, "मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता हूं. इस संघर्ष के कारण दुनियाभर में गंभीर आर्थिक अड़चन पैदा हुई और कई देशों में लोगों की जान गई."

पीएम मोदी ने कहा, "भारत को उम्मीद है कि इस सहमति के लागू होने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी और नेविगेशन और व्यापार की आज़ादी सुनिश्चित होगी."

इसके अलावा उन्होंने उम्मीद जताई कि 'बाक़ी बचे मुद्दों पर भी' होने वाली बातचीत 'एक टिकाऊ और अंतिम समझौते' तक पहुंचेगी.

मध्य पूर्व में जंग की वजह से दुनियाभर में तेल और गैस के दामों और सप्लाई पर गंभीर असर पड़ा है जिससे भारत भी अछूता नहीं रहा है.

भारत की तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होने के साथ-साथ उसके दामों में भारी उछाल देखा गया है. भारत की घरेलू खपत का तेल और गैस का 90 फ़ीसदी हिस्सा आयात होता है जिसमें कच्चे तेल आयात का 60 फ़ीसदी से ज़्यादा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. इनमें इराक़, सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं.

इनमें से भी आधा तेल होर्मुज़ स्ट्रेट से आता है. जबकि मौजूदा संघर्ष के कारण होर्मुज़ में जहाजों की आवाजाही ख़ासी बाधित हुई है. इस वजह से भी भारत पर इस जंग को लेकर ख़ासा दबाव है.

ये समझौता लागू हो जाता है तो तेल की क़ीमतों में गिरावट आना तय है लेकिन भारत को और क्या-क्या फ़ायदा होंगे? इस सवाल पर ऊर्जा मामलों के विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा कहते हैं कि पूरा खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए तीन वजहों से अहमियत रखता है.

वो कहते हैं, "हम भारी मात्रा में वहां से तेल और गैस ख़रीदते हैं. ये इलाक़ा हमारे देश के नज़दीक है जिसकी वजह से शिपिंग टाइम बहुत कम लगता है. पांच-छह दिन के अंदर समुद्री जहाज़ यहां पहुंच जाता है. उससे उसकी लागत भी कम आती है. बीमा वग़ैरह की जो लागत है वो भी कम हो जाती है."

"दूसरी वजह यह है कि हमारे लगभग एक करोड़ भारतीय उस इलाक़े के अंदर काम करते हैं. इनमें हमारे मज़दूर और स्किल्ड वर्कर्स शामिल हैं. तीसरी वजह इसका भारत के बिलकुल नज़दीक होना और पाकिस्तान-चीन का वहां बढ़ता दबदबा है. भारत ऐसे हालात वहां नहीं चाहता जिससे कि वहां चीन का या पाकिस्तान का दख़ल बढ़ जाए."

नरेंद्र तनेजा मानते हैं कि इस समझौते के लागू होने के बाद संघर्ष बंद हो जाएगा लेकिन शांति आएगी या नहीं, यह कहना जल्दबाज़ी होगी.

वहीं मिडिल ईस्ट इनसाइट्स प्लेटफॉर्म की फाउंडर डॉ. शुभदा चौधरी मानती हैं कि शुक्रवार को भी इस समझौते के लागू होने की उम्मीद बेहद कम है.

वो कहती हैं, "मैं नहीं मानती कि ये डील होगी, इसके बहुत सारे कारण हैं. पहला यह कि अमेरिका का कहना है कि वो ईरान के ज़ब्त किए गए 300 अरब डॉलर को वापस दे देंगे, लेकिन यह कैसे होगा? दूसरा, यमन और लेबनान के ऊपर बात नहीं हुई है. इसराइल का हमला कितने लेवल तक कम होगा? इसके बारे में कोई बात नहीं हुई है."

"तीसरी चीज़ यह है कि अगर यह डील हो भी गई तो यह साफ़ नहीं है कि इस पर कौन हस्ताक्षर करेगा क्योंकि सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई के बारे में कुछ भी मालूम नहीं है. ईरान के सुप्रीम काउंसिल, नेशनल काउंसिल और आईआरजीसी की अब क्या भूमिका है, ये साफ़ नहीं है."

शुभदा चौधरी कहती हैं कि ये सिर्फ़ तीन देशों के बीच की लड़ाई नहीं बल्कि दो ग्लोबल ऑर्डर की लड़ाई है.

