लाल किले के भाषण में 'दिमाग़ी नक्सल' शब्द पर सियासी बयानबाज़ी तेज़
पीएम मोदी के 'दिमाग़ी नक्सल' वाले बयान पर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद.
Hızlı Bakış
15 अगस्त को पीएम मोदी के 'दिमाग़ी नक्सल' वाले बयान पर कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने खुद को 'दिमाग़ी नक्सली' होने पर गर्व बताया, जिसके बाद बीजेपी नेताओं ने उन पर तीखा हमला बोला है।
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15 अगस्त को लाल किले के भाषण में पीएम मोदी ने 'दिमाग़ी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद राजनीतिक विवाद शुरू हुआ।
प्रकाशित 16 अगस्त 2026
अपडेटेड 8 घंटे पहले
पढ़ने का समय: 7 मिनट
15 अगस्त को लाल किले के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'दिमाग़ी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किया था.
अब इस शब्द को लेकर सियासी बयानबाजी तेज़ हो गई है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने प्रधानमंत्री की ओर से इस शब्द के इस्तेमाल पर कहा कि उन्हें 'दिमाग़ी नक्सल' होने पर गर्व है.
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर की गई इस टिप्पणी के बाद बीजेपी नेताओं ने चिदंबरम को निशाने पर लेना शुरू कर दिया है.
चिदंबरम की इस टिप्पणी पर गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "हैरानी? बिल्कुल नहीं. अब हम समझ सकते हैं कि पी. चिदंबरम के गृह मंत्री रहते और यूपीए सरकार के दौरान नक्सलवाद क्यों फलता-फूलता रहा. अब हम समझ सकते हैं कि 2004 से 2014 के बीच नक्सलवाद से लड़ते हुए करीब 1,913 पुलिसकर्मी और सीआरपीएफ जवान क्यों मारे गए."
''अब हम समझ सकते हैं कि यूपीए के शासन में नक्सली हमलों में 5,019 से ज्यादा भारतीयों की जान क्यों गई. अब हम समझ सकते हैं कि गृह मंत्री के तौर पर चिदंबरम के कार्यकाल में नक्सलियों के 92 फीसदी हथियार पुलिस के शस्त्रागार से क्यों लूटे गए."
''अब हम समझ सकते हैं कि 2013 में 182 ज़िले नक्सली हिंसा की चपेट में क्यों थे. आंतरिक सुरक्षा के मामले में यूपीए सरकार का रिकॉर्ड खुद अपनी कहानी कहता है."
'पीएम मोदी ने नक्सलवाद ख़त्म किया'
चिदंबरम की इस टिप्पणी की बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने भी आलोचना की है.
बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, "मिस्टर चिदंबरम, इस बेहद गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी से आपका क्या मतलब है? आप इतनी अच्छी अंग्रेज़ी बोलते हैं, इसलिए निश्चित तौर पर आप समझते होंगे कि प्रधानमंत्री ने क्या कहा और किस संदर्भ में कहा?''
''प्रधानमंत्री का कहना था कि मोदी सरकार और अमित शाह की दूरदर्शी नीतियों की वजह से नक्सलवाद और माओवाद का सफ़ाया हो गया है."
चिदंबरम की इस टिप्पणी पर पंजाब के बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, "पी. चिदंबरम अब रिटायरमेंट की उम्र में हैं, लेकिन मेरा उनसे और उनकी पार्टी से एक सवाल है. जब वह गृह मंत्री थे उस समय के रिकॉर्ड देखें तो उनके दौर में नक्सली और माओवादी सबसे ज्यादा सक्रिय थे.''
''उस समय उन्हें पूरा समर्थन हासिल था और झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में जितने बड़े पैमाने पर हत्याएं हुईं, उतनी उसके बाद कभी नहीं हुईं. इसलिए बेहतर होगा कि वे बिल्कुल न बोलें."
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, "जो पी. चिदंबरम खुद को गर्व से 'दिमागी नक्सली' कहते हैं, उन्हें मैं बताना चाहता हूं कि आपके कार्यकाल में एक भी नक्सली आतंकवादी को नहीं मारा गया. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सभी बड़े नक्सली कमांडरों का पूरी तरह सफ़ाया कर दिया गया और नक्सलवाद से पीड़ित गरीब आदिवासियों को बचाया गया. देश ने नक्सलवाद के ख़तरे को ख़त्म कर दिया है."
'चिदंबरम पाला बदल रहे हैं'
केंद्र सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार दिलीप मंडल ने चिदंबरम की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर लिखा, ''दिमागी नक्सल जैसे शब्दों का सबसे पहला प्रयोग पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने 2010 में किया था.''
उन्होंने चिदंबरम के एक पूराने बयान का लिंक डालते हुए लिखा, ''2010 में आप ये कह रहे थे. अब आपने पाला बदल दिया है.''