वो कहती हैं, "एक ग्लोबल ऑर्डर इसराइल, ब्रिटेन, अमेरिका और बहुत से पश्चिम यूरोप देशों का है. वहीं दूसरी तरफ़ इसमें उत्तर कोरिया, चीन, रूस और ईरान शामिल है. ये पेट्रोडॉलर और पेट्रोयुआन की लड़ाई है."

हालांकि शुभदा कहती हैं कि अगर समझौता हुआ तो भारत को चार चीज़ों में फ़ायदा होगा.

वो कहती हैं, "पहला फ़ायदा ईरानी तेल को लेकर होगा जो यूएई या सऊदी तेल से बेहतर है क्योंकि उसमें सल्फ़र की मात्रा कम रहती हैं. दूसरा फ़ायदा फ़र्टिलाइज़र्स और गैस को लेकर होगा क्योंकि हम अधिकतर गैस और फ़र्टिलाइज़र्स वहीं से ख़रीदते हैं. तीसरा रेमिटेंस का फ़ायदा होगा क्योंकि भारी तादाद में भारतीय वहां काम करते हैं. चौथा फ़ायदा भारतीयों की सुरक्षा और कच्चे तेल के दाम घटने का होगा."

दुनिया के कुल तेल का तक़रीबन 20 फ़ीसदी हिस्से का परिवहन होर्मुज़ स्ट्रेट से होता है.

नरेंद्र तनेजा कहते हैं कि यह साफ़ नहीं है कि होर्मुज़ स्ट्रेट किसका नियंत्रण होगा, इस पर टोल लगेगा या नहीं.

वो कहते हैं कि अगर होर्मुज़ स्ट्रेट पर टोल लगता है तो ये भारत समेत चीन और जापान जैसे देशों के लिए एक मुश्किल खड़ी हो जाएगी.

हालांकि नरेंद्र तनेजा ये भी कहते हैं कि समझौता लागू होने से जो जहाज़ होर्मुज़ स्ट्रेट में फंसे हुए हैं जिसमें तमाम भारतीय नाविक हैं वो सुरक्षित रहेंगे और जो एक करोड़ भारतीय वहां रहते हैं उससे उन्हें स्थायित्व मिलेगा.

वो कहते हैं, "जंग रुक जाती है तो तेल सस्ता होगा जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए तो बहुत अच्छी ख़बर है. और जो वहां से रेमिटेंस आते हैं और सारा सिलसिला दोबारा नॉर्मल हो जाएगा."

नरेंद्र तनेजा इसके साथ ही एक बड़ा सवाल भी उठाते हैं. वो कहते हैं कि क्या भविष्य में भारत तेल और गैस के लिए अपनी निर्भरता खाड़ी के देशों पर इतनी ही रखेगा या उसे कम करेगा.

साथ ही वो मानते हैं कि इस समझौते के लागू होने के बाद उस क्षेत्र में ईरान का दबदबा बढ़ेगा और उसके प्रतिद्वंद्वी सऊदी अरब की अमेरिका के अलावा और देशों पर बढ़ेगी.

Bundan Sonra Ne Olabilir?

Yapay zekâ öngörüsü — kesinlik taşımaz

  • समझौते के लागू होने से तेल की कीमतों में गिरावट आएगी.

    Çok muhtemel · Kısa vadede

  • भारत को तेल और गैस की आपूर्ति में स्थिरता और लागत में कमी का लाभ मिलेगा.

    Muhtemel · Kısa vadede

Açık Sorular

  • क्या इसराइल और हिज़्बुल्लाह समझौते का पालन करेंगे?
  • समझौते पर कौन हस्ताक्षर करेगा?
  • होर्मुज़ स्ट्रेट पर टोल लगेगा या नहीं?

İlgili Konular

Bu haber ilk olarak şurada yayınlandı: BBC हिंदी.

İlgili Haberler

क्या ईरान के साथ युद्धविराम समझौता मध्य पूर्व की तस्वीर बदल देगा?
Gelişiyor·26 dk önce

क्या ईरान के साथ युद्धविराम समझौता मध्य पूर्व की तस्वीर बदल देगा?

वर्साय पैलेस में ईरान के साथ युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद मध्य पूर्व की स्थिति अस्थिर बनी हुई है। ईरान में नई पीढ़ी के नेतृत्व के आने और पुराने नेताओं की मौत के बाद देश बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है।

BBC हिंदी
Bu konuda daha fazlaअमेरिका