उन्होंने लिखा, ''13 साल सत्ता से बाहर रहने के बाद चिदंबरम की दिमागी हालत ठीक नहीं है. 2010 में केंद्रीय गृह मंत्री रहते हुए वे यूनिवर्सिटी और मीडिया में नक्सल सपोर्टर खोज रहे थे. 2012 में अर्बन नक्सल पर एक्शन शुरू किया. आज सुबह उठकर पहला काम: ये बताना कि वे दिमागी नक्सल हैं!''
पत्रकार गार्गी रावत ने लिखा, ''ये विडंबना है. मुझे याद है, गृह मंत्री के तौर पर पी. चिदंबरम ने यूपीए सरकार की ज्यादा आक्रामक और समन्वित नक्सल विरोधी रणनीति की अगुआई की थी. आज वही खुद को 'दिमागी नक्सली' कह रहे हैं.''
वरिष्ठ पत्रकार मिन्हाज मर्चेंट ने लिखा, ''मैं प्रधानमंत्री मोदी के 'दिमागी नक्सली' शब्द से सहमत नहीं हूं. इस तरह के नक्सलियों पर आप एक आरोप तो बिल्कुल नहीं लगा सकते. वह है बौद्धिक होने का."
इससे पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, "दो-तीन साल पहले उन्होंने (पीएम मोदी) अपने राजनीतिक विरोधियों को 'अर्बन नक्सल' कहा, तब संसद में ये पूछा गया कि 'अर्बन नक्सल' की परिभाषा क्या है? गृह मंत्री से जवाब आता है कि 'अर्बन नक्सल' कोई चीज़ नहीं है, कोई परिभाषा नहीं है. आज प्रधानमंत्री लाल क़िले से 'दिमाग़ी नक्सल' की भाषा, अपने राजनीतिक विरोधियों को लेकर इस्तेमाल करते हैं."
गृह मंत्री के तौर पर चिदंबरम ने नक्सलियों के बारे में क्या कहा था?
2009 में चिदंबरम यूपीए सरकार में देश के गृह मंत्री थे.
उस समय उन्होंने कहा था, "देश की आंतरिक सुरक्षा को मुख्य रूप से तीन चीज़ों से ख़तरा है. पहला चरमपंथ, दूसरा पूर्वोत्तर में उग्रवाद और तीसरा नक्सलवाद.''
2010 में भारत के गृह मंत्री के तौर पर पी चिदंबरम ने कहा था कि अगले दो से तीन वर्षों में नक्सली प्रभावित इलाक़ों पर नियंत्रण हो जाएगा.
नई दिल्ली में आयोजित इंडिया ईकोनॉमिक समिट में चिदंबरम ने कहा था, "मुझे विश्वास है कि हम दो-तीन वर्षों में नक्सलियों के नियंत्रण वाले इलाक़ों पर क़ब्ज़ा कर लेंगे."
उन्होंने कहा था कि उनके गृह मंत्री बनने के बाद राज्य सरकारों ने माओवादी विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान तेज़ किए हैं और अब बेहतर समन्वय के साथ ऐसा हो रहा है.
चिदंबरम ने कहा था कि माओवादी सशस्त्र संघर्ष में विश्वास रखते हैं और अपने प्रभाव को बढ़ाना चाहते हैं लेकिन लोकतांत्रिक सरकार उनके इस मकसद को कामयाब नहीं होने देगी.
उनका कहना था कि भारत सरकार माओवादियों से निर्णायक तरीके से निपटने में सक्षम है.
माओवादियों के ख़िलाफ़ अभियान पर उन्होंने कहा, "हमें उल्लेखनीय सफलता मिली है और कुछ झटके भी लगे हैं."
पीएम मोदी ने लाल क़िले के भाषण में क्या कहा था?
15 अगस्त को लाल क़िले की प्राचीर से दिए अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, "हथियारी नक्सल तो गए, लेकिन दिमाग़ी नक्सल मौके की तलाश में हैं. हिंसा अराजकता के वो रास्ते खोज रहे हैं. इन दिमाग़ी नक्सलियों को पहचानना होगा. इन दिमाग़ी नक्सलियों को आइसोलेट करना होगा और राष्ट्र को विकसित राष्ट्र बनाने की मुख्यधारा की ओर देश की युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा."
पीएम मोदी की इस टिप्पणी के बाद विपक्षी दलों और आलोचकों ने पूछा है कि 'दिमाग़ी नक्सल' से उनका मतलब किन लोगों से है.
कुछ आलोचकों का आरोप है कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले युवाओं, बुद्धिजीवियों और विचारकों को इस तरह के शब्दों के ज़रिए निशाना बनाया जा रहा है.
वहीं, बीजेपी ने प्रधानमंत्री के बयान का बचाव करते हुए कहा है कि इसे उसके व्यापक संदर्भ में समझने की ज़रूरत है.
Açık Sorular
- पीएम मोदी के 'दिमाग़ी नक्सल' शब्द से स्पष्ट रूप से कौन लोग लक्षित हैं?


